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Jammu Tour Guide in Hindi | जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थल

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Jammu Tour Guide in Hindi | जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थल
Jammu Tour Guide in Hindi | जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थल

कश्मीर की सुरम्य घाटियों में , तवी नदी के तट पर स्थित जम्मू (Jammu) एक एतेहासिक और धार्मिक नगर है | यहाँ स्थित अनगिनत मन्दिरों के कारण इसे मन्दिरों की नगरी भी कहा जाता है | जम्मू (Jammu) अपनी विशिष्टताओ के कारण देशी-विदेशी पयर्टको के आकर्षण का केंद्र है | अनेक जातियों ,संस्कृतियों एवं भाषाओं का संगम बना यह प्रदेश एक खुबसुरत पर्यटन स्थल भी है | शहर के निर्माणकर्ता “जम्बूलोचन” के नाम पर ही इसका नाम पड़ा , जो जम्बू का बिगड़ा हुआ नाम है | कला ,संस्कृति तथा एतेहासिकता की दृष्टि से भी जम्मू (Jammu) से आगे कश्मीर घाटी की सुरम्य घाटियों में आतंकवादी गतिविधियों के कारण देशी पर्यटक अभी वहा नही के बराबर जा रहे है लेकिन विदेशी पयर्टको का तांता अब वहां पुन: बढ़ता जा रहा है |

जम्मू के मुख्य दर्शनीय स्थल

बाहू किला – जम्मू से चार किमी दूर तवी नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन किले का निर्माण लगभग 3 हजार वर्ष पूर्व राजा बहुलोचन द्वारा कराया गया था जो आज भी सही दिशा में है | इसके नीचे बाहू उद्यान पिकनिक के लिए उत्तम स्थान है | यहाँ से सारे शहर को देखा जा सकता है तथा यहाँ पर की जाने वाली रोशनी हमे एक दुसरी ही दुनिया में ले जाती है |

डोगरा आर्ट गैलरी – पहले नये सचिवालय के पास स्तिथ डोगरा आर्ट गैलरी को अब पुराने सचिवालय में ले जाया गया है जहां संग्रहालय के अतिरिक्त जम्मू तथा बसोंहाली के पहाडी कला तथा चित्र कला की चीज संग्रहित है इनमे बसोहली शैली के आभूषण देखने लायक है |

मानतलाई – शुद्धमहादेव से 7 किमी दूर मानतलाई है जो अत्यंत रमणीक स्थल है | विगत प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के राजनितिक गुरु तथा विवादास्पद व्यक्ति धीरेन्द्र ब्रह्मचारी द्वारा बनाया गया होटल तथा अन्य चीज देखने लायक है |

राम नगर – जम्मू से 102 किमी के दूरी पर स्थित रामनगर भारत की सबसे पुरानी तहसील है | यहाँ कई किले तथा तीर्थ स्थल देखने लायक है | पहाडी क्षेत्र होने के कारण यह स्थान स्वास्थ्यवर्धक है | यहाँ के लिए सीधी बस सेवा है तथा रहने का स्थान भी उपलब्ध है |

सनासर -पाटनीटाप से 18 किमी की दूरी पर पहाडियों तथा चीड़ के पेड़ो से घिरा यह स्थान अपनी झील के कारण प्रसिद्ध है | यह स्थान गोल्फ तथा पराग्लाइडिंग की सुविधा के कारण भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है | पटनीटॉप से नत्था टॉप की ओर जाने पर सनासर रस्ते में आता है | सबसे उंचाई पर जाकर आदमी हैरान रह जाता है | यहाँ से  कुछ पटनीटॉप ,सनासर उद्मपुर जिले को भी देखा जा सकता है | रहने के लिए पर्यटक बंगला तथा हट्स भी उपलब्ध है |

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मानसर तथा सुरिनसर झीले – जम्मू से 65 किमी की दूरी पर स्थित मानसर झील बहुत ही आकर्षक है | यहाँ प्रतिवर्ष अप्रैल के प्रथम सप्ताह में मानसर मेले का आयोजन भी होता है | झील में नौकायन की सुविधा है तथा उसके एक किनारे पर पुराने महल भी देखे जा सकते है जो अब खंडहर में बदल चुके है | यहाँ के लिए जम्मू से सीधी बस सेवा उपलब्ध है और रात को ठहरने के लिए पर्यटन विभाग का बंगला तथा हट्स भी उपलब्ध है |

जम्मू से लगभग 42 किमी की दूरी पर स्तिथ सुरिनसर झील मानसर जितनी बड़ी तो नही लेकिन खुबसुरत पर्यटन स्थल अवश्य है | हालांकि सुरिनसर जाने के लिए जम्मू से सीधी बस सेवा तो है ही मानसर झील की ओर रास्ता भी जाता है | जहां से यह पास ही में पडती है | वैसे यह कथा भी प्रचलित है कि दोनों झीलों का भूमि के भीतर से संबध है | रहने को पर्यटक बंगला उपलब्ध है |

सुद्ध महादेव – जम्मू से 120 किमी दूर स्थित 1225 मीटर की उंचाई पर स्थित मनोहारी दृश्यों वाला यह स्थल प्रत्येक पर्यटक तथा तीर्थ यात्री को आकर्षित करता है | रहने के लिए स्थान एवं सेवा भी उपलब्ध है |

अमर महल म्यूजियम – तवी नदी के तट पर निर्मित यह शाही महल फ्रेंच महल के नमूने पर आधारित है | वर्तमान समय में यह महल म्यूजियम के रूप में परिवर्तित हो चूका है | महल के भीतर शाही परिवार के चित्रों ,पहाडी चित्रकला से संबधित चित्रों एवं पुस्तकालय को देखा जा सकता है |

रणवीरेश्वर मन्दिर – जम्मू के इस प्रसिद्ध शिव मन्दिर का निर्माण महाराज रणवीर सिंह द्वारा 1883 में कराया गया था | महराजा रणवीर सिंह के नाम पर ही इस मन्दिर का नाम रणवीरेश्वर पड़ा | पत्थर की पट्टियों से बना शिवलिंग इस मन्दिर की मुख्य विशेषता है |

रघुनाथ मन्दिर – विभिन्न मन्दिरों के शहर जम्मू में रघुनाथ मन्दिर एक भव्य एवं आकर्षक मन्दिर है | महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में इस मन्दिर का निर्माण आरम्भ करवाया था और बाद में उनके पुत्र महाराजा रणवीर सिंह ने 1860 में इसे पूरा करवाया था | इस मन्दिर में देवी देवताओं की कलात्मक मुर्तिया दर्शनीय है |

मुबारक मंडी – पुराने सचिवालय का असली नाम मुबारक मंडी है जो पहले राजाओ के महल थे हालांकि इसके कुछेक भाग गिर चुके है लेकिन बचे हुए अधिकांश भाग आज भी अपनी कारीगरी के लिए जाने जाते है |

पीर खो – शहर से 3.5 किमी की दूरी पर सर्कुलर रोड पर स्तिथ यह स्थान प्राकृतिक शिवलिंग के कारण प्रसिद्ध है जिसके इतिहास की जानकारी आज भी नही मिल पायी है लेकिन लोककथा यह है कि इस शिवलिंग के सामने स्थित गुफा देश के बाहर निकलती है |

जम्मू पहुचने के विविध मार्ग

वायु मार्ग – जम्मू के लिए दिल्ली , चंडीगढ़ ,श्रीनगर और लेह से इंडियन एयरलाइन्स के अलावा निजी विमान सेवाए भी उपलब्ध है |

पर्यटन का उचित समय

वैसे पर्यटक वर्ष के किसी भी महीने में जम्मू का कार्यक्रम बना सकते है पर बरसात में घुमने फिरने में होने वाली दिक्कतों के कारण वहां न जाना उचित है |

जम्मू की प्रसिद्ध वस्तुए

जम्मू से पर्यटक खाने की चीजे जैसे बादाम ,अखरोट ,चेरी ,बासमती चावल ,राजमाश आदि खरीद सकते है इसके आलावा सिल्क के कपड़े , बेंत का सामान तथा कालीन भी खरीदे जा सकते है | खरीददारी के लिए सरकारी एम्पोरियम , खादी ग्रामोद्योग भवन को ही प्राथमिकता दे |

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