सोनपुर मेला , जहा एक महीने तक दिखता है पशु पक्षियों का सतरंगी संसार | Sonpur Mela Facts in Hindi

Sonpur Mela Facts in Hindi

sonpur-mela-facts-in-hindiसोनपुर का मेला Sonpur Mela अपने आप में समृद्ध विरासत को समेटे हुए है | प्राचीनकाल से लगनेवाले इस मेले का स्वरूप भले कुछ बदला हो लेकिन महत्ता आज भी वही है | करीब 20 वर्ग किलोमीटर में फैले इस मेले की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मेले के एक छोर से दुसरे छोर तक घूमते घूमते लोग भले ही थक जाए लेकिन उत्सुकता बनी रहती है | इस भूमि पर लगनेवाले इस मेले को हरिहर क्षेत्र और चत्तर मेले के नाम से भी जाना जाता है | इस मेले को पशु मेले के रूप में विशेष पहचान मिली हुयी है |  आइये आज हम आपको इस Sonpur Mela  मेले के इतिहास और इससे जुडी रोचक जानकारियों से रूबरू करवाते है |

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सोनपुर मेले की जगह हरिहर क्षेत्र से जुडी पौराणिक कथा | History of Sonpur Mela in Hindi

history-of-sonpur-mela-in-hindiपुराणों के अनुसार एक बार एक हाथी (गज ) और मगरमच्छ (ग्राह ) के रूप में दो शापित आत्मा धरती पर उत्पन्न हुए थे | एक बार जब हाथी पानी पीने के लिए कोनहरा नदी के तट पत आया तो अचानक मगर ने उसे जकड़ लिया | हाथी में अपने आपको छुड़ाने की काफी कोशिश की लेकिन विफल रहा और कई वर्षो तक वो उस ग्राह से छुटकारा पाने के लिए लड़ता रहा | हार मानने के बाद उस गज से पुरी श्रुद्ध के साथ भगवान विष्णु को याद किया |

अपने भक्त की पुकार सुनकर हरि से रहा नही गया और कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु उस स्थान पर प्रकट हुए और सुदर्शन चक्र चलाकर गज को उसके चंगुल से मुक्त किया | इस प्रकार गज की जान बच गयी | ऐसा माना जाता है कि इस घटना के बाद गज और ग्राह मित्र बन गये थे | उन दोनों ने साथ मिलकर वहा पर भगवान शिव और भगवान विष्णु का मन्दिर बनवाया , जिसके कारण इस क्षेत्र का नाम हरिहर क्षेत्र पड़ा था |

प्राचीनकाल में इसी क्षेत्र में एक बार ऋषि मुनियों का एक विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ था | उस सम्मेलन में शैव और वैष्णव दोनों जातियों के बीच मन्दिर को लेकर विवाद हो गया था जिसे बाद में सुलझाया गया | उसके बाद से यहा भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की मूर्तियों को इस मन्दिर में स्थापित किया हुआ | इसी स्मृति में यहा कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर विशाल मेले Sonpur Mela  का आयोजन होता है |

चिड़िया से लेकर हाथी सबकी होती है बिक्री | Largest Cattle Fair of Asia

sonpur-ka-melaSonpur Mela  सोनपुर के मेले में अलग अलग प्रकार के बाजार है जिसमे अलग अलग प्रकार के पशु पक्षी बिकते है | आइये आपको इन बाजारों के बारे में विस्तार से बताते है |

  • चिड़िया बाजार – इस बाजार की ख़ास बात यह है कि आपको यहा पर रंग-बिरंगी चिड़िया की अनेको किस्मे मिलेगी जिसमे लव बर्ड ,कोच्क्टेलम, फिंच ,जावा ,कबूतर ,बटेर और चाइनीस मुर्गी की भरमार है | इन चिडियों को देश ले अलग अलग हिस्सों से रेल द्वारा लाया जाता है | यहा पर आपको 200 से लेकर 3000 रूपये तक की चिड़िया मिल सकती है | इसी बाजार में आपको खरगोश और चूहे भी मिल जायेंगे |
  • घोड़े का बाजार – इस बाजार में देश के कई हिस्सों से घुड़सवारी के शौक़ीन लोग आते है | कुछ यहा घोड़े की प्रदर्शनी लगाते है तो कुछ इनकी खरीद बिक्री के लिए | यहा घोडा रेस का भी आयोजन किया जाता है | यहा कई नस्ल के घोड़े है जैसे पंजाब ,राजस्थान और विशेषकर पुष्कर और अजमेर के घोड़े की प्रदर्शनी भी लगती है | यहा पर घोड़ो की कीमत 20 हजार से 80 हजार तक होती है |
  • कुत्तो का बाजार – यहा आनेवाले लोग इस बाजार को देखे बिना नही लौटते | सबसे अधिक खरीददारी यही होती है यहाँ तरह तरह के डॉगी एक ही जगह पर एक साथ देखे जा सकते है | कुत्तो की वैरायटी में प्रमुख है जर्मन शेफर्ड ,पोमेरेयिन , लिब्रा ,डोबरमेन ,सेंट बर्नार्ड एवं ग्रेडियन | इन्हें कोलकाता ,बेंगलुरु ,दिली ,मुजफ्फरपुर ,पटना ,भागलपुर , इलाहाबाद ,बनारस और कानपुर से लाया जाता है | दूर से आने वाले कुत्तो को हवाई जहाज से भी लाया जाता है |
  • हाथी बाजार – सोनपुर मेला पुराने जमाने से खासकर हाथियों के लिए ही प्रसिद्ध है | प्राचीनकाल से आस पास के देशो से लोग इन्हें खरीदने आते थे | अब हाथियों की सिर्फ प्रदर्शनी होती है अरु इनके परेड का रोमांचक आयोजन होता हो जिसे बच्चे बहुत पसंद करते है |

सोनपुर मेले से जुडी रोचक बाते | Sonpur Cattle Fair Facts in Hindi

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  • Sonpur Mela  सोनपुर मेला देश का सबसे पुराना मेला माना जाता है |
  • सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला हो |
  • Sonpur Mela  सोनपुर का मेला एकमात्र ऐसा मेला है जहा बड़ी संख्या में हाथियों की बिक्री होती है |
  • Sonpur Mela  सोनपुर मेले के बारे में ऐसा माना जाता है कि यहा सुई से लेकर हाथी तक उपलब्ध रहता है |
  • 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के लिए बाबू वीर कुंवर सिंह ने इसी मेले से अरबी घोड़े ,हाथी और हथियारों का संग्रह किया था |
  • सिख ग्रंथो में यह जिक्र है कि गुरु नानक यहा आये थे | बौद्ध धर्म के अनुसार अपने अंतिम समय में महात्मा बुद्ध इसी मार्ग  से होकर कुशीनगर की ओर गये थे जहा उनका महापरिनिर्वाण हुआ था |
  • सोनपुर की इस धरती पर हरिहरनाथ मन्दिर दुनिया के इकलौता ऐसा मन्दिर है जहा हरि (विष्णु ) तथा हर (शिव) की एकीकृत मूर्ति है | इस मन्दिर के बार में कई धारणाये प्रचलित है |
  • यहा कभी अफ़घान ,ईराक ,ईराक जैसे देशो से लोग पशुओ की खरीददारी करने आते थे |
  • महान मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने भी इसी मेले से बैल ,घोड़े ,हाथी और हथियारों की खरीददारी की थी |
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