सिंदबाद जहाजी की चौथी यात्रा The Fourth Voyage of Sinbad the Sailor

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The Fourth Voyage of Sinbad the Sailorअगले दिन सिंदबाद जहाजी ने अपने चौथी यात्रा का किस्सा सुनाया | मै घर लौटकर फिर अपने दोस्तों के साथ मजे करने लगा और अपना सा सुख दर्द भुलाकर साधारण जीवन बिताने लगा | कुछ दिनों के बाद मुझे फिर यात्रा करने का विचार आया इसलिए वापस अपना सामान लेकर यात्रा के लिए निकल पड़ा |  हर बार की तरह दिन रात यात्रा कर व्यापार करने लग गया था | एक दिन यात्रा करते हुए हमारा जहाज एक तूफ़ान में फंस गया जिससे हमारा जहाज डूब गया | कई लोग डूब कर मर गये और कुछ लोग तैरकर किनारे पर आ गये | मै भी लगातार आधे दिन तैरने के बाद हिम्मत करते हुए तैरकर किनारे पर आ गया | मैंने खुदा को जान बचाने के लिए लिए शुक्रिया कहा | मेरे साथ कुछ लोग भी हिम्मत करके एक टापू पर आ गये थे |

अब हम उस टापू पर घुमने लगे और वहा पर उगी जड़ी-बूटिया खाकर अपना दिन निकाला | रात हमने किनारे पर ही बिताई और अगले दिन हम उस टापू पर आगे निकल पड़े | जब हम जंगल के बीच आये तभी कुछ आदिवासी लोगो ने हमे पकड़ लिया और हमे पकडकर उनके राजा के पास लेकर चले गये | राजा ने हमे बैठने को कहा और हमारे लिए खाने की व्यवस्था की | वो जो खाना लेकर आये थे वैसा खाना हमने जीवन में पहले कभी नही खाया था लेकिन मेरे साथी भूख के मारे खाना खाने लग गये | मै ऐसी परिस्थितियों से गुजरा हुआ था इसलिए उस समय मैंने खाना नहीं खाया |  खान खाते ही मेरे साथियो को चक्कर आने लग गये और वो पागलो की तरह व्यवाहर करने लगे |

अब मुझे इन लोगो के बारे में पता चल गया था कि ये एक ऐसी आदिवासी जनजाति है को लोगो को पकडकर पहले खिलाती पिलाती है और जब वे मोटे हो जाते है तो उनकी बलि चढ़ा देते है | ये जानकर मै अपने साथियो के लिए चिंता करने लगा | वो आदिवासी मेरे साथियो को जानवरों की तरह भोजन खिला रहे थे | एक रात को चुपके से मै उन आदिवासियों के चंगुल से निकलकर भाग गया और बहुत दूर निकल गया था | मुझे रास्ते में एक किसान मिला जो मुझको राजा के पास ले जाने को कहा |

मैंने सोचा कि कही ये किसान भी उन आदिवासियों से मिला हुआ होगा और मुझे कही फिर उनके पास ना लेकर चला जाए इसलिए मै उसके साथ चलते चलते रात के अँधेरे में उससे अलग हो गया |  रात को एक चट्टान के पास जाकर सोने की कोशिश की लेकिन मुझे भूख के मारे नींद नही आयी |  इसलिए मै आधी रात को वापस सुबह होने तक चलता रहा | भूख के मारे रास्ते की जड़ी बूटिया खाकर भूख बुझाई | इस तरह सात दिनो और सात रातो के बाद आठवे दिन मुझे कुछ लोग दिखाई दिए | जैसे ही मै वहा पंहुचा तो लोग मेरे बारे में पूछने लग गये और मैंने उन्हें अपनी पुरी कहानी सुनाई |

उन लोगो ने बताया कि उन आदिवासियों के चंगुल से आज तक कोई बचकर नही निकल पाया है लेकिन तुम खुशकिस्मत हो जो बचकर निकल आये | उन्होंने मुझे खाना खिलाया और आराम के लिए जगह दी | अब वो मुझे उनके राजा के पास लेकर गये और उनको भी मैंने पूरा किस्सा सुनाया | वो मेरे बारे में जानकर बहुत खुश हुए और उन्होंने मूझे उनका शहर घुमाया | वहा के लोग घोड़ो पर काठी नही डालते थे और उसके बारे में बहे नही जानते थे | मैंने वहा के लुहारो को काठी बनाना सिखाया और मैंने खुद राजा के घोड़े के लिए काठी बनाई |राजा ये देखकर बहुत खुश हुआ और उसने मुझे काफी इनाम दिया |इसके बाद राजा के वजीर के लिए भी काठी बनाई |इस तरह मैंने इस काम से पैसे बनाना शुरू कर दिया | अब लोग मुझे प्यार करने लगे |

मुझे इस काम में मजा आ रहा था | एक दिन राजा ने मुझे बुलाया और कहा “तुम अब हमारे शहर का हिस्सा बन गये हो , इसलिए अब हम तुम्हे अपने देश जाने की इजाजत नही देंगे , मेरी इच्छा है कि एक सुंदर लडकी देखकर तुम्हारी शादी कर दी जाये और मै तुम्हे अपने महल में रहने के लिए जगह दूंगा और तुम अपनी पत्नी के साथ यही रहना , कृपा करके मना मत करना “| मैं राजा की बात सुनकर चुप हो गया क्योंकि मै उनका सम्मान  करता था इसलिए मैंने उनके प्रस्ताव के लिए हां कर दिया |  उन्होंने तुरंत काजी को बुलाकर एक उचे घराने की सुंदर लडकी से मेरी शादी करा दी | शादी के बाद राजा ने मुझे महल में रहने को जगह दी और साथ में नौकर चाकर और दसिया भी नियुक्त की | ऐसी राजशाही जिन्दगी जीकर मै अपने देश को भूल गया | मै और मेरे पत्नी खुशी खुशी से रहने लगे |

एक दिन मेरे दोस्त की पत्नी मर गयी तो मै उसे सांत्वना देने के लिए गये और उसे ढांढस बंधाया | मैंने उससे कहा “अपनी पत्नी के इतना दुखी मत हो , खुदा ने चाहा तो तुम्हे इससे भी बेहतर पत्नी मिलगी जिसके साथ तुम लम्बे समय तक जीवन बिताओगे ” | मेरे उस दोस्त ने रोते हुए मुझसे कहा “मैंने कैसे दुसरी लडकी से शादी कर सकता हु जबकि मेरे पास जिन्दगी का केवल एक दिन बचा है ” | मैंने मेरे दोस्त को समझाया कि पत्नी के गम में मौत का फैसला मत लो | उसने मुझे बताया “हमारे यहा एक रिवाज है जिसका तुम्हे मालुम नही होगा कि पति या पत्नी में से कीसी की भी मौत होने के बाद उसके साथी को भी उसी के साथ जिन्दा दफन कर दिया जाता है ” | ऐसा अजीबोगरीब रिवाज सुनकर मै चौंक गया और सोचने लगा कि मुसीबत तो मेरा पीछा छोडती ही नही है और अगर मेरे साथ ऐसा हो गया तो मुझे भी मरना पड़ेगा |

अब लोगो ने उसकी पत्नी को दफन करने के लिए तैयार किया और उसे एक पहाडी पर लेकर गये | उन्होंने मेरे दोस्त की पत्नी को खाली कुंवे में गिरा दिया और मेरे दोस्त के शरीर पर पत्थर बांधकर रस्सी के सहारे उसे भी कुंवे में डाल दिया | एक जग पानी और सात रोटिया  खाने को दे दी  |  उसके बाद उन्होंने रस्सी उपर खींच ली और उसको मरने के लिए वही छोड़ दिया |मैंने सोचा कि इससे बेहतर तो पिछली मौत थी कम से कम एक जटके में तो मार देते और यहा तो आदमी तडप तडप कर मर जाएगा | मैंने राजा के पास जाकर ऐसे क्रूर कानून का विरोध किया लेकिन उन्होंने इस प्रथा को पुरखो की प्रथा कहकर मेरा मुह बंद कर दिया | अब मेरे पास दो रास्ते थे या तो मै अपनी पत्नी से पहले मर जाऊ या फिर वापस अपने वतन भाग जाऊ |

कुछ दिनों बाद मेरी पत्नी बीमार पड़ गयी और उसकी भी मौत हो गयी | अब मुझे लग गया कि मौत अब आ गयी है और मैंने नही सोचा था कि मेरी पत्नी इतनी जल्दी और अचानक मर जायगी वरना मै यहा से भाग जाता | लेकिन बहुत देर हो चुकी थी और राजा के लोग मुझे उसी पहाडी के खाली कुंवे पर लेकर गये |  मेरे दोस्त की तरह मुझे भी मरने के लिए उस कुंवे में छोड़ दिया | अब मै फिर से अपने भाग्य पर रोने लगा और सोचने लगा कि अगर मुझे पहले ही प्रथा का पता होता तो मै शादी ही नही करता | अब उन्होंने उस कुंवे के मुहाने पर बड़ा पत्थर डाल दिया और सात रोटिया और पानी छोडकर वो वापस अपने रास्ते चले गये |

जब वो मुझे इस नर्क में छोड़ गये तो वहा पहले से ही कई इंसानों की हड्डिय बिखरी पड़ी थी जिसकी दुर्गन्ध से मेरा दम घुट रहा था | मै खुद से पूछने लगा कि” मुझे इस शहर में रुकने की क्या जरूरत थी और हर बार जब कीसी मुसीबत से बाहर निकलता हु दुसरी मुसीबत मेरे स्वागत में खडी रहती है ए खुदा ,मै ऐसी मौत नही मरना चाहता हु ” |  मै ये सोंचने लगा कि जब खाना खत्म हो जाएगा तक मेरा क्या होगा | तभी उस कुंवे के उपर रखा पत्थर खुला और एक मरे हुए आदमी के साथ उसकी पत्नी को नीचे उतारा गया | वो रो रही थी और उन्होंने वापस कुवे पर पत्थर डालकर वापस चले गये |  अब मैंने एक हड्डी से उस औरत के सर पर मारी तो वो बेहोश हो गयी | इस तरह बार उसके सर पर मारकर मैंने उसको मार दिया | अब मेरे पास ओर कोई विकल्प नही था क्योंकि वो औरत तो वैसे भी मरती इससे बढ़िया उसे मारकर मै कुछ दिन ओर जी सकू | मैंने उसके हिस्से की रोटी और पानी पीकर वापस दिन गुजारे |

इस तरह जो भी उस कुंवे में आता मै उसे मारकर उसके हिस्से से भोजन खाकर जीवन बिताने लगा | एक दिन मुझे उस कुंवे में एक आवाज सुनाई दी जो कि एक जंगली जानवर की थी | मैं उस कुंवे के उपरी हिस्से पर थोडा चढ़ा तो मुझे एक छेद दिखाई दिया | मैंने उस छेद को अपने चाक़ू से थोडा ओर बड़ा किया और वो छेद पर्वत के दुसरी ओर निकल गया जहा से मै बाहर निकल गया | मैंने खुदा को शुक्रिया कहा और वापस उस कुंवे में जाकर वहा मरे हुए औरतो के आभुष्ण और जवाहरात लेकर आ गया |

अब मै उस समुद्र के किनारे पर बैठकर किसी जहाज का इंतजार करने लगा लेकिन तब तक उस कुंवे की भोजन सामग्री से दिन बिताने लगा | कई दिनों बाद एक दिन एक जहाज वहा से गुजरा मैंने सफ़ेद कपड़ा लेकर किनारे की ओर दौड़ने लगा | मुझे जहाज के कप्तान ने देख लिया और मुझे लाने के लिए एक नाव भेजी | मै उस नाव में बैठकर जहाज तक पहुच गया और कप्तान ने मुझे अपने बारे में पूछा | मैंने कप्तान को अपनी कहानी सुनई कि किस तरह मै इस टापू पर पहले आदिवासियों से और फिर उस रिवाज के कारण फस गया था |

अब मैंने जहाज के कप्तान को जान बचाने के लिए कुछ जवाहरात दिए और उसने भी मुझे व्यापार करने के लिए कुछ सामान दिया | इस तरह उस जहाज से मै वापस अपने शहर बगदाद आ गया | सब मुझे देखकर खुश हो गये और मेरी सुरक्षित वापसी पर जश्न मनाया | मैंने सभी दोस्तों को उपहार बांटे और फिर से ऐश की जिन्दगी जीने लगा | अब कल मै तुम्हे अपनी पांचवी यात्रा की कहानी सुनाऊंगा | ये कहकर सिंदबाद ने उस हमाल को खाना खिलाकर 100 दीनार देकर भेज दिया और अगले दिन आने को कहा | अगले दिन वो वापस आया और सिंदबाद झाजी ने उसे अपनी पांचवी यात्रा की कहानी सुनाना शुरू किया |

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