90 के दशक के यादगार लम्हे-प्रथम भाग Only 90s Kids Will Remember-Part 1

मित्रो आज मै आपको अपनी पुरानी यादो में लेकर जाना चाहता हु | मित्रो मेरा जन्म 80 के दशक के अंत में हुआ था और मुझे 90 का दशक अच्छी तरह याद है और उन्ही यादगार लम्हों का एक लेख आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हु | मित्रो मै आपको सबसे पहले मनोरंजन के साधनों से रूबरू करवाना चाहता हु | मेरे जन्म के लगभग 4 वर्ष बाद हमारे घर में टीवी आता था उससे पहले हमारे मोहल्ले के 20 घरो में से एक परिवार के घर में ब्लैक एंड वाइट टीवी हुआ करती थी | मुझे पूरा याद नही है लेकिन मुझे मेरे पिताजी बताया करते थे कि टीवी पर दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली रामायण और महाभारत को वो उसी पडौसी के घर पर इकट्ठा होकर देखा करते थे |

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90s Television Kids Memories Indiaजिस परिवार के पास टीवी था वो पिताजी की कंपनी में एक बड़े पद पर कार्यरत था | वो हर रविवार को एक छोटी सी ब्लैक एंड वाइट टीवी अपने घर के आंगन में रख दिया करते थे और फिर लोगो का जमावड़ा शुरू हो जाता था | लगभग 50 से भी ज्यादा लोग एक छोटे से आंगन में घुस घुस कर टीवी देखा करते थे और रविवार के पुरे दिन रामायण की घटनाओ पर चर्चा हुआ करती थी | जब टीवी का प्रचलन ज्यादा हुआ तब हमारे परिवार ने भी टीवी लाने का विचार किया लेकिन उस वक़्त परिवार का खर्चा चलाना टीवी से ज्यादा महत्वपूर्ण था |

मै ये तो नही कह सकता था कि मै गरीब था लेकिन मेरे पिताजी इन संसाधनो के बजाय हमारी पढाई के खर्चे पर ज्यादा ध्यान देते और बाकि बचत किया करते थे | उन्ही की बदौलत मेरे भाई-बहन आज उच्च कंपनियों में कार्यरत है | मै थोडा निट्ठला हु मुझे ब्लॉग्गिंग का शोक लग गया और MCA करने के बाद इस दिशा में आ गया | तो मै बात कर रहा था |मेरे पिताजी की कम्पनी बहुत बड़ी थी और हर वर्ष एक यात्रा का आयोजन किया करती थी | 90 के दशक की शुरवात में हमारा परिवार कंपनी की तरफ से नेपाल की यात्रा पर गया | मैंने पहली बार घर से बाहर उस समय किसी यात्रा का आनंद लिया था |

जब नेपाल की यात्रा पर गये तब वहा के एक बाजार से हमने पहला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कैसेट प्लेयर लिया था जिसमे रेडियो भी चल सकता था | मै बहुत खुश था कि चलो कोई तो मनोरंजन का उपकरण आया | अब बारी आयी कैसेट्स की तो हमारे पास शुरवात में लगभग 5-6 कैसेट हुआ करती थी | मुझे याद है कि एक कैसेट तो मेरे पिताजी ने भगवान के गानों की भरवाई थी , उस समय खाली कैसेट में अपने पसंदीदा गाने भरवाने का प्रचलन था | इसके अलावा हमारे पास हिंदी पॉप गानों की एक कैसेट थी जिसमे अलीशा चिनाय , बाबा सहगल , लकी अली आदि गायकों के गाने हुआ करते थे |

90s Cassette and Players Indiaइन कैसेट्स के अलावा फिल्मो में प्यार किया तो डरना क्या ,  संजय कपूर की फिल्म प्रेम और एक दलेर मेहंदी के गानों की कैसेट हुआ करती थी | अगर आपने कैसेट्स का उपयोग किया हो तो उसको प्लेयर में दोनों तरफ से घुमाकर चलाना पड़ता था | कई बार प्लेयर में रील फंस जाती थी जिसको पेन से घुमाकर सही किया जाता था | अगर कोई कैसेट खराब हो गयी तो उसकी रील को निकलकर खेलने निकल पड़ते | रेडियो पर 3-4 चैनल चला करते थे जिसमे आकशवाणी को सबसे ज्यादा सुना करते थे | इस तरह टेप-रेडियो का तो आनन्द ले लिया था |

एक दिन मेरे पिताजी अचानक घर में ब्लैक एंड वाइट टीवी लेकर आ गये और हमारी खुशी की सीमा नही रही थी | अब टीवी के शुरुवात के कुछ महीनों तक अन्टीना का प्रयोग करते थे जिसे छत पर लगा दिया जाता था | बरसात के मौसम में इस एंटीने में काफी तकलीफे आती थी लेकिन जैसे तैसे टीवी देखा करते थे | एंटीने से उस वक़्त केवल दूरदर्शन आया करता था जिसका आनन्द लिया करते थे | एक दिन पिताजी की कम्पनी सभी कर्मचारियों के घर पर केबल लगा कर गयी | अब दूरदर्शन के अलावा जी टीवी , स्टार प्लस जैसे चैनल भी आने लगे थे | हमारी टीवी में दो बटन हुआ करते थे एक बटन चालु बंद करने के लिए और दूसरा टीवी को काला या कम काला करने के लिए हुआ करता था |

उस समय हमारी टीवी पर एक डायल हुआ करता था जिसमें केवल 12 चैनल हुआ करते थे जिसमे से केवल छ ही प्रयोग हुआ करते थे | उस समय केबल पर हर सोमवार को एक नई फिल्म का प्रसारण किया जाता था जिसका हम बेसब्री से इंतजार करते थे | दूरदर्शन के नाटको के बारे में मैंने पिछले लेखो में विस्तार से बता रखा है | अब टीवी के बाद बात आती है टेलीफोन की | हमारे घर में टेलीफोन आने से पहले हमारे घर से पांच मिनट की दूरी पर एक घर में टेलीफोन हुआ करता था और केवल इमरजेंसी सूचनाओ के लिए उस टेलीफोन पर बात होती थी |

Old India Postcard Rareमैंने चिट्टियो का प्रचलन भी देखा हुआ है जब हमारे घर में हमारे गाँव से दादाजी की चिट्टिया आया करती थी | दादाजी मेरे चाचा को बोलकर चिट्टिया भेजा करते थे | उनकी शुरवात के कुछ शब्द मुझे आज भी याद है “हम सब यहा राजी खुशी है ,भगवान की दया से आप भी राजी खुशी होंगे , आगे समाचार यह है कि ” इस तरह उस पिली चिट्टी के एक तरफ समाचार और दुसरी तरफ आधे पेज पर समाचार और बाकि बचे और पता लिखा जाता था | टेलीग्राम के बारे में ज्यादा पता नही है लेकिन एक बार मेरी दादी के बीमार होने पर टेलीग्राम आया था जिसे डाकिया एक चोटी सी चिट्टी पर संदेश लिख कर लाया था | मेरे पिताजी कभी कभी मनी आर्डर भी भेजा करते थे और मै उनके साथ पोस्ट ऑफिस जाया करता था |

 

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