स्वदेशी आन्दोलन और भारत में विदेशी कंपनियों की लूट – दूसरा भाग Foreign Companies Loot in India

Rajiv dixit and Baba Ramdevमित्रो स्वदेशी आन्दोलन और भारत में विदेशी कंपनियों की लूट के प्रथम भाग में हमने आपको आजादी से पहले स्वदेशी आन्दोलन के बारे में बताया था इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए आज मै आपको भारत में विदेशी कंपनियों की लुट के बारे में बताना चाहता हु | आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे और कैबिनेट की बैठक हुयी जिसमे ये विचार करना था कि देश का विकास अब कैसे किया जाए क्योंकि भारत की सारी सम्पति तो अंग्रेज लुटकर ले गये | आजादी के वक़्त भारत का खजाना खाली हो चूका था क्योंकि एक तो अंग्रेजो ने लुट लिया था और दूसरा बचा हुआ पैसा 55 करोड़ रूपये विभाजन के दौरान पाकिस्तान को देने पड़े थे |

सरकार के पास अब ये समस्या थी कि उद्योग और व्यापार लगाने के लिए धन की जरूरत थी | पहला तरीका तो ये था कि पूंजी का उत्पादन खेती के जरिये करना चाहिए था लेकिन भारत के नेताओ ने पूंजी के लिए किसानो और खेतो पर ध्यान देने के बजाय कर्ज लेना शुरू कर दिया | जिस हिंदुस्तान ने अपने इतिहास में कभी किसी देश से कर्ज नही लिया था उस भारत को आजादी के बाद पहली बार 1952 में विदेशो से कर्ज माँगा | 1947 तक भारत पर 1 रूपये का कर्ज नही था वही 1952 में विदेशीयों के कर्जदार हो गये | अब कर्ज के बदले भारत को कुछ देना भी था इसलिए अब जिन देशो से भारत ने कर्ज लिया था उन्होंने कुछ शर्ते रखी थी

पहली शर्त ये थी कि भारत विदेशो से जिस मुद्रा में कर्ज लेगा उस मुद्रा की कीमत बढनी चाहिए | मतलब अगर भारत डॉलर में कर्ज लेता है तो डॉलर की कीमत बढनी चाहिए | अब जो रुपया 1947 में एक डालर के बराबर था वही 1952 में एक डालर की कीमत 7 रूपये हो गयी थी | इसके बाद 1982 तक भारत में हर पांच सालो में कर्ज लेना शुरू कर दिया था लेकिन 1982 के भारत ने हर साल कर्ज लेना शुरू कर दिया था | कई बार तो भारत के शाशको को पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए कर्ज लेना पड़ गया था परिणामस्वरुप कर्ज बढ़ता गया | 1991 से भारत में उदारीकरण की निति शुरू हो गयी थी जिसमे कर्ज लेकर विकास करना भारत ने शुरू कर दिया था |

आज के समय में आंकड़ो के अनुसार लगभग 36 लाख करोड़ रूपये का विदेशी कर्ज हो गया इसका मतलब हर हिन्दुस्तानी 36000 रूपये का कर्जदार है | इस तरह कर्ज के कारण 1947 में जो 1 डालर एक रूपये के बराबर था आज 1 डालर की कीमत 60 रूपये से भी ज्यादा हो चुकी है | अब आप सोच रहे होंगे कि डालर की कीमत बढ़ने से उनको क्या फायदा है ?? मित्रो बहुत फायदा है अब हम अगर विदेश में माल बेचते है तो हमे 60 रूपये का माल केवल 1 रूपये में बेचना पड़ता है और विदेश से जो माल खरीदते है वो हमको 1 रूपये के बजाय 60 रूपये में खरीदना पड़ता है | मतलब हम माल को बेचते सस्ता है और खरीदते महंगा है इसलिए हमारा देश ओर ज्यादा कर्ज में डूबता जा रहा है |

अब 1952 में विश्व बांको ने दुसरी शर्त रखी कि जिस भी देश से कर्ज लेगे उस देश को भारत में व्यापार करने की पूर्ण अनुमति होनी चाहिए मतलब भारत में व्यापार करने का लाइसेंस मिलना चाहिए | इस तरह आजादी के समय भारत में 24 देशो की 5000 से भी ज्यादा कंपनिया भारत में व्यापार करने लग गयी | अब हम लोगो को अफ़सोस होना चाहीये कि आजादी से पहले एक कम्पनी ईस्ट इंडिया कम्पनी को हमने 100 सालो तक लाखो लोगो का बलिदान देकर बाहर भगाया था और आजादी के बाद हम 5000 विदेशी कंपनियों के चंगुल में फंस गये | इस तरह इन 5000 कंपनियों ने अब तक भारत से करोड़ो रूपये मुनाफे में लेकर गये |

मै आपको कुछ विदेशी कंपनियों के उदाहरण बताना चाहता हु जिन्होंने भारत में लुट मचा रखी है | जूते बनाने वाली एक कम्पनी बाटा कनाडा की कम्पनी है जिसे भारत ने बाटा इंडिया के नाम से बेचा जाता है | हम समझते है कि ये स्वदेशी कम्पनी है लेकिन ये विदेशी कम्पनी है जो पिछले कई सालो से भारत को लुट रही है | ये कम्पनी भारत से बने जुते खरीदती है उस पर अपना मार्का लगाकर फिर भारत में बेचती है | वो भारत से 100 रूपये का जूता खरीदते है उसको मार्का लगाकर भारत में 600 रूपये में बेचती है और इस तरह एक जुते पर ये 500 रूपये का मुनाफा कमाती है | इस कम्पनी ने भारत में 70 लाख रूपये से व्यापार शुरू किया था और आज ये कम्पनी भारत से एक साल में लगभग 300 करोड़ रूपये से भी ज्यादा कमा लेती है |

loading...

इसके बाद एक दुसरी कम्पनी है जिसका नाम यूनिलीवर है जिसने भारत में अपना नाम हिंदुस्तान यूनिलीवर रख दिया | ये कम्पनी जिस भी देश में व्यापार करती है उसमे अपनापन डालने के लिए उस देश के साथ अपनी कम्पनी का नाम जोड़ देती है | आप खुद इन्टरनेट पर देख लीजिये पाकिस्तान में इसका नाम पाकिस्तान उनिलिवर , श्रीलंका में इसका नाम श्रीलंका उनिलिवर और इंडोनेशिया में इंडोनेशिया उनिलिवर है  मतलब इस कम्पनी ने किसी देश में व्यापार करने का नया तरीका ढूंड लिया | ये कम्पनी मूलतः ब्रिटेन और हॉलैंड जे व्यापरियों की कम्पनी है | इस कम्पनी ने भारत में मात्र 24 लाख रूपये से धंधा शुरू किया था और आज ये कम्पनी भारत से 1 साल में 2000 करोड़ रूपये लुटकर ले जा रही है |

इसके अलावा हमारे देश में एक अमेरिका की कम्पनी कोलगेट पामोलिव है जिसने भारत में 15 लाख से धंधा शुरू किया था और आज ये कम्पनी 300 करोड़ रूपये सालाना भारत से लुटती है | इस तरह की भारत में 5000 से भी ज्यादा विदेशी कंपनिया है जो थोड़ी थोड़ी पूंजी से धंधा शुरू करके करोड़ो की कंपनिया बन गयी है | इस तरह ये सारी कंपनिया एक साल में भारत से लगभग 2 लाख करोड़ रूपये लुटकर अपने देश ले जाती है इसलिए वो देश ओर ज्यादा अमीर बनते गये और भारत गरीब होता गया | आजादी से पहले विदेशी कंपनिया जबरदस्ती लुटती थी लेकिन आजादी के बाद हम खुद खुशी से लुटते है | इन कंपनियों ने भारत की एक बड़ी भारी कमजोरी पकड़ ली थी और हमारी कमजोरी ये है कि अगर कोई हमको बार बार झूठ झूठ बोलता रहे तो एक दिन हम उसको सच मानने लग जाते है |

अब मै बताता हु कि कैसे हमसे झूठ बोलते है | ये विदेशी कंपनिया वाले टीवी पर विज्ञापन दिखाते है | एक विज्ञापन दिन में अगर 100 बार आ जाता है तो हम उस विज्ञापन की बातो को इतना सच मान लेते है कि अगले ही दिन वो सामान बिना सोचे समझे खरीदने चले जाते है | अब विज्ञापनों के बारे में तो आपको पता ही होगा कि जैसे ही आप टीवी चलायंगे तो सबसे पहले आपको विज्ञापन ही दिखेगा | अब आप समाचार चैनलों पर देख लीजिये कि समाचार तो केवल 2 मिनट आता है लेकिन विज्ञापन तीन मिनट आता है इस तरह विज्ञापन ज्यादा आने से हम समाचार तो भूल जाते है लेकिन विज्ञापन याद रह जाता है |

विज्ञापन वाले स्लोगन भी ऐसा बनाते है कि वो आदमी के दिमाग में घुस जता है और उनका विवेक शून्य हो जाता है | अब लाइफबॉय का विज्ञापन “लाइफबॉय है जहा तंदुरुस्ती है वहा ” देखकर लाइफबॉय खरीद लेते है लेकिन आपको पता नही होगा कि ये साबुन सबसे खराब साबुन है | इस साबुन की शुरुवात में कोई इस साबुन को नही खरीदता था क्योकि ये एक कार्बोलिक सोप है जिससे इन्सान नही जानवर नहा सकते थे | कार्बोलिक सोप सभी साबुनों का कचरा होता है जिससे ये साबुन बनता है | इसके अलावा इन विदेशी कंपनियों के डिटर्जेंट पाउडर केवल 20 रूपये में बनता है जिसे वो 150 रूपये में बेचते है | तो आप सोच रहे होंगे कि आपको क्या करना चाहिए तो मित्रो मै आप लोगो से अपील करता हु कि आप भी वही करे जो लाल-बाल-पाल और गांधीजी ने स्वदेशी आन्दोलन में किया था |

आप विदेशी वस्तुओ का बहिष्कार करे और स्वदेशी वस्तुए अपनाए तभी भारत का पैसा भारत में रह सकता है और भारत उन्नति कर सकता है | मित्रो मै आपकी सुविधा के लिए विदेशी और स्वदेशी वस्तुओ की सूची बता रहा हु जिससे आप विदेशी और स्वदेशी वस्तुओ में फर्क समझ सकते है | भारत के विकास की डोर अब आप लोगो के हाथ में है जिस तरह स्व. राजीव जी दीक्षित भारत को पूर्ण स्वदेशी बनाने का स्वप्न लेकर इस दुनिया से विदा हो गये , हमे उनके सपने को साकार करना और भारत देश से इन विदेशी कंपनियों को उखाड़ फेंकना और स्वदेशी वस्तुओ को अपनाना है | जय हिन्द जय भारत

loading...
Loading...

3 Comments

Leave a Reply
  1. बड़ी पीड़ा होती है अपनी देश की इस तरह की हालत को सुनकर | हे प्रभु अब मुझे ताकत दे मैं भी अपने देश के लिए कुछ कर सकूं |आज के बाद भी देश की वास्तविक कभी भी उपयोग नहीं करूंगा भले से उसके बगैर ही मुझको गुजारा करना पड़े तो कर लूंगा | बाबा रामदेव बचालो आप मेरे देश को बाबा रामदेव के संतों अब इस देश की नैया आपके हाथों में ही है आप ही बचा सकते हो आप ही यह देश की हालत सुधार सकती हो |

  2. भाइयो आप सभी भक्तों कुछ समझ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करें | स्वदेशी अपनाओ स्वाभिमान बनो | संतो को सताया जा रहा है जो प्रदेश स्वभिमान की बात कर रहा है उन को नष्ट करने का प्रयास कर रहा है ताकि विदेशी कंपनियों की अधिक से अधिक फायदा हो सके |भाइयों अब जाग जाओ दुश्मन की चाल जरा पहचानो अपनों पर भरोसा करो और गैरों का साथ छोड़ो अपने और पराए की पहचान सीखो जय भारत जय छत्तीसगढ़ जय हिंदुस्तान |

    • मैने एक स्वदेशी टयूब 40 रु में खरीदी 14 घंटे चली, यदि मै रोज स्वदेशी अपनाऊ तो 14000 रु टयुबलाईट का खर्चा एक साल का विदेशी का केवल 100 रुपये. मुर्ख.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *