Home जीवन परिचय Galileo Galilei Biography in Hindi | गैलिलियो गैलिली की जीवनी

Galileo Galilei Biography in Hindi | गैलिलियो गैलिली की जीवनी

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Galileo Galilei Biography in Hindi
Galileo Galilei Biography in Hindi

जब कोपरनिकस की मृत्यु हुयी उस समय इटली के पीसा नगर में एक युवक गैलिलियो गेलीली (Galileo Galilei) थे जो बाद में केवल गैलिलियो के नाम से प्रसिद्ध हुआ | उसके भाग्य में वृद्ध मनुष्य की बातो को पूरा करना लिखा था जिन्हें कोपरनिकस अपने जीवनकाल में पूरा न कर सका था | गैलिलियो उससे अधिक बहुमुखी प्रतिभा वाला था | वह इतना सर्वतोमुखी प्रतिभा का व्यक्ति था कि अपनी युवावस्था में उसे कुछ दिनों तक सोचना पड़ा कि वह क्या करे | वह निपुण गायक था और वीणा तथा ऑर्गन बजाने में अपने पिता से , जिसका व्यवसाय ही गाना था ,बढ़ कर था | वह उत्कृष्ट चित्रकार था और अच्छी कविता लिख सकता था किन्तु गणित के प्रेम ने उसको विज्ञान की ओर झुकाया |

विश्वविद्यालय में उसके उच्चपदस्थ अध्यापक डरते थे क्योंकि वह ऐसे प्रश्न पूछता था जिनका उत्तर वे न दे सकते थे | वे उसे यह कहकर चुप न कर सकते थे कि “यह अरस्तु में है ” | गैलिलियो (Galileo Galilei) कहता था “हो सकता है किन्तु आप इसका क्या कारण बताते है ” | यह बड़ी घबराहट की बात किसी और विद्यार्थी ने ऐसे पहले कभी नही किया था | युवक गैलिलियो को सभी मेधावी मानते थे किन्तु विज्ञान विभाग में वह बहुत जन-प्रिय न था | अरस्तु और टॉलमी में संदेह नही किया जा सकता था किन्तु गैलिलियो स्वयं हमेशा उत्तर सोचता रहता था |

एक दिन जब पीसा के बड़े गिरजे से वह पूजा के बाद लौट रहा था तो उसकी दृष्टि एक कांसे के विशाल दीपक पर पड़ी जो छत के बीच लटक रहा था | एक परिचारक उसको जलाने आया था इसलिए उसने उसको खींचा किन्तु जब उसने इसे छोड़ दिया तो वृतांश बनाकर झूलने लगा | गैलिलियो ने इसका निरीक्षण किया और देखा कि वृतांश की लम्बाई क्रमश: कम होती गयी किन्तु समय वही लगता था | उसने इसकी कांच अपनी नाडी से की | इस खोज से उसके वैज्ञानिक जीवन का प्रारम्भ हुआ | यह ऐसी बात थी जो गिरिजाघर में प्रतिदिन होती थी किन्तु पेंडुलम की चाल पर किसी का ध्यान आकर्षित नही हुआ था | इस खोज के आधार पर गैलिलियो ने प्रथम नाडी दर्शक यंत्र बनाया जो डॉक्टरों के पास पहले न था |

सन 1571 में गैलिलियो (Galileo Galilei) के पिता ने उसे पीसा के विश्वविद्यालय में औषधियों का अध्ययन करने के लिए भेजा | उन दिनों तक शताब्दियों बाद तक औषधि विज्ञान ही ऐसा विषय था जिसमे वैज्ञानिक अभिरुचि के निर्धन युवक अपना जीवन कार्य आरम्भ करने की सोचते थे | चार वर्ष बाद उसे उपाधि मिली किन्तु आर्थिक कठिनाइयो से उसे अपनी आगे की पढाई छोडनी पड़ी और गणित तथा औषधि विज्ञान के अध्यापन का कार्य करना पड़ा | इस समय में सदैव सोचता तथा प्रयोग करता रहा | अरस्तु ने कहा था कि दस पौंड के वजन से दस गुना जल्दी गिरेगा | 1800 वर्ष तक किसी ने इस पर संदेह न किया किन्तु गैलिलियो ने अपनी कक्षा के लोगो को बताय कि वे एक ही गति से गिरेंगे |

“क्या” सभी शिक्षित लोगो ने कहा “तुम एक नवयुवक हो और सोचते हो कि अरस्तु से अधिक जानते हो ?” वह उस समय 25 वर्ष का युवक था | गैलिलियो ने शान्ति से कहा “आइये और देखिये” पीसा के प्रसिद्ध झुके हुए गुम्बज पर से इसके सार्वजनिक प्रदर्शन की उसने घोषणा की | लोग बड़े उत्तेजित हो गये और गुम्बज के नीचे चारो ओर एक भीड़ एकत्र हो गयी | लोग चोटी पर से झुके हुए गैलिलियो को गर्दन टेढ़ी कर देखने लगे | “सब तैयार हो” एक ही क्षण उसने दस पौंड टॉप का गोला छोड़ा | निश्चय ही दोनों एक ही क्षण पृथ्वी पर पहुचे | एक निमिष मात्र का अंतर न हुआ | प्रमाण बिल्कुल सही था | किन्तु वृद्ध उच्च पदस्थ अध्यापक बड़े नाराज हुए | उन्होंने आपस में कहा कि इस अद्भुत नवयुवक ने काले जादू का प्रयोग किया है क्योंकि अरस्तु कभी गलती नही कर सकता | जो कुछ भी हो , गैलिलियो इस प्रदर्शन से एक ही दिन में प्रसिद्ध हो गया और वह यह दिखाता रहा कि विज्ञान में अरस्तु ने ओर भी गलतियाँ की थी |

गैलिलियो (Galileo Galilei) का सबसे महान समय तब आया जब उसे यह समाचार मिला कि एक डच ने ऐसी खोज की कि दो लेंस को कुछ दूर पर रखकर उनके द्वारा देखने पर दूर की चीजे पास तथा बड़ी दिखाई देती है किन्तु उल्टी | उस पुरी रात वह सोचता रहा कि किस प्रकार उस यंत्र को बनाया जय | प्रश्न यह था कि लेंस को नतोदर रखा जाये या उन्न्दोतर | इसके अतिरिक्त और बहुत सी बाते थी | प्रात:काल होते ही उसका प्रश्न हल हो गया | उस दिन उसने उससे भी अच्छा दुरदर्शक यंत्र बनाया जिसके विषय में उसने सुना था | पर किसी कारण से उसके दुरदर्शक यंत्र में चीज दाहिने भाग में ऊँची दिखाई देती थी |

वह जानता था कि वह इससे भी अच्छा यंत्र बना सकेगा | अगले छ महीने तक वह अपने दुरदर्शक यंत्र पर परिश्रमपूर्वक काम करता रहा | इसके पश्चात उसके पास ऐसा यंत्र हो गया जो किसी वस्तु को हजार गुना बढ़ा कर दिखा सकता था | इसी की वह प्रतीक्षा करता रहा और उसने इसे चन्द्रमा की ओर लगाया | प्रथम बार मनुष्य की आँखों ने वहां से धरातल पर बड़ी पर्वतमालाये देखी जिनकी घनी छाया पडती थी | स्पष्ट रूप से चन्द्रमा पृथ्वी से बहुत मिलता जुलता था | उस समय तक लोगो का विश्वास था कि चन्द्रमा का धरातल चमकीली धातु के गोले की भाँती चिकना और चमकदार था | इसके बाद उसने अपना दुरदर्शक यंत्र सूर्य की ओर लगाया | सूर्य के धरातल पर उसने धब्बे ही नही देखे बल्कि यह भी देखा कि एक ओर ये धब्बे गायब होते जाते थे और दुसरी ओर फिर आते थे | इसका अर्थ यही हो सकता था कि सूर्य अपनी धुरी पर घूमता है |

इसके  बाद उसने अपना दुरदर्शक यंत्र आकाश गंगा की ओर घुमाया और सही परिणाम पर पहूचा कि प्रकाश का यह पीला कुहरा लाखो तारो से बना था | बाद में यह खोज हुयी कि किसी ग्रीक ने पहले ही इसे ठीक कहा था कि शताब्दियों तक यह बात भूली रही | गैलिलियो ने केवल प्रारम्भ किया था | 7 जनवरी 1610 की रात्रि में उसने यह खोज की कि बृहस्पति ग्रह में चार चन्द्रमा थे | बहुत बाद की शताब्दी में बड़े शक्तिशाली दूर-दर्शक यंत्रो से पाँच ओर चन्द्रमा देखे गये | जब इनका समाचार यूरोप में फ़ैला तो लोग बड़े उत्तेजित हुए |

फ्रांस के सम्राट हेनरी ने गैलिलियो से अपने नाम पर एक नये तारे का नामकरण करने के लिए ओर इसके लिए उसे काफी द्रव्य देने के लिए कहा | यह कहना अनावश्यक है कि गैलिलियो “हेनरी” तारे को कभी न पा सका | पॉप ने उसे बुलाया और पेंशन दिया | गैलिलियो ने रोम के एक उद्यान में अपना दुरदर्शक यंत्र स्थापित किया और स्म्भ्रात लोग बड़ी जिज्ञासा से आकाश के नवीन आश्चर्यो को स्वयं देखने आये | 1632 में गैलिलियो ने अपनी मुख्य पुस्तक “गैलिलियो गैलिली के संसार का क्रम” पुस्तक लिखी | इस पुस्तक ने जो दूरदर्शक यंत्र के आधार पर लिखी घई थी सिद्ध कर दिया कि कोपरनिक्स की बात ठीक ही थी | यह पृथ्वी ही है जो विस्तृत मार्ग में सूर्य के चारो ओर घुमती है जिससे वर्ष बनता है यह पृथ्वी ही है जो अपनी धुरी पर घुमती है जिससे दिन-रात होता है | पुस्तक ने सनसनी फैला दी |

जब 8 जनवरी 1642 में इस महान खगोलशास्त्री की मृत्यु हुयी उस समय वह पेंडुलम के सिद्धांत के आधार पर घड़ी बनाता रहा था | जीवन के अंतिम काल में अपने प्रिय दुरदर्शक यंत्र में कभी न देख सकने के कारण उसे उस क्षण की स्मृति आने लगी जिस समय पीसा के गिरिजाघर में घुटने के बल खड़े होते समय उसने लटकते हुए दीपक को देखकर अपना वैज्ञानिक जीवन आरम्भ किया था | यह कोपरनिकस का नवीन विचार था जिसकी सत्यता गैलिलियो और उसके दूरदर्शक यंत्र ने उत्कृष्ट प्रयोगों द्वारा प्रमाणित की थी |

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