Home सम्पूर्ण महाभारत महाभारत कथा- भीम की हनुमान जी से मुलाकात Mahabharata-Bheem Meets Lord Hanuman

महाभारत कथा- भीम की हनुमान जी से मुलाकात Mahabharata-Bheem Meets Lord Hanuman

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महाभारत कथा- भीम की हनुमान जी से मुलाकात Mahabharata-Bheem Meets Lord Hanuman
महाभारत कथा- भीम की हनुमान जी से मुलाकात Mahabharata-Bheem Meets Lord Hanuman

चौसर का खेल और द्रौपदी चीरहरण के पश्चात खेले गये एक ओर मुकाबले में युधिष्ठिर के हार जाने से पांड्वो को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास मिलता है | अब सभी पांडव धृतराष्ट्र की आज्ञा लेकर वन को प्रस्थान करते है | धृतराष्ट्र को अपने किये पर बहुत पछतावा होता है और वो जाते वक़्त पांडू पुत्रो और द्रौपदी का हाल विदुर जी से पूछते है | विदुर पांड्वो को साधारण वस्त्र में जाते हुए बताते है | इसी बीच हस्तिनापुर में हुयी घटनाओ की जानकारी श्रीकृष्ण को लगती है और वो पांड्वो से मिलने वन की ओर निकल पड़ते है |

श्रीकृष्ण जैसे ही पांड्वो के पास पहुचे द्रौपदी भगवान कृष्ण को देखकर बिलखकर रोने लगी | श्रीकृष्ण ने दद्रौपदी को धीरज बंधाया और कहा “बहन , तुम्हारा अपमान करने वाले लोगो की लाशे युद्ध के मैदान में खून से लथपथ मिलेगी , मै तुम्हे वचन देता हु कि मै सदैव पांड्वो की सहायता करूंगा ” | श्रीकृष्ण के साथ आये द्रौपदी के भाई दृष्टध्युमं भी अपनी बहन को सांत्वना देकर पांड्वो से विदा हुए |

वन में एक दिन द्रौपदी के आश्रम के बाहर एक सुंदर फूल उड़ता हुआ आया और उस फूल को देखकर उसने भीमसेन से ऐसे ओर फूल लाने को कहा | भीमसेन द्रौपदी की इच्छा पुरी करने के लिए वन में निकल पड़ा और एक विशाल बाग़ में पहुच गया | उस बगीचे में एक वानर उस बगीचे के अंदर जाने के लिए रास्ता रोके खड़ा था | भीम ने बन्दर को रास्ते से हटने को कहा तो वानर ने हटने से मना कर दिया | अब भीम ने अपना परिचय दिया कि वो कुंती पुत्र करूवंश वीर है |

वानर ने कहा “देखो भाई मै बुढा हो चला हु , मै अपनी जगह से हिल भी नही सकता हु इसलिए यदि तुम्हे जाना हो तो मेरे उपर से लांघ कर चले जाओ ” | भीम ने कहा “किसी जानवर को लांघना मै अनुचित मानता हु अन्यथा मै कब का लांघ गया होता ” | अब वानर ने कहा “भाई मुझे ये तो बता दो कि वो हनुमान कौन था जो समुद्र को लांघ कर लंका चला गया था ” | अब भीम को गुस्सा आ गया और बोला “तुम जानते हो तुम किसके लिए बोल रहे हो , तुम महावीर हनुमान को नहीं जानते , यहाँ से हट जाओ अन्यथा मुझ्से बुरा कोई नही होगा ”|

अब वानर ने करुण स्वर में कहा “ठीक है शूरवीर , इतना क्रोधित ना हो , अगर तुम्हारा मुझ पर से लांघना अनुचित लगता है तो मेरी पुंछ को हटाकर एक तरफ कर निकल जाओ ” | भीम ने अब वानर की पूछपकड़ी और उठाने लगा लेकिन उससे वो पूछ टस से मस नही हुयी | अब उसने अपने शरीर का सारा जोर लगा लिया लेकिन पूंछ को हिलाने में नाकामयाब रहा | अब भीम मन में सोचने लगा कि इस धरती पर मुझे बलशाली ये वानर कौन हो सकता है और उसने वानर से अपना परिचय पूछा |
वानर ने कहा “पांडूवीर भीम , मै ही ही हनुमान हु ” | भीम लज्जा से झुकते हुए उनके चरणों में गिर गया और उनसे अपने दुर्व्यवहार के लिए क्षमा मांगी और कहा “हे अंजनिपुत्र महाबलशाली हनुमान , मै आपके दर्शन पाकर धन्य हो गया , आज मेरा जीवन सफल हो गया ” | अब हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद दिया और कहा “भीम युद्ध के समय तुम्हारे भ्राता अर्जुन के रथ पर उड़ने वाली ध्वजा में सदैव पांड्वो के साथ रहूँगा और युद्ध मै तुम्हारी ही विजय होगी ” | इतना कहते ही हनुमान जी अदृश्य हो गये और भीम को वहा फूल नजर आये | अब अचानक उसको द्रौपदी के फूल वाली बात याद आयी और तुरंत फूल तोडकर वापस आश्रम में लौट गया |

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