हुमायु के मकबरे का इतिहास Humayun’s Tomb History in Hindi

Humayun’s Tomb History in Hindi

मथुरा रोड और लोदी रोड के चौराहे पर स्थित ये मकबरा मुगल स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना है |1570 में हुमायु का मकबरा Humayun’s Tomb हुमायु की पत्नी हाजी बेगम ने हुमायु की मौत के बाद उसकी याद में  बनवाया था | इस स्मारक को फारसी स्थापत्य कला से बनाया गया है | इस स्मारक की चार दीवारी में कई मुगल शाषको की कब्रे भी है | यह स्मारक दिन भर पर्यटकों के लिए खुला रहता है लेकिन हुमायु के मकबरे को देखने का सबसे सही समय दोपहर के बाद होता है | यहा पर जाने के लिए करीबी मेट्रो स्टेशन JLN स्टेडियम है |यहा पर भारतीयो के लिए प्रवेश शुल्क 10 रूपये और विदेशियों के लिए प्रवेश शुल्क 250 रूपये है | यहा पर फोटोग्राफी का कोई शुल्क नही है और वीडियोग्राफी का 25 रुपये शुल्क है|

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Humayun's Tomb old Photos20 जनवरी 1556 को हुमायु की मौत के बाद उसके शरीर को सबसे पहले दिल्ली के पुराना किला में दफन किया गया |उसके बाद उसकी कब्र को खंजर बेग द्वारा पंजाब के शिरिंद लाया गया क्योंकि उस समय हिन्दू राजा हेमू ने मुगलों को हराकर आगरा और दिल्ली पर कब्जा कर लिया था |  कब्र को हिन्दू राजा हेमू क्षति ना पंहुचा दे इसलिए उसकी कब्र के स्थान को बदला गया | उसकी कब्र को जब उसके पुत्र और तत्कालीन बादशाह अकबर ने उस पर ध्यान दिया और 1571 में उसका मकबरा बन गया था  |

Humayu's Tomb 1860हुमायु का मकबरा अकबर , हुमायु की पहली पत्नी और उसके मुख्य सलाहकारो के आदेश से 1566 में बनना शुरू हुआ | 1572 में हुमायु की मौत के नौ वर्ष बाद 15 लाख की लागत में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ | हुमायु की एक अन्य पत्नी अर्णव देवरुखर ने भी मकबरा बनाने में सहयोग दिया | इस मकबरे को बनाने का सारा खर्चा महारानी बेगा बेगम ने दिया | जब हुमायु की मौत हुयी तो बेगा बेगम इतनी दुखी हुयी कि उसने भविष्य में अपना सारा जीवन दिल्ली की यमुना नदी के किनारे हुमायु का स्मारक बनाने में लगाने का फैसला लिया | आईने अकबरी के मुताबिक मकबरे का निर्माण कार्य मक्का से लौटने पर बेगा बेगम की देखरेख में हुआ |

Humayun Tomb Delhi Old Photoइतिहासकारों के अनुसार इस मकबरे को बनाने वाला वास्तुकार एक फारसी व्यक्ति मिर्जा गयासुद्दीन को हेरत [वर्तमान पश्चिमोत्तर अफगानिस्तान] से बुलवाया था | महारानी बेगा बेगम ने गयासुद्दीन को मकबरे की सबसे उत्तम डिजाईन बनाने के लिए नियुक्त किया लेकिन दुर्भाग्यवश इस मकबरे के बनने से पहले ही उसकी मौत हो गयी | उसकी मौत के बाद उसके बेटे सय्यद मुहम्मद ने अपने पिता की डिजाईन को पूरा कर इस मकबरे को 1571 मे पूरा किया |

Humayu's Tomb Old Photo 192817वी से 19वी सदी तक इस बाग़ को धीरे धीरे हुमायु के वंशजो की कब्रों से भर दिया गया | कई मुगल शाशकों को भी यही पर दफनाया गया | हुमायु के मकबरे को मुगलों का कब्रिस्तान कहा जाने लगा | भारत में मुगल बादशाहों और उनके रिश्तेदारों की कब्रे ओर कही पर नही है | भारत में हुमायु का मकबरा पहला “बाग़-मकबरा” है | Humayun’s Tomb मकबरा 7 मीटर के उचे विशाल स्तम्भों पर टिका हुआ है | इस इमारत का निर्माण लाल पत्थरों से बना हुआ है जबकि कब्रों को पीले और काले संगमरमर से बनाया गया है | इस दो मंजिला इमारत का शीर्ष सफ़ेद फारसी संगमरमर गुम्बद है जो गुरुत्वहीन नजर आता है | हुमायु के मकबरे की उचाई 47 मीटर और चौड़ाई 91 मीटर है

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इसका नीचे का हिस्सा एक आयताकार निर्माण है जिसमे सुंदर मेहराब है | मुख्य कब्र उपरी हिस्से के बीच एक बड़े कमरे में बनी हुयी है जिसमे पंक्तियों में धनुषाकार खिडकिया बनी हुयी है  | मध्य कक्ष अष्टभुजाकार है जिसमे शाही परिवारों के दुसरे सदस्यों की कब्रे है | बादशाह की असली कब्र तलघर में है | अगर आपको इतिहास में गहन रूचि हो तो हुमायु के मकबरे Humayun’s Tomb को जरुर देखे |

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