Florence Nightingale Biography in Hindi | आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाईटेंगल की जीवनी

Florence Nightingale Biography in Hindiवर्तमान युग में अस्पतालों के प्रबन्धन और रोगियों के स्वास्थ्य लाभों में नर्सो का विशेष महत्व है | नर्सो को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है लेकिन 19वी शताब्दी के मध्य तक की स्थिति इसके सर्वथा विपरीत थी | नर्स का कार्य बहुत घटिया समझा जाता था | निम्न वर्ग की महिलाये ही इस पेशे से आती थी | उनमें से अधिकाँश अनपढ़ और चरित्रहीन होती थी और नशा करती थी | उन्हें अपने कार्य के लिए कोई व्यवस्थित ट्रेनिंग भी नही मिलती थी | इस पेशे को सम्मान दिलाने का श्रेय फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) को जाता है |

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फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई 1820 में एक धनी परिवार में हुआ था | उस युग के ब्रिटिश वैभवपूर्ण जीवन के प्रति उन्हें कोई आकर्षण नही था इसके विपरीत दुखी मानवता के लिए उनके हृदय में अपार संवेदना थी | सन 1840 में इंग्लैंड में भयंकर अकाल पड़ा और अकाल पीडितो की दयनीय स्थिति देखकर वह बैचैन हो गयी | अपने एक पारिवारिक मित्र डा. फोउलेर से उन्होंने नर्स बनने की इच्छा प्रकट की | उनका यह निर्णय सुनकर उनके परिजनों और मित्रो में खलबली मच गयी |उनकी माँ को यह आशंका थी कि उनकी पुत्री किसी डॉक्टर के साथ भाग जायेगी | ऐसा इन दिनों शायद आम था |

इतने प्रबल विरोध के बावजूद फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) ने अपना इरादा नही बदला | विभिन्न देसों में अस्पतालों की स्थिति के बारे में उन्होंने जानकारी जुटाई और शयनकक्ष में मोमबत्ती जलाकर उसका अध्ययन किया | उनके दृढ़ संकल्प को देखकर उनके माता-पिता को झुकना पड़ा और उन्हें कैन्सवर्थ संस्थान में नर्सिंग की ट्रेनिंग के लिए जाने की अनुमति देनी पड़ी | सन 1854 में क्रीमियम युद्ध में फ्लोरेंस नाईटेंगल को The Lady With a Lamp का उपनाम टाइम्स अखबार में छपी इस खबर के आधार पर मिल गया

“वह तो साक्षात देवदूत है | दुर्गन्ध और चीख पुकार से भरे इस अस्थायी अस्पतालों में वह एक दालान से दुसरे दालान में जाती है और हर एक मरीज की भावमुद्रा उनके प्रति आभार और स्नेह के कारण द्रवित हो जाती है | रात में जब सभी चिकित्सक और कर्मचारी अपने अपने कमरों में सो रहे होते है तब वह अपने हाथो में के लैंप लेकर हर बिस्तर तक जाती है और मरीजो की जरुरतो का ध्यान रखती है ”

सन 1859 में फ्लोरेंस नाईटेंगल (Florence Nightingale) ने सेंट थोमस अस्पताल में नर्सिंग ट्रेनिंग की स्थापना की | अक्टूबर 1854 में उन्होंने 38 स्त्रियों के दल के एक दल को घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा था | उन्होंने Notes of Nursing नामक पुस्तक लिखी थी | जीवन का बाकी समय उन्होंने नर्सिंग को बढ़ावा देने और इसे आधुनिक रूप देने में बिताया | सन 1861 में उन्हें महारानी विक्टोरिया ने Royal Red Cross Medal देकर सम्मानित किया | 90 वर्ष की आयु में 13 अगस्त 1910 को उनका निधन हो गया |

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