भीम और बकासुर की कहानी Demon Bakasura Story in Hindi

हिन्दू ग्रन्थ महभारत में एक बकासुर Bakasura नामक राक्षश था जिसका वध भीम ने किया था | वो राक्षस एकचक्रनगर नाम के गाँव में रहता था और वहा के राजा को भारी मात्रा में भोजन भेजने को बाध्य करता है | वो राक्षश Bakasur भोजन के साथ भोजन भेजने वाले को भी निगल जाता था | कुंती के निर्देशानुसार उसका पुत्र भीम भोजन लेकर बकासुर Bakasur के पास जाता है और उसका वध कर देता है |आइये इस कहानी Demon Bakasura Story in Hindi को विस्तार से सुनाते है Demon Bakasura Story in Hindi

पांडव और उनकी माता वनवास पर थे | एक दिन जगह जगह घूमते हुए वो एक शांत गाँव में पहुचे | वहा पर वो एक ग्रामीण ब्राह्मण के यहाँ पर रुके  जिसने उन्हें आश्रय दिया | उस ब्राह्मण के एक पुत्री और एक पुत्र था | कुछ दिनों तक समय बिताने के बाद एक दिन कुंती को ब्राह्मण के घर से किसी के रोने की आवाज आयी और वो वहा पर देखने गयी | उस परिवार का हर सदस्य अपना जीवन त्यागने को तत्पर था | ब्राह्मण कह रहा था कि परिवार का मुखिया होने के नाते बली के लिए जाना और अपने परिवार की रक्षा करना उसका उत्तरदायित्व है  | पत्नी कहरही थी कि उसके परिवार के लिए बलि देना उसका कर्तव्य है | दुसरी ओर पुत्री और पुत्र दोनों भी बलि के लिए तत्पर थे |

कुंती को उनके इस व्यवहार का कारण समझ में नही आया और ब्राह्मण से उसका कारण पुछा |  ब्राह्मण ने उनको बकासुर की कहानी Bakasura Story सुनाई ” हमारे राजा ने राक्षश बकासुर से समझौता किया है  जिसमे हमको प्रतिदिन एक बैलगाडी भरकर भोजन के साथ एक गाँववाला भेजना होगा जिसे वो असुर खायेगा | उस राक्षसं Bakasura ने अभी तक कई गाँव वालो कोइस तरीके से मार दिया है और आज हमारे परिवार की बारी है | हमारे परिवार का एक सदस्य बकासुर के लिए भोजन लेकर जाएगा ”

ब्राह्मण की बात सुनकर कुंती ने ब्राह्मण परिवार की रक्षा के लिए अपना एक पुत्र बकासुर Bakasura के पास भेजने का वचन दिया | उसने समझाया कि “अतिथि परिवार के सुख दुःख का हिस्सा बन जाते है और जो तुम्हारी समस्या है वही हमारी समस्या है इसलिए मुझे इसका उपाय करने का पूरा अधिकार है ” | जब ब्राह्मण ने उनको बलि के लिए मना किया तो कुंती ने कहा “मेरे पांच पुत्र है और अगर इनमे से एक मर भी गया तो चार तो जीवित है ” | अंत मे कुंती ने ब्राह्मण को अपने बेटे को बकासुर Bakasura के पास भेजने के लिए मना लिया और ब्राह्मण को बलि के लिए रोककर अपने परिवार की रक्षा करने को कहा क्योंकि वो जानती थी कि बिना पति के बच्चो को पालना कितना कठिन है |

सारा विचार विमर्श करने के बाद कुंती और पांड्वो ने भीम को भेजने का निर्णय किया ताकि वो उस परिवार और एकचक्रनगर गाँव को बचा सके | अब भीम बैल गाडी में बैठकर बकासुर के लिए भोजन पहुचाने के लिए रवाना हुआ और जब वो जंगल के बीच पंहुचा उसे बकासुर दिख गया | अब भीम ने बकासुर Bakasura को उकसाने के लिए खुद सारा भोजन खा गया | ये देखकर Bakasura बकासुर के क्रोध की कोई सीमा नही रही और उन दोनों के बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया | अंत मे भीम ने बकासुर का वध कर दिया|

जब बकासुर Bakasura के वध की सुचना गाँव वालो तक पहुची सारे गाँव वाले खुशी से झूम उठे | वो सभी बकासुर को मारने वाले व्यक्ति का स्वागत करने के लिए ब्राह्मण के घर के बाहर जमा हो गये | जब पांड्वो को इसकी सुचना मिली की ब्राह्मण के घर के बाहर भीम के स्वागत के लिए लोग जमा हो गये है तो भीम के पहुचने से पहले ही मार्ग से भीम को लेकर गाँव से रवाना हो गये ताकि वनवास के दौरान उनकी पहचान गाँव वालों को पता ना चल सके | इस तरह बकासुर की कहानी का अंत हुआ |

loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *