शेखचिल्ली के कारनामे Shekh Chilli Stories in Hindi

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Shekh Chilli Stories in Hindi

Shekh Chilli Stories in HindiShekh Chilli शेखचिल्ली के कारनामे के बारे में हमने बचपन में बहुत किताबे ओर कॉमिक्स पढी है उन्ही कहानियो में से कुछ चुनिन्दा कहानिया आज हम आपको सुनायेंगे | वैसे शेखचिल्ली एक सूफी संत था जो मुगल बादशाह दारा शिकोह का गुरु था |शेख चिल्ली की कब्र आज भी हरियाणा के थानेसर में बनी हुयी है | Shekh Chilli शेखचिल्ली का बचपन बहुत गरीबी में बिता था और बचपन में उसकी पिता की मौत के बाद उसकी माँ ने उसको पाल पोसकर बड़ा किया | उसको बचपन में सभी शेख कहकर पुकारते थे | एक दिन मौलवी साहब ने मदरसे में उसको सिखाया कि लडके और लड़की के लिए अलग अलग शब्दों का प्रयोग होता है जैसे सुलेमान पानी पीता है और सुल्ताना पानी पीती है उसी तरह सुल्तान गाव जाता है और सुल्ताना गाँव जाती है |

अब वो मौलवी साहब की इस शिक्षा को समझ गया | एक दिन वो रास्ते में जा रहा तो उसे किसी के चिल्लाने की आवाज आयी उसने पास जाकर देखा तो एक लडकी कुंवे में गिर गयी थी और मदद के लिए चिल्ला रही थी | वो दौड़ता हुआ अपने साथियो के पास गया और कहने लगा “एक लडकी कुंवे में गिर गयी है और मदद के लिए चिल्ली रही है ” | उसके साथी दौड़ते हुए गये और उस लडकी को बचाया | शेख बार बार चिल्ली चिल्ली कह रहा था तो उसके दोस्तों ने पूछा कि वो बार बार चिल्ली चिल्ली क्या कह रहा था तो शेख ने समझाया कि मौलवी साहब ने उसे पढाया था जिसके अनुसार अगर लड़का होगा तो उसके लिया “चिल्ला रहा ” शब्द प्रयोग करेंगे लेकिन लडकी के लिए तो “चिल्ली रही ” तो प्रयोग करेंगे | उसके दोस्तों ने उसकी मुर्खता को समझ लिया और उसे चिल्ली कहकर चिढाने लगे | तब से उसका नाम शेखचिल्ली पढ़ गया |

इस तरह Shekh Chilli शेख चिल्ली ने बचपन से ही कई ऐसे मूर्खतापूर्ण काम किये जिसे Shekh Chilli शेखचिल्ली के कारनामे कहा जाता है | Shekh Chilli शेखचिल्ली के कारनामो में से कुछ किस्से हम आपको यहा प्रस्तुत करते है |

शेखचिल्ली की चोरी Sheikh Chilli Went for Stealing

एक बार रात को Shekh Chilli शेखचिल्ली रात को घर जा रहा था | रात बहुत ज्यादा हो गयी थी और वो सडक पर अकेला जा रहा था | उसने चार लोगो को सडक पर चुपचाप जाते देखा तो उनसे पूछा “मै तो घर जा रहा हु लेकिन आप सब इतनी रात को कहा जा रहे हो ” | उनमे से एक ने कहा “हम चोर है और चोरी करने जा रहे है ” | शेखचिल्ल्ली ने सोचा “ये शायद कोई बढ़िया काम करने जा रहे है ,मैंने ऐसा काम पहले कभी नही किया और अगर इनके साथ जाऊँगा तो कुछ सिखने को  मिलेगा ” | उसने चोरो से कहा “अगर आप लोगो को कोई परेशानी ना हो तो मै पाके साथ चल सकता हु ” | उनमे से एक चोर ने पूछा “क्या तुमने पहले कभी चोरी की है ?” | शेखचिल्ली ने मना कर दिया तो उन्होंने कहा “तो हम तुम्हे साथ ले जाने का खतरा नही उठा सकते है ”

शेखचिल्ली के खूब पीछे पड़ने पर उन चोरो ने उसको साथ ले लिया | रास्ते में उन्होंने शेखचिल्ली से कहा “जैसा हम कहे ,वैसा ही करना वरना हम फंस जायेंगे ” | शेखचिल्ल्ली मान गया और चोरो ने एक खुला दरवाजा देखकर अंदर घुस गये | उस घर में एक बुढी औरत दरवाजा बंद करना भूल गयी थी | जैसे ही वो सभी अंदर गये तो देखा कि बुढिया पलंग पर सो रही थी और उसके पास खीर पकने के लिए रखी हुयी थी | खीर की खुशबु बहुत जोरो से आ रही थी | सभी चोर चुराने का सामान देखने में लगे हुए थे लेकिन शेखचिल्ली की नजर तो उस खीर पर पड़ी हुयी थी |

अब वो खीर के पास गया और एक प्याले में खीर लेकर खाने लग गया | उसने आस पास देखा कि कही वो बुढ़िया जग तो नही रही है | उसने देखा कि बुढिया के एक हाथ की हथेली खुली हुयी पलंग के बाहर लटक रही थी | उसने सोचा कि बुढिया खीर मांग रही है इसलिए उसने एक प्याले में गर्म खीर डालकर उसकी हथेली पर रख दी | गर्म खीर हाथ पर रखते ही बुढिया का हाथ जल गया और वो “चोर चोर” चिल्लाने लगी | जब चोरो ने उस बुढिया की आवाज सूनी तो वो छुप गये | शेखचिल्ली भी देहलीज के उपर चढकर बैठ गया | एक चोर दहलीज के पीछे छिप गया |

बुढिया की आवाज सुनते ही पडौसी उठ गये और दौड़ते हुए उसके घर आ गये | बुढिया ने बताया कि किसी ने गर्म खीर उसकी हाथ पर रख दी थी और शायद कोई चोर अंदर आ गया है | अब पडौसी घर में ढूंढने लगे तो उनकी नजर दहलीज के पीछे छिपे आदमी पर पड़ी | उन्होंने उसे पकड़ लिया और उससे पूछा “जल्दी बताओ तुमने क्या चोरी की और तुम्हारे साथ कौन है ” | जब कई बार उससे पूछा तो उसने उपर की ओर इशारा करते हुए कहा “उपरवाला सब जानता है ” | वो बार बार यही कह रहा था इसलिए शेखचिल्ली से रहा नही गया और वो नीचे उतर गया और बोला “क्या बोल रहे हो , सब उपर वाला जानता है तो तुम कुछ नही जानते हो “| इसके बाद शेखचिल्ली ने सारी कहानी लोगो को बताई और उन चोरो को जेल में डाल दिया गया |

शेखचिल्ली के खयाली पुलाव Sheikh Chilli Daydreaming

एक दिन Shekh Chilli शेख चिल्ली बाजार से अंडे खरीद कर लाया और उन्हें टोकरी में रख सिर पर रखकर घर लेकर आ रहा था | अब रास्ते में सोचते आ रहा था कि “अगर इन अंडो से बच्चे निकले तो मेरे पास बहुत सारी मुर्गिया होगी , उन मुर्गियों से फिर बहुत सारे अंडे होगे और इतने सारे अन्डो को बेचकर मै धनवान हो जाऊँगा , उसके बाद मै खुद बाजार जाने के बजाय नौकर रखूँगा , उसके बाद मै एक बड़ा घर बनाऊंगा , उस घर में एक सोने का , एक बैठक का  और एक खाने का कमरा बनाऊंगा  ,मेरी माँ के लिए एक बड़ा कमरा बनाऊंगा , इसके बाद एक अमीर और सुंदर लडकी से शादी कर लूँगा , वो कभी रसोई में काम नही करेगी मै उसके लिए नौकर रखूँगा , उसके बाद मेरे बच्चे होंगे और कम से कम 6 बच्चे होने चाहिए, जब वो बड़े होंगे तो मै उनकी शादी कर दूंगा और उनके भी बच्चे होंगे , फिर बुढा होने पर अपने पोतो के साथ खेलूँगा   ” | इतने में उसके पैर में ठोकर लगी और अंडो की टोकरी जमीन पर गिर गयी | सारे अंडे फुट गयी और साथ में उसके सारे सपने भी टूट गये |

 

इसी तरह एक बार वो अपने दोस्तों के साथ जंगल में लकडिया काटने गया और पेड़ पर चढ़ गया | वो एक टहनी पर बैठ गया और लकड़ी काटते काटते सोचने लगा “”मै खूब सारी लकडिया काटकर बाजार में बेचूंगा  और उससे धन कमाऊंगा | धीरे धीरे जब मेरे पास काफी पैसे आ जायंगे तो उन पैसो से लकडिया काटने के लिए आदमी रख दूंगा और उससे ओर पैसे बनाऊंगा | इसके बाद मै फर्नीचर का व्यापार शुरू कर दूंगा , एक दिन इतना अमीर हो जाऊँगा कि राजा अपनी बेटी की शादी मुझसे कराने के लिए राजी हो जाएगा | ” अब वो शादी के बारे में सोचने लगा और सपने में राजकुमारी से गले लगाने के लिए हाथ बढाया | उधर उसका संतुलन खो गया और वो टहनी टूट गयी और वो नीचे गिर गया | उसके सारे सपने चूर हो गये और उसकी टांग टूट गयी | उसके दोस्तों ने शेखचिल्ली को कंधो पर उठाकर घर तक पहुचाया | इस तरह शेखचिल्ली कई खयाली पुलाव बनाता रहता था |

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