अलिफ़ लैला की कहानी – राजा और हकीम | Arabian Nights Story -The Greek King and the Physician Doobaan

अलिफ़ लैला की कहानी – राजा और हकीम की दिलचस्प कहानी 

अलिफ़ लैला की कहानी - राजा और हकीम की दिलचस्प कहानी मछुआरे ने कहानी सुनाना शुरु किया| फारस में एक जोमन नाम का राजा हुकुमत करता था और उसका वजीर एक धोखेबाज आदमी था मगर बादशाह उसे नेक इन्सान समझते थे | वजीर बादशाह को मारकर उसकी सल्तनत पर कब्जा करना चाहता था | एक दिन वजीर ने एक ऐसा काढ़ा पिला दिया जिससे उसकी मौत हो जाए लेकिन बादशाह मरा नही और खुबसुरत बादशाह बदसूरत बन गया और उसे कोढ़ हो गया | कोढ़ के इलाज के लिए वजीर ने अपने खरीदे हुए हकीमो से कई बार बादशाह को मारने की कोशिश की मगर बादशाह फिर भी नही मरा बल्कि ओर ज्यादा कोढ़ फैलता गया |

उस ज़माने में ये कानून था कि जब किसी हकीम के इलाज से फायदा ना हो उस हकीम का उअर उस हकीम को लाने वाले का सर काट दिया जाता था | अब वो दिन आ गया जब हकीम और उसके वजीर के सर काटने का दिन आया गया | बादशाह ने जल्लाद और हकीम के सर कलंक का आदेश दिया | उसी समय एक ओर हकीम दुबान  उनके दरबार में आया और उसने बादशाह को ठीक करने का वचन दिया | अब बादशाह ने उसे इलाज करने का एक मौका दिया और साथ ही ठीक हो जाने पर मालामाल करने का वादा किया | बादशाह ने ये भी कहा कि यदि उसके इलाजो से वो ठीक नही हो पाया तो उसका सर कलंक करवा देगा |

अब हकीम दुबान बोला “मुझे आपकी बात मंजूर है लेकिन मेरी भी एक शर्त है कि इस हकीम और वजीर की जान बक्श दी जाये ” | बादशाह ने हकीम की बात मानकर उन दोनों की जान बक्श दी |बादशाह ने हकीम से पूछा कि वो कितने दिनों में ठीक हो जाएगा | हकीम ने 24 हफ्तों का समय माँगा और वो दवाई बनाने में लग गया | उस हकीम ने एक ऐसी छड़ी बनाई जिसमे अनेको दवाइयों का मिश्रण भरा हुआ था | अब वो चौगान की छड़ी लेकर बादशाह के पास गया और बोला “बादशाह , मैंने आपके लिए एक छड़ी बनाई है जिससे आप हाथ में लेकर गेंद के साथ खेलते रहे , इस चौगान की छड़ी को पकड़कर खेलने से आपके शरीर में गर्मी आयेगी जिससे इसके अंदर की दवाई आपके शरीर पर काम करेगी ” |

अब राजा उस छड़ी को लेकर अपने दरबारियों के साथ घोड़े पर बैठकर चौगान खेलने लग गया |  जैसे ही उसे पसीना आने लगा वो अपने महल में जाकर नहाकर सो गया | इस तरह ओर भी कई उपचारों के साथ कई दिनों तक बादशाह का उपचार चलता रहा | धीरे धीर उसके कोढ़ में कमी होती गयी और वो अपने इलाज को लेकर बहुत खुश था | इस तरह एक दिन बादशाह का सारा कोढ़ खत्म हो गया और वो पहले की तरह खबसूरत हो गया |

अब उस हकीम दुबान को दरबार में बुलाया गया और उसे बादशाह ने 2000 सोने की अशर्फिया देकर शाही हकीम से नवाजा गया | इसके साथ ही हकीम को बादशाह ने उसके तख़्त के बिलकुल नजदीक बिठाया | ये सब देखकर वजीर को बहुत इर्ष्या हुयी और उसे ऐसा लगने लगा कि एक दिन कही वो वजीर बनकर उसकी जगह ना लेले | वजीर ने हकीम को अपने रास्ते से हटाने की योजना बनाई |

एक दिन वजीर बादशाह के पास गया और बोला “बादशाह इतनी जल्दी किसी इन्सान पर भरोसा करना अच्छा नही है जिसे आप हकीम समझ रहे है वो एक एक गद्दार है जो आपका कत्ल करने आया है  ” बादशाह ने वजीर पर गुस्सा करते हुए कहा “वजीर तुम्हे ऐसा कहते हुए बिलकुल भी शर्म नही आ रही है , अगर तुम मेरे वजीर ना होते तो तुम्हे अभी खत्म कर देता , हकीम दुबान ने इतनी मेहनत करके मुझे ठीक किया है वो मुझे क्यों मारेगा , ओर तू भूल गया कि हकीम दुबान की वजह से ही तू जिन्दा है वरना उस दिन तेरा सर कलंक हो गया होता , अब तू मेरे नजरो के सामने से दूर हो जा ” | इतना सुनते ही वजीर वहा से चला गया |

अब बादशाह के बहकावे में ना आने पर उसने अपने साथी हकीमो के साथ मिलकर एक साजिश की | उसमे बादशाह को देने वाली दवाई में जहर मिलवा दिया ताकि उसका सर कलंक हो जाए | अगले दिन हकीम वो दवाई लेकर बादशाह के दरबार में आया और जब बादशाह उसे पीने लगा तभी वजीर ने उसे रोक लिया और बादशाह को कहा कि इसमें जहर मिला हुआ है | बादशाह को गुस्सा आ गया और हकीम पर इल्जाम लगाने के जुर्म में उसे मौत की सजा सुनाई और उससे अपनी आखिरी ख्वाहिस पूछी | उस वजीर ने आखिरी ख्वाहिश में हकीम की दगाबाजी का साबुत पेश करने की इजाजत मागी | बादशाह को आखिरी ख्वाहिश माननी पड़ी |

अब वजीर ने एक गुलाम को बुलाकर उस दवाई को पीने के लिए कहा और वो दवाई पीते ही वो गुलाम मर गया | राजा और दरबार के सभी लोग उसको देखकर चौंक गये | हकीम ने इसके पीछे उस वजीर की साजिश होने की बात कही और अपनी बेगुनाह होने की बात कही | बादशाह ने अपने जल्लादों को बुलाकर हकीम को कत्ल करने को कहा और मौत से पहले अपनी आखिरी ख्वाहिश पूछी | हकीम ने कहा “बादशाह मेरी आखिरी ख्वाहिश है कि मै अपने घर पर रखी सभी इल्म की किताबो को किसी अच्छे हकीम को सौपना चाहता हु और साथ ही एक अजीबोगरीब और अनूठी इल्म की किताब आपको बतौर तोहफा देना चाहता हु जिसमे जादुई शक्ति से मेरा सर काटने के बाद भी मेरा सर आपके सवालों का जवाब देगा  ”

हकीम को एक दिन की मोहलत दे दी गयी और अगले दिन हकीम अपना सर कलंक करवाने दरबार में आ गया और बादशाह को अनोखी किताब दी | अब उस हकीम का सर कलंक कर दिया गया और उसे उस किताब के कपड़े पर उसका सर रखा गया जो कटने के बाद भी जिन्दा था | अब बादशाह ने वो किताब खोलकर हकीम का बताया पन्ना खोलने को कहा | अब वो बादशाह अपनी अगुली को जीभ पर लगाकर पन्ने पलट रहा था और जिस पन्ने पर हकीम ने कहा वहा आकर रुक गया | उस पन्ने पर लिख रखा था “तेरी मौत ” क्योंकि हकीम ने उस किताब के हर पन्ने पर जहर लगा दिया था जो पन्ने पलटते वक़्त बादशाह की जीभ पर लग गया था | इस तरह वजीर की बातो में आकर बादशाह की भी मौत हो गयी और बादशाह ने मरते मरते वजीर को भी तलवार से मार दिया | इस तरह तीनो की मौत हो गयी |

अब वापस उस मछुवारे और जिन्न के किस्से पर आते है | अब कहानी सुनने के बाद जिन्न ने अपने आप को सुधरने की बात कहकर मछुवारे को मालामाल करने का वादा किया अगर वो उसे सुराही से बाहर निकाल दे | मछुवारे ने जिन्न की बातो पर विश्वास कर जिन्न को सुराही से बाहर निकाल दिया | जिन्न ने उसकी नेकी से खुश होकर उसे मालामाल कर दिया और अपना चार बार जाल फेंकने के नियमो को बदलने को कहा | इस तरह जिन्न वहा से चला गया और मछुवारा भी खुशी खुशी घर चला गया |

loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *