Siachen Glacier , जहा Indian Soldiers शून्य से कम तापमान पर करते है देश की सुरक्षा | Facts of Indian Soldiers at Siachen Glacier in Hindi

Facts of Indian Soldiers at Siachen Glacier in Hindi

The Life of Siachen Soldiersसियाचीन ग्लेशियर दुनिया की सबसे उची रणभूमि है जहा भारत के Siachen Soldiers जवान शून्य से 50 डिग्री से कम तापमान पर भारत के सीमाओ की सुरक्षा करते है | इस जगह पर 13 अप्रैल 1984 से लगातार भारत और पाकिस्तान के जवान तैनात है जो अपने अपने देश की आतंकवादियों से सुरक्षा करते है | ये जगह समुद्रतल से 6000 मीटर की उचाई पर है जहा हर चीज जम जाती है | यहा पर सेना के जवान लड़ाई से ज्यादा मौसम के कारण मर जाते है | आइये आज हम आपको सियाचीन का इतिहास और जवानो Siachen Soldiers के जीवन के बारे में विस्तार से बताते है |

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सियाचिन ग्लेशियर विवाद का इतिहास | History of Siachen Glacier in Hindi

Map Siachen Kashmir1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया था लेकिन उस समय जम्मू कश्मीर पर महाराजा हरी सिंह का राज था | आजादी के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान ने हमला कर दिया जिसके लिए महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद मांगी | भारत में विलय होने की शर्त पर जम्मू कश्मीर की सुरक्षा के लिए भारत ने अपनी सेना भेजी और पाकिस्तान को खदेड़ दिया | अब जम्मू कश्मीर भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जो टुकडो में बंटा हुआ है जिसका हर हिस्सा अलग अलग देश ने हथिया लिया था | हम भारत के नक्शे में पुरे जम्मू कश्मीर को भारत में बताते है जम्मू कश्मीर का आधे से ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान और चीन के कब्जे में है |

1962 में अक्साई चीन को चीन ने हथिया लिया क्योंकि भारत उस युद्ध में सेना की कमी के कारण हार गया था | दुसरी तरफ पाकिस्तान ने आजाद कश्मीर नामक कश्मीर के हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया | इसके साथ ही पुरे काराकोरम पहाडी पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया | अब केवल सियाचीन ग्लेशियर बच गया था | 1970 और 1980 के दशक में पाकिस्तान ने कई पर्वतारोहियों को इस ग्लेशियर पर चढने की अनुमति दे दी और इस काम के लिए पाकिस्तान सरकार की अनुमति लेनी पडती थी | एक बार इस बात को जानते हुए भी भारतीय सेना के कर्नल कुमार ने 1978 में एक सैन्य अभियान में भारतीय सेना को उस ग्लेशियर पर चढ़ा दिया |

इस सैन्य अभियान के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद की शुरुवात हो गयी थी जिसका जिक्र 1982 के कलकत्ता अख़बार में हुआ था | इसके बाद 13 अप्रैल 1984 को भारतीय सेना की कुमाऊ रेजीमेंट ने मेघदूत ऑपरेशन चलाया और भारतीय वायु सेना को ग्लेशियर तक भीजा | उधर पाकिस्तान भी अपनी सेना के साथ तैयार खड़ा था | एक सप्ताह के अंदर भारत ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया और सियाचीन ग्लेशियर का अधिकतर हिस्सा अपने अंदर ले लिया |  अब सिया-ला और बिलफोंड-ला को भारत ने अपने कब्जे में ले लिया जबकि ग्योंग-ला पाकिस्तान के कब्जे में रह गया | उस दिन से दोनों देशो की सेनाओ ने इतनी उचाई पर अपनी सेना को सुरक्षा के लिए भेज रखा है |

भारतीय सेना K-2 और उसके आसपास की पहाडियों को ब्लोक कर दिया जिसके कारण पाकिस्तानी ग्लेशियर के उपर नही जा सकते जबकि भारतीय नीचे नही उतर सकते है | वर्तमान में ग्लेशियर का एक-तिहाई हिस्सा भारत के कब्जे में है फिर भी भारत -पाकिस्तान के बीच चोटी मोटी मुठभेड़ होती रहती है लेकिन मुठभेड़ से ज्यादा जवान ठंड के कारण मर जाते है | दोनों देशो ने ठंड , हिमस्खलन और दुसरे कारणों के कारण अपने 4000 जवानो को खो दिया है | दोनों देशो को मिलाकर 150 आउटपोस्ट है जिसमे 3000 सैनिक हमेशा तैनात रहते है | इन आउटपोस्ट का हर साल दोनों देशो को करोड़ो रूपये का खर्च होता है |

भारतीय सेना यहाँ पर केवल हेलीकाप्टर से आ सकती है जबकि पाकिस्तानी सेना ने बर्फ में रास्ता बना लिया है | भारत ने 21000 फीट पर दुनिया का सबसे उचा हेलिपैड बनाया है जिसका नाम सोनम है | औसत रूप से देखा जाए तो हर दुसरे दिन पाकिस्तान के चार जवान और भारत का एक जवान इस ग्लेशियर में मारा जाता है | भारत ने अब तक 850 से भी ज्यादा जवान इस ग्लेशियर में खोये है जिसका एकमात्र कारण खराब मौसम और ठंड रहा है |

Unknown Facts of Indian Soldiers at Siachen Glacier in Hindi

01 Safety Dresses to Overcome Deadly Frostbite

Saftey Dresses to Ocercome Deadly Frostbite

यहा के मौसम में जवानो को ऐसे कपड़े पहनने पड़ते है जिससे शरीर का कोई अंग बाहर ना रहे | हाथो में दस्ताने पहने बिना आप गन भी नही चला सकते है और अगर यहा पर बिना दस्ताने पहने जवान 15 सैकंड भी स्टील को छु ले जैसे अगर उसने बंदूक को पकड़ रखा हो तो वो घातक शीतदंश का शिकार हो जाता है | इस वजह से कई जवान अभी तक अपनी जान गंवा चुके है क्योंकि ऐसी परिस्तिथि में आपके अंग काम करना बंद कर देते है और आपको मदद मिलने से पहले आपकी मौत हो जाते है | 18000 फीट की उचाई पर तो बंदूके तक जम जाती है जिनको स्टोव पर गर्म कर वापस सामान्य किया जाता है |

02 Only Super Soldier Can Survive

Only Super Soldier Can Surviveइस जगह पे केवल Super Siachen Soldiers ही टिक पाते है क्योंकि इस 5000 मीटर की उचाई पर तापमान शून्य से 50 डिग्री कम हो जाता है | ऐसी स्थिथि में अपने शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है | आपको जानकर हैरानी होगी कि सियाचीन ग्लेशियर पर केवल 10 प्रतिशत ऑक्सीजन ही है | गर्मियों में भी यहा तापमान शून्य से नीचे रहता है और सर्दियों में तो शून्य से 60 डिग्री तक चला जाता है | ऐसी भयंकर सर्दी में जवान तीन महीनों तक नहा भी नही पाते है क्योंकि नहाने का मतलब मौत को बुलावा देना होता है | आजकल सेना ने कुछ विशेष कमोड तैयार कर दिए जिससे जवान एक महीने में एक बार नहा सकता है |

सियाचीन में हर जवान की तीन महीनों के लिए तैनाती होती है इसलिए गर्म कपड़े और मौजे पहले ही भेज भेज दिए जाते है | सैनिको के पास Integrated Shelter Hut होते है जो उनको खराब मौसम में बचाते है | Siachen Soldiers को Sleeping Bag में सोना पड़ता है और खुद को गर्म रखने के लिए ये अपने टेंट में एक ख़ास अंगीठी इस्तेमाल करते है |

03  Loosing Body Weight and Memory Loss

Loosing Body Weight and Memory Loss5000 मीटर की इस उचाई पर आपके शरीर का भार कम हो जाता है  क्योंकि इस जगह पर ना तो आपको भूख लगती है और ना ही ढंग से नींद आ पाती है | जिसके कारण जल्द ही आपके शरीर की हालत बिगड़ने लग जाती है यहा पर आपक बोलने में ही कपकपी छुट जाती है तो ब्रश करने की बात तो दूर है क्योंकि यहा पर टूथपेस्ट भी जम जाता है | ओक्सीजन की कमी के कारण यहाँ कई बार जवानो को कम सुनाई देना , कम दिखाई देना और मेमोरी लोस जैसी बीमारिया भी होती है जिसके कारण उनको उपचार के लिए नीचे बेस कैंप में भेजना पड़ता है |

05 Deadly Snowstorms

Deadly Snowstormsयहाँ पर 3 हफ्तों तक लगातार बर्फ की आंधिया चल सकती है | यहा पर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीले और ठंडी हवाए चलती है जिसके कारण तापमान बहुत ज्यादा गिर जाता है | यहाँ हर साल सियाचीन में 35 फीट उची बर्फ की परत जम जाती है | यहा पर बर्फ की आंधियो के वक़्त भी हमेशा दो या तीन जवानो Siachen Soldiers को जागना पड़ता है ताकि दुश्मन हमला ना कर दे |ऐसे मौसम में जवानो को इग्लू जैसे घरो में रहना पड़ता है जिसमे अंदर एक केरोसीन स्टोव होता है जिससे गर्माहट मिल सके | यहा पर पानी गर्म करते ही नही पिया गया तो थोड़ी देर में ही वापस जम जाता है | जवानो को यहाँ जमी बर्फ पिघलाकर ही पानी पीना पड़ता है |

06 Try to Find Ways to Get StressFree

Try to Find Ways to Get StressFreeयहा पर भी लोग मनोरंजन के साधन ढूंड ही लेते है मौसम साफ़ होने पर ये क्रिकेट और वोलीबाल भी खेलते है जिससे इनके शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और मौसम खराब होने पर टेंटो के अंदर शतरंज , केरम जैसे खेल खेलते है जिससे उनका दिमाग सुन्न ना हो जाए |

07 Unable to Get Fresh Food

Unable to Get Fresh Food

सियाचीन एक ऐसी जगह है  जहा पर संतरा या सेव लाते ही वो क्रिकेट के बॉल की तरह सख्त होकर जम जाता है | यहा पर एक रोटी की कीमत पहुचते पहुचते 200 रूपये हो जाती है यहा पर ताजा खाना तो मिलना नामुनकिन है इसलिए टिन के दब्बो में बना बनाया खाना भेजा जाता है जिससे वो अपना काम चलाते थे | यहाँ की सर्दी में वो कोई फल भी नही खा सकते हिया क्योंकि किसी भी फल को यहा बर्फ का गोला बनने में देर नही लगती है |

यहा प्रतिदिन हेलीकाप्टर ने जवानो के लिए टिन के दब्बो में खाना आता है जो हेलीकाप्टर से जवानो के कैंप में गिरा देते है क्योंकि सभी कैंपो पर प्लेन नेहे उतर सकता है |उन पायलट के पास हर जगह पर 1 मिनट से भी कम समय मिलता है क्योंकि प्लेन की स्थिरता कम रहती है | कई बार मौसम खराब होने के कारण हेलिकॉप्टर जवानो तक नही पहुच पाता है और अगर पहुच भी गया तो बर्फ की चादर में दफन हो जाता है इसलिए कई बार जवानो को भूखा भी सोना पड़ता है |

यहा पर गिराए गये राशन के सामान को Siachen Soldiers बर्फ के बनाये घरो इग्लू में Sno-Scooter के माध्यम से लाते है | खाना धीरे धीरे खूब चबाकर खाना पड़ता है ताकि वो हजम हो जाए | Siachen Soldiers को कूड़ा फैलाने की मनाही है क्योंकि पाकिस्तान की तरफ से कौवे चले आते है तथा पाकिस्तानी जवान कई बार उन कौवो की दिशा में फायरिंग करना शुरू करने लगते है |

08 Expenses for Siyacheen Army

Expenses for Siyacheen Army

सियाचीन पर तैनात Siachen Soldiers के लिए करोड़ो रूपये खर्च होते है ताकि ऐसी विषम परिशिथितो में भारत की रक्षा कर सके | एक आंकड़े के अनुसार सियाचीन पर तैनात जवानो पर प्रतिदिन 6 करोड़ रूपये खर्च होते है इसका मतलब साल भर में लगभग 2000 करोड़ रूपये खर्च हो जाता है क्योंकि वहा पर तैनात सैनिको ले लिए बंदूके , टेंट , खाना , कपड़े और हेलिकॉप्टर पर इतना खर्च हो ही जाता है | यहा के जवानो के लिए भारत सरकार तीन लेयर वाला Extreme Cold Weather Clothing System मुहैया कराती है जिसके एक सेट की कीमत लगभग 35000 रूपये होती है

सोचिये अगर पाकिस्तान सियाचीन मामले में विवाद नही करता तो भारत के करोड़ो रूपये बच जाते जिसको उपयोग देश के विकास में किया जा सकता था | फिर भी भारत को अपनी सीमा की सुरक्षा तो करनी है चाहे कितने पैसे लगे या कितने जवान शहीद हो जाये |

09 Causalities from Weather

Causalities from Weatherयहा पर पिछले 30 सालो में 850 से भी ज्यादा Siachen Soldiers ने अपनी जान खो दी और उसका सबसे बड़ा कारण यहा का खराब मौसम है | यहा पर कई बार मरने वालो की लाशे सालो सालो तक नही मिलती है क्योंकि वो बर्फीली हवाओ में दफन हो जाती है | हवलदार गया प्रसाद क शव तो 18 साल बाद सियाचीन में पाया गया | | सियाचीन में मरने वाले लोगो के लिए नुबरा नदी के किनारे एक  स्मारक बनाया गया है जहा पर सियाचीन में जान खोने वाले हर जवान का नाम दर्ज है |

सियाचीन में जवान 80 प्रतिशत से ज्यादा समय जवान तैनाती पर लगे रहते है | यहा पर भारत  का Defence Research and Development Organisation सियाचीन में जवानो के रहने के लिए ओर बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा जिसके फलस्वरूप पिछले कुछ सालो में जवानो की मौत में कमी हुयी है | 2013 में मरने वाले जवानो की संख्या 12 . 2014 में 10 और 2015 में घटकर 6 रह गयी है | उधर पाकिस्तान ने अब तक 250 जवानो की जाने गवाई है क्योंकि वो सियाचीन के निचले इलाके में तैनात है |

10 Save Country Save Nation

सियाचीन पर तैनात भारतीय जवान दिन रात सीमाओं पर भारत की रक्षा करते है ताकि आप चैन की नींद सो सके | ऐसी कठिन परिष्ठिथियो में वो सियाचीन के बर्फीले इलाको में तीन महीने गुजारते है जिनमे से कई लोगो को पता होता है कि वो कभी वापस लौट कर नही आयेंगे फिर भी देश के लिए न्योछावर होने वाले इन बहादुर भारतीय जवानो को सलाम और शत शत नमन

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