सिंदबाद जहाजी की पहली यात्रा The First Voyage of Sinbad the Sailor

first voyage of Sindbadखलीफा हारुन-अल-रशीद के समय में बगदाद शहर मर सिंदबाद नाम का एक हमाल रहता था | वो बहुत गरीब था और बोरिया उठाकर अपना जीवन चलाता था | एक दिन वजन बहुत ज्यादा था और दिन गर्म था और वो एक व्यापारी के दरवाजे से निकलते वक़्त एक बेंच पर आराम के लिए बैठ गया | जैसे ही वो वहा बैठा उसे संगीत सुनाई दिया जो उस व्यापारी के कमरे से आ रहा था | अब वो उस व्यापारी के कमरे में झाँकने लगा तो उसे उसमे एक बड़ा बगीचा और कई नौकर दिखाई दिए | उसे उस कमरे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी राजा का घर हो | अब वो अपना बोझ उतारने के लिए जैसे ही जाने लगा तभी उस कमरे से एक आदमी आया और बोला “अंदर आ जाओ , मेरे मालिक तुमको बुला रहे है ” | वो मना तो करना चाहता था लेकिन नही कर सका और बोझ को दरवाजे के पास रखकर अंदर चला गया | उसने एक भूरी दाढी वाले एक नौजवान को देखा और उसे सलाम किया |

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उस नौजवान ने उस हमाल को बिठाया और खाने को भोजन दिया | जब उसने खाना खा लिया तो उसे व्यापारी ने पूछा “तुम्हारा नाम क्या है और तुम क्या काम करते हो ” | वो हमाल बोला “मेरा नाम सिंदबाद है और मै बोझा उठाकर अपना जीवन चलाता हु ” | तभी आश्चर्यचकित होते हुए उस व्यापारी ने कहा “ओ सिंदबाद , तुमको जानकर हैरानी होगी कि मेरा नाम भी सिंदबाद है लेकिन मुझे सभी लोग समुद्री सिंदबाद जहाजी कहते है ” | दोनों सिंदबाद एक दुसरे को देखकर बहुत खुश हुए | अब सिंदबाद जहाजी ने उस हमाल को कहा “सुनो , मेरी कहानी बहुत शानदार है जो मै तुम्हे बताऊंगा , मैंने सात समुद्री यात्राये की है जिससे मुझे इतना धन और वैभव मिला है , हर यात्रा के साथ एक कहानी जुडी हुयी है और ये सारी कहानिया सब मेरी किस्मत का खेल था , आओ मै तुम्हे शुरवात में अपनी पहली यात्रा की कहानी सुनाता हु   ” | अब सिंदबाद जहाजी ने अपने पहली कहानी सुनाना शुरू किया |

मेरे पिता व्यापारियों में पहले दर्जे के इन्सान थे | जब मै जवान हुआ तब मेरे पिता की मौत हो गयी थे और वो मेरे लिए खूब धन-दौलत छोडकर गये थे | जब मै बड़ा हुआ तो अपनी धन दौलत से खाने पीने और ऐश करने लगा और जल्दी ही मेरा सारा धन खत्म हो गया | इस तरह मै एक गरीब आदमी बन गया | मैंने बहुत समय पहले कही गयी एक बात याद करने लगा कि मौत का दिन जन्म से बेहतर , जिन्दा कुता एक मरे शेर से बेहतर और महल से बेहतर कब्रगाह होती है | अब मैंने अपनी थोड़ी बहुत बची सम्पति के पैसो को जोडकर 3000 चांदी की अशर्फिया इकट्ठी की और दुसरे देश जाने के लिए सोचने लगा | मैंने सफर  के लिए सभी साजो-सामन ले लिए थे | मैं बसरा से आने वाले एक जहाज में सवार हो गया |

अब मै उस जहाज से एक टापू से दुसरे टापू , एक समुद्र से दुसरे समुद्र और के देश से दुसरे देश जाकर सामान खरीदने और बेचने लगा | इस तह एक दिन हम एक स्वर्ग जैसे टापू पर उतरे | वहा पर हमने खाना बनाने के लिए सामान रखा और खाना बनाने की तैयारी करने लगे | हम अपना अपना काम कर रहे थे तभी हमारे जहाज के मालिक ने आवाज लगाई “अपनी जान बचाकर फौरन जहाज में आ  जाओ , ये कोई टापू नही है , ये एक बहुत बड़ी विशाल मछली है जो काफी समय से स्थिर होने के कारण इस पर मिटटी जम गयी और पेड़-पौधे उग गये इसलिए ये एक टापू जैसा दिखाई दे रहा है और तुम जैसे ही यहाँ पर खाने के लिए आग जलाओगे तो आग की गर्मी से ये समुद्र के अंदर चली जायगी”

जहाज के कप्तान की बात सुनते ही सभी यात्री सभी सामानों को वहा छोडकर भागते हुए जहाज में बैठ गये लेकिन कुछ जहाज में नही बैठ पाए |  वो टापू अपनी जगह से हिलता हुआ समुद्र के अंदर चला गया | मैं भी जहाज तक नहीं पहुच सका था और समुद्र में गोते लगाने लगा लेकिन अल्लाह ने मुझे डूबने से बचा लिया | मैं एक तैरते हुए लकड़ी के लट्ठे पर बैठ गया था जिस पे एक दिन और एक रात गुजारने के बाद मैं एक दुसरे टापू पर पहुच गया | वहा पहुचते ही मेरे हाथ पैर सुन्न पड़ गये और मैं बेहोश हो गया | में उस टापू पर एक दिन तक पड़ा रहा और अगले दिन खुद को घसीटते घसीटते एक सुरक्षित जगह पर ले आया था | अब मै वहा पर कुछ दिनों तक फल और मीठा पानी पीकर वापस शरीर में ऊर्जा लेकर आया और चलने में सक्षम हुआ |

एक दिन मै उस टापू पर टहल रहा था तो मुझे एक अजीबोगरीब घोडी दिखाई दी और मैंने जैसे ही उसे छुआ वो घोडी रोने लगी  | उसी दौरान एक आदमी एक सुरंग से निकला और मुझसे पूछा “तुम कौन हो ? तुम यहा क्यों आये हो ? तुम कहा से आये हो ” | सिंदबाद बोला “मेरे मालिक , मैं एक अजनबी हु , मै एक जहाज पर था जो दुसरे लोगो के साथ पानी में डूब गया , अल्लाह ने मुझे बचा लिया और मै यहाँ पर आ गया ” | वो मेरा हाथ पकडकर एक जमीन के नीचे सुरंग में लेकर गया और मुझे खाना दिया | मैंने खाना खाया और उसे अपनी पुरी कहानी विस्तार से सुनाई | अब मैंने उसे अपने बारे में बताने को कहा कि वो यहाँ जमीन के नीचे सुरंग में क्यों रहता है और वो घोडी कौन थी  |

उसने बताया कि “हम इस टापू पर पहले राज किया करते थे , हम सभी राजा मिहिर्जान के घोड़ो की देखरेख करने वाले है और इन सभी जानवरों का ध्यान रखते है , हर पखवाड़े पर हम इन घोडियो को यहाँ बांध दिया करते है , ये घोडिया समुद्र में रहने वाले समुद्री घोड़ो को आकर्षित करते है और उनसे पैदा होने वाले जानवर दुनिया में बहुत कम मिलते है जिनसे हम धन कमाते है , मै तुम्हे अपनी राजा से मिलाऊंगा  ” | उसी दौरान बहुत सारे समुद्री-घोड़े समुद्र से निकले और घोडियो को घेर लिया |  अब वो मुझे अपने राजा को मिलाने के लिए लेकर गये |

राजा ने मेरा स्वागत किया और मैंने उसे अपने कहानी सुनाइ | उन्होंने मुझे उनके बन्दरगाह का नियंत्रक नियुक्त कर दिया और मै वहा काम करने लग गया | मैं वहा पर रहना नही चाहता था इसलिए मै हमेशा वहा के लोगो से बगदाद की दिशा पूछता था लेकिन वहा पर ना तो कोई बगदाद को जानता था और ना ही उसका रास्ता | एक दिन मै राजा के पास गया और मैंने वहा पर कुछ भारतीय लोगो को देखा | उन्होंने मेरे बारे में पूछा और मैंने उनके बारे में पूछा | उन्होंने बताया कि वो क्षत्रिय ब्राह्मण है जो ना किसी पर जुल्म करते है औ ना शराब पीते है | उन्होंने मुझे बताया कि भारतीय 72 वर्गों में बटे हुए है जिसे सुनकर मै चौंक गया |

हम एक बार कासिल नाम के टापू पर पहुचे और रात भर संगीत सुना | वहा पर हमने 200 गज लम्बी मछली देखी जिसे देखकर लोग डर गये | मछुवारे ने लकड़ी से मारकर उसे भगा दिया | वहा पर एक दुसरी मछली देखी जिसका मुह उल्लू जैसा था | इस तरह मैंने अलग अलग प्रकार की अजीबोगरीब मछलिया देखी | एक दिन मैं किनारे पर बैठा हुआ था तभी एक जहाज उसकी ओर आया | उस जहाज के लोग अपने सामान किनारे पर उतार रहे थे तो मैंने उस जहाज के कप्तान से पूछा “कुछ जहाज पर बाकी रह गया हो तो मै किसी को भेंजू “| कप्तान ने कहा “यात्रा के दौरान कुछ व्यापारी डूब गये थे जिनका सामान मेरे कब्जे में है जिसको मै उसके परिवार रक बगदाद पहुचाना चाहता हु “| मैंने उससे पूछा “उस आदमी का क्या नाम था ” | उसने बताया “सिंदबाद  जहाजी “| तब मैंने उसे ध्यान से देखा और उसे पहचान लिया |

मैंने रोते उससे लिपट गया और कहने लगा “मेरे मालिक , मैंने ही उन सामानों का मालिक हु और मेरा नाम ही सिंदबाद जहाजी है ” | लेकिन उस कप्तान ने उसे पहचानने से मना कर दिया | तब उस कप्तान ने कहा “तुम मुझसे ये सुनकर किसी डूबे आदमी का माल रह गया ,तुम उसे अपना बताने लगे , मेरे सामने सभी लोग डूब गये थे और कोई यात्री इतने बड़े समुद्र से कैसे बच सकता है ” | तब मैंने जहाज पर घटी पुराणी सारी घटनाओ को उसे सुनाया और उस विशाल मछली के बारे में भी बताया | तब वो मान गया और उसने मुझे वापस अपने सामान लौटा दिए | अब मै कुछ कीमती सामान लेकर राजा के पास गया और उसे अपने जहाज के बारे में बताया | इस तरह मैं वापस अपने जहाज में बैठकर बगदाद अपने घर लौट आया और मेरी पहली यात्रा समाप्त हो गयी , मै कल तुम्हे अपनी दुसरी यात्रा की कहानी सुनाऊंगा |

अब दोनों सिन्द्बादो ने खाना खाया और सिंदबाद जहाजी ने सिंदबाद हमाल को सोने की 100 अशर्फियां दी | सिंदबाद हमाल वापस अपने काम पर लौट गया और अगली सुबह वापस सिंदबाद जहाजी के पास लौट आया | अब उसने अपनी दुसरी यात्रा की कहानी सुनाना शुरू किया|

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