मालगुडी डेज की कहानिया Malgudi Days Stories in Hindi

Malgudi Daysमालगुडी भारत के प्रख्यात लेखक R.K. Narayan द्वारा रचित एक काल्पनिक शहर है और इसी तर्ज पर कन्नड़ अभिनेता और निर्देशक शंकर नाग ने इस पर 1986 में एक टीवी सीरियल का निर्देशन किया जिसे मालगुडी डेज Malgudi Days कहते है | मालगुडी दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटो की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जिसे R.K. Narayan ने अपनी कल्पना में बनाया | यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है | इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद R.K. Narayan अनजान थे | कई लोग इसे कोइम्बतुर में मानते है क्योंकि वहा पर भी ऐसी ही इमारते और घर थे |

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Malgudi Days on Stampइस सीरियल Malgudi Days को दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता था | इस सीरियल Malgudi Days के निर्माता T. S. Narasimhan और अनंत नाग थे | अनंत नाग , शंकर नाग के भाई थे |इस सीरियल के दूरदर्शन पर 39 एपिसोड प्रसारित किये गये | इस सीरियल के अधिकतर एपिसोड 20-22 मिनट के होते थे | हम Malgudi Days सीरियल का टाइटल सोंग “ताना ना  ना ना ना ” आज  भी नहीं भूल सकते है | Malgudi Days को बाद में Sony TV और माँ टीवी पर तेलुगु भाषा में फिर प्रसारित किया गया था | Malgudi Days सीरियल की शूटिंग कर्नाटक के शिमोगा जिले के Agumbe गाँव में की गयी |

Malgudi Map1980 के दशक के आरम्भ में मालगुडी Malgudi शहर और उनके पात्रो को जीवित करने का काम एक टाउन प्लानर और आर्ट डायरेक्टर जॉन देवराज को दी गयी | देवराज के लिए ये जीवन की सबसे बड़ी चुनौती थी क्योंकि उसको एक काल्पनिक शहर को 180 से ज्यादा परिवार बसाकर सजीव करना था | देवराज ने इस काम को बिलकुल शून्य से शुरू करना था और उन्होंने इस शहर में मुर्तिया , बैलगाड़िया , दुकाने , मन्दिर और भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया |

Malgudi Days Sketchअगुम्बे Agumbe गाँव को उजाड़ से एक भरा हुआ गाँव बनाने में देवराज के काम और शंकर नाग के जूनून का नतीजा था | उन्होंने एक बाद जगदीश मलंद को 20 किमी दूर गाँव से फिल्मांकन के लिए गधा लाने को बोला था | इस शहर Malgudi को जीवित बनाने के लिए इस नाटक के पात्र और कर्मचारी तीन साल तक इस गाँव में रहे |इस नाटक में काम करने वाले लोग अगुम्बे के घरो में ही रहने लग गये |

Malgudi Days Swami HouseSwami and Friends में जो घर आपने देखा वो आज भी वहा पर लेख सकते है | ये घर 150 साल से भी ज्यादा पुराना है और Malgudi Days मालगुडी डेज की शूटिंग का इस मकान के मालिको ने कोई पैसा नही लिया है | उस समय ये घर परिवार के कई लोगो से भरा रहता था लेकिन समय के साथ ये घर जिसे Dodda Mane कहते है वीरान हो गया और केवल कस्तुरी नाम की महिला यहा पर रहती है | इस घर में आपको तीन रसोईघर , तीन कुवे और अनाज भंडार मिल जाएगा | स्वामी की कहानी में स्वामी को इस घर के हर कोने में देखा जा सकता है |

Shanker Nag Malgudi Daysशंकर नाग  Shanker Nag 36 साल के उम्र में ही कार एक्सीडेंट में मारे गयी अन्यथा वो कन्नड़ सिनेमा के सबसे बड़े निर्देशक और अभिनेता होते है | हालंकि मालगुडी डेज में उनके काम को आज भी नही भुला जा सकता है | शंकर नाग की पत्नी का कहना है अगुम्बे उनके जीवन का इतना महत्वपूर्ण अंग बन गया कि उनकी एक साल की बेटी काव्या भी वहा के स्कूल में पढ़ती थी | शंकर नाग ने RK नारायण की कल्पना को हकीकत बना दिया था | इस सीरियल में काम करने वाले अशोक मंदाना का कहना है कि उस समय में किसी काल्पनिक गाँव को असल गाँव में बदलना सम्भव था लेकिन वर्तमान में ऐसा काम करना नामुनकिन सा लगता है |

Malgudi Days सीरियल को 2004 में शंकर नाग Shanker Nag के बजाय कविता लंकेश ने फिर से निर्देशित किया और अप्रैल 2006 से इसका प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया लेकिन ये मंझे हुए पात्रो के आभाव में ये सीरीज ज्यादा सफल नही रही |Malgudi Days मालगुडी डेज की अधिकतर कहानिया एक एपिसोड में खत्म हो जाती थी लेकिन कुछ कहानियों को 4-5 एपिसोड में खत्म करना पड़ता था | आइये आज हमको मालगुडी डेज की कहानिया Malgudi Days Stories in hindi बताते है

पहली कहानी – Swami and Friends [ स्वामी और उसके दोस्त ] Malgudi Days

Swami and his Friends

Swami and Friends की कहानी अगर आप आज भी Youtube पर देखेंगे तो 80 के दशक में जन्मे  लोगो को अपने बचपन की याद आयेगी |  स्वामी को देखकर आपको अपने बचपन वो हर किस्सा याद आ जाएगा जिसे आप भूल गये थे कि किस तरह स्कूल में पिटाई होना , दोस्तों के साथ घुमना , लड़ाई करना ,खुले मैदानो में खेलना , पिताजी की डांट , दादी का प्यार , माँ का दुलार , नई खुराफाते , बारिश के पानी में नांव चलाना , लोगो के बहकावे में आना , स्कूल से भाग जाना , पढाई से जी चुराना , परीक्षा की टेंशन , नतीजो में घबराना .गर्मियों की छुट्टियों के मजे लेना , स्कूल की छुट्टी होने पर मजे करना , टीचर की छड़ी से मार खाना , दोस्तों के साथ प्लान बनाना , स्कूल जाने में बीमारी का बहाना करना और इसके अलावा कई बाते आपको मालगुडी डेज के इस कहानी में देखने को मिलगी जो भविष्य के बच्चे कभी नहीं सोच सकते | मोबाइल और इन्टनेट की क्रान्ति ने बच्चो को घर तक सिमित कर दिया लेकिन हमने वो हर युग को अपनी नजर से देखा है | अब आइये आपको Swami and Friends की पुरी कहानी बताते है |

Swami and Friends की कहानी दस साल के बच्चे स्वामीनाथन उर्फ़ स्वामी के इर्द गिर्द घुमती है | पहले एपिसोड में स्वामी सुबह उठकर नहा धोकर स्कूल जाता है | वो एक क्रिस्चियन स्कूल Albert Mission School में पढता है | उस दिन स्कूल में उसके अध्यापक उसको कृष्ण की बुराइया और लार्ड जीसस की अच्छाईया स्कूल के बच्चो को बताते है | Swami को उनकी ये बात पसंद नहीं आती है और वो उनसे बहस करने लग जाता है | इस पर नाराज होकर अध्यापक Swami के कान मरोड़ देते है | इस बात के बारे में Swami के पिता जो कि एक वकील है उनको पता चल जाता है और वो स्कूल के प्रिंसिपल को एक पत्र लिखते है जिसमे उनके अध्यापक को सही शिक्षा देने की सलाह देते है | Principal स्वामी के पिता की चिट्टी पढकर स्कूल के प्रिसिपल उन्हें स्कूल के मसले स्कूल में सुलझाने की सलाह देते है |

राजन जिसके पिता Malgudi के DSP है और वो मद्रास के अंगरेजी स्कूल से Malgudi में पढने आता है | स्वामी उससे दोस्ती करने का कोई मौका नहीं गवाता है और उसका दोस्त बन जाता है |  स्वामी के इस बर्ताव को देख उसके दोस्त उसको राजन की पूछ कहने लगते है और वो उनसे झगड़ पड़ता है | स्वामी का पुराना दोस्त मणि , राजन से बहुत इर्ष्या रखता है और उसको लड़ाई के लिए चुनौती देता है | राजन ये चुनौती स्वीकार कर लेता है और अगले दिन दोनों नदी के किनारे मिलते है | राजन अपने पिता की बंदूक लेकर आता है जिससे मणी डर जाता है और फिर बाद में वो दोनों दोस्त बन जाते है

02 Vendor of Sweets [ मिठाईवाला ] – Malgudi Days

Vendor of Sweetsइस नाटक Vendor of Sweets की कहानी बाप और बेटे के रिश्ते पर आधारित होती है | इस कहानी में जगन एक मिठाईवाला होता है | वो अपने बेटे से हर वक़्त कॉलेज में बारे में पूछता है लेकिन वो हर बात को नकार देता है | एक दिन जगन का बेटा उसको कॉलेज छोड़ देने के बारे में बताता है तो जगन बड़ा पपरेशान होता है कि ये अब क्या करेगा | वो अपने परम मित्र से उसके बेटे की जासूसी करवाता है | जासूसी करते हुए उनका परम मित्र उनको माली के बारे बताता है कि माली लेखक बनना चाहता है | जगन ये बात सुनकर काफी खुश होते है और उनको अपने लेखन में मन लगाने को कहते है |

एक दिन जगन के मित्र को माली के बारे में पता चलता है की वो विदेश जाना चाहता है और वीसा पासपोर्ट की तैयारी में लगा हुआ था | जगन माली की इस बात को सुनकर काफी नाराज होते है लेकिन माली की जिद को देखते हुए उसे विदेश भेज देते है | कुछ महीनों बाद माली वापस अपने गाँव मालगुडी लौटता है और साथ में एक विदेशी लडकी को पत्नी बनाकर साथ लाता है | पहले तो जगन इस बात से काफी नाराज जोते है लेकिन जल्द ही वो अपनी बहु से मिलनसार हो जाते है |

माली एक दिन जगन को बताता है कि वो एक ऐसी मशीन लाया है जिससे बटन दबाते ही अपने आप लेखन का कार्य हो जाता है | वो इस मशीन की फैक्ट्री मालगुडी में लगाना चाहता था और इसके लिए पैसो की आवश्यकता थी | वो जगन से पैसो की मांग करता है लेकिन वो उसकी बात को बिना समझे हां कर देते है |  कुछ दिनों बाद जगन की दूकान पर एक कागज आता है जिसमे माली के फक्ट्री बनाने की बात लिखी होती है और अंत में जगन का नाम लिखा होता है |

वो उसी शाम जगन को बिना पूछे नाम लिखने के लिए डांटते है और वो प्रोजेक्ट में पैसा लगाने से मना कर देते है | माली जगन को बताता है कि अगर वो ये फक्ट्री में निवेश नही करेंगे तो माली की पत्नी देश छोडकर चली जायेगी | जगन को जब इस बात का पता चलता है तो वो माली की अनुपस्थिथि में ग्रेस से मिलते है उनके विदेश जाने का कारण पूछते है | ग्रेस उनको बताती है कि माली की उससे शादी नहीं हुई है | इस बात को सुनकर वो सदमे में आ जाते है और उन दोनों की मंदिर में शादी कराने की बात कहते है | लेकिन इससे पहले ग्रेस घर छोडकर मद्रास में अपनी सहेली के यहा चली जाती है |

इसके बाद एक दिन माली की गाडी में शराब मिलने के कारण पुलिस माली को जेल में डाल देती है | जगन का मित्र जब जगन को यह बात बताता है तो वो उसको कुछ पैसे देकर माली को छुड़ाने की बात करता है और जगन खुद मालगुडी से दूर कुछ दिनों के लिए घर से विश्राम के लिए चले जाते है और कहानी का अंत हो जाता है |

इस कहानी Vendor of Sweets के बीच बीच में जगन के युवावस्था के दृश्य दिखाए जाते है किस तरह जगन की शादी होती है और उनकी भगवान से मन्नत मांगने पर माली का जन्म होता है | जगन की पत्नी की अक्सर तबियत खराब रहती है और एक दिन ज्यादा तबियत खराब होने से उसकी मौत हो जाती है | माली उसकी माँ की मौत का जिम्मेदार जगन को मानता था |

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