आप की अदालत फेम रजत शर्मा की सफलता की कहानी Rajat Sharma Success Story in Hindi

Rajat Sharma Success Story in Hindi

Rajat Sharma Success Story in Hindiमित्रो हम अक्सर महापुरुषो , फ़िल्मी कलाकारो , टीवी कलाकारो ,क्रिकेटरों और नेताओं की जीवनी पढ़ते है लेकिन हमने कभी किसी न्यूज़ एंकर की जीवनी बनी हो ऐसा कभी नही सुना होगा क्योंकि न्यूज़ एंकर आते जाते रहते है लेकिन जो न्यूज़ एंकर सच्चाई के साथ अपना काम करते है वो आने वाले वालो में नही बल्कि हमेशा रहने वालो में रहते है | इन्ही न्यूज़ एंकर में रजत शर्मा एक ऐसा नाम है जिनके शो आप की अदालत को देश की सारी जनता एक साथ देखती है | आप की अदालत की माध्यम से उन्होंने कई कलाकारों ,नेताओ और जानी मानी हस्तियों से वो प्रश्न पूछे जिसे पूछने के लिए लोग इसलिए घबराते थे कि शायद ऐसा शो सफल ना हो सके लेकिन उन्होंने अपनी मुस्कुराहट के बल पर देश की जानी मानी हस्तियों से सब कुछ उगलवा दिया | आइये आपको उन्ही प्रेरणादायक रजत शर्मा की कहानी से आप लोगो को रूबरू करवाते है |

Rajat Sharma रजत शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1957 को दिल्ली में हुआ था | रजत जी बचपन में अपने साथ भाइयो ,  एक बहन , बीमार माँ और पिता के साथ पुरानी दिल्ली में 10×10 के एक छोटे से घर में रहते थे | उस समय उनके घर में बिजली और पानी के व्यवस्था भी नही हुआ करती थी | रजत जी पढने के लिए municipality school जाते थे | रजत जी ने बताया कि उनकी आर्थिक स्तिथि इतनी कमजोर थी कि वो पाउडर का दूध पीते थे जिसे गर्म पानी में डालकर पीते है | नहाने के लिए वो गली के नुक्कड़ पर लगे हुए एक सरकारी नल पर जाते  थे | जब घर में बिजली की व्यवस्था नही हुआ करती थी तो वो पढने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन के लैंप के नीचे बैठकर पढ़ा करते थे | उस समय में पढने की लगन बहुत कम बच्चो में होती थी और बहुत कम बच्चे ज्यादा पढने  में विश्वास रखते थे लेकिन रजत जी को कुछ कर गुजरने की चाह ने पढाई में लगाये रखा |

बचपन में उनके जीवन में एक ऐसी घटना हुयी जिसने उनके जीवन को बदलकर रख दिया | 60 के दशक में टीवी सेट कुछ ही घरो में हुआ करते थे | ऐसा मान सकते है कि 100 घरो में एक घर में टीवी हुआ करती थे | रजत जी के पडौसी के पास टीवी हुआ करती थी जहा पर सारा मोहल्ला टीवी देखने के लिए इक्ठटा हो जाता था | उस समय दूरदर्शन पर फिल्मे दो कड़ीयो में आती थी शनिवार को पहला भाग और रविवार को दूसरा भाग आता था  | एक दिन की बात है जब वो आठ साल के थे तब मनोज कुमार की “शहीद” फिल्म का पहला भाग उन्होंने अपने पडौसी के यहा देखा और दुसरे दिन जब फिल्म का दूसरा भाग देखने गये तब उनके पडौसी ने उन्हें अंदर नही आने दिया |

अब रजत जी रोते हुए अपने घर आये क्योंकि वो फिल्म का आधा भाग नही देख पाए थे और उनके दिमाग में फिल्म के दुसरे भाग की बाते घूम रही थी | जब वो घर लौटे तो उनके पिताजी ने उनके रोने का कारण पूछा तोरजत जी ने बताया “पिताजी मै फिल्म देखने गया , आधी फिल्म कल देख ली थी और आज जब फिल्म का बाकी आधा भाग देखने गये तो उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया “|  उस समय उनके पिताजी ने जो बात कही वो उनके दिल को छु गयी , उनके पिताजी ने कहा “बेटा , तुम किसी दुसरे को देखने के लिए तीसरे के घर में टीवी देखने जाते हो अगर दम है तो तुम कुछ ऐसा करके दिखाओ कि जिससे तुम्हे टीवी देखने की जरूरत न पड़े बल्कि टीवी पर तुम्हे लोग देखे ” |

इसके बाद उन्होंने इस बात को अपने जीवन का उद्देश्य बना दिया और पढ़ाई में लगे रहे | उनके जीवन में पहला मौका तब आया जब उन्होंने M Com पुरी कर ली | M Com पुरी करने के बाद वो समर जॉब की तलाश में घूम रहे थे तभी उनकी मुलाकात जनार्धन ठाकुर से हुयी जिन्होंने उस दौरान आनन्दबाजार पत्रिका छोडी ही थी | आनदं बाजार पत्रिका को आप अच्छी तरह जानते होंगे जो मीडिया में आज बहुत बड़ी कंपनी बनकर उभरा है जिसे हम ABP के नाम से जानते है जिनका न्यूज़ चैनल वर्तमान में चल रहा है |

जनार्धन ठाकुर उस समय एक नये सिंडिकेटेड कॉलम को शुरू करने की तैयारी कर रहे थे | उन्होंने रजत जी को Researcher के रूप में काम पर रख लिया | करीब तीन महीने तक उन्होंने अपनी गर्मियों की छुट्टियों में उनके साथ काम किया | 1982 में जब एक बार जब उन्होंने अपनी रिसर्च का इस्तेमाल करने की आज्ञा माँगी तब उन्होंने Onlooker magazine में अपनी पहली कहानी लिखी थी | जिसके लिए उनको 300 रूपये मिले थे जो उस समय के लिए बहुत मायने रखते थे | उस समय वो एक जगह जॉब भी कर रहे थे और उनको 400 रूपये महीना मिलता था | जब उनको एक कहानी के ही 300 रूपये मिले तो उनका रुझान मैगज़ीन में काम करने की तरफ चला गया |

इसके बाद रजत जी ने Onlooker magazine में trainee reporter के रूप में काम करना शुरू कर दिया | 1984 में उनको ब्यूरो का प्रमुख बना दिया गया और उसके बाद उनको 1985 में एडिटर बना दिया गया | इसके बाद रजत जी को मुंबई बुलाया गया जिस समय उनके पास journalism में केवल तीन साल का अनुभव था | जब वहा पर दिग्गज अफसरों ने 28 साल के रजत शर्मा को एडिटर के रूप में देखा तो लोगो ने उन्हें अपनाने से मना कर दियालेकिन बाद में उनके काम को देखकर वो उनसे खुश हुए | उन्होंने उस समय एक दुसरी पत्रिका के साथ मिलकर चंद्रास्वामी पर स्टिंग ऑपरेशन भी किया था |  तीन साल बाद वो एडिटर के रूप में Sunday Observer में काम करने लगे और उसके बाद  The Daily में फिर उन्हें एडिटर का काम मिला |

Rajat Sharma  रजत जी के जीवन में दूसरा महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब दस साल बाद 1992 में फ्लाइट के सफर में उनकी मुलाकात सुभाष चन्द्र से हुयी | सुभाष जी ने उस समय जी टीवी की शुरुवात की ही थी | जी टीवी भारत का पहला प्राइवेट एंटरटेनमेंट हिंदी चैनल है उससे पहले टीवी में दूरदर्शन के अलावा कोई चैनल नही था | सुभाष की एक दिलचस्प इंटरव्यू कार्यक्रम की तलाश में थे जिसमे वो सेलिब्रिटीज को बुलाकर उनसे सवालात करे | रजत जी उस फ्लाइट में उनको आप की आदालत का रफ़ आईडिया दिया था | इसके बाद कुछ समय तक उनसे मुलाक़ात नही हुयी थी |

कुछ दिनों बाद सुभाष जी ने Rajat Sharma रजत जी को अपने ऑफिस में बुलाया और कहा “मै तुमको अपने शो का होस्ट बनाना चाहता हु ” | रजत जी को बिलकुल भी विश्वास नही हुआ क्योंकि इससे पहले टीवी पर आने के बारे में उन्होंने सपने में भी नही सोचा था | उनको उस समय लगा कि उनके पिताजी द्वारा कही बात अब सच होने जा रही है | Rajat Sharma रजत जी तुरंत राजी हो गये और 12 फरवरी 1993 को आप की अदालत का पहला शो रिकॉर्ड हुआ था | अब इससे पहले Rajat Sharma रजत जी ने कभी टीवी पर कोई प्रोग्राम नही किया था तो वो इसके लिए रिसर्च काफी कर रहे थे | अब ये तय किया गया कि सुबह 10 बजे से 12 बजे तक रिहर्सल करेंगे और 12:30 बजे पहला प्रोग्राम खुशवंत सिंह के साथ रिकॉर्ड होना था और उसी दिन दूसरा प्रोग्राम लालू यादव का करना तय किया गया था |

अब उस दिन जब सब तैयारी हो गयी थी तब सुबह 11 बजे लालू यादव का फ़ोन आया कि “शाम को कुछ काम के कारण हम नही आ सकते है इसलिए यदि अभी समय हो तो इंटरव्यू ले लो “| अब रजत जी घबरा गये क्योंकि उस समय तक उन्होंने ज्यादा तैयारी भी नही की थी | उस समय लालू यादव बड़े नेता थे और वो इस इंटरव्यू को मिस नही करना चाहते थे इसलिए रजत जी ने लालू यादव को आने को बोल दिया | अब लालू यादव आ गये लेकिन रजत की इतनी तैयारी नही हो पायी थी इस कारण घबरा रहे थे | अब जब इंटरव्यू शुरू होने लगा तब लालू यादव ने रोकते हुए कहा कि “नया शो है नारियल तो फोड़ो ” | तब कही से नारियल लाया गया और स्टेज के बीच में लालू यादव ने नारियल फोड़ दिया जिससे पानी फर्श पर बिखर गया तब उसे साफ़ करने में तोडा ओर समय लग गया |

इसके बाद इंटरव्यू शुरू हुआ और सवाल जवाब के बीच पहली रेकॉर्डींग पुरी हो गयी | इंटरव्यू खत्म होने पर रजत जी को चैन की साँस आयी | इसके बाद एक से बढकर एक नेता और कलाकार आप की अदालत में आये जिनको रजत जी ने पसीने ला दिए थे | इस शो की बदौलत आज रजत जी मीडिया की दुनिया में शीर्ष पर पहुच गये | इसके बाद उन्होंने सुभाष जी से बात कर न्यूज़ चैनल शुरू करने की बात की | 1995 में Rajat Sharma रजत जी ने पहला प्राइवेट बुलेटिन जी न्यूज़ पर चालु किया |

इसके बाद Rajat Sharma के जीवन का तीसरा मोड़ तब आया जब उन्होंने अपने खुद का न्यूज़ चैनल शुरू करने का विचार बनाया जिसको उन्होंने देश के नाम पर इंडिया टीवी रखकर 2004 में लांच किया | इंडिया टीवी शुरूवाट में केवल सीरियस खबरे दिखाता था जिसमे महिला कल्याण या पशु कल्याण जैसे मुद्दे हुआ करते थे | अब उन्होंने इंडिया टीवी न्यूज़ चैनल की शुरुवात तो कर दी लेकिन शुरवात के दो सालो में ही उनके पास पैसो की कमी होने लग गयी थी | उस समय उन्होंने अपनी सारी प्रॉपर्टी बेचकर लोगो की त्नखाव्ह निकाली थी | इसके बाद उनके पास दो विकल्प रह गये थे कि या तो हार मानकर इस चैनल को बंद कर दे या कुछ बदलाव करे |

2008 में उन्होंने अपने न्यूज़ चैनल में बदलाव करना शुरू किया और गम्भीर मुद्दों के अलावा लोकप्रिय खबरे भी दिखाना शुरू कर दिया | अब धीर धीरे चैनल की लोकप्रियता बढ़ने लगी थी और आठ महीनों में वो देश का दूसरा सबसे बड़ा न्यूज़ चैनल बन गया | अब उनके पास पैसो की भी कोई कमी नही रही | जब 2009 में इंडिया टीवी शिखर पर पहुच गया तब उन्होंने फिर गम्भीर मुद्दों पर न्यूज़ देना शुरू कर दिया जिसे लोगो ने अपना लिया | Rajat Sharma रजत जी ने जी टीवी से अपने नाटक आप की अदालत को इंडिया टीवी पर शिफ्ट कर लिया जो हर शनिवार को रात 10 बजे प्रसारित होता है जिसमे देश की जानी मानी हस्तिया आती है | 2015 में रजत शर्मा Rajat Sharma  को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया |

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