प्रकाश सिंह बादल , पंजाब राजनीती के स्तम्भ और भारत के सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री | Parkash Singh Badal Biography in Hindi

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पंजाब में अब तक पांच बार मुख्यमंत्री बनकर अकाली दल सुप्रीमो एवं भारतीय राजनीती में प्रौढ़ राजनीतिज्ञ प्रकाश सिंह बादल ने यह सिद्ध कर दिया है कि सिख भाईचारे में शेर-ए-पंजाब के रूप में जाने जाते सफल शासक तथा प्रशासक ,दूर दृष्टा एवं कुशल स्टेट्समेन के रुप में स्थापित हुए है | पंजाब में शिरोमणि अकाली दल एक ताकतवर राजनितिक पार्टी के रूप में स्थापित है | इसका लम्बे समय तक नेतृत्व करना कोई खाला जी का बाड़ा नही है लेकिन मास्टर तारा सिंह के बाद और विशेष रूप से इस दल के सत्तावादी होने के बाद इस सशक्त दल की लगाम को अपने हाथो में रखने में प्रकाश सिंह बादल सफल रहे |

प्रकाश सिंह बादल पार्टी में ताकतवर ,बड़ी कुरबानिया ,लोकप्रियता ,शकुनी चालो के लिए मशहूर तथा उग्र विचारधारा के लोगो को साथ लेकर चलने में सफल रहे | पार्टी पर लगातार पकड़ बनाये रखने के लिए प्रकाश सिंह बादल अपने नजदीकी रिश्तेदारों को भी साथ रखने में सफल रहे | राजनितिक शासको तथा नेताओ का राजनितिक पारते , प्रशासन तथा समाज में विरोध होना स्वाभाविक है | हर कोई सत्ता की सीढ़ी के शिखर के पायदान पे शुभाय्मान होक इसकी प्राप्ति हेतु राजनीति में कदम रखता है | विरोधी पैर पैर अडचने पैदा करते है |

जस्टिस गुरनाम सिंह ,सुरजीत सिंह बरनाला ,बेअंत सिंह तथा कैप्टेन अमरेन्द्र सिंह जैसे मुख्यमंत्रीयो की असफलता का कारण उनका राजनीतिक विरोध ही बना लेकिन बादल ने अपने कट्टर विरोधियो तथा ताकतवर अकाली नेताओं को गहरी राजनितिक चालो से नियंत्रित करके रखा | आइये आज उनके जन्मदिवस पर उनके जीवन के बारे में आपको बताते है |

गाँव से शुरू किया राजनितिक करियर

8 दिसम्बर 1927 को जन्मे प्रकाश सिंह बादल ने ऍफ़.सी.कॉलेज से ग्रेजुएशन करके अपना राजनीतिक करियर गाँव बादल की सरपंची तथा ब्लाक की चेयरमैनी से शुरू किया | 1957 में वह विधायक बने | 1970 में वह पहली बार मुख्यमंत्री बने | पंजाब की सत्ता से कांग्रेस के एकाधिकार को खत्म करने और शिरोमणि अकाली दल को सत्ताधारी पार्टी स्थापित करने के लिए उन्होंने कुछ एतेहासिक पोपूलिस्ट एवं व्यवहारिक और दूरदर्शी पग उठाये | पंजाब की आर्थिकता एवं रीढ़ की हड्डी किसानी के लिए फोकल पॉइंट ,ग्रामीण पंजाब को जोड़ने के लिए पक्की लिंक सदके ,पुलों का निर्माण किया ,खेती सम्बधी ट्यूबवेलो की बिजली माफ़ की जिसका बिल आज बढकर 6000 करोड़ सालाना हो चूका है |

दलितों को अपने कामो से अकाली दल से जोड़ा

पंजाब में देश के सबसे ज्यादा 31 प्रतिशत दलित बसते है | देश की आजादी के बाद SC ,ST आरक्षण के कारण यह वर्ग कांग्रेस पार्टी का पक्का वोट बैंक चला आ रहा था लेकिन बादल ने इस वर्ग तथा अन्य गरीबो को आटा-दाल सस्ता देने ,सगुन स्कीम और 200 यूनिट प्रति परिवार बिजली फ्री देकर उन्हें अकाली दल से जोड़ा | ऐसे ही इसाई बिरादरी को जोड़ा | इसका प्रमाण 2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव के अकाली दल ने राज्य की 34 आरक्षित सीटो में से 21 सीटें जीती थी |

पंजाब में हिन्दू-सिख एकता की थी स्थापित

बादल ने हिन्दू सिख एकता के स्थापित नेता है | इसका मुख्य आधार उनके द्वारा अकाली-भाजपा गठबंधन को बनाये रखना है | यह बादल का सामाजिक तथा राजनितिक करिश्मा माना जाता है | नवम्बर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी की उकसाहट से हिन्दू पुलिस तथा बिरादरी ने दिल्ली तथा अन्य स्थानों पर देश के सिखों का कत्लेआम किया | यहा तक कि सिख फ़ौजी भी नही बख्शे गये लेकिन 10-12 वर्ष तक आतकंवादी त्रासदी के बावजूद पंजाब में हिन्दुओ और सिखों का एक भी दंगा नही भड़का |

शहीदों की यादो में बनवाई इमारते

सिख कौम के इतिहास में बादल का नाम धार्मिक तथा एतेहासिक यादगारों के साथ साथ सर्वधर्म तथा शहीद यादगारों के निर्माण कारण सदैव याद किया जाएगा | विरासत-ए-खालसा आनंदपुर साहिब ,चपड़चिड़ी बड़ा नरसंहार , काहनूवान छोटा नरसंहार , शहीद यादगार करतारपुर साहब ,निशाने खालसा मुक्तसर ,हरमिंदर साहिब तथा मार्गो का सौंदर्यीकरण  ,श्री रामतीर्थ मन्दिर ,भगत श्री रविदास मन्दिर  ,भगत नामदेव आदि यादगारे वर्णनयोग्य है |

देश के कई प्रधानमंत्रीयो से थे अच्छे ताल्लुकात

बादल की केमिस्ट्री प्रधानमंत्री श्री इंद्र कुमार गुजराल तथा श्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने कारण , प्रधानमंत्री डा,मनमोहन सिंह के दिलम में उनके प्रति आदर सत्कार होने के कारण 10-12 साल की आतकंवादी त्रासदी की आर्थिक ,सामजिक ,राजनितिक तौर पर छलनी पंजाब को जिन्दा रखने के लिए उन्होंने अहम भूमिका अदा की | वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार बादल की देश के सम्मानित व्यक्तित्व की यह विशेषता रही है कि 1970 में पहली बार वह मुख्यमंत्री बने तो वह देश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री थे | आज जब वह मुख्यमंत्री की अपनी 5वी पारी पुरी करने जा रहे है तो वह देश के सबसे बड़ी उम्र के मुख्यमंत्री माने जाते है |

सगत दर्शन की वजह से बने लोकनायक

भारत ही नही पुरे विव्ह में लोकतान्त्रिक व्यवस्था को अपने “सगत दर्शन” प्रोग्राम के कारण विलक्षण लोकनायक स्थापित हुए है | वह सर्दी ,गर्मी ,बारिश या कडकती धुप में पंजाब के गाँवों ,शहरों ,गलियों ,मोहल्लो ,खेत खलिहानों ,सरहद की कंटीली तार के पास तथा लोक अदालत में शामिल होते है | लोगो की समस्याओ का मौका पर निवारण करते है तथा विकास कार्यो के लिए चैको की झड़ी लगाते है |

कुछ मसलो से दागित होर ही है छवि

बादल की मुख्यमंत्री की इस पांचवी पारे में उनके सत्ता की बागडोर उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को सौंपने तथा आगे इस सत्ता के एकाधिकारवादी उपयोग उनकी पत्नी तथा भाई कैबिनेट मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया द्वारा करने के कारण राज्य में बजरी ,रेत ,केबल ,ट्रांसपोर्ट , नशीले पदार्थो विशेष तौर पर चिट्ठे के गली गली में व्यापार ,बेरोजगारों ,र्क्म्चारियो , किसानो के दिन प्रतिदिन धरनों ,पुलिस द्वारा गैर कानूनी दमनकारी मारपीट  , पंजाब की झर्झर हो रही वित्तीय व्यवस्था ,साधुओ और गैंगस्तरों की भिंडत  ,श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी आदि मसलो के कारण उनकी प्रतिष्ठा दागदार हुयी है |

पंजाब राजनितिक के स्तम्भ पुरुष

वास्तव में यह भारतीय परिवारवादी राजनीति का परिणाम है | बिहार में लालू यादव ,तमिलनाडु में करूणानिधि , महाराष्ट्र में दिवंगत बाला साहब ठाकरे ,उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव आदि परिवारों में राजनितिक उठापठक देखने को मिलती रही है | बादल देश के फैडरल ढाँचे ,राज्यों के वित्तीय एवं प्रशासनीय स्वशासन ,पंजाब एवं सिखों के पंथक हितो के समर्थक रहे है | इनकी रक्षा के लिए वह 17 वर्ष जेल भी रह चुके है | उनकी पन्थ के प्रति बड़ी सेवाओं के दृष्टिगत उन्हें “फख-ए-कौम” उपाधि से नवाजा गया | उन जैसा उदारवादी जननायक का आज के परिपेक्ष्य में मिलना बहुत मुश्किल है ||

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