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गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Gangotri Travel Guide in Hindi

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गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Gangotri Travel Guide in Hindi
गंगोत्री धाम से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी | Gangotri Travel Guide in Hindi

गंगोत्री (Gangotri) को गंगाजी का उदय स्थल माना जाता है | यह एक बहुत ही पवित्र एवं महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है | यहाँ कई मन्दिर एवं कुंड भी बने है जो दर्शनीय है | इस स्थान का मुख्य मन्दिर गंगा मन्दिर है | इस मन्दिर में गंगा जी की मूर्ति है जो आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्टित की गयी थी | इस मन्दिर में राजा भागीरथ , यमुना ,सरस्वती एवं शंकराचार्य जी की मुर्तिया इसकी शोभा को ओर अधिक बढाती है | मन्दिर में सुवर्ण रचित गंगाजी की मूर्ति है और छत्रमुकुट भी सोने का ही है | यहाँ पर भेदभाव नहे है | अछूत और सवर्ण सबके साथ एक ही व्यवहार होता है |

गंगाजी के मन्दिर के पास ही भैरवनाथ मन्दिर भी है | गंगोत्री में सूर्यकुंड ,विष्णुकुंड और ब्रह्मकुंड आदि तीर्थ है | यही पर राजा भागीरथ द्वारा बैठकर तप किया | इसी स्थान पर एक शिला भी है जो भागीरथ शिला के नाम से प्रसिद्ध है | इस शिला को पिंडदान किया जाता है | यहाँ गंगाजी को विष्णुतुलसी चढाई जाती है | गंगोत्री (Gangotri) स्थान समुद्र स्तर से लगभग दस हजार फुट की उंचाई पर स्थित है | यह गंगाजी के दक्षिण तट पर है यहाँ कई धर्मशालाये है | यात्रियों को यहाँ सदावर्त भी मिलता है | गंगाजी यहाँ केवल 44 फुट चौड़ी है और गहराई लगभग तीन फुट है |

गंगोत्री (Gangotri) से लगभग दो किमी नीचे गौरीकुंड है | यहाँ जाने के लिए गंगाजी को पुल से पार करना है | इस कुंड से होती हुयी केदार गंगा , भागीरथी में मिलती है | गंगाजी से मिल्रने वाली यह पहली नदी है | केदार गंगा के पानी का रंग भूरा है | गंगोत्री से तीन किमी पर पातगनी नामक स्थान है | कहा जाता है कि पांच पांड्वो ने बारह वर्ष तप किया था | यह समस्त स्थान शीतकाल में बर्फ से ढक जाता है |

अन्य दर्शनीय स्थल

लगभग 25 किमी दूर गंगा जी का उदय स्थल गोमुखी धारा स्थित है जो एक पवित्र स्थान है | गोमुख द्वारा गंगाजी की धारा पर्वत से बाहर निकलती हो परन्तु यहाँ बर्फ इतनी रहती है और मार्ग इतना दुर्गम है कि प्रत्येक यात्री वहां पर नही जा सकता है | गंगोत्री (Gangotri) के आसपास जंगल भी बना है किन्तु गोमुखी स्थान वृक्षों से हीन है | गोमुख में ही हिमधारा भगवती भागीरथी के दर्शन करके लगता है कि जीवन धन्य हो गया |

यात्रा मार्ग

यमुनोत्री से वापस गंगाजी तक लौट आना चाहिए | यहाँ से बसे आदि मिल जाती है | उत्तराखंड सरकार ने इस क्षेत्र में अनेक सड़क मार्गो से तीर्थ स्थानो को जोड़ दिया है | अत: अब पैदल यात्रा बहुत कम करनी पडती है | यमुनोत्री से 10 किमी लौट आने पर उत्तराकाशी के लिए मोटर-बसे आसानी से मिल जाती है | गंगोत्री (Gangotri) के लिए ऋषिकेश से भी बसे उपलब्ध है |

ठहरने के स्थान

गंगोत्री के पास अनेक धर्मशालाये एवं आश्रम आदि है जहां तीर्थ यात्री ठहर सकते है | खाने पीने का सामान भी यहाँ उपलब्ध है |

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