मैराथन की कहानी और मैराथन से जुड़े रोचक तथ्य Marathon Story in Hindi

Marathon Story in Hindi

Marathon Story in Hindiमित्रो मैराथन Marathon के बारे में तो आपने काफी सुना होगा लेकिन मैराथन की शुरुवात कैसे हुयी इसके बारे में शायद आपको जानकारी नही होगी इसलिए आज हम आपको मैराथन से जुडी दिलचस्प कहानी आपके सामने लेकर आये है जिससे हमको Marathon मैराथन दौड़ के इतिहास के बारे में गहराई से जानने को मिलेगा |

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प्राचीन ओलम्पिक खेलो में मैराथन Marathon नही थी | सन 1896 ईस्वी में आधुनिक ओलम्पिक के प्रथम आयोजन स्थल एथेंस नगर से यह आरम्भ की गयी थी | 480 ईस्वी पूर्व यूनान के एथेंस नगर से 26 मील दूर मैराथन  के युद्ध क्षेत्र में दस हजार यूनानी सैनिक लगभग एक लाख पेर्सियन सैनिको से अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए झुझ रहे थे | यह निर्णायक युद्ध था और यूनानी योधाओ ने पर्शियनो को  परास्त कर खदेड़ दिया |

यूनानी सेना में प्रसिद्ध धावक फीड़ीपीड्स था | विजय का महान धावक अपने कवच टॉप उतार कर एथेंस की ओर दौड़ पड़ा |वह युद्ध से बेहद थका था फिर भी पहाड़ो ,जंगलो ,कंटीले झाडो वाले रास्ते को बिना कही रुके पार करता आगे भागता ही रहा | एथेंस नगर में जब उसने प्रवेश किया उसके पैर लहुलुहान हो चुके थे | उसकी साँस उखड़ रही थी |

जमीन पर गिरने से पूर्व वह जोर से चिल्लाया “देशवासियों हम युद्ध जीत गये खुशियाँ मनाओ ” | तुरंत वह गिरकर ढेर हो गया | इस वीर धावक की यादगार में मैराथन दौड़ का समावेश ओलम्पिक जो 1896 से शुरू हुआ , से किया गया | यह समारोह का अंतिम इवेंट रहता है |

Marathon मैराथन दौड़ की दूरी 26 मील है और मैराथन तथा एथेंस की दूरी भे लगभग इतनी ही थी | यह 26 मील की दूरी 1908 ईस्वी में लन्दन ओलम्पिक में 26 मील 365 गज हो गयी | इटली के धावक दोरनदो पियेत्री 1908 में मैराथन दौड़ के स्वर्ण पदक से वंचित रह गया परन्तु उसकी दौड़ यादगार थी | उस दौड़ में 56 धावक मैदान में थे | दौड़ के बीच में दक्षिणी अफ्रीका के चार्ली हैकरसन सबसे आगे हो गये |

अंतिम स्थान पर पहुचने के लिए छ: मील बाकी थे | पियेत्री काफी पीछे था | वह हैकरसन को दबाना चाहता था | पियेत्री ने पुरी ताकत लगादी और उसका दम उखड़ने लगा था | बेहद थकावट और मानसिक तनाव के कर्ण बाए मुड़ने के बजाय वह दाये भाग के स्टेडियम में प्रवेश कर गया | इस गलती की सुचना उसे दी गयी , इससे पहले ही वह लडखडा कर गिर गया लेकिन वह फिर उठा ,गिरा और फिर उठा | खेल भावना उसने दौड़ पुरी की |\

हैकरसन जो आगे था पिछड़ गया | अमेरिकी धावक जानी हाउस ने हैकरसन को पीछे छोड़ दिया | 2 घंटे 25 मिनट 1804 सेकंड में जानी यह दौड़ जीत सका | गिर पड़ने और गलत दिशा में स्टेडियम में प्रवेश करने के कारण पियेत्री को दौड़ में अमान्य कर दिया गया लेकिन ब्रिटिश पत्रकारों ने पियेत्री की शौर्यगाथा को बहुत सराहा | मजबूर होकर ओलम्पिक समिति ने इसे एक विशेष पुरुस्कार दिया |

वस्तुस्थिति यह थी कि 26 मील की दौड़ में लन्दन के आयोजको ने 365 गज स्टेडियम के प्रवेश द्वार से उस विशेष कक्ष की दूरी को जोड़ दिया था जिसमे इंग्लैंड की रानी एलेक्सेंद्रा बैठी थी | प्रवेश द्वार तक पियेत्री आगे था | पियेत्री स्वर्ण पदक जीत लेता यदि वह अतिरिक्त दूरी जोड़ी ना जाती | अब मैराथन में दूरी हमेशा के लिए 26 मील 365 गज हो गयी | आइये अब आपको मैराथन से जुड़े रोचक तथ्य बताते है

  • आधुनिक ओलम्पिक खेलो का विचार जब 19वी सदी के अंत में वास्तविकता बना तो आयोजक इसे प्राचीन यूनान के गौरव के जरिये लोकप्रिय करने के तरीके खोज रहे थे |
  • तब Marathon मैराथन दौड़ आयोजित करने का विचार फ़्रांसिसी भाषा विज्ञानी मिशेल ब्रेयाल से आया जो इसे 1896 में एथेंस के प्रथम ओलम्पिक खेल में शामिल करना चाहते थे | इस विचार को आधुनिक ओलम्पिक के संस्थापक पियरे दी कुब्रतीं का तगड़ा समर्थन मिला |
  • यूनानियो ने प्रतियोगियो को चुनने के लिए 10 मार्च 1896 को एक दौड़ आयोजित की जिसे चारिला ओस वासिलाकोस ने 3 घंटे 18 मिनट में पुरी करके जीता  (इस प्रथम ओलम्पिक के भावी विजेता ने भी इस चुनावी दौड़ को पूरा किया जो पांचवे स्थान पर रहे थे )
  • 10 अप्रैल 1896 को आधुनिक ओलम्पिक की पहली मैराथन दौड़ Marathon जीतने का सौभाग्य एक यूनानी स्पाईरिडों लुईस को मिला जिन्होंने यह दौड़ 2 घंटे 58 सेकंड में जीती थी |
  • महिला मैराथन दौड़ सर्वप्रथम 1984 मे लोस अन्ज़िल्स ओलम्पिक में हुयी | महिला मैराथन मुकाबले में सिर्फ दो महिला खिलाड़ी शामिल हुयी थी जिनमे से एक ऑस्ट्रेलिया की ही लीजा ओंदिका थी | लीजा का सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन 1988 सिओल ओलम्पिक में था था जिसमे उन्हें रजत पदक हासिल हुआ था |
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