Subhash Chandra Bose Biography in Hindi | सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी

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Subhash Chandra Bose Biography in Hindi | सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी

Subhash Chandra Bose Biography in Hindiनेताजी सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose ) भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी और Indian National Army के संस्थापक थे | आजादी के पूर्व की अवधि में वो भारत के भविष्य के लिए Labor Party से बात करने लन्दन गये थे | उनके ताइवान से अचानक खो जाने के कारण उनके अस्तित्व की सम्भावनाओ की कई बार वाद विवाद हुआ था |

सुभाष चन्द्र बोस का प्रारम्भिक जीवन Early life of Subhash Chandra Bose

Subhash Chandra Bose childhood
Early life of Subhash Chandra Bose

सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose ) का जन्म 23 जनवरी 1897 को बंगाल प्रान्त के उडीसा भाग के कटक जिले में हुआ था | उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था | वो उनके परिवार के 14 बच्चो में से 9वे स्थान पर थे | उनको जनवरी 1902 में अपने भाई बहनों की तरह Protestant European School में दाखिला दिलाया गया | उन्होंने 1909 तक प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण कर रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में भेज दिया गया | जिस दिन सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose ) का दाखिला उस विद्यालय में हुआ तभी उनके प्रधानाध्यापक ने उनकी प्रतिभा समझ ली थी | 1913 में मैट्रिक परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त करने के बाद कॉलेज की पढाई के लिए Presidency College  में प्रवेश लिया |

Subhash Chandra Bose के राष्ट्रवादी स्वभाव के बारे में जानकारी जब हुई तब भारत विरोधी टिप्पणियों के विरोध में उन्होंने प्रोफेसर पर हमला कर दिया था और उन्हें कॉलेज से निष्काशित कर दिया गया | इसके बाद उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी के स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया और दर्शनशास्र में बी.ए . पास की | 1919 में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने इंग्लैंड चले गये और वहा पर परीक्षा में चौथा स्थान लाये | Subhash Chandra Bose का भारतीय सिविल सेवा में चयन कर लिया गया लेकिन वो अंग्रेज सरकार की अधीनता में काम नही करना चाहते थे | 1921 में वो भारतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देने के कगार पर आ गये थे और अपने बड़े बही सरत चन्द्र बोस को पत्र में लिखा कि “केवल त्याग और पीड़ा की मिट्टी हमारे राष्ट्रीय भावना को उठा सकती है ” | वो 23 अप्रैल 1921 को सिविल सेवा से त्यागपत्र देकर भारत लौट आये |

कांग्रेस के साथ Subhash Chandra Bose With Indian National Congress

Subhash Chandra Bose with congressभारत आकर उन्होंने एक समाचार पत्र “स्वराज” शुरू किया और बंगाल प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के प्रकाशन का पदभार संभाला | Subhash Chandra Bose चितरंजन दास से बहुत प्रभावित थे जो बंगाल में आक्रामक राष्ट्रवाद के प्रवक्ता थे | 1923 में उन्हें “अखिल भारतीय युवा कांग्रेस” का अध्यक्ष और “बंगाल प्रदेश कांग्रेस” का सचिव चुना गया | इसके साथ ही वो चितरंजन दास द्वारा चलाये जा रहे समाचार पत्र “Forward” के संपादक थे | बोस ने “कोलकाता नगर निगम”के सी.ई.ओ. के रूप में भी काम किया | राष्ट्रवादियों के घिरे होने के कारण 1925 में बोस Subhash Chandra Bose को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जहा उन्हें तपेदिक हो गया |

1927 में जेल से रिहा होने के बाद वो कांग्रेस पार्टी के महासचिव बने और स्वतंत्रता के लिए जवाहर लाल नेहरु के साथ काम किया |1928 में उन्होंने कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वार्षिक बैठक रखी | कुछ समय बाद उन्हें पुनः सविनय अवज्ञा के लिए गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और इस बार वो कलकत्ता के मेयर बनकर उभरे | 1930 एक मध्य में बोस Subhash Chandra Bose ने यूरोप की यात्रा की जहा पर उन्होंने भारतीय छात्रों और मुसोलिनी जैसे यूरोपी नेताओ से मिले | उन्होंने वहा पर उन्होंने पार्टी संघठन .साम्यवाद और फासीवाद देखा |

इस दौरान उन्होंने अपनी किताब “The Indian Struggle” का प्रथम भाग लिखा था जिसमे उन्होंने 1920–1934 भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में लिखा था | उनके ये किताब 1935 में लन्दन में छपी थी लेकिन उपद्रव के भय से अंग्रेज सरकार ने इस पुस्तक पर प्रतिबन्ध लगा दिया |1938 तक बोस एक राष्ट्रीय कद के नेता बन गये थे और कांग्रेस अध्यक्ष के नामांकन को स्वीकार कर लिया था |

कांग्रेस के साथ विवाद Subhash Chandra Bose Dispute with Congress

congress dispute Subhash Chandra BoseSubhash Chandra Bose अंग्रेजो के खिलाफ अयोग्य स्वराज के लिए खड़े हुए | इसके लिए महात्मा गांधी उनके अध्यक्ष चुने जाने के विरोढ में थे | बोस ने एकता बनाने की कोशिश की लेकिन गंधोजी ने बोस को अपनी अलग मंत्रिमंडल बनाने को कहा | इस वजह से Subhash Chandra Bose बोस और नेहरु के बीच भी मनमुटाव हो गया | 1939 में बोस कांग्रेस की बैठक में आये और उन्हें अध्यक्ष पद के लिए चुन लिया गया जबकि गांधीजी किसी ओर को अध्यक्ष बनाना चाहते थे | मुत्थुरामालिंगम थेवर ने कांग्रेस के आंतरिक विद्रोह में उनका साथ दिया और सारे दक्षिण भारतीय वोट उनके लिए जुटाए |

हालांकि गांधीजी के नेतृत्व गुट की चालो की वजह से बोस को अध्यक्ष पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा | 22 जून 1939 में बोस Subhash Chandra Bose ने भारतीय रास्ट्रीय कांग्रेस के नये गुट “ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक” संगठित किया | इस गुट का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक वाम-पक्ष को मजबूत करना था लेकिन इसकी मुख्य ताकत बंगाल में थी | बंगाल में मुत्थुरामालिंगम थेवर इस गुट से जुड़ गये | जब बोस मदुरै आये तक थेवर ने एक विशाल रैली का आयोजन किया जिसमे उन्होंने “ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक” का समर्थन किया | उन्होंने पत्र व्यवहार में अंग्रेजो की नापसंदगी को जाहिर किया था | इंग्लैंड में Subhash Chandra Bose भारत के भविष्य के विचारो के लिए “मजदूर दल” के नेताओ से पत्र व्यवहार करने लगे

आजाद हिन्द फ़ौज का घठन Formation of INA by Subhash Chandra Bose

Subhash Chandra Bose Indian National Army in singaporeद्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1939 में बोस ने एक विशाल आन्दोलन चलाया और देश के सभी नौजवानों को इकठ्ठा किया | उनके इस आन्दोलन में कई लोग शामिल हुए और अंग्रेजो ने उनको तुरंत जेल में डाल दिया | जेल में उन्होंने दो सप्ताह तक खाना खाने से इंकार कर दिया और उनकी बिगड़ी हालत को देखते हुए उन्हें रिहा कर घर में नजरबंद कर दिया | उनके नजरबंद के दौरान उन्होंने वहा से भागने की योजना बनाई | योजना के अनुसार वो नजरबंद से भागकर पहले बिहार गये और फिर पेशावर चले गये | अंत में Subhash Chandra Bose जर्मनी चले गये जहा वो हिटलर से मिले |

बर्लिन में उन्होंने ऑस्ट्रिया के पशुचिकित्सक की बेटी एमिली शेंकल से शादी कर ली जहा उनकी एक बेटी अनीता बोस का जन्म भी हुआ | 1943 में वो दक्षिण – पूर्व एशिया के लिए रवाना हो गये और जापानियों की मदद से सेना बनाना शुरू कर दिया | इस सेना को बाद में Subhash Chandra Bose बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज नाम रखा | आजाद हिन्द फ़ौज में महिलाओ के लिए उन्होंने झांसी की रानी रेजिमेंट का मिर्माण किया था | बर्मा में एक रैली के दौरान उन्होंने एक नारा दिया “तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा “| इसके अलावा Subhash Chandra Bose ने आजाद हिन्द फ़ौज में जोश उत्प्प्न करने के लिए “दिल्ली चलो” और “जय हिन्द” जैसे नारों से युवा फ़ौज का आह्वान किया |  इन नारों से वो भारत के लोगो को अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे थे |

6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित होने वाले आज़ाद हिन्द रेडियो से एक भाषण दिया था जिसमे उन्होंने पहली बाद महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता ” कहकर पुकारा था और उनके अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई के लिए उनको शुभकामनायें और उनका आशीर्वाद सभी भारतवासियों को देने की बात कही | तभी से महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर पुकारा जाने लगा |

सुभाष चन्द्र की म्रत्यु और म्रत्यु का रहस्य Disappearance and Death of Subhash Chandra Bose

Netajiहालांकि ऐसा माना जाता है कि Netaji Subhash Chandra Bose नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जापान के टोक्यो से ताइवान की तरफ विमान में जाते वक़्त हवाई दुर्घटना में मृत्यु हुयी लेकिन उनके शरीर को कभी बरामद नही किया गया | बंगाल के लोगो का फिर भी मानना था कि बोस भारत की आजादी के लिए फिर लौटकर आयेंगे | भारत सरकार ने इस मामले को सुलझाने के लिए कई बैठके बुलाई और सच का पता लगाया | मई 1956 में शाह नवाज कमिटी बोस Subhash Chandra Bose की म्रत्यु की जाँच करने के लिए जापान गयीलेकिन ताइवान के साथ राजीनीतिक रिश्तो में कमी की वजह से ताइवान सरकार ने सहयता करने से मना कर दिया |17 मई 2006 में संसद में जस्टिस मुखर्जी कमीशन ने घोषणा की गयी कि “बोस की म्रत्यु हवाई दुर्घटना में नही हुयी और रेंकोजी मन्दिर में अस्थिय उनकी नही है ” लेकिन उनकी खोज को भारत सरकार ने खारिज कर दिया |

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