सिंदबाद जहाजी की पांचवी समुद्री यात्रा The Fifth Voyage of Sinbad the Sailor

The Fifth Voyage of Sinbad the SailorThe Fifth Voyage of Sinbad the Sailor सिंदबाद ने अपनी पांचवी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाना शूरू किया | सुनो मै तुम्हे अपनी पांचवी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाता हु | चौथी यात्रा से आने के बाद कई दिनों तक बगदाद में ऐश की और मजे किये लेकिन फिर मेरा मन यात्रा करने को हुआ | इसलिए वापस यात्रा के लिए सामान लेकर बसरा से एक जहाज में सवार हो गया | उस जहाज में ओर भी कई व्यापारी थे जो व्यापार के लिए जा रहे थे | हम जहाज पर मजे करते हुए यात्रा कर रहे थे | एक दिन यात्रा करते हुए हम एक उजाड़ टापू पर आराम के लिए रुके | मुझे जहाज से उस टापू पर उसी विशाल पक्षी रुख का अंडा दिखाई दिया | मै अपने साथ बीती घटना से अवगत था इसलिए जहाज से नही उतरा और मेरे साथी उतर गये |

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मेरे सभी साथी  मिलकर पत्थर से उस अंडे को फोड़ने लगे , मैंने उन्हें काफी मना किया क्योंकि मै भुगतभोगी था और उस विशाल पक्षी के बारे में जनता था | मेरे साथी ने मेरी बातो पर ध्यान नही दिया और पत्थरों से उस अंडे को फोड़ दिया और चूजे को भूनकर खा गये | तभी एक विशाल पक्षी उड़ता हुआ अंडे को फुटा हुआ देखकर मेरे दोस्तों के पीछे पड़ गया और वो दौड़ते हुए जहाज में बैठ गये | बड़ी मुश्किल से वो जहाज में बैठे और जहाज वहा से रवाना कर दिया | जब उस पक्षी ने हमे देखा कि हम उस टापू से जा रहे थे तो वो हमारे पीछे पड़ गया | वो अपने पंजो में बड़े बड़े पत्थर लेकर आ रहा था और उसने पत्थर हमारे जहाज पर गिरा दिए | इसके बाद ओर भी ऐसे पक्षी आ गये और उन्होंने हमारे जहाज पर हमला बोल दिया |

उनके हमलो से हमारा जहाज तहस-नहस हो गया और मेरे सभी साथी डूबकर मर गये | मै जहाज के पट्टे के सहारे तैरता हुआ और एक टापू के किनारे पर आ गया | उधर वो जहाज मेरी आँखों के सामने समुद्र के बीच डूब गया था |  उस टापू पर पहुचते ही ठंडे पानी की वजह से मेरा शरीर सिकुड़ गया था | दिन में तेज धुप से मेरे शरीर को राहत मिली और मै चलने लायक हो सका | अब मै उस टापू पर घुमने लगा और मुझे वो टापू स्वर्ग के बाग़ जैसा लग रहा था जिसमे कई वृक्ष म मीठे पानी की नदिया और पक्षी थे | मैंने फल खाकर अपनी भूख बुझाई और फिर पानी पिया |  मैंने खुदा को दुबारा अपनी जान बचाने का शुक्रिया कहा और शाम ढलने तक वहा बैठा रहा | मैंने अभी तक उस टापू पर एक भी आदमी नही देखा था इसलिए मुझे थोडा डर लग रहा था कि किसी मुसीबत में ना फस जाऊ | लेकिन उस रात मैंने उस टापु पर चैन की नींद सोयी |

अगली सुबह वापस चलने लगा और एक छोटी सी नदी के पास पंहुचा  | उस छोटी सी नदी के किनारे पर मुझे एक बुढा आदमी दिखाई दिया जिसने शरीर पर पेड़ो के पत्ते बाँध रखे थे | मैंने सोचा कि ये भी मेरी तरह इस टापू पर भटक गया होगा इसलिए मैंने उसको अभिवादन किया | उसने हाथ हिलाकर बिना बोले जवाब दिया | मैंने उससे पूछा कि वो इस छोटी सी नदी के किनारे पर अकेला क्यों बैठा है | उसने सांकेतिक भाषा में समझाया कि वो उसके कंधे पर बैठकर नदी पार करना चाहता था | मैंने उसकी मदद के लिए उसे कंधे पर बिठाकर नदी पार करा दी | जब उस नदी के दुसरी तरफ आया तो मैंने उसे कंधे से नीचे उतरने को कहा लेकिन वो उतरने को तैयार ही नही था | उसने उसके पैर मेरी गर्दन में बड़ी जोर से जकड़े हुए थे जिसे खोल पाना मेरे लिए बड़ा मुश्किल था |

मैंने उसके पैर देखे जो बहुत काले और बेजान दिख रहे थे | मैंने उसको डराकर नीचे गिराने की कोशिश की लेकिन उसने मेरी गर्दन को बड़ी जोर से जकड़ रखा था | अब मै दर्द के मारे कराहते हुए पेड़ की सहारे गिरकर बेहोश हो गया | जब मै उठा तो देखा कि वो अभी भी मेरे कंधे पर ही बैठा था और वो मुझे फलो के पेड़ो की ओर जाने को इशारा कर रहा था | मैंने जब उसकी बात नही मानी तो वो मेरे बाल खीचने लगा और उसके पैरो से मेरे गर्दन को दबाने लगा | मजबूरी में मुझे उसकी बात मानते हुए उन पेड़ो तक जाना पड़ा | इस तरह दिन रात वो मेरे कंधे पर ही बैठा रहता | सोते वक़्त भी वो पैरो को जकड़ पर थोड़ी देर सो जाता था | मैंने खुद से कहा कि “मैंने इस आदमी की मदद की और ये मेरे साथ बुरा बर्ताव कर रहा है , अब मै किसी की भी मदद नही करूंगा ” |

एक दिन मै उसको कद्दू के बाग़ में लेकर गया और एक कद्दू फोड़कर उसमे अंगूर का रस डाल दिया | अब मै उसको कुछ दिनों तक शराब बन जाने के लिए छोड़ दिया और शराब बन जाने के बाद मै उसे रोज पीने लगा | इससे मुझे थकान सहने की ताकत मिलती थे | एक दिन उस आदमी ने मुझे पीते हुए देख उसने भी पीने की इच्छा जताई | मैंने उसे भी शराब पिला दी और नशे में वो मेरे कंधो पर झूलने लगा | जब वो पुरे नशे में आ गया तो मैंने गर्दन से उसके पैरो की पकड़ को ढीला कर उसे नीचे गिरा दिया | उसके नीचे गिरते ही मैंने एक बड़ा पत्थर लेकर उसके उपर गिरा दिया और उस पर बिना दया दिखाए उसे मार दिया |

अब मै वापस समुद्र तट पर आकर किसी जहाज का इंतजार करने लगा | कुछ दिनों बाद एक जहाज वहा से गुजरा और उसके यात्रियों ने मुझे देख लिया था | वो जहाज उस टापू पर रुका और उसके यात्री नीचे उतरे | उसके यात्रियों ने मुझे इस टापू पर फंसने का कारण पूछा | मैंने उसे अपनी पुरी कहानी बताई कि किस तरह  मेरा जहाज डूब गया और यहा पर उस बूढ़े आदमी को कंधो पर बिठाकर थक गया | अब मै उन लोगो के साथ जहाज पर चढ़ गया और उन्होंने मुझे खाने पीने का सामान दिया | वो जहाज बंदरो के टापू पर जा रहा था और मुझे फिर से डर लगने लग गया कि फिर से वो मुझे उस नर्क में लेकर जा रहे है जहा मेरे कई साथी मारे गये | लेकिन उस जहाज के यात्रियों ने उस टापू पर बचने का तरीक ढूंड रखा था जो केवल दिन में उस टापू पर रहते और रात को वापस जहाज पर आ जाते थे |

अब मैंने उनके इस टापू पर आने का कारण और रहने की कला के बारे में पूछा | उन्होंने बताया कि वो नारियल का व्यापार करते है और यहा नारियलो के लिए आते है क्योंकि यहा पर नारियलो की भरमार है | मैंने उनसे नारियल तोड़ने का तरीका पूछा तो वो मुझको उन नारियलो के पेड़ के पास लेकर गये | अब उन्होंने मुझे एक थैले में पत्थर लेकर चलने को कहा और मै थैले में पत्थर भरकर उनके साथ चल पड़ा | अब वो मुझे एक ऐसी घाटी पर लेकर गये जहा नारियल के बड़े बड़े पेड़ थे | वो पेड़ इतने विशाल थे कि उन पर कोई इन्सान नही चढ़ सकता था | वहा पर बहुत सारे बन्दर थे और जब उनहोंने हमे देखा तो भागकर पेड़ो पर चढ़ गये | अब उन्होंने मुझे और अपने सभी साथियो को उन बंदरो पर पत्थर मारने को कहा और बदले में वो बन्दर पत्थर की बजाय नारियल तोडकर उन पर गिराने लगे |

मै भी अपने थैले के पत्थर खत्म होने तक पत्थर फेंकता था और जमीन पर मुझे ढेरो नारियल गिरे हुए दिखाई दिए | हम सबने जितने नारियल उठा सकते थे उतने उठा लिए और जहाज की ओर रवाना हो गये | अब मैंने अपने नारियलो को उन व्यापारी को लौटाना चाहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा की मै भी इन नारियलो को बेचकर व्यापार करु | मैंने उन भले लोगो को शुक्रिया कहा | अब मैंने कई दिनों तक इस तरीके से खूब सारे नारियल इकट्ठे कर लिए | अब मै जहाज में बैठकर वापस बगदाद आ गया और उन नारियलो को बेचकर खूब धन कमाया | मेरे दोस्त मुझे फिर एक बार सुरक्षित लौटने पर खुश हुए और मैंने नारियलो को बेचकर जो पैसे कमाए उनसे उनके लिए तोहफे खरीद लिए थे |

अब मै तुम्हे अपनी छठी यात्रा की कहानी कल सुनाऊंगा | ये कहकर सिंदबाद जहाजी उस हमाल को 100 दीनार ओर दिए और अगले दिन आने को कहा | अगली सुबह वो फिर सिंदबाद की छठी कहानी सुनने के लिए आया और सिंदबाद ने उसे खाना खिलाया | खाना खाने के बाद सिंदबाद ने अपनी छठी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाना शुरू किया |

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