उत्साह और उमंग का महापर्व है ओणम | Onam Significance and Story in Hindi

Onam Significance and Story in Hindi

पर्व हमारे जीवन में उर्जा .उमंग और खुशहाली लेकर आते है जैसे तमिलनाडू में पोंगल ,असम में बीहू , पंजाब में लोहड़ी आदि पर्व जिस उत्साह से मनाया जाता है उसी भव्यता और उत्साह के साथ केरल में ओणम उत्सव मनाया जाता है | इस वर्ष ओणम उत्सव 14 सितम्बर यानि आज से शुरू हो चूका है | यह पर्व केरल में सबसे ज्यादा धूमधाम और  प्रमुखता से मनाया जाता है |

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इस पर्व के दौरान केरल की संस्कृति की झलक आपको देखने को मिलती है | इसी कारण यह पर्व 1961 से केरल में राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाता है इस पर्व की ख्याति अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़ैल चुकी है | यह पर्व मलयाली कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है | यह 10 दिनों तक चलने वाला पर्व होता है |

हर घर में बनती है रंगोली | Rangoli on Onam Festival

onam-rangoliमलयालम भाषा में पुव का अर्थ फुल और कोलम का मतलब जमीन पर बने रंगीन चित्र होता है | पुकल्ल्म फूलो से बनी रंगोली है | ओणम के दौरान लोग आंगन में सुंदर पुकल्ल्म बनाते है | इस रंगोली को बनाने में ढेर सारे फूलो एवं पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है | इस रंगोली के बीचो बीच विष्णु भगवान या महाबली ई मूर्ति रखी जाती है | इसे बनाने में मुख्यतः गुढहल , रुग्मिनी आदि फूलो का इस्तेमाल होता है | इस दौरान कई प्रतियोगिताओ का भी आयोजन होता है और इसमे जीतने वाले पुरुस्कृत होते है |

सामूहिक भोज का आयोजन | Onam Feast

onam-sadhyaमलयालम भाषा में साध्य का मतलब भोज होता है | ओणम के उपलक्ष्य में जो साध्य बनता है वह पूर्णत: शाकाहारी होता है | साध्य में व्यंजनों की संख्या 11 से 64 तक हो सकती है | साध्य का मुख्य भोजन पका चावल होता है जो कई प्रकार की सब्जियों , दालो ,चटनी खीर के साथ परोसा जाता है | भोजन बनाने में चावल ,नारियल एवं उसके तेल का ज्यादा प्रयोग होता है | साध्य को केले के पत्ते में परोसा जाता है | इस दौरान लोग मिलजुलकर खाते है और दोस्ती प्रगाढ़ करते है | ओणम में आनन्द भरने के लिए लोग गीत भी गाते है |

इस दौरान नौकायन की परम्परा | Boat Race on Onam

onam-significance-and-story-in-hindiओणम में नौकायन की धूम रहते है | इसमें उपयोग होने वाले नौके साधारण नही बल्कि विशेष तरीके से तैयार किये जाते है उ=इन्हें अंजलि पेड़ या कदम्ब के लकड़ी से तैयार किये जाते है | इन नावो का एक भाग सांप के फन की तरह घुमा होता है इस कारण इन्हें स्नेक बोट भी कहा जाता है | इन नावो को हरी लाल छतरी से विशेष रूप से सजाया जाता है | ओणम पर्व के पांचवे दिन इस रेस का आयोजन होता है जब हजारो की संख्या में लोग नदी के तट पर इसका आनन्द लेते है | हर नौके पर 150 लोग सवारी करते है जिसमे 125 नाविक , 25 गायक और चार खेवनहार होते है |

ओणम के दौरान खेल | Games During Onam Festival

स्वादिष्ट साध्य के बाद लोग खेलना पसंद करते है जहा बच्चे बुजुर्ग कई तरह के खेल खेलते है वही नौजवान कायनकली एवं अट्टाकलम जैसे खेल खेलते है | कायनकली में प्रतियोगी एक दुसरे पर मुट्ठी से वार करते है अट्टाकलम में एक टीम गोल के अंदर रहकर बचाव करती है तो दुसरी उन्हें वहा से निकालने का प्रयास करती है | ये कुश्ती से मिलते जुलते खेल है | ओणम के दौरान तरह तरह के लोक नृत्य देखने को मिलते है उनमे से एक कुम्म्ती कली नृत्य है | नर्तक चेहरे पर लकड़ी के बने देवी देवताओ के मुखौटा पहन कर धार्मिक कथाओ पर नृत्य करते है |

इस त्यौहार के पीछे प्रसंग

बहुत समय पूर्व राक्षश सम्राट महाबली केरल के राजा हुआ करते थे | वे बड़े ही नेक और दयालु राजा था | इस कारण उनकी प्रजा सुखी सम्पन्न थी | महाबली में बस एक अवगुण थे कि वे घमंडी थे | उनके इस घमंड को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु वामन रूप में अवतरित हुए उन्होंने दान स्वरुप तीन पग हिस्से की मांग की | भगवान विष्णु एक पग में धरती , दुसरे में अम्बर अम्बर नाप लेते है |

गर्व टूटने पर महाबली वामन के तीसरे पग के लिए अपना सिर रख देते है | वामन के पाँव रखते ही वे पाताल पहुच जाते है लेकिन इसके पूर्व वह भगवान वामन से साल में एक दिन अपनी प्रजा से मिलने की आज्ञा मांगते है और साल के उस दिन से ही ओणम मनाया जाता है | केरल के लोग हर वर्ष अपने प्रिय राजा महाबली का इन्तजार करते है और उनके स्वर्णिम राज्य को याद कर खुशी मनाते है |

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