Home इतिहास Cellular Jail जिसकी हवाओं में बसी है क्रान्तिकारियो की सांसे | Cellular...

Cellular Jail जिसकी हवाओं में बसी है क्रान्तिकारियो की सांसे | Cellular Jail History in Hindi

220
0
SHARE
Cellular Jail जिसकी हवाओं में बसी है क्रान्तिकारियो की सांसे | Cellular Jail History in Hindi
Cellular Jail जिसकी हवाओं में बसी है क्रान्तिकारियो की सांसे | Cellular Jail History in Hindi

क्रान्तिकारियो के बलिदान कस साक्षी Cellular Jail अब स्वतंत्रता का महातीर्थ है | भारत का सबसे बड़ा केंद्र शाषित प्रदेश अंडमान-निकोबार द्वीप समूहसुन्दरता का प्रतिमान है और सुंदर दृश्यावली के साथ सभी को आकर्षित करता है | बंगाल की खाड़ी के मध्य प्रकृति के खुबसुरत आगोश में विस्तृत 572 द्वीपों में भले ही मात्र 38 द्वीपों पर जनजीवन है पर इसक यही अनछुआपन ही आज इसे प्रकृति के स्वर्ग के रूप में परिभाषित करता है |

यही अंडमान में ही एतेहासिक Cellular Jail है | सेल्लुलर जेल का निर्माण 1896 में आरम्भ हुआ तथा 10 साल बाद 10 मार्च 1906 में पूरा हुआ | Cellular Jail के नाम से प्रसिद्ध इस कारागार में 698 बैरक (सेल) तथा 7 खंड थे जो सात दिशाओं में फैलकर पंखुड़ीदार फुल की आकृति का एहसास कराते थे | इसके मध्य में बुर्जयुक्त मीनार थी और हर खंड में तीन मंजिले थी |यह आज भी विवाद का विषय है कि इसे अंग्रेजो ने क्यों बनवाया था |इतिहास में तो केवल इतना लिखा गया है कि भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के मद्देनजर अंग्रेज सरकार सकते में आगयी थी  जिसके कारण उन्होंने शायद ऐसा कदम उठाया था |

ब्रिटेन के मजदूर नेता अर्नेस्ट जोंस ने कहा था कि “अंग्रेजी राज्य में सूरज कभी डूबता नही और खून कभी सूखता नही ” | उस बात को भारतीय क्रांतिकारीयो ने गलत सिद्ध कर दिया था | | अंग्रेजो को अब लग चूका था कि उन्होंने युद्ध अपनी बहादुरी एवं रणकौशलता की वजह से नही बल्कि षड्यंत्रों,गद्दारों और कुछेक भारतीय राजाओं के सहयोग से जीता था | अपनी इन कमजोरियों को छुपाने के लिए जहा अंग्रेजी इतिहासकारों ने प्रथम स्वाधीनता संग्राम को मात्र “सैनिक गदर”  कहकर इसके प्रभाव को कम करने की कोशिश की ,वही इस संग्राम को कुचलने के लिए भारतीयों को असहनीय एवं अविस्मरणीय यातनाये दी गयी थी |

अंग्रेजी हुकुमत ने काला पानी से इस आग को बुझाने की जबर्दस्त कोशिश की पर वह तो चिंगारी से ज्वाला बनकर भड़क उठी | Cellular Jail अंडमान में कैद क्रांतिकारियों पर अंग्रेजो ने जमकर जुल्म ढाए पर जुल्म से निकली हर चीख ने भारत माँ की आजादी के इरादों को ओर बुलंद किया | क्रान्तिकारियो का मनोबल तोड़ने और उनके उत्पीड़न के लिए Cellular Jail में तमाम रास्ते इख़्तियार किये गये |स्वाधीनता सेनानियों और क्रांतिकारियों को राजनितिक बंदी मानने की बजाय उन्हें एक सामान्य कैदी माना गया | यही कारण था कि क्रान्तिकारियो को यही Cellular Jail की काल कोठरियों में कैद रखा गया और यातनाये दी गयी | यातना भरा काम और पूरा न होने पर कठोर दंड दिया जाता था | खराब व्वयस्था ,जंग और काई लगे टूटे-फूटे लोहे के बर्तनों में गंदा भोजन जिसमे कीड़े मकौड़े होते ,पीने के लिए बस दिन भर दो डिब्बा गंदा पानी , पेशाब-शौच तक पर बंदिशे |

Loading...

ऐसे में किन परिस्थितियों में इन देशभक्त क्रान्तिकारियो ने यातनाये सहकर आजादी की अलख जगाई वह सोचकर रौंगटे खड़े हो जाते है | Cellular Jail में बन्दियो को हर दिन कोल्हू (घाणी) में बैल की भांति घूम घूमकर 20 पौंड नारियल का तेल निकालना पड़ता था | इसके अलावा प्रतिदिन 30 पौंड नारियल की जटा कूटने का भी कार्य करना होता | काम पूरा न होने पर बेंतो की मार पडती औ टाट का घुटन्ना और बनियान पहनने को दिए जाते थे जिससे पूरा दिन रगड़ खाकर शरीर ओर भी चोटिल हो जाता था | अंग्रेजो की नाराजगी पर नंगे बदन पर कोड़े बरसाए जाते थे |

जब भी किसी को फाँसी दी जाती तो क्रांतिकारी बन्दियो में दहशत पैदा करने के लिए तीसरी मंजिल पर बने गुम्बद से घंटा बजाया जाता ,जिसकी आवाज 8 मील की परिधि तक सुनाई देती थी | भय पैदा करने के लिए क्रान्तिकारी बन्दियो को फांसी के लिए ले जाते व्यक्ति को ओर फांसी पर लटकते देखने के लिए विवश किया जाता था |वीर सावरकर को तो जान बुझकर फांसीघर के सामने वाले कमरे में भी रखा गया था | गौरतलब है की  सावरकर जी के एक भाई भी काला पानी की यहा सजा काट रहे थे पर तीन सालो तक उन्हें एक दुसरे के बारे में पता नही चला | इससे समझा जा सकता है कि अंग्रेजो ने यहा क्रान्तिकारियो को कितना एकाकी बना कर रखा था | फांसी के बाद मृत शरीर को समुद्र में फेंक दिया जाता था |अंग्रेजो के दमन का यह एक काला अध्याय था जिसके बारे में सोचकर आज भी रौंगटे खड़े हो जाते है |

आज Cellular Jail आजादी का पवित्र तीर्थ बन गया है|  अब इसके प्रांगण में रोज शाम को लाइट-साउंड प्रोग्राम इन दिनों की यादो को तरोताजा करता है जब हमारे वीरो ने काला पानी की सजा काटते हुए भी देश भक्ति का जज्बा नही छोड़ा था | गन्दगी और सीलन के बीच समुद्री हवाए और उस पर से अंग्रेजो के दनादन बरसते कोड़े मानव शरीर को काट डालते थे | इन सबके बीच आजादी का जज्बा निकला पर उस इतिहास को वर्तमान से जोड़ने की जरूरत थी | Cellular Jail अपने अंदर जुल्मो की निशानी के साथ वीरता , प्रतिरोध ,बलिदान एवं त्याग की उस अनोखी गाथा को समेटे हुए है जिसको आज की युवा पीढ़ी में संचारित कराना जरुरी है |

Cellular Jail की खिडकियो से अभी भी जुल्म की दास्ताँ झलकती है | ऐसा लगता है मानो अभी फफक क्र दीवारे रो पड़ेगी | वाकई में देश के हरेक व्यक्ति विशेषकर बच्चो को Cellular Jail के दर्शन जरुर करने चाहिए ताकि आजादी की कीमत का उन्हें अहसाह हो सके | देशभक्ति के जज्बे से भरे देशभक्तों ने Cellular Jail की दीवारों पर अपने शब्द चित्र भी अंकीत किये |दूर दूर से आकर लोग इस पावन स्थल पर आजादी के दीवानों का स्मरण कर अपनी भावभीनी श्रुधान्जली अर्पित करते है एवं इतिहास के गर्त में झाँककर उन पीएलओ को महसूस करते है जिनकी बदौलत आज हम आजादी के माहौल में साँस ले रहे है | बदलते वक्त के साथ Cellular jail इतिहास की चीज भले ही बन गया हो पर क्रांतिकरियो के संघर्ष ,बलिदान एवं यातनाओं का साक्षी यह स्थल हमेशा याद दिलाता रहेगा कि स्वन्त्न्रता यु ही नही मिली इसके पीछे क्रान्तिकारियो के संघर्ष ,त्याग एवं बलिदान की गाथा है |

आज Cellular Jail की गाथा को लोगो तक पहुचने के लिए तमाम श्रव्य-दृश्य साधनों का उपयोग किया जा रहा है पर उसे लोगो की भावनाओ से जोड़ने की जरूरत है | Cellular Jail के माध्यम से वैचारिक विस्तार की भी आवश्यकता है ताकि देश के अन्य भागो में भी इस भावना को प्रवाहित किया जा सके जिसके लिए सेनानियों ने सर्वस्व न्योछावर कर दिया |आजादी का यह तीर्थ हमारी विरासत है जो सदियों तक आजादी की कीमत का एहसास कराती रहेगी |

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here