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Chamba Tour Guide in Hindi | चम्बा के प्रमुख पर्यटन स्थल

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Chamba Tour Guide in Hindi | चम्बा के प्रमुख पर्यटन स्थल
Chamba Tour Guide in Hindi | चम्बा के प्रमुख पर्यटन स्थल

राजा साहिल वर्मा द्वारा स्थापित किये गये इस शहर चम्बा (Chamba) का नामकरण इनकी पुत्री चम्पावती के नाम पर किया गया है | समुद्र तट से लगभग 996 किमी की ऊँचाई पर बसे इस शहर एम् अनेक एतेहासिक एवं धार्मिक स्थल है जो पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है |

चम्बा (Chamba) के मुख्य दर्शनीय स्थल

सहो – चम्बा से लगभग 20 किमी दूरी पर स्थित यह क्षेत्र साल नदी के किनारे पर है | यहाँ पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केंद्र चंद्रशेखर मन्दिर है जो बहुत ही विख्यात है |

सलूनी – 1829 मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ यह जगह चम्बा से 56 किमी दूर है | आप यहाँ से बर्फ से लदी चोटियों के मनोरम दृश्यों का आनन्द उठा सकते है | सलूनी से 22 किमी दूर 1830 मीटर की ऊँचाई पर स्थित भन्दाल घाटी अपने तरह के वन्य प्राणियों के लिए प्रसिद्ध है |

पांगी घाटी – 2438 मीटर की उंचाई पर स्तिथ चम्बा से 137 किमी दूर यह लुभावनी घाटी अपने प्राकृतिक सौन्दर्य ,भोल-भाले लोगो एवं विभिन्न प्रकार के नृत्यों के लिए प्रसिद्ध है | घाटी के किलाड़ क्षेत्र से केलांग ,मंडी एवं किश्तावाड़ के लिए ट्रैकिंग मार्ग है |

भरमौर – पर्यटन के लिए उपयुक्त यह स्थान चम्बा से लगभग 63 किमी की दूरी पर स्थित है | भारत की मशहूर मणि महेरा की धार्मिक यात्रा यही से शुरू होती है | 400 वर्षो से भी अधिक समय तक चम्बा रियासत की राजधानी रहा भरमौर 680 ई. के दौरान अस्तित्व में आया | अपनी अनुपम कुदरती छटा के लिए मशहूर यह पर्यटन स्थल अपने सीधे सरल ग्द्द्दी जनजाति के लोगो के लिए भी जाना जाता है | यहाँ के चौरासिया मन्दिर समूह एवं शिकारा भी दर्शनीय है |

मणिमहेश – भरमौर से 34 किमी दूर 4170 मीटर की उंचाई पर स्तिथ यह जगह अपनी 5636 मीटर ऊँची मणिमहेश चोटी के लिए विख्यात है | इसके अलावा यहाँ प्रसिद्ध मणिमहेश झील भी दर्शनीय है जहां प्रतिवर्ष अगस्त-सितम्बर माह के दौरान मणिमहेश यात्रा आयोजित की जाती है |

छतराडी – भरमौर से 40 किमी दूर छतराडी शक्ति देवी मन्दिर के लिए विख्यात है जो पर्यटक पुरातत्व में रूचि रखते है उनके लिए यह बहुत ही उपयुक्त है |

लक्ष्मीनारायण मन्दिर – यह पत्थरों से निर्मित 6 मन्दिरों का समूह है जिसका निर्माण 8वी शताब्दी के दौरान किया गया | इस समूह में लक्ष्मीनारायण मन्दिर सबसे प्राचीन है |

भूरीसिंह संग्रहालय – इस संग्रहालय में वहां की हस्तकला और शासको की शासन व्यवस्था झलकती है | इस संग्रहालय में कांगड़ा , बिसौली एवं चम्बा घराने की मिनिएचर पेंटिंग , पुराने चम्बा रुमाल एवं चप्पल का संग्रह किया गया है |

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चौगान – चम्बा के मध्य क्षेत्र में स्थित यह मैदान हरियाली से परिपूर्ण है | यह स्थान शहर में आयोजित होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र है | प्रतिवर्ष जुलाई-अगस्त माह के दौरान यहाँ प्रसिद्ध मन्दिर उत्सव का आयोजन किया जाता है | सप्ताह भर चलने वाला यह एक प्रकार का ग्रामीण उत्सव है जो फसल कटने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है | चौगान से एक किमी की दूरी पर प्रसिद्ध चामुंडा देवी का मन्दिर है जो अपनी लकड़ी की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है |

कटासन – मन्दिर के लिय प्रसिद्ध यह क्षेत्र चम्बा से 30 किमी दूरी पर स्थित है | इस क्षेत्र में पर्यटक चम्बा घाटी के मनोरम दृश्य का आनन्द ले सकते है |

सरोल – पिकनिक के लिए उपयुक्त माना जाने वाला यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए भी अच्छा है | यहाँ सुंदर गार्डन , पक्षीशाळा तथा भेड़ प्रजनन केंद्र है | यह जगह चम्बा से 11 किमी की दूरी पर है |

झमवाड़ – घने जंगल और उनके बीच स्थित सेब के बगीचे यहाँ का प्रमुख आकर्षण है | यदि आप सेब के मौसम के यहाँ जाए तो ताजे फलो का आनन्द ले सकते है | झमवाड़ में चम्बा के 10 परम्परागत वेशभूषा में नृत्य करते चम्बा के लोग पयर्टको का मन मोह लेते है |

विशेष आकर्षण – यहाँ पर हर साल चौगान में अगस्त महीने में रंग-बिरंगे कार्यक्रमों का पर्व मिंजर आयोजित किया जाता है जो कुल्लू के दशहरे पर्व की तरह ही प्रसिद्ध है |इस पर्व को देखने के लिए हर साल पर्यटकों की भारी भीड़ एकत्रित होती है |

चम्बा पहुचने के मार्ग

सिर्फ सडक मार्ग से पहुचने वाले इस शहर से समस्त नजदीकी शहरों से कई बसे आती है | दिल्ली ,शिमला ,चंडीगढ़ , पठानकोट , जम्मू तथा अमृतसर से बस के अलावा किराए पर टैक्सीया भी बुक कराई जा सकती है | यहाँ से निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट तथा निकटतम हवाई अड्डा अमृतसर तथा जम्मू है | चम्बा में स्थानीय भ्रमण के लिए किराये पर टैक्सीया तथा हिमाचल परिवहन निगम के बसे ली जा सकती है | टैक्सीया पर्यटन कार्यालय होटल इरावती के माध्यम से अथवा टैक्सी स्टेंड से प्राप्त हो जाती है बस सुविधा के लिए परिवहन निगम कार्यालय से फोन न. 2010 पर पूछताछ की जा सकती है |

पर्यटन का उचित समय

चम्बा में दिसम्बर से लेकर फरवरी तक का मौसम बहुत ठंडा रहता है तथा जुलाई से लेकर सितम्बर तक भारी वर्षा का मौसम है |इनको छोडकर बाकी मौसम बहुत ही सुवाहने होते है इस मौसम में हल्के सूती वस्त्र के लायक ठंड होती है |

चम्बा की प्रसिद्ध वस्तुए

चम्बा हस्तकलाओ का केंद्र है | आप यहाँ से प्रसिद्ध चम्बा रुमाल , चम्बा चप्पल , शाल , पहाडी गुड़ियाए आदि खरीद सकते है | राज्य सरकार द्वारा चलाया जा रहा हस्तशिल्प विकास केंद्र इन वस्तुओ के विक्रय का प्रमुख केंद्र है |

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