Samrat Ashoka History in Hindi चक्रवती अशोक सम्राट का इतिहास

Samrat Ashoka History in Hindi

अशोक मौर्य Ashoka Maurya जिसे सामान्यत: अशोक Ashoka और चक्रवती अशोक सम्राट Chakrvaty Ashoka Samrat कहा जाता है , Maurya Dynasty मौर्य वंश का सबसे महान शाषक था जिसने लगभग पुरे भारत उपमहाद्वीप पर 268 ई. पूर्व से 232 ई. पूर्व तक राज किया था | अशोक के साम्राज्य की मुख्य राजधानी पाटलिपुत्र [वर्तमान बिहार ] और प्रांतीय राजधानीया तक्षशिला [वर्तमान पाकिस्तान में स्थित] और उज्जैन थी | 260 ई. पूर्व में कलिंग [वर्तमान उडीसा ]के भीषण युद्ध में हुए रक्तपात ने अशोक का हृदय परिवर्तित कर दिया और बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया | एक ग्रन्थ के अनुसार अशोक का नाम “अशोक वृक्ष” से प्रेरित था | उनके जीवन के अधिकांश अंश दुसरी सदी के अशोकवदन Ashokavadana और श्रीलंकन ग्रन्थ महावामसा Mahavamsa से प्राप्त होता है आइये अब हम आपको अशोक के जीवन का History of Ashoka विस्तार में वर्णन करते है

Early Life of Ashoka अशोक का प्रारम्भिक जीवन

Ashoka the Greatअशोका Ashoka का जन्म मौर्य सम्राट बिन्दुसार और उनकी निचले दर्जे की पत्नी धर्मा से हुआ था | अशोक मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य Chnadragupta Maurya का पौत्र था | अवदना ग्रन्थ के अनुसार उसकी माता का नाम रानी सुभद्रंगी था |अशोकवदन  के अनुसार सुभद्रंगी चम्पा जिले के एक ब्राह्मण की पुत्री थी | महल में चल रही साजिशो की वजह से उसे चन्द्रगुप्त से दूर कर दिया था लेकिन तब तक अशोक का जन्म हो गया था | सुभद्रंगी ने चन्द्रगुप्त से बिछड़ने के शोक में अपने पुत्र का नाम अशोक रखा था ताकि वो उनको शोक मुक्त रखे |

अशोक के कई ज्येष्ठ भाई बहन थे जो बिन्दुसार की दुसरी पत्नियों से उसके सौतेले भाई  थे | उसकी लड़ाई की क्षमता बचपन से ही स्पष्ट हो गयी थी और उसे शाही सैन्य प्रशिक्षण दिया गया | अब वह इतना निडर शिकारी था कि एक किंवदंती के अनुसार उसने एक शेर को केवल एक लकड़ी के डंडे से मार गिराया था |उसके भयावह योद्धा और बेरहम सेनापति की ख्याति के चलते उसे मौर्य साम्राज्य के अवन्ती प्रान्त में चल रहे दंगों पर अंकुश लगाने के लिए भेजा गया |

बौद्ध ग्रन्थ दिव्यवदन में बताया गया है कि अशोक को उसके दुष्ट मंत्रियो की गतिविधियों ने विद्रोह करने पर मजबूर कर दिया | ऐसी घटनाये बिन्दुसार के साथ भी हुयी थी | तारानाथ के लेख बताते है कि बिन्दुसार के मुख्य सलाहकार चाणक्य ने 16 शहरों के राजाओ और रईसों को मारकर उन सभी गणराज्यो पर मालिकाना हक बना लिया था | कुछ इतिहासकार इसे बिन्दुसार की जीत बताते है और कुछ विद्रोह का दमन बताते है | इसके बाद अशोक को उज्जैनी का शाषक नियुक्त किया गया |

उत्तराधिकारी की जंग और अशोक का राज्याभिषेक  War Over Succession and Coronation of Ashoka

Coronation of Ashoka272 इसा पूर्व में बिन्दुसार की मौत के बाद सिंहासन के लिए उत्तराधिकारी के लिए जंग शुरू हो गयी | दिव्यवदन के अनुसार बिन्दुसार अपने ज्येष्ठ पुत्र सुशीम को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे लेकिन बिन्दुसार के कुछ मंत्री अशोक को सिंहासन पर बिठाना चाहते थे क्योंकि सुशीम अभिमानी और उनके प्रति असभ्य पेश आता था | बिन्दुसार के मंत्री और चाणक्य के शिष्य राधागुप्त ने अशोक को सिंहासन पर बिठाने में मुख्य योगदान दिया |

अशोकवर्दन के अनुसार  राधागुप्त ने अशोक को एक पुराने शाही हाथी पर बैठकर बगीचे में सवारी करने का प्रस्ताव दिया जहा पर राजा बिन्दुसार अपना उत्तराधिकारी चुनने वाले थे | अशोक राधागुप्त की बात ना मानकर उचित तरीके से सिंहासन पाना चाहता था इसलिए उसने जलते हुए अंगारों पर होते हुए बगीचे में प्रवेश कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया | सिंहासन पाने के बाद अशोक ने राधागुप्त को अपना प्रधान मंत्री बनाया था | दिपवसना और महावसना के अनुसार , अशोक ने अपने सगे भाई विटशोक को छोडकर सारे 99 भाइयो को मार दिया था हालांकि इस घटना  का पुख्ता प्रमाण कही नही है | उसके सिंहासन के उत्तराधिकारी बनने के चार साल बाद 269 ईस्वी पूर्व में उसका राज्याभिषेक किया गया |

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अशोक नर्क और मौर्य साम्राज्य का विस्तार Ashoka’s Hell and Expand of Maurya Dynasty

Ashoka Empire Maurya Dynastyबौद्ध ग्रंथो में बताया गया है कि अशोक गर्म मिजाज और दुष्ट प्रकृति का था | उसने “अशोक नर्क” नाम से एक  यातना कक्ष बनाया था जहा पर आंतरिक और बाहरी कृत्यों में हस्तक्षेप करने वालो को उनका जल्लाद गिरिका मार देता था | इस वजह से वो चंद अशोक [भयंकर अशोक ] नाम से कुख्यात हुआ | प्रोफ़ेसर चार्ल्स ने बौद्ध ग्रंथो को अशोक में बदलाव लाने के लिए बोद्ध धर्म को जिम्मेदार बताने के लिए उसे पूर्व में दुष्ट और बाद में धार्मिक बताया गया है |

सिंहासन पर बैठने के बाद अशोक ने अगले आठ वर्ष तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया जो वर्तमान असम से बलूचिस्तान और पामीर के पठार से दक्षिण भारत तक था | अशोक का प्रारम्भिक शाषनकाल काफी जालिम रहा था लेकिन कलिंग युद्ध के बाद वो उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया था | कलिंग राज्य उस समय अपनी संप्रभुता और लोकतंत्र के लिए गौरवान्वित था | अपने राजतंत्रीय संसदीय लोकतंत्र की वजह से कलिंग प्रसिद्ध था क्योंकि प्राचीन भारत के उस दौर में राजधर्म का सिधांत हुआ करता था |

कलिंग का युद्ध और हृदय परिवर्तन Kalinga War and Buddhist Conversion

Ashoka Kalinga Warकलिंग युद्ध अशोक Ashoka के राज्याभिषेक के आठ वर्ष बाद हुआ था | ये युद्ध इतना भयंकर था कि इसमें 1 लाख सैनिक और कई नागरिक मारे गये और 150,000 से ज्यादा लोग निर्वासित कर दिए गये | जब अशोकAshoka युद्ध के बाद कलिंग के मैदान में अपनी विजय का जश्न मनाने के लिए घूम रहा था तब उसे कई लाशो के उपर से गुजरना पड़ा और उनके पास उनके परिजन विलाप करते हुए दिखे | इस भयानक दृश्य को देखकर उसका मन विचलित हो उठा और अकेले में एकालाप करते हुए बोला

” ये मैंने क्या कर दिया ?? अगर यही विजय है तो पराजय क्या होती है  ?? क्या ये विजय है या पराजय  ?? क्या ये न्याय है या अन्याय ?? कता ये शौर्य है या घोर पराजय ?? क्या मै नादान बच्चो और औरतो के जीवन का मूल्य चूका पाऊंगा ?? क्या ये मैंने साम्राज्य विस्तार और प्रतिष्टा के लिए किया या दुसरे साम्राज्य को नष्ट करने के लिए किया ?? किसी ने अपना पति खोया है किसी ने अपना पिता , कोई बच्चा है तो कोई अजन्मा बच्चा …. ये लाशों के मलबे में कौन है पता नही चल पा रहा है  ?? क्या ये विजय के निशान है या पराजय के ??  क्या ये गिद्ध , कौवे और बाज मौत के दूत है  ?? ”

कलिंग Kalinga War के इस जानलेवा युद्ध ने हिंसक सम्राट अशोक Ashoka को अस्थिर और शांतिप्रिय राजा में परिवर्तित कर दिया और वो बोद्ध धर्म का अनुयायी हो गया | उन्होंने धर्म परिवर्तन किया या नही इसके पुख्ता प्रमाण नही है और इसे बोद्ध ग्रंथो ने भी प्रमाणित नही किया | उसके बौद्ध धर्म के सरंक्षण करना और फैलाना शुरू कर दिया | उनके इस काम में शामिल होकर उनके पुत्र महिंदा और पुत्री संघमित्रा ने बोद्ध धर्म को वर्तमान श्री लंका में स्थापित किया था | बौद्ध धर्म का पुरातात्विक साक्ष्य बुद्ध की मौत के बाद और अशोक Ashoka के समय के बीच कही नही अंकित है और अशोक के समय में बौद्ध धर्म की प्रचुरता हो गयी

अशोक का परिवार और अशोक की मृत्यु Ashoka Family and Death

Ashoka Buddh Darshnaअशोक Ashoka ने 40 वर्ष तक शाशन किया और तथ्य बताते है कि उसकी मौत के बाद उसकी चिता सात दिन तक जलती रही | अशोक की मौत के बाद मौर्य साम्राज्य 50 वर्ष तक ओर टिका जब तक कि ये पुरे भारत उपमहाद्वीप में पूरा नही फ़ैल गया |अशोक की कई पत्निया और संताने थी लेकिन समय के साथ उन सबके नाम लुप्त हो गये | उसकी मुख्य पत्नी असंधमित्रा थी जो अशोक के शाशनकाल में उसके साथ रही और उसने किसी संतान को जन्म नही दिया |

Ashoka अपने बुढ़ापे में वो अपनी सबसे जवान पत्नी तिश्यरक्षा के सम्मोहन में आ गया | उससे अशोक के पुत्र कुनाल का जन्म हुआ जो तक्षशिला का राज्य प्रतिनिधि था | उसे सिंहासन का उत्तराधिकारी के लिए प्रकल्पित किया गया लेकिन कुछ क्षत्रुओ ने उसे अँधा कर दिया | जल्लादों ने कुनाल को बक्श दिया और वो भटकता हुआ गायक बन गया जिसे उसकी प्रिय पत्नी  कंचनमला ने साथ दिया | कुणाल के बाद उसके बेटे सम्प्रति ने अगले 50 वर्षो तक राज किया |

समय के साथ अशोक मौर्य Ashoka Maurya का शाषनकाल इतिहास के पन्नो में खो गया और उसके शाषन के बारे में इतिहास में कोई जानकारी नही है |  केवल अशोक द्वारा बनाये स्तभों और चट्टानों पर उसका इतिहास सरंक्षित रह गया जो ब्राह्मी लिपि में लिखा गया था | अशोक की मौत के बाद 185 इसवी पूर्व में अंतिम मौर्य शाषक बृहद्रथ को मौर्य सेना में सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने मार दिया और शुंग साम्राज्य की स्थापना की |

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