सर एडमंड हिलेरी की जीवनी Sir Edmund Hillary Biography in Hindi

Sir Edmund Hillary Biography in Hindi

Sir Edmund Hilary Biography in HindiEdmund Hillary सर एडमंड हिलेरे न्यूजीलैंड के एक पर्वतारोही थे जिन्होंने तेनजिंग नोर्गे के साथ मिलकर एवरेस्ट की चोटी पर सबसे पहले पहुचे थे | इस एवरेस्ट अभियान की अगुआई ब्रिटिश अफसर जॉन हंट ने की थी | Time मैगज़ीन में उन्हें 20वी सदी के 100 प्रभावशाले व्यक्तियों में से एक गिना जाता है | एवरेस्ट पर फतेह पाने के बाद हिलेरी ने अपना अधिकतर जीवन नेपाल के शेरपा लोगो की मदद में बिताया और हिमालयन ट्रस्ट का निर्माण किया जिसके तहत उन्होंने नेपाल में को स्कूल और हॉस्पिटल बनवाए | आइये आज आपको उसी जाबांज एडमंड हिलेरी की जीवने बताते है |

एडमंड हिलेरी का प्रारम्भिक जीवन Early Life of Edmund Hillary

Edmund Hillary एडमंड हिलेरी का जन्म 20 जुलाई 1919 को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में हुआ था | उनके पिता का नाम Percival Augustus Hillary था जो 1920 में ऑकलैंड के दक्षिणी हिस्से Tuakau में आकर बीएस  गये थे | उनके दादाजी इंग्लैंड से यहा आकर बसे थे |  हिलेरी की प्रारम्भिक शिक्षा Tuakau Primary School और उसके बाद Auckland Grammar School में हुयी | Edmund Hillary हिलेरी ने दो साल पहले ही प्राइमरी स्कूल उत्तीर्ण कर ली | हिलेरी बचपन से ही बहुत शर्मीले स्वाभाव के थे और अक्सर अपने जीवन में कुछ साहसिक कार्य करने के बारे में सोचते रहते थे |

16 वर्ष की उम्र में अपनी स्कूल ट्रिप में Mount Ruapehu पर चढाई के दौरान उनको पर्वतारोहण में रूचि बढ़ने लग गयी | अब उनकी लम्बाई भी 6 फीट 5 इच हो गयी थी जिसके कारण वो शारीरिक रुप और मानसिक रूप से भी ताकतवर हो गये थे | अब उन्होंने Auckland University College से गणित और विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की | 1939 में उन्होंने अपनी पहली बड़ी चढाई Mount Ollivier पर की थी | अब Edmund Hillary एडमंड अपने भाई रेक्स के साथ मधुमक्खी पालन का काम भी करने लग गये थे और साथ साथ गर्मियों में पर्वतारोहण सीखते रहते थे |

अब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान Edmund Hillary हिलेरी ने New Zealand Air Force के लिए आवदेन किया लेकिन बाद में उन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों की वजह से अपना नाम वापस ले लिया | 1943 में Edmund Hillary हिलेरी ने RNZAF ज्वाइन कर लिया जिसमे उन्होंने नाविक का काम लिया | 1945 में हिलेरी को फिजी भेज दिया गया जहा उनकी नाव बुरी तरह जल गयी थी जिसके कारण वो वापस न्यूजीलैंड लौट आये थे |

एवरेस्ट विजय अभियान 1953 Everest expedition

Tenjing Norgay and edmund Hillary1953 Everest expedition से पहले Edmund Hillary एडमंड हिलेरी ने 30 जनवरी 1948 को न्यूजीलैंड की सबसे उची चोटी माउंट कुक पर अपने साथी Mick Sullivan के साथ चढाई की | हिलेरी 1951 के एवरेस्ट अभियान का भी हिस्सा था जिसका नेतृत्व एरिक शिफ़टन कर रहे थे |  1952 में भी वो ब्रिटिश एवरेस्ट अभियान का हिस्सा थे लेकिन गलत रास्ते की वजह से वो चोटी तक नही पहुच पाए थे | उस समय तिब्बत और नेपाल द्वारा जाने वाले एवरेस्ट के रास्ते को साल में एक अभियान के लिए ही खोला जाता था इसलिए 1952 में एक Swiss expedition , जिसमे तेनजिंग भी शामिल थे , एवरेस्ट पर चढ़ा था लेकिन खराब मौसम की वजह से एवरेस्ट चोटी पर पहुचने से पहले ही लौट आया |

1953 में फिर ब्रिटिश अभियान दल को एवरेस्ट पर चढाई का अवसर मिला और इस बार वो पुरी तैयारी के साथ इस अभियान में आये थे | अब इस अभियान दल का नेतृत्व जॉन हंट कर रहे थे जो इससे पहले सात एवरेस्ट अभियानों का नेतृत्व कर चुके थे | Edmund Hillary हिलेरी की शुरवात में Lowe के साथ चढने की इच्छा थी लेकिन बाद में चढाई के लिए उन्होंने दो टीम बनाई | पहली टीम में Tom Bourdillon और Charles Evans जबकि  दुसरी टीम में Edmund Hillary हिलेरी और तेनजिंग को रखा गया | Edmund Hillary हिलेरी ने अब तेनजिंग के साथ दोस्ती बनाना शुरू कर दिया | जॉन हंट के इस अभियान दल में 400 लोगो ने हिस्सा लिया था जिसमे 362 केवल बोझा ढोने वाले शेरपा थे जिनको 4500 किलो सामान उपर पहचाना था

Success on Mount Everestमार्च 1953 में बेस कैंप तैयार कर दिया गया जो 25,900 फीट की उचाई पर था | 26 मई को जॉन हंट ने May Bourdillon और Evans को पहले दल के रूप में चढाई के लिए भेजा लेकिन evan का ऑक्सीजन सिस्टम रास्ते में ही फ़ैल हो गया था जिसके कारण दोनों को वापस लौटना पड़ा था | वो  South Summit तक पहुच कर वापस लौट रहे थे | अब जॉन हंट ने दुसरी टीम के रूप में हिलेरी और तेनजिंग को भेजा | ठंडी बर्फीले हवाओं के कारण उन दोनों को South Col तक पहुचने में दो दिन लग गये | 28 मई को उनकी सहायता करने के लिए हंट ने Lowe, Alfred Gregory और अंग नीमा को भेजा और उन्होंने उन दोनों को सामान देकर वापस बेस कैंप में लौट आये |

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अब 28 मई को उन दोनों 8500 मीटर की उचाइ पर अपना टेंट लगाया जिसमे उनको बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था | अब रात हो चुकी थी और उनको वो रात यही पर गुजारनी थी इसलिए वो दोनों टेंट में सो गये | अब रात भर ठंडी बर्फीले हवाए चल रही थी जिससे अच्छे अच्छो की कुल्फी जम जाए लेकिन उन दोनों के पास ऐसे ओवरकोट थे जिससे उनको गर्माहट महसूस हो | अब अगली सुबह वो वो दोनों उठे तो हिलेरी को उठने में बड़ी परेशानी हो रही थी | जब उसने अपने पैरो की तरफ देखा तो उसके पैर जम गये थे क्योंकि गलती से उनके बूट टेंट के बाहर रह गये थे | अब दो घंटे तक अपने पैरो को गर्म करने के बाद फिर वो दोनों आगे बढे |

अब आगे बढ़ते वक़्त उन दोनों के साथ कोई नही था और उन दोनों को मिलकर 14 किलो सामान धोकर उपर चढना था | अब रास्ते में उनको एक जगह दिक्कत आयी जब एक खडी चट्टान के बीच से उनको गुजरना था क्योंकि इसके अलावा दुसरे रास्ते पर काफी समय लग जाता | अब Edmund Hillary हिलेरी बे अपनी कुल्हाडी से उस बर्फ की दरार में से रास्ता बनाया और खुद पहले उपर चढ़े | उस जगह को आज भी “हिलेरी स्टेप” के नाम से जाना जाता है |अब Edmund Hillary हिलेरी ने तेनजिंग को भी रस्सी के सहारे उपर खींच लिया | उसके बाद उनके आगे का सफर सरल था तभी तेनजिंग ने कहा “सपना सच हो गया ” | वैसे तो हिलेरी ने पहला कदम माउंट एवरेस्ट की चोटी पर रखा था लेकिन हिलेरी ने सबको ये ही बताया कि वो दोनों एक साथ चोटी तक पहुचे थे |

Edmund and Tenzingअब वो 8848 मीटर कीउचाई पर दुनिया की सबसे उची चोटी के शिखर पर खडी जहा वो 11 बजकर 30 मिनट पर पहुचे | अब 15 मिनट तक वो एवरेस्ट चोटी पर रुके जहा पर हिलेरी ने तेनजिंग का वो प्रसिद्ध फोटो लिया था जिसमे वो हाथ में झंडा लेकर खड़े थे | तेनजिंग को कैमरा चलाना नही आता था फिर भी तेनजिंग ने हिलेरी को कैमरे से फोटो लेने को कहा लेकिन Edmund Hillary हिलेरी ने मना कर दिया | तेनजिंग ने बर्फ में कुछ चॉकलेट अर्पित की और हिलेरी ने जॉन हंट द्वारा दिया गया क्रोस वहा रखा | इसके बाद उनके नीचे उतरते समय के चित्रों ने ये कन्फर्म किया कि उन्होंने एवरेस्ट की चोटी को जीत लिया है | अब धीरे धीरे वो दोनों बेस कैंप तक पहुच गये जह Lowe ने रास्ते में ही उन्हें हॉट काफी पिलाई थी |

अब एवरेस्ट विजय की खबर ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ तक पहुच गयी और उन्होंने सबको बधाई दी | काठमांडू में उनका भव्य स्वागत किया गया | उसके बाद वो लन्दन गये जहा उन्हें नाइट की उपाधि मिली जिसके कारण उन्हें सर एडमंड हिलेरी Sir Edmund Hillary कहकर पुकारा जाने लगा | इसके बाद हिलेरी अपने देश न्यूजीलैंड चले गये | कुछ दिनों के बाद उन्होंने हिमालय की 10 दुसरी चोटियों पर भी चढाई की और साथ साथ साउथ पोल तक भी पहुचे थे |इसके बाद उन्होंने नेपाल और भारत से कई पुरुस्कार दिए गये और दुनिया भर में उनका नाम हो गया था |

व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु Personal life and Death

Personal life and Death EdmundEdmund Hillary हिलेरी ने एवरेस्ट विजय के तुंरत बाद 3 सितम्बर 1953 में लुइस मैरी रोज से शादी कर ली | उनके तीन बच्चे पीटर ,सारा और बेलिंडा हुए जिसमे से हिलेरी की पत्नी और बेटी बेलिंडा की 1975 में काठमांडू के निकट एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गयी | 1989 में हिलेरी ने June Mulgrew से शादी की |  पीटर हिलेरी भी अपने पिता की तरह सन 1990 में एवरेस्ट की चोटी पर पहुचा था | मई 2002 में पीटर हिलेरी और तेनजिंग के बेटे जमलिंग दोनों ने साथ मिलकर एवरेस्ट अभियान की 50वी वर्षगांठ पर एवरेस्ट की चोटी पर पहुचे |हिलेरी के छ: पौते-पौतिया है |

11 जनवरी 2008 को हृदयाघात की वजह से हिलेरी Edmund Hillary की मृत्यु हो गयी उस समय उनकी उम्र 88 वर्ष थी | हिलेरी की मौत की घोषणा स्वय प्रधानमंत्री हेलन क्लार्क ने दी जिसमे उन्होंने हिलेरी की मौत को न्यूजीलैंड के लिए एक भारी क्षति बताया | हिलेरी की मौत के बाद 22 जनवरी को उनका राष्ट्रीय शवयात्रा निकाली गयी जिसके बाद उनका दाह संस्कार किया गया | उनकी अस्थियो को नेपाली मठ में भेजा गया |  5 नवम्बर 2008 को Edmund Hillary के नाम से पांच स्टाम्प भी जारी हुए | इसके बाद उनके जीवन पर कई documentaries और फिल्मे बनी जिसके कारण आज भी उनके एवरेस्ट विजय की यादे ताजा हो जाती है |

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