History of India in Hindi भारत का इतिहास

History of India in Hindi

History of Indiaमित्रो वैसे अगर भारत का इतिहास लिखना चाहे तो हमारे ब्लॉग को इसको पूरा करने में कई साल लग जायेंगे क्योंकि भारत की इतिहास इतना विशांल और पुराना है जिसे पूर्णतया बता बना मुश्किल है | भारत की इतिहास विश्व में सबसे पुराना इतिहास माना जाता है | भारत के इतिहास को जवाहर लाल नेहरु ने अपनी किताब “Discovery of  India ” में बताया है |भारतीय इतिहास के कुछ पन्ने तो अभी भी निर्मनाधीन है | भारतीय इतिहास को मानव प्रजाति  Homo sapiens के समय से माना जाता है जो आज से 75000 साल पुराना है | लेकिन भारतीय इतिहास की प्रमाणिकता आज से 5000 वर्ष पूर्व मानी जाती है | आइये भारत के इतिहास को संक्ष्पित में बताते है

पूर्व ऐतिहासिक युग [The Pre Historic Era]

पाषाण युग  [The Stone Age] – History of India in Hindi

Stone Ageमित्रो जैसा कि हमने बचपन की किताबो में पाषाण युग के बारे में पढ़ा है कि इस युग में मानव ने पत्थरों से औजारों को बनाने की कला सिख ली थी | पाषाण युग अनुमानित 5 लाख से 2 लाख वर्ष पूर्व बताया जाता है इसके प्रमाण मध्य भारत की नर्मदा घाटी के नजदीक पाए गये| भारत के इतिहास की प्रमाणिकता के कुछ नमूने तमिलनाडु में मिले है  इस प्रमाणिकता को 75000 वर्ष पूर्व माना जाता है जब यहा पर एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था |

भारत की पहली सत्यापित प्रमाणिकता प्रदेश के Bhimbetka rock shelters जो 9000 वर्ष पुराने माने जाते है | इसके बाद नवपाषान संस्कृति की सभ्यता के अनुमान हरियाणा में Bhirrana findings [7500 ईस्वी पूर्व ] और पाकिस्तान के बलोचिस्तान में Mehrgarh findings [7000 ईस्वी पूर्व ] माना जाता है | इसके बाद ताम्र युग का आरम्भ हो गया था

ताम्र युग [Bronze Age] – History of India in Hindi

Bronze Ageताम्र युग का आरम्भ 3300 ईस्वी पूर्व माना जाता है जिसे सिन्धु घाटी सभ्यता भी कहते है | सिन्धु घाटी सभ्यता का केंद्र सिन्धु नदी को माना जाता है जो घग्गर घाटी , यमुना नदी , गुजरात और अफ़ग़ानिस्तान तक फ़ैली हुई थी | इसके बाद इस सभ्यता का फैलाव भारत के गुजरात , हरियाणा , पंजाब और राजस्थान प्रांत और पाकिस्तान के सिंध ,पंजाब और बलोचिस्तान तक फैल गया | सिन्धु घाटी सभ्यता को मेसोपोटामिया और प्राचीन मिस्त्र की सासभ्यताओ के साथ विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओ में एक माना जाता है |

सिन्धु घाटी सभ्यता के निवासियों [हडप्पा ] ने  धातुकर्म की नई तकनीको ,हस्तशिल्प और नै धातुओ [ताम्बा , पीतल , सीसा और जस्ता  ]  का उत्पादन शुरू कर दिया था | सिन्धु घाटी सभ्यता का विकास 2600 ईस्वी पूर्व से 1900 ईस्वी पूर्व हुआ जिसका केंद्र वर्तमान भारत के धोलावीरा-कालीबंगा और पाकिस्तान के हडप्पा-मोहनजोदड़ो  को माना जाता है इस सभ्यता ने ईंटो से घर बनाना, सडक के किनारे नालिया बनाना और बहुमंजिली इमारत बनाने के लिए जाना जाता है |1700 ईस्वी पूर्व के अंत तक सिन्धु घाटी सभ्यता का अंत शुरू हो गया और धीरे धीरे ये सभ्यता लुप्त हो गयी

प्राऐतेहासिक काल [Early Historic Period]

वैदिक काल [Vedic Period] – History of India in Hindi

Vedic Period Indiaवैदिक काल का समय 1750 ईस्वी पूर्व से 500 ईस्वी पूर्व माना जाता है |वैदिक काल का निर्माण आर्य सभ्यता से शुरू हुआ जिसमे हिन्दू धर्म के वेदों को वर्णित किया गया | मौजूदा ग्रंथो में वेद सबसे पुराना ग्रन्थ माना जाता है |इतिहासकारों ने वैदिक सभ्यता को पंजाब क्षेत्र और गंगा के मैदानों तक फैला हुआ माना था | अर्थववेद के समय में पीपल के पेड़ और गाय को पवित्र माना जाता था |  वैदिक काल में ही धर्म और कर्म की अवधारणाये भारतीय सभ्यता में आयी | ऋग्वेद को वेदों में सबसे पुराना ग्रन्थ माना जाता है जो की ईसा से दुसरी सदी पूर्व का माना जाता है |

वैदिक काल में आर्य समाज को सबसे जनजाति माना जाता था क्योंकि उस समय तक हड्डपा संस्कृति लुप्त हो चुकी थी | ऋग्वैदिक काल के अंत तक आर्य समाज का विस्तार होना शुरू हो गया था जो कि भारत के पश्चिमोत्तर इलाके से लेकर गंगा के मैदानों तक फैले हुए थे | इस दौर में वर्णों का बनना शुरू हो गया था और उसी वर्ण व्यस्व्स्था के आधार पर उन्होंने समाज का विभाजन करना शुरू कर दिया | इस काल में खेती का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया था | इस काल में दुसरे छोटी-छोटी जनजातियो ने भी संघठित होकर राजतंत्रीय व्यस्व्स्था प्रारम्भ कर दी थी 

वैदिक काल के दौरान की संस्कृत भाषा का जन्म हुआ और संस्कृत ग्रंथो से हिन्दू देवी देवताओ के महत्व को जानना शुरू  किया | वैदिक काल में कुरु साम्राज्य को सबसे पहला प्रांतीय साम्राज्य माना जाता है जिसकी शुरुवात 1200 ईस्वी पूर्व से 800 ईसा पूर्व में लौह युग के शुरुवात में माना जाता है | कुरु साम्राज्य ने सर्वप्रथम सामाजिक अनुष्टान की प्रक्रिया शुरू की | कुरू साम्राज्य के अंत के बाद 1100 ईसा पूर्व से 600 इसा पूर्व तक पांचला साम्राज्य का उदय हुआ | इन दोनों साम्राज्यों का विस्तार वर्तमान भारत के हरियाणा से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाको तक माना जाता है |

वैदिक काल में ही हिन्दू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथो रामायण और महाभारत का उद्गम हुआ था | वैदिक काल के अंत तक विदेहा साम्राज्य का उदय हुआ था जिसक केंद्र  वर्तमान भारत के बिहार और नेपाल में था | वैदिक काल के अंत के बाद महाजनपदों का निर्माण प्रारभ शुर हो गया

महाजनपद [Mahajanapadas] – History of India in Hindi

Mahajanpad800 ईसा पूर्व से 200 ईसा पूर्व तक जैन और बोद्ध धर्मो का निर्माण हुआ और उपनिषद लिखे गये | 500 इसा पूर्व के समय को “दूसरा शहरीकरण  [Second urbanization]” कहा जाता है इसी काल में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ था | 500 इसा पूर्व में 16 राजतंत्र और गणराज्यो को मिलाकर महाजनपद कहा जाता था जिसमे काशी [वाराणसी] , कोशल [श्रावस्ती] , अंग [चम्पनागरी], मगध , वज्जी , मल्ल , छेदी , वत्स  , कुरु , पांचाल, मत्स्य , शुरसेन , अश्म्क ,अवन्ती , गांधार  और कम्बोज जनपद आते थे |

ये 16 महाजनपद गंगा के मैदानों में वर्तमान अफगानिस्तान से बंगाल और महाराष्ट्र तक फैला हुआ था |इस काल ने सिन्धु घाटी सभ्यता के बाद सबसे बड़ा शहरीकरण देखा था |6 ईस्वी पूर्व से 4 इसवी पूर्व तक वज्जि गणराज्य का केंद्र वैशाली था और संस्कृत मुख्य बोले जाने वाली भाषा थी | गौतम बुद्ध के समय में ये 16 जनपद मुख्यत चार राज्य वत्सा , अवन्ती , कोसला और मगध पर निर्भर थे |

फारसी और यूनानी विजय अभियान [Persian and Greek conquests] – History of India in Hindi

Alexander in India530 इसवी पूर्व में फारसी राजा सायरस ने हिन्दू-कुश पर्वत को पार कर वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के इलाको को अपने कब्जे में लिया | ये इलाका दो सदियों तक फारसी साम्राज्य के शाषन में रहा | फारसी साम्राज्य का मुख्य केंद्र तक्षशिला था जहा पर वैदिक और इरानी शिक्षा का मिश्रण हो गया था | फारसी साम्राज्य का अंत यूनानी शाषक सिकन्दर ने किया |

326 ईस्वी पूर्व में सिकन्दर ने दक्षिण एशिया में विजयी अभियान शुरू कर दिया था | भारत की उत्तरी पश्चिमी सीमा पर पहुचने पे उसने Hydaspes के युद्ध में राजा पोरुस को हराकर वर्तमान पंजाब के कई हिस्सों पर विजय प्राप्त कर ली थी | सिंकन्दर ने आगे बढ़ते हुए मगध के नन्द साम्राज्य और बंगाल के गंगारीदाय से आमना सामना किया लेकिन उसकी सेना भारत के विशाल सेना से घबराकर फिर लौट गया |

मौर्य साम्राज्य [Maurya Empire] – History of India in Hindi

Maurya Empire Map and Kingsमौर्य साम्राज्य पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने पुरे भारत को एक राज्य में तब्दील कर दिया और भारतीय इतिहास में भारत उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा साम्राज्य बना | उपर दिए गये नक्शे में आप मौर्य साम्राज्य का विस्तार देख सकते है | इस साम्राज्य की स्थापना मगध के चन्द्रगुप्त मौर्य ने नदं साम्राज्य को हरा कर की | 272 ईस्वी पूर्व में चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु के बाद बिन्दुसार ने मौर्य साम्राज्य की कमान संभाली और उसने भी चन्द्रगुप्त के अखंड भारत के स्वंप्न को बनाये रखा | केवल कलिंग क्षेत्र [वर्तमान में उडीसा ] मौर्य साम्राज्य में शामिल नहीं था |

बिन्दुसार के बाद अशोक के मौर्य साम्राज्य के सिंहांसन को संभाला | उसने 37 सालो तक 232 इसवी पूर्वतक राज संभाला और मौर्य साम्राज्य का विस्तार किया |  260 इसवी पूर्व कलिंग युद्ध में हजारो लोगो के शव देखकर अशोक का हृदय परिवर्तित हो गया और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया | अशोक की मृत्यु के बाद धीरे धीरे मौर्य साम्राज्य का पतन होना शुरू हो गया मौर्य साम्राज्य का अंतिम शाशक बृहद्रथ था जिसको पुष्यमित्र शुंग ने मारकर शुंग साम्राज्य की स्थापना की

शुंग साम्राज्य Shunga Empire – History of India in Hindi

Shunga Empire187 इसवी पूर्व से 78 इसवी तक शुंग साम्राज्य ने भारत उपमहाद्वीप के कई इलाको पर अपना आधिपत्य कर लिया था | पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य साम्राज्य के अंतिम शाषक को मारकर इस साम्राज्य की स्थापना की | पुष्यमित्र शुंग ने 36 वर्ष तक शाषन किया और उसके पुत्र अग्निमित्र ने इस साम्राज्य को संभाला | शुंग साम्राज्य पर 10 शाषकों ने राज किया और कई युद्ध जीते | इन्होने कलिंग , सातवाहन , यूनानी , पांचालो और मथुरा शाशको को पराजित किया | इनके शाषन ने शिक्षा का भी विकास हुआ और कई इमारते जैसे साँची का स्तूप बनवाई |

सातवाहन साम्राज्य Satavahana Dynasty – History of India in Hindi

Satvahana Empire Mapमौर्य साम्राज्य के पतन के बाद अखंड भारत टुकडो में विभाजित हो गया | एक तरफ पश्चिमोतर क्षेत्र पर शुंग साम्राज्य का आधिपत्य हो गया उअर दुसरी तरफ दक्षिणी भारत के कई हिस्सों पर सातवाहन साम्राज्य ने कब्जा कर लिया | सातवाहन साम्राज्य का उद्गम आंध्रप्रदेश के अमरावती से शुरू हुआ था  जो महाराष्ट्र के कई हिस्सों तक फैला हुआ था | 230 ईस्वी पूर्व तक इस साम्राज्य के भारत के कई हिस्सों को अपना बना लिया था |

इन्होने हिन्दू और बौद्ध धर्म का सरंक्षण किया और कई बौद्ध स्मारकों का निर्माण किया जो एलोरा से अमरावती तक फैले हुए थे | सातवाहन साम्राज्य ने सबसे पहले सिक्को का प्रचलन शुरू किया था इससे पहले स्वर्ण मुद्राए प्रचलन में थी | उन्होंने शुंग साम्राज्य और कानवा साम्राज्य से सामना कर अपना साम्राज्य बनाये रखा |सातवाहन साम्राज्य के गौतमीपुत्र सत्करनी और श्रीयजन ने विदेशी आक्रमणकारियों से अपने साम्राज्य को बचाया | तीसरी सदी में ये साम्राज्य छोटे राज्यों में बंट गया |

कुषाण साम्राज्य [Kushan Empire] – History of India in Hindi

Kushan Empire Map and Kingsकुषाण साम्राज्य का उदय वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान से शुरू हुआ जिसके प्रथम राजा कुजुला कद्फिसेस ने पहली सदी इसवी पूर्व के मध्य में भारत में कुच किया | ये भारतीय-यूरोपीय  लोगो के मिश्रण वाले शाषक थे | राजा कुजुला के पौते कनिष्क ने उत्तरी भारत के काफी हिस्से पर अपना आधिपत्य कर लिया था जिसमे साकेत , पाटलिपुत्र , गंगा के मैदान और बंगाल की खाड़ी आते थे | इन्होने मध्य एशिया और चीन तक बौध धर्म का प्रचार किया | अशोक के बाद कनिष्क पहला ऐसा भारतीय शाषक था जिसने बौद्ध धर्म का महत्व समझ कर उसका विस्तार किया | तीसरी सदी  तक उन्होंने शाषन किया और वासुदेव उनका अंतिम शाषक था |

गुप्त साम्राज्य  [Gupta Empire] – History of India in Hindi

Gupta Empireभारत के इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाने वाला साम्राज्य गुप्त साम्राज्य था जिन्होंने भारत के राज्यों को फिर से संघठित किया | इस साम्राज्य की स्थापना चन्द्रगुप्त प्रथम ने की थी | चन्द्रगुप्त प्रथम के बाद समुद्रगुप्त , चन्द्रगुप्त द्वितीय , कुमारगुप्त प्रथम और स्कन्दगुप्त जैसे शशको ने इस साम्राज्य की कमान संभाली और भारत के इतिहास को विकास की ओर ले गये इस युग में विज्ञान , तकनीक , कला , गणित , धर्म , दर्शनशाश्र्त्र और खगोलशाष्त्र का उदय हुआ | इसी युग में शून्य का आविष्कार हुआ था बाकी इससे पहले केवल 1  से 9  तक अंक होते थे |

गुप्त साम्राज्य के दौरान शांति और समृधि में विकास हुआ |   गुप्तकाल में ही भारत के महान अविष्कारक और लेखक हुए थे जिनमे कालिदास , आर्यभट , वराहमिहिर , विष्णु शर्मा और वात्स्यानन का नाम आज भी स्वर्ण अक्षरों में इतिहास के पन्नो में लिखा जाता है | विज्ञानं और राजनीतिक प्रशाशन नई उचाइयो पर पहुच गया था | भारत का व्यापार पड़ोसी देशो बर्मा ,श्रीलंका और अन्य देशो से बढ़ने लगा | हुण साम्राज्य के आने के बाद उन्होंने वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान से अपना साम्राज्य हटा लिया |

हर्ष साम्राज्य [Empire of Harsh] – History of India in Hindi

Harshavardhana Empire and Kingहर्षवर्धन ने 606 ईस्वी से 647 इसवी तक उत्तरी भारत के कई हिस्सों पर राज किया  | हर्ष वर्तमान हरियाणा के प्रभाकरवर्धन के बेटे और राज्यवर्धन के छोटे भाई थे |उन्होंने बहुत कम समय में अपना साम्राज्य पंजाब , राजस्थान , गुजरात , बंगाल और उड़ीसा तक फैला दिया था | गुप्त वंश के पतन के बाद उत्तरी भारत छोटे छोटे राज्यों में बंट गया था | हर्ष ने बौद्ध धर्म अपना लिया था |

उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में पंजाब और मध्य भारत के छोटे छोटे गणराज्यो को एकत्रित कर खुद को महाराजा की उपाधि दे दी |हर्ष कन्नोज के रहने वाले थे लेकिन उन्होंने लगभग उत्तरी भारत  के कई हिस्सों को अपने अंदर मिला लिया |उनके दरबार में शांति और समृधि पर चर्चाये होती रहती थी | चीनी यात्री हुआन ज़ेंग ने हर्ष के दरबार में उसके न्याय और शान्ति की काफी प्रशंशा की |

चालुक्य एवं पल्लव – History of India in Hindi

छठी से आठवी सदी तक दक्षिण भारत में चालुक्य और पल्लव नरेशो का वर्चस्व रहा | राष्ट्रकुटो ने चालुक्यो से और चोल वंश ने पल्लवों से वहा की सत्ता छीन ली | बंगाल में पाल वंश ने 8वी और 9वी सदी में शाशन किया और उसके पश्चात सेन वंश के लोग बंगाल के शाषक बने | दक्षिण में चोल वंश काफी प्रभावी रहा | इनका राज्य श्रीलंका और मालद्वीप तक था | चौदवी सदी के मालिक काफूर के आक्रमण के समय तक ये दक्षिण में राज्य करते रहे |

हम जल्द जी History of India in Hindi भारत के इतिहास के इस अंश को आगे बढ़ाएंगे तब तक आप दुसरे लेख पढ़ते रहे |

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