सिंदबाद जहाजी की दुसरी यात्रा | The Second Voyage of Sinbad the Sailor

सिंदबाद जहाजी की दुसरी यात्रा | The Second Voyage of Sinbad the Sailor

सिंदबाद जहाजी की दुसरी यात्रा The Second Voyage of Sinbad the Sailorअब सिंदबाद जहाजी ने अपनी दुसरी यात्रा के बारे में सिंदबाद हमाल को कहानी सुनाना शुरू किया | अपनी पहली यात्रा के बाद मैंने काफी धन वापस कमा लिया थ और मै अब वापस यात्रा करने के लिए बैचैन हो रहा था | इसलिए मैंने फिर से सामान खरीदने बेचने का काम शुरू कर दिया और फिर से एक टापू से दुसरे टापू पर यात्राये करने लगा | इस तरह यात्राये करते हुए एक सुंदर टापू पर पहुचे जहा पर घने वृक्ष ,पेड़-पौधे, नदिया और पशु-पक्षी थे लेकिन उस टापू पर हमे एक भी इन्सान दिखाई नही दिया |  मै उस टापू पर घुमा और खाना खाकर सो गया | जब मै जागा तब मुझे वहा कोई आदमी दिखाई नही दिया | मैंने देखा कि जहाज चला गया था ओर किसी ने मुझे साथ ले जाने के लिए नही जगाया | इस तरह मै इस सुनसान टापू पर अकेला रह गया |

मैं बुरी तरह सदमे में आ गया क्योंकि उस समय ना तो मेरे पास  कुछ खाने को था और ना ही कपड़े थे | मै सोचने लगा “पिछली बार तो मैं बच गया था लेकिन अब कोई बचने का तरीका नही रहा “|  मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा और उस टापू पर आगे बढ़ने लगा | आगे जाकर मै एक पेड़ पर चढ़ गया और आस पास देखने लगा शायद कोई नजर आ जाए | तभी मुझे कुछ दूरी पर एक सफ़ेद चीज दिखाई दी और मै पेड़ से नीचे उतरकर उस दिशा में आगे बढ़ने लगा | उसे करीब से देखने पर पता चला कि वो एक विशाल गुम्बद था जिसमे अंदर जाने के लिए कोई दरवाजा नही था | मै उस पर चढ़ भी नही सकता था क्योंकि वो बहुत चिकनी सतह थी | इसलिए मैं जहा खड़ा था वहा उस गुम्बद पर एक निशान कर दिया और उसकी परिधि मापने लगा जो पुरे पचास कदम थी |

अब शाम हो गयी थी और अँधेरा छाने लग गया था | मैंने सोचा कि बादलो के कारण अँधेरा हुआ होगा लेकिन वो तो गर्मी का समय था | मैंने उपर देखा तो उपर कोई बादल नही बल्कि एक विशाल पक्षी उड़ रहा था जिसके पंखो से सूरज धक गया था | उसी समय मुझे एक पूरानी कहानी याद आ गयी जो मैंने यात्राओ में सूनी थी कि कीसी टापू पर एक विशाल पक्षी हाथियों को खा जाता था | मुझे अब यकीन हो गया कि वो गुम्बद उस विशाल पक्षी का अंडा था | इसी दौरान वो पक्षी उड़ता हुआ आया और पंख फैलाकर उस अंडे के उपर सो गया | तभी मुझे एक विचार आया और मैंने अपनी पगड़ी खोलकर उसकी रस्सी बनाई | मैंने उस रस्सी का एक भाग मेरी कमर में बांध लिया और दूसरा उस पक्षी के पैर में बाँध दिया और ये सोचने लगा कि ये पक्षी मुझे दुसरे टापू पर लेकर चला जाएगा | मैं रात भर नही सो पाया ताकि पक्षी कही अचानक ना उड़ जाए |

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अब सुबह वो पक्षी उठा और उड़ने लगा | मै भी उसके साथ उड़ने लगा और वो एक उची पहाडी पर आकर बैठ गया | मैंने तुंरत अपनी रस्सी ढीली की और चुपके से वहा से निकल पड़ा | उस पक्षी की चोंच में एक सांप था जिसे लेकर वो उड़ गया | अब मै आस पास घूमकर देखने लगा तो मुझे पता चला कि वो एक विशाल पर्वत है जिसकी चोटी भी मुझे दिखाई नही दे रही थी | अब फिर मै अपने भाग्य को दोष देने लगा कि इससे अच्छा तो मै उसी टापू पर था जहा खाने पीने की चीजे तो थी | लेकिन यहा पर ना ही पेड़ ,ना फल और ना नदिया दिखाई दे रही थी | अब मुझे खतरा महसूस होने लगा |अब मैं उस घाटी के नीचे की ओर उतरने लगा |

मुझे रास्ते में कीमती जवाहरात ,खनिज और हीरे मिले लेकिन उससे भी खतरनाक वो जगह विषैले सांपो से भरी पड़ी थी जिनका आकार ताड़ के पेड़ जितना बड़ा था | वो केवल रात को बाहर आते थे जबकि दिन में उन पक्षियों के डर से बिल में घुसे रहते थे | मैं वहा दिन तो आसानी से गुजार लिया लेकिन रात को सोने के लिए जगह ढूंढने लग गया | अब मै अपना जीवन बचाने के लिए खाना और पानी ढूंढने लग गया | मुझे एक गुफा दिखाई दी जिसके अंदर घुस गया | मैंने सोचा कि ये जगह रात गुजारने के लिए सही जगह है और सुबह यहा से चला जाऊँगा | अब मैं जैसे ही गुफा के अंदर गया , मुझे एक विशाल सांप अपने अंडो पर सोता हुआ दिखाई दिया | अब मेरी हालत तो वैसी हो गयी , इधर खाई तो उधर कुंवा | फिर भी मेरे पास कोई चारा नही था इसलिए मैं वहा पुरी रात जागते हुए बिताई | सुबह होते ही मै तुंरत उस गुफा से बाहर निकल गया | अब मेरा भूख और डर के मारे बुरा हाल हो गया था |

बाहर घूमते हुए मुझे एक मरा हुआ विशाल जानवर पड़ा हुआ दिखाई दिया  लेकिन उसके करीब कोई भी नही था | अब मुझे वापस अपनी यात्राओ में सूनी कहानी याद आयी जिसमे हीरो की तलाश में लोग ऐसे टापुओ पर आते थे जो अपने साथ भेड लेकर आते थे और उसको मारकर उसके मांस को घाटी की गहराई में फेंक देते थे जिसे गिद्ध के सहारे वो हीरो को दुसरे देशो में भेज देते थे | इसलिए मैंने भी जब उस जानवर को देखा तो बहुत सारे हीरे मैंने अपनी जेबों में भर दिया और अपने चारो ओर मांस लपेटकर मरे हुए समान सो गया | उसी वक़्त एक गिद्ध आया और उस मरे हुए जानवर के साथ मुझे भी पहाड़ की चोटी पर छोड़ दिया |मुझे वहा पर किसी आदमी की आवाज आयी और मैं उसके नजदीक गया | वो आदमी मुझे देखकर डर गया और मेरे बारे में पूछने लगा | मैंने अपनी पुरी कहानी उसे बताई | उसने भी बताया कि वो भी हीरो की खोज में इस खतरनाक जगह पर आया था लेकिन हीरा हाथ नही लगा था |मैंने उसे कुछ हीरे देकर उसे मदद के लिए कहा |

उसकी मदद से मै उस खतरनाक जगह से निकल पाया | रास्ते में मुझे अजीबोगरीब जानवर देखने को मिले जो मैंने कभी नही देखे थे | अब मुझे इस जगह के बारे में पूरा पता चल गया था कि ये हीरो की घाटी है जहा केवल लोग हीरे ढूंढने आते है और मेरी तरह बहुत कम लोग वापस जिन्दा लौट पाते है | मैंने उन हीरो को बेचकर बहुत सारा माल खरीद लिया और उसके बाद वापस बगदाद लौट आया | मैंने घर लौटकर सभी रिश्तेदारों को खूब सारे तोहफे दिया क्योंकि ईन्ही लोगो की दुआ से इतने खतरनाक हालातो से भी मै बचकर निकल आया था | इस तरह मैंने अपनी दुसरी यात्रा खत्म की | कल मै तुम्हे अपनी तीसरी यात्रा का किस्सा सुनाऊंगा |

अब सिंदबाद जहाजी ने सिंदबाद हमाल को 100 दीनार दिए और वापस अगले दिन आने को कहा | अगले दिन वो हमाल फिर आया और उसने वहा खाना खाया  | खाना खाने के बाद सिंदबाद जहाजी ने अपनी तीसरी यात्रा की कहानी सुनाई |

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