महान दार्शनिक प्लेटो की जीवनी Greek Philosopher Plato Biography in Hindi

Greek Philosopher Plato Biography in Hindi

Greek Philosopher Plato Biography in HindiPlato प्लेटो , यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक , गणितज्ञ और सुकरात के शिष्य एवं अरस्तु के गुरु थे | पश्चिमी जगत की दार्शनिक पृष्ठभूमि को तैयार करने में इन तीन दार्शनिको की त्रयी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | Plato प्लेटो को अफलातून के नाम से भी जाना जाता है | पश्चिमी जगत में उच्च शिक्षा के लिए पहली संस्था “एकेडमी ” की स्थापना का श्रेय भी प्लेटो को ही जाता है | उन्हें दर्शन और गणित के साथ साथ तर्कशास्त्र एवं नीतिशास्त्र का भी अच्छा ज्ञान था |

Plato प्लेटो के आरम्भिक जीवन के बारे  में ज्यादा ज्ञात नही है लेकिन उनका जन्म 428 ईसा पूर्व एथेंस के एक सभ्रांत परिवार में हुआ | उनकी शिक्षा-दीक्षा अच्छे वातावरण में हुयी | वे अपना पाठ बड़ी तेजी से याद कर लेते थे और वे बचपन से ही स्पष्ट विचारों वाले थे | प्लेटो बचपन में ही सुकरात के विचारों से बेहद प्रभावित रहे और उनके शिष्य बन गये | उनके अधिकतर लेखन में सुकरात और उनके विचार ही छाए हुए है | हम सुकरात के विचारों और जीवन दर्शन की जानकारी एकमात्र Plato प्लेटो के लेखन से ही प्राप्त होती है |  हालांकि सुकरात के शब्दों को प्लेटो ने ज्यो का त्यों नही लिखा ; उन्होंने उनसे जो कुछ सीखा ,उसका विश्लेष्ण भी किया गया है |

Plato प्लेटो ने कई विषयों पर विस्तार से कलम चलाई है लेकिन सामान्य दर्शन और निति शाश्त्र में उनकी दिलचस्पी उद्घाटित हुयी है | प्लेटो लिखते है कि वे शरीर और आत्मा में भेद देखते है | वे यह भी लिखते है कुछ लोग भौतिक दुनिया को तुच्छ मानते है और कुछ लोग इसी को अहमियत देते है | Plato प्लेटो का मानना था कि दार्शनिक मत वाले व्यक्ति बाहरी सीमाओं और सौन्दर्य . सत्य .एकता और न्याय के सर्वोच्य आदर्श के बीच भेद कर सकते है | उनका यह दर्शन भौतिक और मानसिक सीमाओं का संकेत देता है और उच्च आदर्श के प्रोत्साहन हेतु प्रेरित करता है |

Plato प्लेटो पुनर्जन्म के भी समर्थक रहे | उनका मानना था कि हमारा वर्तमान जन्म पूर्व जीवन के कर्मो पर आधारित होता है | सुकरात से भी पहले हुए यूनान के एक ओर महान दार्शनिक पाईथो गोरस के विचारों से भी प्लेटो बेहद प्रभावित रहे , खासकर उनके पुनर्जन्म पर धार्मिक विचारों से | राजनीति में प्लेटो ने “दार्शनिक राजा ” की अवधारणा विकसित की – एक ऐसा राजम ,जो बुद्धिमानो की कद्र करता हो और विवेक एवं न्याय से राज्य चलाता हो | उनके इस राजनितिक दर्शन ने उन्हें तत्कालीन यूनानी लोकतांत्रिक प्रणाली का आलोचक बना दिया |

Plato प्लेटो ने कोई शोध प्रबंध ग्रन्थ नही लिखा , बल्कि अपने गुरु सुकरात की तरह पाठको से प्रश्न करने और उन पर स्वयं विचार करने पर जोर दिया | कई बार इससे शंका पैदा होती है कि जब वे पूछने और सोचने पर जोर देते थे , जो कुछ उन्होंने लिखा ,वो यकीनन उनका लिखा है  भी ? कुल मिलाकर वे उपदेशक की बजाय प्रेक्षक ज्यादा रहे | उनके कुछ महत्वपूर्ण वचन है –

“स्वयं को कार्य में लगाये रखे – इस जीवन में और अगले जीवन में भी ; बिना परिश्रम के कोई सामर्थ्यवान नही होता | भूमि अगर उर्वरा भी है . फिर भी उसमे बिना खेती के अच्छी फसल नही होती ”

“शुभ कार्य स्वयं को मानसिक शक्ति देते है और स्वयं दुसरो को भी अच्छे कार्य करने को प्रेरित करते है ”

Plato प्लेटो के अंतिम दिन उनकी संस्था “एकेडमी ” में गुजरे , आखिरी समय वे लिखते ही रहे |  80 वर्ष की आयु में 348 ईसा पूर्व एथेंस में उनका निधन हो गया |

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