Delhi History in Hindi | दिल्ली का इतिहास और प्रमुख शाषक

Delhi History in Hindi | दिल्ली का इतिहास और प्रमुख शाषक

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  • भारतीय लोक साहित्य के अनुसार (Delhi) दिल्ली एक शानदार और भव्य जगह इंद्रप्रस्थ (Indraprasth ) थी
  • इंद्रप्रस्थ भारतीय ग्रन्थ महाभारत (Mahabharata) के अनुसार 3500 ई. पूर्व पांड्वो की राजधानी थी |
  • यह पांच प्रस्थो सोनीपत,पानीपत ,तिलपत और बागपत में से एक थी |
  • हिन्दू ग्रंथो के अनुसार दिल्ली को हस्तिनापुर Hastinapur कहते थे |
  • 16वी सदी के पारसी इतिहासकार के अनुसार दिल्ली को यूनानी आक्रमणों से पूर्व राजा ढीलू ने खोजा था और इन्ही के नाम पर दिल्ली का नाम पहले ढील्लिका Dhillika रखा गया था |
  • स्वामी दयानंद के सत्यार्थ प्रकाश में भी पुरानी दिल्ली की खोज का श्रेय राजा ढीलू को बताया गया है बाकि किसी भी ग्रन्थ में इसका जिक्र नही है |

पृथ्वीराज चौहान के दौर की दिल्ली | Delhi History in Hindi during Prithviraj Chauhan

Delhi photo 1860

  • दिल्ली Delhi भारत की साथ मध्ययुगीन बस्तियों में सबसे पहली बस्ती थी जिसे योगिनिपुरा कहते थे |
  • 12वी सदी में दिल्ली पृथ्वीराज चौहान की  उपनिवेश थी |
  • अपभ्रमशाळा के लेखक विबुध श्रीधर ने सबसे पहले दिल्ली के नाम का व्याख्यान किया |
  • तोमर वंश ने 736 ई. में लाल कोट की खोज की |
  • “पृथ्वीराज रासो ” में तोमर अनंगपल को लाल कोट का खोजकर्ता बताया है जिसका नाम दिल्ली Delhi के क़ुतुबमीनार परिसर में लौह स्तम्भ पर  खुदा हुआ है जिसे चन्द्रगुप्त द्वितीय ने बनवाया था |

दिल्ली सल्तनत का उदय

Qutub Minar Old Pics and Photos

अजमेर के चौहान राजाओ ने 1180 में लाल कोट पर कब्ज़ा कर लिया और इसका नाम किला राय पिथोरा कर दिया | किला राय पिथोरा के संग्रहालय और दीवारों के प्राचीन अवशेषों के अनुसार दिल्ली Delhi के इस पहले नगर को 10वी सदी के पृथ्वीराज चौहान ने खोजा था | चौहान राजा पृथ्वीराज तृतीय ने 1192 में मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद गौरी Muhmmad Gori को हराया था | 1206 में Delhi दिल्ली गुलाम वंश की राजधानी बनी | दिल्ली का पहला सुल्तान कतुबुद्दीन ऐबक एक गुलाम था जिसने अपन पद को बढ़ाते हुए पहले सेनापति , फिर क्षत्रप और फिर दिल्ली का सुल्तान बना | कतुबुद्दीन Qutubuddin Aibak  ने अपनी जीत का उत्सव मनाने के लिए Qutub Minar  क़ुतुबमीनार का निर्माण शुर करवा दिया था लेकिन उसके पूरा होने से पहले ही उसकी मौत हो गयी |

क़ुतुब परिसर में उसने कुवत-अल-इस्लाम का निर्माण करवाया जो मौजूदा मस्जिदों में सबसे पुरानी है | ऐसा भी कहा जाता है कि उसने क़ुतुब परिसर में बने 27 जैन मन्दिरों को तुडवाया था और उस मलबे में  निकले  उत्कृष्ट नक्काशीदार स्तंभों और निर्माण सामग्री से मस्जिद का निर्माण करवाया जिसे आप आज भी देख सकते है | गुलाम वंश के अंत के बाद खिलजी वंश, तुगलक वंश , सय्यद वंश और लोदी वंश ने मध्युगीन दौर में अपनी शक्ति बढ़ायी और दिल्ले में कई किले और बस्तिया बनवायी  |1398 में तैमुर लंग Taimur ने भारत पर आक्रमण किया | उसने तुगलक बंश Tuglaq Dynasty के नसीरुद्दीन मुहम्मद की सेना को हराकर 1398 में दिल्ली Delhi में प्रवेश किया और शहर को लुटा और बर्बाद कर उजाड़ कर दिया |  उसने 1 लाख कैदियों को भी मार दिया |

मुगल वंश का दिल्ली पर था बोलबाला

Red Fort 1860 Old Photos1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध First Battle of Panipat में फरगना के पूर्व शाषक बाबर Babar ने लोदी वंश के अंतिम शाषक अफ़ग़ान लोदी को हरा दिया और मुगल वंश की स्थापना की जिसने दिल्ली Delhi  ,आगरा और लाहोर पर राज किया |16वी सदी के मध्य में मुगलो Mughal के शाषन में एक व्यवधान आया जिसमे शेरशाह सुरी ने बाबर के बेटे हुमायु को हरा दिया और उसे फारस भाग जाने को बाध्य किया | शेरशाह सुरी Shershah Suri ने दिल्ली Delhi के छठे नगर पुराना किला का निर्माण करवाया |

शेरसाह सुरी Shershah Suri की मौत के बाद 1545 में उसके पुत्र इस्लाम शाह Islam Shah ने उत्तरी भारत से दिल्ली Delhi तक की बाग़डोर संभाली | इस्लाम शाह Islam Shah  ने 1533 तक दिल्ली Delhi पर राज किया और उस समय सुरी वंश Suri Dynasty का सेनापति हिन्दू राजा हेम चन्द्र विक्रमादित्य उर्फ़ हेमू था | हेमू ने विद्रोहियों के खिलाफ लगातार 22 लड़ाइया जीती और दो बार अकबर की सेना को हराया |

अकबर Akbar की सेना को हराकर 1556 में हेमू दिल्ली के सिंहासन पर बैठ गया और कुछ समय के लिए उत्तरी भारत में हिन्दू राज स्थापित किया | उसे विक्रमादित्य की उपाधि मिली और पुराना किला पर उसका राज्याभिषेक हुआ | अब अकबर ने अपनी किस्मत खराब होने के कारण राजधानी आगरा बना दी | 17वी सदी में मुगल बादशाह शाहजहा ने शाहजनाबाद नगर का निर्माण करवाया जिसे वर्तमान में पुरानी दिल्ली Old Delhi कहते है | इस शहर में उसने लाल किला और जामा मस्जिद बनवाई | जब शाहजहा ने आगरा से फिर अपनी राजधानी स्थानातरित की तो इस बार पुरानी दिल्ली Old Delhi को अपनी राजधानी बनाया |

1658 में औरंगजेब Aurangzeb ने शालीमार बाग़ बनवाया | 1680 के बाद मुगल साम्राज्य Mughal Dynasty का प्रभाव कम होता गया और हिंदू मराठा तीव्र गति से अपना साम्राज्य फैला रहे थे |  1739 में मुगलों की युद्ध में भारी हार के कारण फारस के नादिर शाह ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर उसको लुट लिया | वो धन दौलत के साथ कोहीनुर को भी ले गया | मुगल बादशाह मुह्हमद शाह प्रथम ने नादिर शाह से लुटी हुयी धन दौलत छीन ली और उसे भारत छोड़ने को मजबूर कर दिया | मुगल अब इतने कमजोर हो गये कि फिर कभी शाषन नही कर पाए |

1757 में अब्दाली ने भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली Delhi का शाषन नजीउददौला को देकर अफ़ग़ानिस्तान चला गया | मराठो ने नाजिब को हराकर दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया | 1761 में मराठा अब्दाली से पानीपत के तीसरे युद्ध में हार गये और फिर से अब्दाली ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिए | मराठा प्रभुत्व के उत्तर भारत में खत्म होने के दस वर्ष बाद महादजी शिंदे के नेतृत्व में फिर से मराठो ने दिल्ली Delhi पर कब्ज़ा कर लिया और मुगल राजा शाह आलम द्वितीय Shah alam को 1772 में सिंहासन पर बिठाया |

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ईस्ट इंडिया कम्पनी का दिल्ली पर राज

Delhi History in Hindi1803 में दुसरे अंग्रेज-मराठा युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी East India Company  ने मराठा सेना को दिल्ली की लड़ाई में हरा दिया और दिल्ली से मराठा शाषन खत्म हो गया | परिणामस्वरुप Delhi दिल्ली अब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के कब्जे में आ गया | 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली की सत्ता सीधे ब्रिटिश सरकार के हाथ में आ गयी | 1857 की क्रांति में दिल्ली में  काफी क्षति हुयी जिसके बाद  नाममात्र के मुगल बादशाह Bahadur Shah Jafar बहादुरशाह जफर को रंगून भेज दिया और बाकी बची मुगल प्रदेश को ब्रटिश सरकार का हिस्सा बना दिया |

आजादी के बाद दिल्ली में फहराया गया तिंरगा

15 August 1947 Jawahar Lal Nehru1911 में ब्रिटिश सरकार की राजधानी कलकत्ता घोषित की गयी लेकिन उसी वर्ष दिल्ली दरबार Delhi Durbar में किंग जोर्ज V ने दिल्ली को फिर से राजधानी बनाने का एलान किया |पुरानी दिल्ली Old Delhi के कई हिस्से मिलाकर नई दिल्ली का निर्माण किया गया जिसमे सरकारी इमारतो का निर्माण किया गया |  भारत के स्वतंत्र होने के बाद 1949 में भारत सरकार की विधानसभा सीट घोषित की गयी | विभाजन के दौरान कई पश्चिम पंजाब से कई हिन्दू और सिख शरणार्थी दिल्ली बस गये |

दिल्ली के शाषको की सूची | Delhi Rulers List in Hindi

शाषन  Dynasty वंश  Emperor Name शाषक का नाम 
1206–1210 Slave Dynasty गुलाम वंश Qutub-ud-din Aibak कुतुबुदीन ऐबक [मुहम्मद गौरी का गुलाम और गुलाम वंश का संस्थापक ]
1210–1211 Slave Dynasty गुलाम वंश Aram आराम शाह [ऐबक का बड़ा बेटा ]
1211–1236 Slave Dynasty गुलाम वंश Shams-ud-din Iltutmish इल्तुतमिश [ऐबक का दामाद ]
1236 Slave Dynasty गुलाम वंश Rukn-ud-din Firoz 1 फीरोज [इल्तुतमिश का बेटा]
1236–1240 Slave Dynasty गुलाम वंश Raziyat-ud-din Sultana रजिया सुल्ताना [इल्तुतमिश का बेटी]
1240–1242 Slave Dynasty गुलाम वंश Muizz-ud-din Bahram बेहराम [इल्तुतमिश का बेटा]
1242–1246 Slave Dynasty गुलाम वंश Ala-ud-din Masud मसूद [फीरोज का बेटा ]
1246–1266 Slave Dynasty गुलाम वंश Nasir-ud-din Mahmud महमूद [इल्तुतमिश का छोटा बेटा]
1266–1286 Slave Dynasty गुलाम वंश Ghiyas-ud-din Balban बलबन [इल्तुतमिश का दामाद और गुलाम वंश का सबसे शक्तिशाली शाषक ]
1286–1290 Slave Dynasty गुलाम वंश Muizz-ud-din Kaikubad कैकुबद [महमूद का नाती ]
1290–1296 Khilji Dynasty खिलजी वंश Jalal-ud-din Firoz II [कायम खां का बेटा उअर खिलजी वंश का संस्थापक ]
1296–1316 Khilji Dynasty खिलजी वंश Ala-ud-din Muhammad मोहम्मद खिलजी [फिरोज खिलजी का बेटा और खिलजी वंश का सबसे शक्तिशाली शाषक ]
1316 Khilji Dynasty खिलजी वंश Shihab-ud-din Mubarak
1321 Khilji Dynasty खिलजी वंश Nasir-ud-din Khusru
1321–1325 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Ghiyath al-Din Tughluq
1325–1351 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Muhammad Tughlaq
1351–1388 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Firoz III
1388–1389 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Ghiyath al-Din Tughluq II
1389–1390 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Abu Bakr
 1390–1393 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Nasir ud din Muhammad Shah III
1393 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Ala-ud-Din Sikandar Shah I
1393–1394 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Mahmud Nasir ud din
1394–1399 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Nusrat Shah
1399–1413 Tughlaq Dynasty तुगलक वंश Nasiruddin Mahmud Shah
1414–1421 Sayyid Dynasty सय्यद वंश Khizr Khan
1421–1434 Sayyid Dynasty सय्यद वंश Mubarak Shah
1434–1445 Sayyid Dynasty सय्यद वंश Muhammad Shah
1445–1451 Sayyid Dynasty सय्यद वंश Alam Shah
1451–1489 Lodi Dynasty लोदी वंश Bahlol Lodi बहलोल लोदी [लोदी बंश का संस्थापक]
1489–1517 Lodi Dynasty लोदी वंश Sikandar Lodi
1517–1526 Lodi Dynasty लोदी वंश Ibrahim Lodi
1526 Lodi Dynasty लोदी वंश बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराकर दिल्ली सल्तनत खत्म की
1526–1530 Mughal Dynasty मुगल वंश Babar बाबर [मुगल वंश का संस्थापक , चंगेज खान और तैमुर का वंशज]
1530–1540 Mughal Dynasty मुगल वंश Humayun
1540–1545 Suris Dynasty सुरी वंश Sher Shah शेरशाह सुरी [हुमायु को हराकर सुरी वंश स्थापित किया]
1545–1554 Suris Dynasty सुरी वंश Islam Shah
1554–1555 Suris Dynasty सुरी वंश Muhammad Adil Shah
1555 Suris Dynasty सुरी वंश Ibrahim Shah Suri
1555 Suris Dynasty सुरी वंश Sikandar Shah Suri
1555–1556 Mughal  Dynasty मुगल वंश Humayun
1556–1605 Mughal  Dynasty मुगल वंश Akbar
1605–1627 Mughal  Dynasty मुगल वंश Jahangir
1627–1658 Mughal  Dynasty मुगल वंश Shah Jahan
1658–1707 Mughal  Dynasty मुगल वंश Aurangzeb Alamgir.
1707–1712 Mughal  Dynasty मुगल वंश Bahadur
1712–1713 Mughal  Dynasty मुगल वंश Jahandar
1713–1719 Mughal  Dynasty मुगल वंश Farukhsiyar
1720–1748 Mughal  Dynasty मुगल वंश Muhammad
1748 Mughal  Dynasty मुगल वंश अहमद शाह दुर्रानी का आक्रमण
1748–1754 Mughal  Dynasty मुगल वंश Ahmad
1754–1759 Mughal  Dynasty मुगल वंश Alamgir II
1759–1806 Mughal  Dynasty मुगल वंश Shah Alam
1806–1837 Mughal  Dynasty मुगल वंश Muhammad Akbar II
1837–1857 Mughal  Dynasty मुगल वंश Bahadur Shah II अंतिम मुगल शाषक
1857 East India Company अंग्रेजो के खिलाफ पहली क्रांति
1947 India भारत अंग्रेजो से आजाद हुआ

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