महाभारत – हस्तिनापुर का इतिहास The Mahabharatha – History of Hastinapur in Hindi

The Mahabharatha – History of Hastinapur in Hindi

महाभारत की कहानी राजा भरत से शुरू हुयी थी जिन्होंने महाभारत के मुख्य नगर हस्तिनापुर Hastinapur की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | आइये आपको बताते है कि किस तरह हस्तिनापुर Hastinapur नगर की स्थापना हुयी |

Hatinapur History in Hindiभरत राजा दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र थे | राजा दुष्यंत ने बड़े होने पर उनका विवाह करवाकर सिंहासन सौप दिया | भरत के 9 पुत्र थे और वो वृद्ध होने पर सिहासन के उत्तराधिकारी क लिए चिंतित था क्योंकि परम्परा के अनुसार सिंहासन पर सबसे जयेष्ट पुत्र को बिठाया जाता है और यही उनकी चिंता का कारण था | भरत ने अपने पुत्रो और मंत्रियो से इस बारे में बातचीत की लेकिन उनको ये एहसास हुआ कि उनका कोई भी पुत्र राज करने के लिए उपयुक्त है |अब राजा भरत ने सोचा कि अब कोई विकल्प ना होते हुए जयेष्ट पुत्र को सिन्हासं पर बिठाना उचित होगा |

अब राजा भरत अपने अतीत को याद करने लगा कि किस तरह उनके माता पिता ने गर्व से उन्हें सिंहासन सौपा था और अपने गुरुओ के उपदेशो को याद रखा था | राजा भरत के पिता की तरह वो भी एक महान योधा थे | वो सोचने लगे कि उन्होंने अपनी जनता का बहुत अच्छी तरह ख्याल रखा था और उनके पुत्र शायद उतना ख्याल नही रख पायेंगे और उनका साम्राज्य नष्ट हो जाएगा | अब उनके दिमाग में विचार आया कि वो अपन पुत्र को स्थान पर किसी ओर को सिंहासन का उत्तराधिकारी बनायेंगे |

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अब भरत के विचार में एक युवा नौजवान का दृश्य आया जो बहुत शक्तिशाली और बहादुर था और उनके साम्राज्य को उनकी तरह संभाल सकता था | अब उनको परिवार से हटकर अपने साम्राज्य के लिए सोचना था | एक दिन उन्होंने दरबार में सभा बुलाई और घोषणा की “मै भरत , राजा दुष्यंत और शंकुंतला का पुत्र, यहा पर भुमंयु को अपना उत्तराधिकारी घोषित करता हु ” | उनके इस फैसले को सुनकर दरबार के सभी लोग चौंक गये कि उसने अपने पुत्रो के स्थान पर एक साधारण नौजवान को अपना उत्तराधिकारी बना दिया | सभी लोग भूमन्यु को उत्तराधिकारी बनाने के प्रश्न का उत्रर चाहते थे |

अब राजा भरत ने भूमन्यु को दरबार में बुलाया और उसको सिंहासन पर बिठा दिया | अब राजा भरत ने कहा “तुम एक अकेले इन्सान हो जिसे मै इस सिंहासन के लिए योग्य मानता हु , मेरा ये सोचना है कि मै अपने पुत्रो को इस सिंहासन पर बिठाकर सिंहासन के साथ अन्याय करूंगा ….मै इस नौजवान की बहादुरी से बहुत प्रसन्न हुआ और अगर कोई इस सिंहासन का सही वारिस है तो वो भूमन्यु है “| अब राजा भरत भुमंयु का हाथ पकडकर उसका अभिवादन किया |

अब भूमन्यु की आशाओं के अनुसार भुमंयु ने बहुत अच्छी तरह राज किया और जनता ने उसे बेहद पसंद किया | भूमन्यु के पुत्र का नाम सुहोत्रा था जिसने भूम्न्यु के बाद साम्राज्य संभाला | सुहोत्रा के बाद उसके पुत्र हस्ती ने राजपाट संभाला | हस्ती ने Hastinapur हस्तिनापुर की स्थापना की जहा पर महाभारत की पुरी कहानी प्रारभ होती है |

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