गणितज्ञ युक्लिड , जिन्होंने ज्यामितीय की रचना कर गणित को बनाया आसान | Mathematician Euclid History in Hindi

mathematician-euclid-history-in-hindiयुक्लिड प्राचीन यूनान के गणितज्ञ थे जिनका ज्यामिति संबधी कार्य बहुत लम्बे समय तक लोकप्रिय रहा | युक्लिड का जन्म ईसा पूर्व 330 के आसपास हुआ | उनकी शिक्षा दीक्षा एथेंस में हुयी थी और बाद में वे मिस्त्र के लोकप्रिय शहर अलेक्जेंड्रिया में गणित पढाने लगे थे | उस काल में यह शहर शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था | उस काल में टॉलमी प्रथम का शासन था |

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अब तक अनेक गणित के विद्वान विशेष रूप से जामितीय के क्षेत्र में अपने अपने तरीको से कर चुके थे | युक्लिड ने इन सबकी रचनाओं का संग्रह एवं अध्ययन किया और फिर अपने तरीके से ज्यामितीय के अध्ययन की डिजाईन तैयार के | उस काल में ज्यामितीय अनेक कारणों से थी | जमीन के मापन में इसकी आवश्कता थी | भीषण बारिश के कारण नील नदी में बाढ़ आ जाती थी और जमीन मापन हेतु लगे निशान नष्ट हो जाते थे |

जब राज्य के आधिकारी कर वसूलते थे तो अनेक प्रकार की समस्याए खडी हो जाती थी | उस समय त्रिकोण बनाकर जमीन की यथासम्भव शुद्ध माप की जाती थी | धीरे धीरे ज्यामितीय को एक व्याहारिक विज्ञान मान लिया गया और इसका अनुप्रयोग दिशा-ज्ञान ,खगोलशास्त्र तथा पिरामिडो के निर्माण में होने लगा था | युक्लिड ने थेल्स ,पाइथोगोरस एवं मिस्त्रवासी विद्वानों के कार्य को एकत्रित किया और पुनर्गठित किया |

अब इसका ऐसा रूप हो गया कि नये विचार उसमे जुड़ सकते थे | धीरे धीरे प्रमेयो की संख्या बढती गयी | धीरे धीरे युक्लिड का कार्य इतना परिपक्व हो गया कि यांत्रिकी ,प्रकाश विज्ञान ,दिशा ज्ञान , जीव विज्ञान आयर चिकित्सा विज्ञान भी युक्लिड के कार्यो आधार पर होने लगे | युक्लिड की रचना “एलीमेंट्स” 13 खंडो में है और यह ज्यामीतीय की पाठ्य पुस्तक मानी जाती है |

प्राचीन यूनानी भाषा में लिखी यह पुस्तक पहले अरबी में अनुवाद की गयी और फिर लैटिन में | सन 1570 में इसका अंग्रेजी में अनुवाद हुआ | युक्लिड की रचना “एलीमेंट्स” के अलग अलग खंडो में अलग अलग विषय है | ये विषय अन्य विद्वानों द्वारा विकसित किये गये थे | उदारहण के तौर पर सातवे खंड में अंकगणित है जिसे ईसा पूर्व 400 विकसित किया गया था |एलीमेंट्स के अतिरिक्त भी युक्लिड की ज्यामितीय सम्बधी अन्य रचनाये है | इनमे से एक डाटा पर और दुसरी डिवीज़न पर है डिवीज़न में भाग देने के तरीके बतलाये गये है | इसके अरबी और लैटिन संस्करण मिले और सन 1915 में इसे मूल स्वरूप प्रदान किया गया |

इसके अलावा प्राचीन यूनानी ग्रंथो में चार ऐसी पुस्तको का वर्णन है जिन्हें युक्लिड का माना जाता है | इनमे से एक में छात्रों को दी जाने वाले चेतावनियों का वर्णन है जिन्हें ज्यामितीय के अध्ययन के समय उन्हें दिया जाता है | ये चेतावनिया ज्यामितीय की समस्याओ हो हल करने वाली हो सकने वाली भूलो से संबधित है | उसी कोनिक्स में शंकु एवं उसके परिच्छेदों का वर्णन है | अनुपलब्ध पुस्तको के बारे में अनुमान है कि ये उच्च स्तर की थी |

युक्लिड एक उच्च कोटि के गणितज्ञ थे यह तो दावे के साथ नही कहा जा सकता है पर यह अवश्य कहा जा सकता है कि वे उच्च कोटि के शिक्षक थे | उनकी रची हुयी पुस्तक 2000 से अधिक वर्ष तक ज्यामितीय की पाठ्य पुस्तक रही और आइन्स्टाइन जैसे विद्वान गणितज्ञ बचपन में ही इससे प्रभावित हो गये थे |19वी शताब्दी में युक्लिड की रचनाओ को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा और ज्यामितीय में अन्य पाठ्य पुस्तके तैयार हो गयी | तब तक युक्लिड की “एलीमेंट्स” बाइबिल के बाद श्रेष्टतम रचना मानी जाती रही | जन्म की तरह युक्लिड की मृत्यु के बारे में अनुमान ही लगाया जा सकता है | यह माना जाता है कि उनकी मृत्यु ईसा पूर्व 275 में हुयी थी |

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