भारत के महान वैज्ञानिक , जिन्होंने विश्व में हिन्दुस्तान का परचम फहराया | Great Indian Scientists Biographies in Hindi

Great Indian Scientists Biographies in Hindi

जगदीश चन्द्र बसु (Jagdish Chandra Basu)

30 नवम्बर 1858 को मयरागंज (वर्तमान में बांग्लादेश में ) में जन्म हुआ | 1885 में कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में चयन हुआ किन्तु भारतीय होने के कारण इनका वेतन यूरोपीयन व्याख्याताओ की तुलना में आधा ही निर्धारित हुआ | इन्होने पद स्वीकार कर लिया किन्तु वेतन स्वीकार नही किया | तीन वर्षो बाद इनकी प्रखर बुद्धि का लोहा मानते हुए इन्हें पूरा वेतन दिलवाया | 10 मई 1901 को रॉयल सोसाइटी के वैज्ञानिकों के सम्मुख अपना शोध पत्र पढ़ा तथा प्रयोग द्वारा सर्व प्रथम सिद्ध किया कि पौधों में जीवन होता है |

बेतार का तार का भी इन्होने सर्वप्रथम अविष्कार किया किन्तु इसका श्रेय एक साल बाद मार्कोनी को मिला | माइक्रो\वेव बनाने का श्रेय भी इन्ही को है | इनके द्वारा बनाया गया यंत्र आज भी अनेक इलेक्ट्रॉनिक तथा न्यूक्लीयर यंत्रो में आवश्यक पुर्जो के रूप में प्रयोग किये जाते है | इनका सर्वोत्तम अविष्कार “केस्कोग्राफ” नामक यंत्र है जो पेड़ पौधों की बढत को नाप सकता है | इन्होने कलकत्ता में वैज्ञानिक अनुसन्धान के लिए “बोस इंस्टीट्यूट” की स्थापना की | 23नवम्बर 1937 कको इनका देहांत हो गया |

Read: जगदीश चन्द्र बोस , जिनको बचपन की जिज्ञासा ने बनाया वैज्ञानिक 

प्रफुल्ल चंद राय | Prafulla Chandra Ray Brief Biography in Hindi

प्रफुल्ल चंद राय (Prafulla Chandra Ray) का जन्म 2 अगस्त 1861 को राउली काटीपुरा (अब बांग्लादेश में ) में हुआ था | संस्कृत ,लेटिन ,फ्रेंच तथा अंग्रेजी के मर्मज्ञ होने के साथ साथ ये राजनीती शास्त्र के भी विद्वान थे | विज्ञान की ओर इनका रुझान बेंजामिन फ्रेंकलिन की जीवनी पढने पर हुआ  जिसमे पतंग द्वारा प्रयोग के विषय उन्होंने लिखा था | 1888 में एडिनवरा में D.Sc. की डिग्री लेकर कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवक्ता के रूप में काम मिल गया |

प्रफुल्ल चंद राय (Prafulla Chandra Ray)ने “Bengal Chemical and Pharmaceutical Works ” की स्थापना की | इन्हें भारतीय रसायन उद्योग का जनक कहा जाता है | इनकी सर्वप्रथम खोज सोडा फास्पेट है जिससे अनेक दवाईया बनती है | मर्क्युर्स नाइट्रेट तथा इसके अनेक उत्पादों को भी इन्होने सर्वप्रथम बनाया | इन अविष्कारों से वह अकूत सम्पदा के स्वामी बन सकते थे लेकिन इन्होने सदा साधू के रूप में जीवन व्यतीत किया | “The History of Hindu Chemistry” इनकी प्रसिद्ध पुस्तक है | इनका निधन 1944 में हुआ था |

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया | Mokshagundam Visvesvaraya Brief Biography in Hindi

विश्वेश्वरैया (Mokshagundam Visvesvaraya) का जन्म 15 सितम्बर 1861 को मैसूर में हुआ था | इन्होने सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ली तथा अनेक उप्लाब्दिया हासिल की | खडक वासला बाँध में बाढ़ के पानी को रोकथाम के लिए इन्होने स्वचालित दरवाजो के निर्माण की विधि विकसित की जो अधिक पानी होने की स्थिति में स्वयं खुल और बंद हो सकते थे | कृष्णार्जुन सागर बाँध के निर्माण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही |

मैसूर के चीफ इंजिनियर तथा बाद में दीवान के पद पर कार्य किया | मैसूर राज्य और बाद में भारत सकरार के लिए इन्होने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये , जिनमे अनेक बांधो और पुलों का निर्माण शामिल है | इन्हें अंग्रेजी राज्य से केसरे हिन्द तथा स्वतंत्र भारत में भारत रत्न उपाधियो से सम्मानित किया गया | 14 अप्रैल 1962 को 101 वर्ष की आयु में इनका देहांत हो गया | मरते दम वो क्रियाशील रहे थे |

डी.एन वाडिया | D. N. Wadia Brief Biography in Hindi

डीएन.वाडिया (D. N. Wadia) का जन्म 25 अक्टूबर 1883 को गुजरात के सुरत शहर में हुआ था | बडौदा कॉलेज से M.Sc. पास करने के बाद Prince of Wales College जम्मू में नौकरी आरम्भ की | यहा उन्होंने हिमालय के शिलाखंडो में रूचि पैदा हुयी और इस क्षेत्र में कार्यरत रहते हुए अनेक उपलब्धिया हासिल की | वहा उन्होंने उन शिलाखंडो के बनने और बढने की क्रिया के खुलासा किया और अनेक पेचीदा गुत्थियो को सुलझाया |

loading...

श्रीनिवास रामानुजन

रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को तमिलनाडू के इरोड में हुआ था | बचपन से ही उनमे विलक्षण प्रतिभा के दर्शन होने लगे | 13 वर्ष की उम्र में इन्हें लोनी की त्रिकोणमिति की पुस्तक मिल गयी और उन्होंने शीघ्र ही इसके कठिन से कठिन प्रश्नों को हल कर डाला | इसके अतिरिक्त अपना स्वयं का शोध कार्य भी आरम्भ कर दिया | स्नातक परीक्षा में गणित में प्रथम श्रेणी प्राप्त की किन्तु अन्य विषयों में रूचि न होने के कारण इन्टर की प्रथम वर्ष की परीक्षा में दो बार अनुतीर्ण हुए |

गणित में विशेष योग्यता के कारण उन्हें स्नातक डिग्री न होने के बावजूद रॉयल सोसाइटी और त्रिनित्री कॉलेज का फैलो चुना गया | जी.एच.हार्डी और लिटिलवुड जैसे विख्यात गणितज्ञो के साथ अनेक निर्मेय स्थापित किये | जिनमे हार्डी-रामानुजन-लिटिलवुड तथा रोजर-रामानुजन जैसे प्रसिद्ध प्रमेय शामिल है | 26 अप्रैल 1920 को 33 वर्ष की अल्पायु में इस प्रतिभा का अंत हो गया |

चंद्रशेखर वेंकटरमन (C.V. Raman Brief Biography in Hindi)

चंद्रशेखर वेंकटरमन 07 नवम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था | आरम्भ में इनकी रूचि ध्वनि विज्ञान थी और उन्होंने कलकत्ता स्थित Indian Association for Cultivation of Science में वायलिन तथा सितार में तारो द्वारा स्पंदन के विषय में खोज की किन्तु एक बार विदेश से जहाज में लौटते समय समुद्र की विशाल जलराशि तथा आकाश के नीले रंगो ने उनमे इस विषय में जिज्ञासा उत्पन्न कर दी | इसी के फलस्वरूप उन्होंने “रमन प्रभाव” नामक शोध की जिस पर इन्हें 1930 में नोबेल पुरुस्कार प्राप्त किया | 1924 में इहे रॉयल सोसाइटी का फैलो चुना गया | 1945 में इन्होने बंगलौर में Raman Research Institute की स्थापना की | 21 नवम्बर 1970 को उंनका देहान्त हो गया |

बीरबल साहनी | Birbal Sahni Brief Biography in Hindi

14 नवम्बर 1891 को पंजाब के मेडा नमक स्थान पर इनका जन्म हुआ | लन्दन विश्वविद्यालय से 1919 D.Sc. की देग्री लेकर ए.सी.स्टीवर्ड प्रसिद्ध वैज्ञानिक के साथ कार्य आरम्भ किया | 1929 में वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से D.Sc. की उपाधि पाने वाले प्रथम भारतीय बने | 1936 में रॉयल सोसाइटी के फैलो चुने गये | बिहार में अनेक पौधों की खोज की | वनस्पति विज्ञान के अतिरिक्त कुछ प्राचीन चट्टानों की आयु ज्ञात की तथा पुरातत्व विज्ञानी की तरह कार्य करते हुए 1936 में रोहतक में पुराने सिक्को की खोज की |

मेघनाद साहा | Meghnad Saha Brief Biography in Hindi

मेघनाद साहा (Meghnad Saha) का जन्म 6 अक्टूबर 1893 को ढाका में हुआ था | बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा मौजूद था जिसके कारण उन्होंने ब्रिटिश के स्कूल दौरे का बहिष्कार किया | फलस्वरूप उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया तथा छात्रवृति बंद कर दी गयी | हाई स्कूल पास करने के बाद इन्होने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में दाखिला लिया , जहा इन्हें जगदीश चन्द्र बोस तथा प्रफूल्ल चंद राय जैसे अध्यापक तथा सत्येद्र नाथ बोस और महालनोबीस सरीखे सहपाठियो का सानिध्य प्राप्त हुआ |

एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने एक सूत्र दिया जिसे खगोलशास्त्री सूर्य तथा अन्य सितारों का अध्ययन कर सके | 1927 में रॉयल सोसाइटी के फैलो चुने गये | इन्होने 1948 में कोलकाता में Saha Institute of Nuclear Physics की स्थापना की  इसके अतिरिक्त दामोदर घाटी , भाखड़ा नांगल तथा हीराकुंड परियोजनाओं में भी सहायता की | Science and Culture नमक पत्रिका भी इन्होने आरम्भ की | 1962 में लोकसभा सदस्य चुने गये | 16 फरवरी 1966 को उनका देहावसान हो गया |

इसके बाद अगले अंश में हम आपको  21वी सदी के शुरुवात में जन्मे वैज्ञानिको के बारे में आपको बतायेंगे ताकि भारत के महान वैज्ञानिको के बारे में आपको जानकारी मिल सके |

loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *