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सांकेतिक भाषा दिवस , मूक-बधिर लोगो तक अपनी बात पहुचाने का दिवस | International Day of Sign Languages Essay in Hindi

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International Day of Sign Languages Essay Hindi | सांकेतिक भाषा दिवस निबन्ध
International Day of Sign Languages Essay Hindi | सांकेतिक भाषा दिवस निबन्ध

जो लोग सुन या बोल नही सकते यानि मूक-बधिर लोगो के हाथो , चेहरे और शरीर के हाव-भाव से बातचीत की भाषा को Sign Language यानि सांकेतिक भाषा दिवस कहा जाता है | हालंकि Sign Languages महज इशारे नही होते बल्कि किसी अन्य भाषा की तरह इसका अपना व्याकरण एवं नियम है पर यह लिखी नही जाती और अंग्रेजी-हिंदी की तरह अपनी बात को कहने के लिए पुरे वाक्य बनाने की जरूरत भी नही होती | जैसे कि अगर किसी मूक-बधिर व्यक्ति को कहना हो कि “ये खाना अच्छा है ” तो उसे केवल “खाना” और “अच्छा” का हाथो से संकेत दर्शाना होगा |

सांकेतिक भाषा का इतिहास | Sign Languages History in Hindi

सांकेतिक भाषा (Sign Languages) का प्रारम्भिक प्रमाण 5वी शताब्दी ईसा पूर्व में प्लेटो की क्रेटीलस में मिलता है जहां सुकरात कहते है कि “अगर हमारे पास आवाज या जुबान नही होती है और हम एक-दुसरे से विचार व्यक्त करना चाहते है तो क्या हम अपने हाथो ,सिर और शरीर के अन्य अंगो द्वारा संकेत करने की कोशिश करते , जैसा कि इस समय मूक लोग करते है ” | 1620 में जुआन पाब्लो बोनेट ने मेड्रिड में मूक-बधिर लोगो के संवाद को समर्पित पहली पुस्तक प्रकाशित की | इसके बाद 1680 में जोर्ज डालगार्नो ने भी एक ऐसी ही पुस्तक प्रकाशित की | 1755 में अब्बे डी लिपि ने Paris में बधिर बच्चो के लिए प्रथम विद्यालय की स्थापना की | 19वी सदी में अमेरिका तथा कुछ अन्य देशो में भी अनेक ऐसे स्कूलों की स्थापना होने लगी थी |

अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस | International Sign Languages Day

सांकेतिक भाषा (Sign Languages) के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 सितम्बर को सांकेतिक भाषा दिवस घोषित किया और इस वर्ष पहली बार ही सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाएगा | सांकेतिक भाषा (Sign Languages) के लिए विशेष दिन की घोषणा के संकल्प के साथ ही इस बात पर जोर दिया गया है कि सांकेतिक भाषा तथा इससे जुडी सेवाओं को जल्द मूक-बधिर लोगो तक पहुचाया जाए |

विश्व बधिर फेडरेशन के अनुसार विश्व में लगभग 7 करोड़ 20 लाख बधिर है | इनमे से 80 प्रतिशत विकाशशील देशो में रहते है | कुल मिलाकर वे 300 अलग तरह की सांकेतिक भाषा इस्तेमाल करते है | साल 2011 के जनगणना के अनुसार भारत में ढाई करोड़ दिव्यांग है जिनमे से 50 लाख को सुनाई नही देता या सुनने की शक्ति कमजोर है | सांकेतिक भाषा इनके लिए संचार का एकमात्र तरीका है | देश में करीब 700 स्कूल है जहा इसकी मदद से पढाई की जा रही है पर यह अपर्याप्त है |

अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा | International Sign Languages

सांकेतिक भाषा (Sign Languages) प्राकृतिक भाषाए है | एक अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा भी है जिसका प्रयोग बधिर लोगो को अंतर्राष्ट्रीय बैठको अथवा विदेशो के सफर के दौरान किया जाता है | इसे सांकेतिक भाषा का मिश्रित रूप भी माना जाता है जो अधिक जटिल नही है और इसका शब्दकोष भी सिमित है | दिव्यांगो के अधिकारों के सम्मेलन के दौरान सांकेतिक भाषा के उपयोग को स्वीकार्यता तथा बढ़ावा देना है | सांकेतिक भाषा को बोले जाने वाली भाषाओं के समान स्तर तथा महत्व दिया गया है और दुनिया भर की सरकारों की जिम्मेदारी तय की गयी है कि वे सांकेतिक भाषा सिखाने तथा बधिर समुदाय की भाषाई पहचान में बढ़ावा देगी |

भारत का पहला सांकेतिक भाषा शब्दकोश | India’s First Sign Language Dictionary 

इसी वर्ष भारत की पहली Sign Language Dictionary लांच की गयी है जिसमे Sign Language से अंग्रेजी तथा हिंदी भाषा में अनुवाद किया गया है | यह शब्दकोश इन सांकेतिक भाषा तथा हिंदी-अंग्रेजी जैसी भाषाओ के बीच पुल का काम करेगी और सांकेतिक भाषा को समझ रखने वाले लोगो को लिखित अंग्रेजी और हिंदी की जानकारी देती है |

एक सवाल किया जाता है कि क्या दुनिया में पहले से मौजूद Sign Language Dictionary का इस्तेमाल भारत में नही हो सकता ? दरअसल सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल दुनियाभर में होता है पर ही शब्द के संकेत देश की संस्कृति तथा स्थानीय परम्पराओं के अनुसार अलग हो सकते है जैसे कि शादी का संकेत American Sign Language में अंगूठी पहनाने से जुड़ा है जबकि Indian Sign Language में यह हथेलियों को एक के उपर एक रखकर दिखाया जाता है |American Sign Language में चाय का संकेत Tea-Bag को डुबोने के संकेत से किया जाता है जबकि भारत में यह चाय की प्याली से चाय पीते हुए दिखाकर किया जाता है | यही कारण था कि Indian Sign Language की  dictionary बनाना जरुरी पाया गया |

सामाजिक कल्याण मंत्रालय के तहत साल 2016 में बनाये गये Indian sign Language Research and Training Center में इस शब्दकोश पर काम चल रहा था | सेण्टर के प्रवक्ता के अनुसार देश में Sign Language का इस्तेमाल लगभग 100 सालो से हो रहा है पर देश के अलग अलग इलाको के संकेतो के जरिये एक ही बात कहने के अलग अलग तरीके है और यह डिक्शनरी उनका एक मानक बना देगी | जैसे कि दक्षिण भारत में मुट्ठी बंद कर दोनों बांहों को एक एक उपर एक रखा जाए तो उसे शादी का संकेत माना जातक है पर इसी को उत्तर भारत में जेल का संकेत माना जाता है |

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