नवाजुदीन सिद्दकी के स्टार बनने की कहानी Nawazuddin Siddiqui Struggle Story

Nawazuddin Siddiqui Struggle Story

Nawazuddin Siddiqui Struggle Story

Nawazuddin Siddiqui नवाजुदीन सिद्दकी एक बहुत गरीब किसान परिवार के थे जो मुज्जफरपूरंगर जिले के बुरहांना गाँव में रहते थे | उनके सात भाई-बहन थे  | उनके गाँव में 12वी तक स्कूल थी और उन्हें आगे की पढाई के लिए शहर जाना था | अब शहर में उनके पास ग्रजुएट होने के अलावा कोई विकल्प नही था क्योंकि उनके परिवार में उनको कुछ नया कोर्स की सलाह देने वाला कोई नही था | अब उनको ये तो पता था कि केवल ग्रेजुएट होने से कोई नौकरी मिलने वाली नही है इसी कारण उनको काम की तलाश में दर दर भटकना पड़ा था | अब उनके पास गाँव से बाहर निकलने के अलावा कोई विकल्प भी नही था क्योंकि गाँव में खेती के अलावा कोई काम नही होता था |

Nawazuddin Siddiqui ने बचपन में कभी फिल्म नही देखी थी लेकिन वयस्क होने पर उनके दोस्त उन्हें फिल्म दिखाने ले जाया करते थे | उन्होंने पहली कोई फिल्म देखी थी तो उसका नाम दोस्ती था जो अंधे और लंगड़े दोस्तों की कहानी थी | फिल्म देखने के लिए उनको गाँव से 45 किमी दूर शहर में जाना पड़ता था | उनको गाँव में फिल्मे देखने नही देते थे क्योंकि वो फिल्मे देखना बुरा मानते थे | अब उनके गाँव में फिल्मे देखने वालो को आवारा समझा जाता था इसी कारण वो इस श्रेणी में नही आना चाहते थे |

उनको फिल्मो में केवल धर्मेन्द्र के अलावा किसी भी अभिनेता के बारे में पता नही था | उस समय जिस थिएटर में वो फिल्म देखने जाया करते थे वहा ज्यादातर सी ग्रेड की फिल्मे लगती थी और दोस्तों के कहने पर केवल ऐसी फिल्मे ही देखते थे | वैसे तो उनके गाँव में फिल्मो को बुरा मानते थे फिर भी त्योहारों के वक़्त उनको हर काम की छुट होती थी तो उनको गाँव का एक सब्जी वाला फिल्म दिखाने ले जाया करता था | वो सब्जी वाला नवाजुदीन के सभी दोस्तों से टिकिट का पैसा इकट्टा करता था और सबको साथ ले जाता था |

उन्होंने गाँव से शहर आने के बाद नौकरी की काफी तलाश की थी लेकिन उनकी किस्मत में नौकरी करना नही लिखा था | इसी कारण कई नौकरिया भी मिली और कई नौकरिया छोडनी भी पड़ी | उन्होंने बडौदा में एक केमिस्ट की दूकान पर भी काम किया था उसके बाद नौकरी की तलाश में दिल्ली चले गये थे | उनको दिल्ली में एक खिलौने बनाने वाली कंपनी में चौकीदार की नौकरी मिली | उन्होंने पढ़े लिखे होने के बावजूद किसी भी काम को छोटा नही समझा था लेकिन उनको पता था कि उनका अच्छा समय अभी नही आया है |

एक दिन दिल्ली में Nawazuddin Siddiqui के दोस्त उनको एक नाटक देखने के लिए लेकर गये | उस नाटक का नाम “उलझन” था जिसमे मनोज वाजपेयी भी कलाकार थे | ये उनके जीवन का पहला नाटक उन्होंने देखा था | अब 2-3 सालो के संघर्ष के पश्चात उस नाटक को देखने के बाद उनका रुझान फिल्मी दुनिया की ओर बढ़ा | इसके बाद उन्होंने कई नाटक देखना शुरू कर दिया |जिससे उनको लगा कि उनमे ऐसे नाटक करने की क्षमता है |

1993 में उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा ज्वाइन कर लिया था | नाटको में पहली बार उनको मुख्य कलाकारों के पीछे भीड़ में रोल दिया गया था |  अब उन्होंने थिएटर करने की ठान ली थी और उस समय मुंबई ना आने का फैसला किया था | 1996 में NSD से पास होने के बाद उन्होंने नुक्कड़ नाटक करना शूरु कर दिया था जिसमे किसी भी ब्रांड का विज्ञापन करते थे | उन्होंने 3-4 साल तक यही नूक्कड़ नाटक करके थोडा पैसा कमाना शुरू कर दिया था लेकिन उनके लिए इतनी कमाई पर्याप्त नही थी | अब उन्होंने सोचा कि ऐसी गरीबी में जीने के बजाय बम्बई में चलना बेहतर होगा |

अब उन्होंने बॉम्बे का रुख किया और बम्बई आ गये | अब उन्होंने वहा पर स्ट्रगल करना शुरू कर दिया था | वो कभी कभी निराश होकर वापस अपने गाँव लौटने की सोचते थे लेकिन फिर उनको विचार आता कि वापस गाँव जाकर तो खेती करनी पड़ेगी और गाँव के लोग अलग मजाक उड़ायेंगे | उन्होंने कई छोटे छोटे धारवाहिको में काम भी किया जिससे बम्बई में उनका खर्चा पानी चल जाता था |अब उनको एक कम बजट वाली फिल्म “बिंदिया मांगे बंदूक ” में काम मिला जिसमे उन्होंने रजा मुराद के पीछे छोटे मोटे डाकू का किरदार किया था | शुरवाती फिल्मो में उन्हें चोर या गरीब का रोल दिया जाता था और उनके डायरेक्टर कहते है “अरे ये गरीब दीखता है इसको गरीब का रोल दो “| उनको क्या पता था कि यही गरीब एक दिन बॉलीवुड में तहलका मचा देगा |

2004 उनके जीवन के संघर्ष का सबसे बुरा साल था जब Nawazuddin Siddiqui अपने मकान का किराया तक नही चुका पाए थे | इस कारण उन्होंने अपने NSD सीनियर के साथ रहने के लिए पुछना पड़ा | उनका सीनियर नवाज को साथ रखने को तो राजे हो गया लेकिन उसके बदले नवाज को उसके लिए खाना बनाना पड़ता था | Nawazuddin Siddiqui नवाज को बॉलीवुड में पहला रोल आमिर खान की फिल्म सरफरोश में मिला था जिसमे उन्होंने एक चोर का किरदार निभाया जिसके एक दृश्य में आमिर खान पूछताछ के दौरान खूब पीटते है | इसके बाद उनको मुन्नाभाई MBBS में एक छोटा रोल मिलता है जिसमे वो सुनील दत्त का बटुवा चुरा लेते थे | इस ददृश में भी उनको खूब मार पड़ती है |

Nawazuddin Siddiqui नवाज को पहला दमदार अभिनय अनुराग कश्यप की फिल्म “ब्लैक फ्राइडे ” में मिला जो 2007 में रिलीज़ हुयी थी | उनको पहला मुख्य रोल  पतंग फिल्म में मिला था जिसमे उन्होंने एक wedding singer का किरदार निभाया था इस फिल्म में उनके अभिनय की काफी सराहना की गयी | इसके बाद उनको Dev D फिल्म में एक cameo रोल मिला जिसमे वो “इमोशनल अत्याचार” गाना गाते हुए दिखाए जाते है | पहली बार उनको एक एक्टर के रूप में पहचान “पीपली लाइव” फिल्म में मिली जिसमे उन्होंने एक पत्रकार का किरदार निभाया था |

इसके बाद 2012 में उन्हें “कहानी” फिल्म में ऑफिसर खान का किरदार निभाने को मिला | इसके बाद अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ़ वासेपुर ने Nawazuddin Siddiqui रातो रात एक मेगास्टार बना दिया | इसके बाद 2013 में उन्होंने हॉरर फिल्म आत्मा में काम किया ओर फिर आमिर खान की फिल्म “तलाश” में काम किया | 2015 में उनके सितारे बुलंद हुए और उन्हें बजरंगी भाईजान और मांझी फिल्म में मुख्य किरदार निभाने का मौका मिला | उन्होंने अंजली से शादी की और उनके एक लड़की और एक लड़का है |  2016 और 2017 के लिए भी उन्होंने कई फिल्मे sign कर ली है | इस तरह Nawazuddin Siddiqui नवाजुदीन हिंदी सिनेमा के एक ऐसे अभिनेता बन गये जो इस समय संगर्ष के दौर में अर्श से फर्श पर पहुच गये |

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