विश्व के प्रमुख कैलेंडर एवं उनका इतिहास | History of Worlds Calendars in Hindi

आज कौनसा दिन है ? सम्भवतः यह एक ऐसा सवाल है जिसे मनुष्य हमेशा से पूछता आया है | यह न सिर्फ उत्सुकता भरी अभिव्यक्ति है बल्कि एक ऐसा सवाल है जिस पर हमारा जीवन निर्भर करता है खराब मौसम में पौधे लगाना , भोजन पकाना और इकट्ठा करना पुरी सभ्यता के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है

सभ्यता से पहले से ही समय को कैलेंडर के रूप में मापा और जोड़ा जाता था | दुनियाभर में कई अलग अलग प्रकार के कैलेंडरो का इस्तेमाल किया जाता था | ये कैलेंडर प्रवृति के अवलोकन पर भरोसा करने और आव्रुतीय खगोलीय चक्र (जैसे सितारों की स्थिति) के लिए पुरी तरह से सही नही होते |

प्राचीन मनुष्य ने यह महसूस किया था कि मौसम चक्रीय रूप में बदलते है और एक मौसम के फिर वापस आने में उतना ही समय लगता है जितना कि सूर्य को पृथ्वी के चारो ओर परिक्रमा करने में समय लगता है | इस समय को एक वर्ष के रूप में परिभाषित किया जाता है इस बदलते समय को साल महीने सप्ताह और दिन कहा जाता है | अब आइये आपको विश्व के प्रमुख कैलेंडरो से रूबरू करवाते है

जुलियन कैलेंडर

जुलियन कैलेंडर 45 ईसा पूर्व रोम सम्राट जुलियस सीजर द्वारा शरू किया गया था | यह कैलेंडर 11 महीने के 30 दिन या 31 दिन के साथ 28 महीनों के एक अतिरिक्त फरवरी महीने के साथ बनाया गया था | इस कैलेंडर में 12 महीने के साथ कुल 365 दिन थे | इस कैलेंडर में फरवरी में 29 दिन के लिए हर 4 साल में एक अतिरिक्त दिन जोड़ा गया था क्योंकि जुलियन वर्ष में 365.25 दिन थे | लेकिन जुलियन कैलेंडर में सौर कैलेंडर से 11 मिनट 30 सैंकंड का अंतर था | यह हमे प्रतीत नही होता लेकिन कई शताब्दी पहले (16वी शताब्दी ) यह पाया गया कि जुलियन कैलेंडर सौर कैलेंडर से 10 दिन पीछे था |

ग्रेगोरियन कैलेंडर

ग्रेगोरियन कैलेंडर का अब सामान्यत: दुनियाभर में प्रयोग किया जाता है | इसे 1582 में उस समय के पॉप ग्रेगरी ने तैयार किया था | इस कैलेंडर ने पुराने जुलियन कैलेंडर की गलत गणना को सही किया था | ग्रेगोरियन कैलेंडर ने अधिवर्ष में एक नये नियम लागू कर के इसमें भिन्नता को निर्धारित किया और कैलेंडर वर्ष और खगोलीय वर्ष को मिलाया | इस प्रकार 1582 में यह परिवर्तन लागू किया गया | इसके अनुसार जब लोग 4 अक्टूबर को सोने के लिए गये तो 15 अक्टूबर को सोकर उठे हालांकि इस कैलेंडर ,में छोटी छोटी गलतियाँ मिली | इस कैलेंडर में हर 3236 वर्ष के बाद एक दिन कम होता जाएगा |ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ साथ दुनियाभर में अन्य कैलेंडरो का भी उपयोग किया जा रहा है अधिकतम कैलेंडर धार्मिक प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किये जाते है इनमे है

चीनी कैलेंडर

नाम के विपरीत दक्षिणपूर्व एशिया के कई भागो में धार्मिक और कृषि उद्देश्यों के सन्दर्भ में इसका इस्तेमाल किया जाता है इसको दुसरे कैलेंडरो से जो बात अलग करती है वह यह है कि चीन के राशिचक्र में अनुसार हर 60 साल के बाद वर्ष के नमो की पुनरावृत्ति होती है

इस्लामी कैलेंडर

यह 12 महीनों का एक चन्द्र कैलेंडर है जिसे 16 जुलाई 622 ईस्वी से गिना जाता है | यह तिथि पैगम्बर मुहम्मद के मक्का से मदीना के प्रवास की तिथि से मेल खाती है | इस कैलेंडर में चद्रमा की स्थिति और चरण के अनुसार तिथि की गणना की जाती है इसका प्रयोग इस्लामी त्योहारों और यादो को तारीखों के निर्धारण के लिए किया जाता है

हिन्दू कैलेंडर

इस कैलेंडर का भारत में इस्तेमाल किया जाता है | हिन्दू कैलेंडर चन्द्र सौर प्रणाली पर आधारित है | ईसा से 2000 साल पहले इसका पथ निर्धारित किया गया था | हिन्दू कैलेंडर दो अलग अलग स्वतंत्र कैलेंडर के संयोग से बना है जो साथ साथ प्रयोग किये जाते है सौर कैलेंडर जन्मतिथि और ज्योतिष के लिए उपयोग किया जाता है और चन्द्र कैलेंडर धार्मिक कार्यो के लिए |

हिब्रू कैलेंडर

यह चन्द्र सौर कैलेंडर है इसको निम्न बिन्दुओ पर विचार किया जा सकता है

  • पृथ्वी की घूर्णन गति (प्रतिदिन के अनुसार)
  • पृथ्वी के चारो ओर चाँद के घूर्णन गति (एक महीने के अनुसार)
  • सूर्य के चारो ओर पृथ्वी की घुर्णन गति (एक वर्ष में )
  • वास्तव में यह बहुत पुराना कैलेंडर है इस कैलेंडर के अनुसार हम 5775 वर्ष में जी रहे है

 

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