Doordarshan History in Hindi and Old DD Serial दूरदर्शन का इतिहास और पुराने धारावाहिक

Doordarshan History in Hindi and Old DD Serial

Doordashan History and Old DD SerialDoordarshan History and Old DD Serial मित्रो जैसा कि आप जानते है कि दूरदर्शन पहला हिंदी टीवी चैनल है जिसने ना केवल भारत को मनोरंजन दिया बल्कि भारत के लोगो को एकता के सूत्र में बाँधा है | आज हम आपको दूरदर्शन के इतिहास और प्रसिद्ध धारावाहिकों से आपको रूबरू करवाएंगे |

Doordarshan History in Early Stage in End of 50s

Doordarshan Old News ReadersDoordarshan दूरदर्शन का पहला प्रयोगात्मक प्रसारण 15 सितम्बर 1959 में दिल्ली से शुरू किया गया जिस समय दूरदर्शन के पास एक छोटा ट्रांसमीटर और एक अस्थायी स्टूडियो था | उस समय प्रसारण केवल प्रयोग के तौर पर किया जाता था जो केवल 40 किमी की रेंज तक ही सीमित था | उस समय दिल्ली के शहरी इलाको में प्रयोग के तौर पर 21 टीवी सेट लगाये गये थे  उसके बाद UNESCO से सहायता मिलने पर 50 टीवी सेट का प्रबंध किया गया था | शुरुवात में हर सप्ताह 2 बार 20-20 मिनट के सामाजिक जागरूक कार्यक्रम और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम प्रसारित किये जाते थे |

60 के दशक का दूरदर्शन | Doordarshan History in 60s

Doordarshan and All india Radio

1961 में फोर्ड फाउंडेशन से सहायता मिलने के बाद दिल्ली के स्कूलों के लिए दूरदर्शन के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम प्रसारित किये जाते थे | दूरदर्शन का दैनिक प्रसारण 1965 से प्रारम्भ हुआ जब दूरदर्शन आल इंडिया रेडियो का भाग बना | Doordarshan दूरदर्शन पर पहला प्रसारण समाचार का था | 1965 में ही पहली बार पांच मिनट का समाचार प्रसारण किया गया और प्रतिमा पुरी पहली समाचार वाचिका थी | 1967 में समाचार वाचन के लिए सलमा सुल्तान ने दूरदर्शन से जुड़ गयी और बाद में एक समाचार वाचिका बन गयी |

1967 से ही भारतीय कृषि संस्थान द्वारा कृषि दर्शन कार्यक्रम की शुरुवात हुयी जो दिल्ली के आसपास के 80 गाँवों में प्रसारित होता था क्योकि अव दूरदर्शन की रेंज 80 किमी हो चुकी थी |उस समय Doordarshan दूरदर्शन पर समाचार के अलावा कुछ नही आता था और उस लोगो में टीवी के प्रति जागरूकता भी नही थी और ये भी कह सकते है कि टीवी ही नही थी | Doordarshan दूरदर्शन पर जब समाचार नही आते तो काली धारिया आने लग जाती थी |

70 के दशक का दूरदर्शन | Doordarshan History in 70s

Doordarshan Logo Old1970 के दशक की शुरुवात में दिल्ली और आस पास के क्षेत्रो में 20,000 टीवी सेट बिक गये थे | 1972 में Doordarshan दूरदर्शन ने अपने केंद्र बॉम्बे और अमृतसर में भी बना लिए थे | 1975 तक केवल सात भारतीय शहरों में टीवी केंद्र बने थे और Doordarshan दूरदर्शन भारत में एकमात्र टेलीविजन का एकमात्र प्रदाता था | 1 अप्रैल 1976 को टीवी को रेडियो से अलग कर दिया गया और इसकी  घोषणा स्वयं तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दूरदर्शन पर की | इस घोषणा में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने टीवी के विकास के लिए इन दोनों माध्यमो को अलग करने की बात कही |अब आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन Doordarshan दोनों के लिए अलग अलग अधिकारी नियुक्त किये गये |Doordarshan Old ShowsDoordarshan दूरदर्शन का प्रतीक जिसमे पहले उसके नीचे आकाशवाणी लिखा रहता था उसे हटाकर एक नया लोगो तैयार किया गया | इस प्रतीक के मध्य में Doordarshan दूरदर्शन और नीचे की तरफ सत्यम शिवम सुन्दरम लिखा रहता था |नये प्रतीक के साथ एक नई धुन भी रखी गयी जिसका संगीत पंडित रविशंकर ने दिया था |Doordarshan दूरदर्शन उस समय ब्लैक एंड वाइट था और 1979 से समाचारों के अलावा अब संगीत और नृत्य कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाने लगे | जिसमे “अखिल भारतीय संगीत एवं नृत्य कार्यक्रम” और “भरत-नाट्यम” जैसे कार्यक्रम प्रसारित किये जाते थे |

दर्शको को पहली बार समाचारों के अलावा दुसरे कार्यक्रम देखने को मिले थे जिससे लोगो में दूरदर्शन के प्रति थोड़ी रूचि बढी |  अब समाचारों में भी अंतर्राष्ट्रीय खबरे भी दिखाई जाने लगी | अब कुछ लाइव कार्यक्रम भी प्रसारित किये जाने लगे जिसमे से एक कार्यक्रम में आपको सुनील दत्त और अशोक कुमार जैसे दिग्गज अभिनेता देखेने को मिलेंगे | अब दूरदर्शन ने फिल्म प्रसारण भी शुरू कर दिया और साथ ही एक ऐसा शो भी शुरू जिसे आप आज भी याद करते होंगे उसका नाम है चित्रहार | यह 1970 के दशक में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो था जिस पर नये पुराने गाने दिखाए जाते थे | ये शो हर शुकवार शाम सात बजे आधे घंटे के लिए प्रसारित होता था | उस ज़माने में जब फिल्म देखना नसीब नही होता था तो लोग गाने सुनकर ही खुश हो जाते थे |phool khile hain gulshan gulshan tv show tabassumउस समय “फुल खिले है गुलशन गुलशन” भारतीय टीवी इतिहास का पहला टॉक शो था जो 1972 से 1993 तक प्रसारित किया गया था | इस टॉक शो में बाल अभिनेत्री से होस्ट बनी तब्बसुम ने बॉलीवुड और टीवी के कई  कलाकारों का साक्षात्कार किया | यह शो हर शुक्रवार रात 9 बज्र प्रसारित होता था |एक टीवी इंटरव्यू में तब्बसुम में बताया कि उस समय उनको उस समय 75 रूपये हर एपिसोड का दिया जाता था लेकिन टीवी पर लाखो लोगो के सामने आने के लिए उन्होंने इस शो को अपना लिया | अब दूरदर्शन  की लोकप्रियता बढ़ने लगी थी और लोग समाचार वाचको को भी पहचानने लग गये थे |

80 के दशक का दूरदर्शन | Doordarshan History in 80s

Doordarshan 1982 Asian Games15 अगस्त 1982 में पहली बार दूरदर्शन पर रंगीन प्रसारण शुरू हुआ और स्वतंत्रता दिवस का सीधा प्रसारण टीवी पर रंगीन दिखाया गया जिस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी | इसके तुरंत बाद एशियाई खेलो का आयोजन हुआ और उस समय देश की लगभग 90 प्रतिशत जनता तक  दूरदर्शन की पहुच थी | उस समय तक 46 दूरदर्शन स्टूडियो तैयार हो गये थे | 1982 में दूरदर्शन एक राष्ट्रीय प्रसारक बन गया और राष्ट्रीय चैनल के रूप में कृषि दर्शन पहला कार्यक्रम था जो भारतीय टीवी इतिहास का सबसे ज्यादा लम्बा चलने वाला शो था |Doodarshan Bhooli Bisri Yaadein1983 में भारत क्रिकेट विश्व कप जीत गया था जिसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था जिसे पुरे देश की जनता ने एक साथ देखा था | इस वजह से दूरदर्शन पर खेलो के कारण लोगो की रूचि बढ़ने लगी थी | इसके अलावा दूरदर्शन पर दिखाया जाने वाल वो वाकिया आपको याद ही होगा जब पहली बार इंदिरा गांधी ने चाँद पर जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा से सीधी बात की और पूछा “उपर से भारत कैसा लगता है ” तो राकेश शर्मा ने जवाब दिया “मै यहाँ पर आकर गर्व से कह सकता हु कि सारे जहा से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ” | इस प्रसारण से लोगो में जोश आ गया था | अब दूरदर्शन पर कई प्रादेशिक प्रसारण भी किये जाने लगे और मुझे आज भी याद है हर शाम को राजस्थान में जयपुर से शाम को प्रसारण होता जिसमे गोरबंद जैसे नाटक आते थे |DD Old Serial1984 में DD2 नाम का एक नया चैनल शूरू किया गया जिस पर अंतर्राष्ट्रीय फिल्मे दिखाई जाती थी | इस चैनल पर बॉलीवुड के कई मशहूर निर्माताओ को अपने सीरियल प्रसारण के लिए आमंत्रित किया जाता था | सत्यजीत राय प्रेमचन्द के उपन्यास पर आधारित  “सतगति” नाम की एक शोर्ट फिल्म प्रसारित की थी |  1980 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक “हम लोग ” और  “बुनियाद ” थे जिससे टीवी जगत में एक क्रांति आ गयी |  “हम लोग” भारतीय टीवी जगत में प्रसारित होने वाला पहला धारावाहिक था जिसका प्रसारण 1984 से शुरू हुआ | इसके बाद विभाजन पर आधारित धारावाहिक  “बुनियाद ” शूरू हुआ और इस धारावाहिक की लोकप्रियता इतनी थी कि पाकिस्तान में इस धारावाहिक को देखने के लिए सड़के सूनी हो जाती थी |Ramayan Ramanand Sagar 1इसके बाद कॉमेडी शो “ये जो है जिन्दगी ” को भी खूब लोगो ने सराहा और “नुक्कड़”  जैसे नाटक सामने आये | 80 के दशक के अंत में  प्रसारित होने वाले रामायण और महाभारत ने तो टीवी जगत में बहुत बड़ी क्रांति ला दी और लोग जिस काव्य को आज तक सिर्फ किताबो में पढ़ रहे थे उनको जीवंत देखने का अवसर मिला | ये ऐसे सीरियल थे जिनको बच्चे से लेकर बूढा तक देखता था | इन सीरियल का समय होते ही सडको पर लोग नजर नही आते थे सभी टीवी के आगे चिपक के बैठ जाते थे | उस समय में टीवी बहुत कम लोगो के पास हुआ करती थी लेकिन जिसके पास होती थी उसके घर में पडौस के सभी लोग इकट्ठा हो जाते थे | हर पात्र को जीवंत देखते थे उस समय राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को वास्तविकता में राम और नितीश भरद्वाज को कृष्ण समझने लगे थे |DD serials ever seenइसके बाद जवाहरलाल नेहरु की किताब “डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया ” पर आधारित सीरियल “भारत एक खोज ” प्रसारित किया जाने लगा जिसमे भारत का सम्पूर्ण इतिहास दिखाया गया जिससे भारतीय लोगो को भारत के इतिहास की जानकारी मिली | इसके बाद करमचन्द , व्योमकेश बक्शी ,अलिफ़ लैला ,मिर्जा ग़ालिब , टर्निंग पॉइंट ,मालगुडी डेज , सुरभि ,फ़ौजी , शांति , सर्कस चन्द्रकान्ता , नीम का पेड़, वागले की दुनिया जैसे धारावाहिकों ने दूरदर्शन पर समा बाँध दिया | इन धारावहिको के बीच में विज्ञापन आने भी शुरू हो गये थे और जिन कंपनी ने दूरदर्शन से विज्ञापन शुरू किया वो आज देश की जाने माने ब्रांड बन गये जिनका करोड़ो में टर्न ओवर है |

Doordarshan दूरदर्शन पर हर शुक्रवार को नई फिल्म आती थी जो भले ही 5 साल पुरानी हो लेकिन हमारे लिए तो नई ही होती थी | शनिवार को पुरानी फिल्म आती थी जिसमे ज्यादातर फिल्मे अमिताभ ,मिथुन ,धर्मेन्द्र ,दिलीप कुमार और राज कपूर की हुआ करती थी | रविवार को शाम को 4 बजे नई फिल्म आती थी और रविवार रात को 12 बजे प्रादेशिक फिल्म आती थी | कभी भूल से रात को टीवी चालू रह जाये तो 2 बजे के बाद तो धारिया आनी शूरू हो जाती थी जो वापस 4 या 5 बजे वापस शूरू होती थी | रोज शाम को आठ बजे आधे घंटे हिंदी समाचार और आधे घंटे अंग्रेजी समाचार आते थे मुझे पता नही इतनी देर समाचारों को कैसे झेल लेते थे |

1990 के दशक तक Doordarshan दूरदर्शन भारत का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला चैनल था लेकिन बाद में जी टीवी , स्टार प्लस  और ढेर सारे प्राइवेट चैनल  आने के बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता धीरे धीर कम होती गयी | 80 के दशक में जिस चैनल को भारत की 90 प्रतिशत जनता देखती थी उसको आज भारत की 1 प्रतिशत जनता भी मुश्किल से देखती है | दूरदर्शन को अब लोग सिर्फ क्रिकेट मैचों के दौरान देखते है बाकि ये सुना पड़ा रहता है | लेकिन 80 के दशक के जन्मे लोग दूरदर्शन को कभी नही भूल सकते है |

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3 Comments

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  1. सर मेरा नाम मुकेश कुमार है सर मुझे एक जानकारी चाहिए थे जो मेरे लिए बहुत ही जरूरी है सन 1990 में bobby फिल्म दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी मुझे इस फिल्म की एग्जैक्ट डेट जानिए सर क्योंकि इसी दिन मेरा जन्म हुआ था मुझे अपना डेट ऑफ बर्थ नहीं पता है अगर आप इतना कर दे तो मेरे लिए बहुत उपकार होगा क्योंकि मैं पिछले 6 सालों से यही चीज पता करने की कोशिश कर रहा हूं किसी भी ऑनलाइन डिटेल में है इसके बारे में नहीं है प्लीज टू हेल्प please forget se helper son it’s a humble request to you I hope you will reply my question please answer this question so please

    • मुकेश ये तो बहुत मुश्किल है लेकिन आप खुद दूरदर्शन के दिल्ली केंद्र में जाकर इसका प्रयास कर सकते है लेकिन ऑनलाइन आपको कही जानकारी नही मिलेगी |

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