भारतीय पुलिस का इतिहास जिसके बारे में आपने कभी नही सुना होगा Indian Police History in Hindi

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Indian Police History in Hindi

Indian Police Act History in Hindiमित्रो आज मुझे ये बताते हुए बेहद अफ़सोस होता है की Indian Police भारतीय पुलिस अंग्रेजो की देन है | आज मै आपको Indian Police भारतीय पुलिस का इतिहास के बारे में बताऊंगा जिसके बारे में आपने कभी नही सुना होगा | मित्रो जैसा कि आपको पता होगा कि ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत में 1612 में व्यापार के बहाने भारत आयी और उन्होंने सुरत से व्यापार करना शुरू कर दिया था | इनका मुख्य व्यवसाय विदेशी लड़ाकू उत्पादों को भारत में बेचना था | इस तरह शुरवात में भारत के कई हिस्सों में अपना व्यापार फैला लिया था | व्यापार के साथ साथ इन्होने भारत के राजाओ से भी मित्रता कर ली थी | धीरे धीरे जब व्यापार बढ़ गया तो उन्होंने राजाओ को रिश्वत देकर कई राज्यों पर राज करना शुरू कर दिया था | इस तरह उनकी संख्या बढ़ती गयी थी |

1757 में प्लासी के युद्ध के बाद ईस्ट इंडिया की जड़े ओर ज्यादा मजबूत हो गयी थी | उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी का वाइसराय रोबर्ट क्लाइव था | अब उन्होंने धीरे धीरे ईस्ट इंडिया कम्पनी का ध्वज को हर प्रदेश पर फहराना शुरू कर दिया था | अब ईस्ट इंडिया कंपनी की ताकत बढ़ चुकी थी और वो भारत को लुटने के साथ साथ अत्याचार भी करने लग गये थे | जब अत्याचार ज्यादा बढ़ गया तो भारत की जनता में विद्रोह बढ़ता गया था | विद्रोह की शुरुवात मंगल पांडे से शुर हुयी थी और धीरे धीरे ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ काफी बड़ी संख्या में क्रांतिकारी इकट्ठे हो गये थे | तब जाकर 1857 की क्रांति की शुरुवात हुयी और ईस्ट इंडिया कम्पनी के बुरी तरीक के हार हो गयी थी |

अब ईस्ट इंडिया कम्पनी वापस इंग्लैण्ड लौट गयी लेकिन उन्होंने जाने से पहले भारत में अपनी जड़े मजबूत करने के लिए “इंडियन पुलिस एक्ट ” की स्थापना करके गये | 1857 से पहले पुलिस का कोई अस्तित्व नही था , इसकी बजाय राजा और उनके सैनिक की प्रजा की न्याय उअर रक्षा व्यवस्था को सम्भालते थे | अब  1860 में पुलिस एक्ट बनने के बाद  “इंडियन पुलिस एक्ट ” बनाने वाले सभी अंग्रेज अधिकारी थे जिन्होंने ऐसे कड़े कानून बनाये थे जिनसे उनकी जड़े फिर भारत में म्जुबुत हो सकती थी | भारत की जनता उस समय इन कानूनों से अनभिग्य थी और पुलिस व्यवस्था को सुरक्षा की दृष्टी से देखती थी लेकिन उनको इसके पीछे के उद्देश्य के बारे में पता नही था |

धीरे धीरे पुलिस में भारतीय लोग भी शामिल होना शुरू हो गये थे और इस तरह भारत में पुलिस की शुरवात हुयी थी | अब इस पुलिस व्यवस्था को अंग्रेजो ने सुरक्षा व्यवस्था बताकर पुरे देश में फैला दिया और कई भारतीय जनता को पुलिस में भर्ती किया | उस समय उच्च पदों पर हमेशा अंग्रेज ही रहे थे और निम्न पदों पर भारतीयों को रखा जाता था | अब वही पुलिस उच्च पदों वाले अंग्रेज अफसरों के कहने पर भारतीयों को अपने कब्जे में रखी हुयी थी | किसी भी विद्रोह करने वाले को बिना वजह जेल में डाला जा सकता था | जब भारत में साइमन कमीशन के दौरान साइमन भारत आया तो लोगो ने उनका विद्रोह करना शुरू कर दिया था जिसमे एक भी भारतीय शामिल नही होने से लाला लाजपत राय के नेतृत्व में विशाल विद्रोह किया गया |

अब इसी “इंडियन पुलिस एक्ट” के तहत विद्रोह करने वालो पर लाठीचार्च की गयी और फलस्वरूप लालाजी की मृत्यु हो गयी थी | अंग्रेजो द्वारा बनाये गये इसी कानून की वजह से लालजी की मौत हुयी थी  |इसके जवाब में भगतसिंह ने सांडर्स की हत्या कर दी और उनको फासी की सजा का आदेश हुआ | जब भगतसिंह के साथ उस समय के पत्रकारों ने बात की तो उन्होंने कहा कि “इस इंडियन पुलिस एक्ट को खत्म नही किया गया तो भारत कभी आजाद नही हो पायेगा ” | भगतसिंह को तो फांसी हो गयी लेकिन वो लाखो युवाओं की प्रेरणा बनकर देश की लिए लड़े |

मित्रो भारत को आजादी तो मिल गयी लेकिन वो “इंडियन पुलिस एक्ट” अभी भी चल रहा है जिसके तहत विद्रोह पर निर्दोष लोगो पर भी लाठी चार्ज किया जाता है | मित्रो मेरा कहना ये नही है कि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था न बनाये लेकिन लाठीचार्जे के अलावा भी कई तरीके है जिनसे सुरक्षा व्यस्था को सुधारा जा सकता है |  इस तरह आज जो आप सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस देखते है वो अंग्रेजो की देन है | अगर अंग्रेज उस समय सुरक्षा व्यवस्था के लिए सख्त कानूनों के बजाय कुछ नरम कानून बनाती तो भारत की जनता में पुलिस के प्रति रोष के बजाय प्रेम होता है | तो मित्रो आप Indian Police पुलिस के प्रति  अपने नजरिये को कमेंट के जरिये ब्यान करे ताकि सुरक्षा व्वस्था के नये तरीको को इजाद किया जा सके |

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3 Comments

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  1. hello dost
    mere ko lega tha ki muje yehan itihas ke bare jankari milegi. per aap to bus kehi suni baton per yekeen kerte ho. orr meri semaj se peree hai.
    sorry
    pankaj sharma

    • पंकज जी अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी गलत लगे हो तो आप हमे इसकी जानकारी देवे | हम भी यही चाहते है कि हमारे पाठको को कोई गलत जानकारी ना मिले |

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