चटगाँव विद्रोह, जिसमे शामिल थे भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी Chittagong Armoury Raid by Indian Republican Army

Chittagong Armoury Raid by Indian Republican Army

Chittagong Armoury Raid by Indian Republican ArmyChittagong चटगाँव विद्रोह जिसमे युवा क्रांतिकारियों ने एक दिन के लिए 18 अप्रैल 1930 को अपना प्रदेश अंग्रेजो से मुक्त कर दिया था | चटगाँव Chittagong जो ब्रिटिश इंडिया के समय भारत के बंगाल राज्य में आता था लेकिन विभाजन के बाद बांग्लादेश में चला गया | यहा के युवा क्रांतिकारियों ने ऐसा कारनामाँ कर दिखाया जो भारत के कई बड़े बड़े क्रांतिकारी नही कर पाए थे | आज आपको उन्ही युवा क्रांतिकारियों के विद्रोह की कहानी बताते है |

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जैसा कि आप जानते है कि सन 1930 में भारत पर अंग्रेजो का राज था और अंग्रेजो के खिलाफ पुरे देश में अलग अलग जगह विदोह चल रहा था | कही महात्मा गांधी , तो कही भगतसिंह जैसे कई क्रांतिकारी अपने अपने तरीको से विद्रोह कर रहे थे | इन्ही विद्रोहों की तरह बंगाल की खाडी के नजदीक एक प्रदेश चटगाँव भी अग्रेजो के कब्जे में था | अंग्रेजो के अत्याचारों के कारण Chittagong चटगाँव के लोगो का भी खून खौल रहा था तब उस समय एक युवा क्रांतिकारी सूर्य सेन ने क्रांति की बागडोर सम्भाली |

सूर्य सेन का जन्म 22 मार्च 1894 में हुआ था और उनके पिता अध्यापक थे | बचपन से ही वो अंग्रेजो के जुल्म को सहते आ रहे थे और उनके मन में विद्रोह के बीज तो अंग्रेजो ने बो दिए थे लेकिन वो सही समय का इंतजार कर रहे थे | 1918 में बी.ए की पढाई पुरी करने के बाद वो वापस चटगाँव Chittagong लौटे और वहा के स्कूल में पढाना शुरू कर दिया |सूर्य सेन को गाँव के सभी लोग मास्टरदा कहकर पुकारते थे | अब उनके दिमाग में जब विद्रोह की बात आयी तो उन्होंने सोचा कि उनके अकेले के विद्रोह से कुछ नही होने वाला है इसलिए उन्होंने अपने स्कूल में आने वाले बच्चो को क्रांति का पाठ पढ़ाया और आजादी का महत्व समझाया |

सूर्य सेन की बातो से प्रभावित होकर कई छात्रों ने सूर्य सेन के साथ आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने की इच्छा जाहिर की | सूर्य सेन ने सभी युवा क्रांतिकारियों ,जिसमे से अधिकतर की उम्र 18 वर्ष से कम थी , के साथ मिलकर Indian Republican Army का निर्माण किया जिसका उद्देश्य देश को आजादी दिलाना था |  ये कोई इतना बड़ा दल नही था कि पुरे देश को आजाद कर सके लेकिन सूर्य सेन का कहना था कि शुरुवात तो कही से करनी होगी | धीरे धीरे इस Army में कई युवा क्रांतिकारी शामिल होते गये जिनका पहला उद्देश्य अपने प्रदेश चटगाँव Chittagong को अंग्रेजो से आजाद करना था |

अब सूर्य सेन ने Chittagong चटगांव शस्त्रागार पर छापा मारने की योजना बनाई क्योंकि उन्हें पता था कि अगर उनके हाथ हथियार लग जाए तो अंगेजो से आसानी से लोहा ले सकते है | इस छापे के लिए उन्होंने कुछ प्रशिक्षित क्रांतिकारियों को दल के प्रशिक्ष्ण की जिम्मेदारी सौंपे जिनमे से गणेश घोष ,निर्मल सेन ,लोकनाथ बाल और नरेश रॉय जैसे अनुभवी क्रांतिकारीयो को युवाओं को प्रशिक्ष्ण देने की जिम्मेदारी दी | अब इन युवा क्रांतिकारियों ने गुप्त रूप से सभी बच्चो को एकत्रित कर युद्ध कला सिखाई जिसमे बंदूक चलाना महतवपूर्ण था | धीरे धीरे उस दल के सभी युवा युद्ध कला में निपुण हो गये थे क्योंकि उन युवाओं में आजादी का इतना जोश था कि वो अपने घर छोडकर आ गये थे |

अब सूर्य सेन की योजना के अनुसार चटगाँव के दो मुख्य शस्त्रागार पर छापा मारना था | इसके लिए उनको सारी संचार और आवागमन सेवाए बंद करनी थी ताकि अंग्रेज सरकार तुरंत एक्शन ना ले पाए | अब कुछ Indian Republican Army के कुछ युवा क्रांतिकारीयो ने मिलकर टेलीग्राफ और टेलीफोन ऑफिस पर छापा मारकर उसे तबाह कर दिया इसके लिय उन्हें कुछ अंग्रेज अफसरों की हत्या भी करनी पड़ी थी | दुसरी तरह Indian Republican Army के कुछ युवाओं ने रेल की पटरियो को उखाड़ दिया ताकि बाहर से कोई ट्रेन ना आ सके | इस तरह उन्होंने Chittagong Armoury Raid की पुरी तैयारी कर ली थी |

अब इस योजना के लिए 18 अप्रैल 1930 का दिन चुना गया | अब Indian Republican Army के युवाओ ने गणेश घोष के नेतृत्व में दामपुरा के police armoury पर रात के 10 बजे हमला बोल दिया | उस समय उस Police Armoury के सभी पुलिस सो रहे थे और उनको पलटवार करने का मौका भी नही मिला | इस तरह उस Police Armoury पर तो Indian Republican Army का कब्जा हो गया | दुसरी तरफ लोकनाथ के नेतृत्व में केवल दस युवाओं की फ़ौज ने Auxiliary Forces armory पर भी कब्जा कर लिया | इस तरह Hindustan Republican Army ने चटगाँव को अपने कब्जे में कर लिया |

अब उन्होंने Chittagong Armoury पर तो कब्जा कर लिया लेकिन उनके सबसे बड़ी मुश्किल ये हुयी कि उनको गोला-बारूद नही मिला | अब संचार के सभी साधन बंद कर दिए थे तो कोई पुलिस वाला संदेश नही भेज पाया |अब Indian Republican Army के युवाओं ने अंग्रेजो के यूरोपीयन क्लब पर कब्जा करने की योजना बनाई ताकि वो गोला बारूद वाली जगह का भी पता उनसे ले सके लेकिन उस दिन Good Friday होने के कारण क्लब के सभी सदस्य अपने अपने घरो पर थे |

अब सूर्य सेन ने Indian Republican Army के सभी युवा क्रांतिकारियों को Police Armoury के बाहर बुलाया जहा पर सूर्य सेन ने तिरंगा लहराया और अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति का भाषण दिया जिससे युवाओं में जोश भर गया | अब Indian Republican Army के युवाओं को सूर्य सेन चटगाँव की पहाडियों में सुरक्षित जगह लेकर गये जहा उनको कोई ढूढ़ ना सके | अब कुछ दिनों बाद पुलिस ने युवा क्रांतिकारीयो के छिपने की जगह का पता  लगा लिया | अब  Indian Republican Army के युवाओं को 22 अप्रैल 1930 को पुलिस के हजारो सैनिक ने पहाडी के चारो ओर से घेर लिया |

अब उन युवा क्रांतिकारियों के पास लड़ने के अलावा कोई विकल्प नही था क्योंकि उनको देश के लिए जान देना गवारा था लेकिन समर्पण नही कर सकते थे | अब पुलिस और क्रांतिकारीयो के बीच गोलीबारी शुरु हो गयी जिसमे Indian Republican Army के युवाओं ने पुलिस के छक्के छुडा दिए | इस भीषण लड़ाई में Indian Republican Army के 12 युवा क्रांतिकारी शहीद हो गये जबकि Indian Republican Army ने पुलिस के 80 जवानो को मार गिराया | पुलिस को निराश होकर वापस लौटना पड़ा |

अब सूर्य सेन ने अपने सभी युवा क्रांतिकारीयो की फ़ौज को तितर बितर होने का आदेश दिया ताकि सभी एक साथ पुलिस के हाथ में ना आये |अब सूर्य सेन ने ये भी निश्चय किया कि जिन युवा क्रांतिकारीयो की पहचान नही हो पायी उन्हें घर भेज देना चाहिए जब तक कि मामला ठंडा नही हो जाए | अब कुछ क्रांतिकारी  कलकता भाग गये जबकि कुछ क्रांतिकारीयो को गिरफ्तार कर लिया गया | अब प्रीतिलता वाद्देकर नामक महिला क्रांतिकारी ने सूर्य सेन के कहने पर Indian Republican Army के युवाओं के साथ मिलकर यूरोपीयन क्लब पर हमला बोल दिया लेकिन इस छापे में प्रीतिलता सहित कई क्रांतिकारी शहीद हो गये |

अब Chittagong चटगाँव में लगातार क्रांतिकारी गतिविधिय शुरू हो गयी और 1930 से 1932 के बीच Indian Republican Army के युवा क्रांतिकारीयो ने 22 अंग्रेज अफसरों और अंग्रेजो के लिए काम करने वाले 220 लोगो को अलग अलग घटनाओ में मार दिया | जनवरी 1932 में पुलिस ने बड़े पैमाने पर छापा मारकर Indian Republican Army के कई युवाओं को गिरफ्तार कर लिया जिसमे से 12 क्रांतिकारीयो को काला पानी भेज दिया गया और 32 लोगो को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया | सूर्य सेन अब तक भी पुलिस के हाथ नहीं लेगे थे और निरंतर पुलिस उन्हें ढूंढने में लगी हुयी थी |

16 फरवरी 1933 को आख़िरकार सूर्य सेन  को एक गाँव से गिरफतार कर लिया गया जिससे चटगाँव के युवा क्रांतिकारीयो को बड़ा धक्का पहुचा |  सूर्य सेन पर अंग्रेज सरकार ने 10,000 रूपये का इनाम रखा था इससे आप अनुमान लगा सकते है कि सूर्य सेन को पकड़ना कितना जरुरी था उस समय में 10000 रूपये एक लाख के बराबर हुआ करते थे | अब पैसो के लालच में और इर्ष्या के कारण सूर्य सेन के ही दल के एक गद्दार नेत्र सेन ने ब्रिटिश सरकार को उनका पता बता दिया जिस घर में वो छुपे हुए थे | नेत्र सेन को इनाम की राशि मिलने से पहले ही युवा क्रांतिकारीयो ने मार गिराया | सूर्य सेन को 12 जनवरी 1934 को फांसी पर लटका दिय गया और उनके साथ ही Indian Republican Army भी खत्म हो गयी |

इसके बाद काला पानी की सजा के लिए भेजे गये सभी क्रांतिकारीयो को 1946 में रिहा कर दिया जिसमे से अधिकतर Communist Party of India से जुड़ गये | तो मित्रो आपने देखा कि किस तरह उस समय अंग्रेजो एक खिलाफ लोगो में विद्रोह की ज्वाला थी जिससे युवा भी अछूते नही रहे थे | अगर आपको Chittagong Armoury Raid और Indian Republican Army की कहानी पसंद आयी तो अपने विचार और सुझाव देना ना भूले |

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