Bollywood History in Hindi बॉलीवुड का इतिहास

Bollywood History in Hindi

Bollywood बॉलीवुड मुंबई में स्थित हिंदी भाषा की फिल्मो की सबसे बड़ी इंडस्ट्री है | हालंकि कई लोग Bollywood बॉलीवुड का मतलब भारतीय फिल्मो से ले लेते है जबकि भारतीय फिल्मो में कई अलग अलग भाषाओ में फिल्मे भी शामिल होती है | Bollywood बॉलीवुड फिल्मो में केवल हिंदी फिल्मे ही आती है | बॉलीवुड फिल्मो में भारत के सबसे ज्यादा निर्माता निवेश करते है |बॉलीवुड को पहले हिन्दी सिनेमा कहा जाता था |

loading...

History of BollywoodBollywood बॉलीवुड विश्व में सबसे ज्यादा लोगो को रोजगार देने वाली और सबसे ज्यादा फिल्मे देने वाली इंडस्ट्री है | 2011 में हॉलीवुड के 9 लाख टिकिटो के मुकाबले बॉलीवुड के 35 लाख टिकिट बिके | बॉलीवुड में हर साल लगभग 1000 से भी ज्यादा फिल्मे बनती है जबकि हॉलीवुड में केवल 500 का आंकड़ा पार कर पाती है |Bollywood बॉलीवुड शब्द बॉम्बे और हॉलीवुड से मिलकर बनाया गया हालंकि हॉलीवुड की तरह बॉलीवुड का कोई संस्थान नहीं है | बॉलीवुड शब्द का उपयोग 1970 से किया जा रहा है |

दादा साहब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली मूक फिल्म हरिश्चन्द्र बनाई | 1930 तक इंडस्ट्री में हर साल 200 से भी ज्यादा फिल्मे बनने लगी | भारत की पहली बोलती फिल्म “आलम आरा” 1931 में आयी जिसने भारतीय फिल्मो को एक नया रुख दिया | 1930 और 1940 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध और भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन के  कारण ज्यादा फिल्मे नहीं बन पायी | केवल कुछ फिल्म निर्माता ही इस दौर में स्वत्रन्त्रता के मुद्दे पर फिल्म बनाने में सफल रहे | आलम आरा फिल्म बनाने के बाद निर्माता इरानी ने 1937 में पहली रंगीन फिल्म “किसन कन्हैया” बनाई |

भारत की आजादी से पहले के दशक 1940 से आजादी के बाद के दशक 1960 तक को हिंदी सिनेमा का स्वर्ण युग माना जाता है | कई फिल्मकारों का मानना है कि इस दौर में सबसे सदाबहार फिल्मे जैसे प्यासा (1957) , कागज के फूल (1959), आवारा(1951), , श्री 420 (1955) और आन (1952) बनी | इन फिल्मो ने भारत के सामजिक मुद्दों को फिल्मो में उभारा | 1957 में बनी महबूब खान की फिल्म “मदर इंडिया ” ने पुरे विश्व में हिंदी सिनेमा की छाप छोडी | इसके बाद 1960 में बनी मुगले आजम को कभी नही भुला जा सकता है इस फिल्म को कुछ सालो पहले रंगीन बनाकर फिर सिनेमाघरों में उतारा गया था |

बिमल रॉय ने 1958 में पुनर्जन्म पर आधरित फिल्म मधुमति बनाई | उस समय के मशहूर कलाकारों में देव आनन्द , राज कपूर , दिलीप कुमार , गुरु दत्त , नर्गिस , मीना कुमारी , नूतन , वैजयन्ती माला , माला सिन्हा , वहीदा रहमान और मधुबाला का नाम आता है | 1950 से बंगाली सिनेमा हिंदी सिनेमा की नकल कर फिल्मे बना रहा था जिसमे “नीचा घर” और “दो बीघा जमीन” जैसी फिल्मे थी | नीचा घर फिल्म को  Cannes Film Festival में पुरुस्कृत किया गया | गुरु दत्त को उस समय का सबसे मशहूर फिल्म निर्माता माना जाता था |

1960 के दशक के अंत में हिंदी सिनेमा में रोमांटिक और एक्शन फिल्मे बनना शुरू हो गयी | उस समय के मशहूर कलाकारों में  राजेश खन्ना , शशि कपूर , संजीव कपूर , शर्मिला टगोर , आशा पारेख और मुमताज आदि का नाम आता था |1970 के दशक में अमिताभ बच्चन और मिथुन चक्रवती जैसे अभिनेताओ ने फिल्मो में डाकुओ के नये दौर को जन्म दिया |1990 के दशक में अनिल कपूर , सनी देओल और गोविंदा ने कई फिल्मे दी |

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *