कैसे हुई डाक टिकटों की शुरुवात Postage stamps History in Hindi

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Postage stamps History in Hindi

Postage stamps History in Hindiहालंकि आज हवाई सेवाओं से जुडी तेज कोरियर सेवाओ का जाल फैला है और डाक व्यवस्था का दुनिया भर में विशाल नेटवर्क हैमगर आज की सारी डाक तार व्यवस्था के पीछे इसके विकास की एतेहासिक यात्रा है | डाक टिकिटो का इतिहास करीब 175 साल पुराना है | दरअसल Postage stamps डाक टिकिटो और उससे जुडी व्यवस्था की औपचारिक शुरुवात सन 1840 में ब्रिटेन में हुयी थी लेकिन क्या आप जानते है कि Postage stamps डाक टिकिटो की शुरुवात कब ,क्यों और कैसे हुयी ?

Postage stamps डाक टिकिटो की विधिवत शुरुवात  6 मई 1840 को हुयी थी | तब एक पैनी मूल्य का पहला डाक टिकिट जारी किया गया था जिसे “Black Penny” के नाम से जाना गया क्योंकि यह डाक टिकिट काली स्याही से छापा गया था | इस डाक टिकिट के अस्तित्व में आने से पूर्व डाक टिकिटो के स्थान पर “ठप्पा टिकिटो ” का प्रयोग होता था जो आयताकार ,गोलाकार ,त्रिकोनाकर अथवा अंडाकार होते थे और इन ठप्पों पर “पोस्टपेड” अथवा “पोस्ट नॉन पेड़ ” इत्यादि लिखा होता था |

प्राचीनकाल में डाक सेवा का उपयोग राजा महाराजा अथवा शाही घरानों के लोग ही करते थे | और उसे वक्त पत्र अथवा संदेश लाने ले जाने का काम उनके विशेष संदेश वाहक अथवा दूत या कबूतर अथवा अन्य पशु-पक्षी की करते थे जिन्हें बकायदा इस काम के लिए प्रशिक्षित किया जाता था लेकिन बाद में जब आम लोगो को भी इसकी जरूरत महसूस होने लगी तब यह तय किया गया कि पत्रों की आवाजाही के शुल्क का भुगतान या तो पत्र प्रेषक करेगा या प्राप्तकर्ता से शुल्क लिया जाएगा मगर अक्सर यह होने लगा कि प्रेषक पत्रों को अग्रिम भुगतान किये बिना ही भेज देता औत तब तब प्रेषक भी शुल्क के भुगतान से बचने के लिए उस लेने से इंकार कर देता | इससे सरकार को बहुत आर्थिक हानि झेलनी पड़ी पडती थी |

सरकार को डाक व्यवस्था की खामीयो के कर्ण लगातार होते आर्थिक नुकसान में मद्देनजर ब्रिटिश सरकार को प्रसिद्ध आर्थिक सलाहकार रोलेंड हिल ने सलाह दी कि वह डाक व्यवस्था में मौजूद दोषों या खामियों को दूर करने के लिए इसमें जरुरी संशोधन करे और डाक शुल्क के अग्रिम भुगतान के रूप में डाक टिकिट तथा शुल्क अंकित लिफाफे जारी करे ताकि इनके जरिये अग्रिम डाक शुल्क प्राप्त हो जाने पर सरकार को घाटा न झेलना पड़े |

आख़िरकार काफी जद्दोजहद के बाद ब्रिटिश सरकार ने उनका सुझाव स्वीकार कर लिया और तब तक चले आ रहे ठप्पा टिकिटो के बजाय डाक टिकिटे जारी करने का फैसला किया गया और इस तरह 10 जनवरी 1840 को डाक टिकिट का अविष्कार हो गया जो एक पैनी मूल्य का था लेकिन इसको विधिवत 6 मई 1840 को ही जारी किया गया | इस तरह यह विश्व का पहला डाक टिकिट बन गया |

आधा औंस वजन तक के पत्रों के लिए डाक टिकिट का मूल्य एक पैनी और एक औंस वजन के लिए दो पैनी निर्धारित किया गया | इसके अलावा जो लोग निजी लिफाफों या रैपरो के बजाय डाक विभाग द्वारा मुद्रित सामग्री का ही प्रयोग करना चाहते थे , उनके लिए एक पैनी एवं दो पैनी मूल्य के लिफाफे जारी किए | इसके करीब तीन वर्ष बाद दुनिया के अन्य देशो में भी डाक टिकिटो का प्रचलन शुरू हो गया था | ब्राजील में 1843 में ,अमेरिका में 1847 में , बेल्जियम में 1849 में और भारत में 1854 में पहली बार डाक टिकिट जारी किये गये |

भारत में Postage stamps डाक टिकिटो की शुरुवात ब्रिटिश शाषनकाल में सन 1852 में हुयी थी | उस समय जारी किये गये टिकिट सिर्फ सिंध प्रान्त में ही चल सकते थे | आधा आना मूल्य के ये टिकिट लाल रंग के चमड़े पर तैयार किये गये थे लेकिन चमड़े पर होने के कारण ये बहुत जल्दी टूट जाते थे इसलिए कुछ समय बाद इन्हें चमड़े के बजाय सफेद रंग के कागज पर गोल आकार में उभारा गया किन्तु टिकिटो का रंग सफेद होने के कारण डाककर्मियों को इन्हें रात को देखने में परेशानी होती थी इसलिए टिकिटो को सफेद कागज पर नीली स्याही से छापा गया |

अप्रैल 1854 में यह टिकिट जारी होने से पहले ही अखिल भारतीय स्तर पर टिकिट जारी हो गयी ,जिन पर महारानी विक्टोरिया का चित्र छापा गया था | ये टिकिट आधा ,एक ,दो और चार आने मूल्य की सीरीज में जारी किये गये थे | इस तरह कहा जा सकता है कि भारत में डाक टिकिटो की शुरुवात 1854 में हुयी क्योंकि देश में अखिल भारतीय स्तर पे इसी वर्ष टिकिट जारी हुए थे | उस समय डाक टिकिटो के पीछे ना तो गोंद लगा होता था और ना ही छिद्र्ण प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता था | इन टिकिटो का प्रकाशन तब कलकत्ता के सर्वेयर जनरल के कार्यालय में होता था |

आज आपको लगभग हर देश के अपने अपने डाक टिकिटो की बेहतरीन श्रुंखला मिल जायेगी | कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे ,जिन पर डाक टिकिटो का संग्रह करने का ऐसा जूनून सवार रहता ही कि उनके पास शुरू से लेकर अब तक के अधिकांश डाक टिकिट मिल जायेंगे | डाक टिकिटो के ऐसे शौकीनों की दुनिया भर में कोई कमी नही है |आमेरिका के जेम्स रुक्विन नामक व्यक्ति के पास तो विश्व के प्रथम डाक टिकिट से लेकर अब तक के लगभग तमाम दुर्लभ डाक टिकिटो का संग्रह है उनके संग्रह में 35,000 से अधिक डाक टिकिट शामिल है |  डाक टिकिट जितना पुराना और दुर्लभ होता है उसकी कीमत भी उतनी ही बढ़ जाती है और Postage stamps डाक टिकिटो का संग्रह करने के शौक़ीन कुछ व्यक्ति तो उसे हासिल करने के लिए मुहमांगी कीमत देने को भी तैयार रहते है |

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