भारत के कुछ चौंका देने वाले रीती रिवाज Bizarre Traditions in india

Bizarre Traditions in india

मित्रो भारत विविधताओ से भरा देश है यहा हर धर्म और जाति के लोग रहते है | हर जाति में कुछ अपनी अलग अलग परम्पराए होती है जो बरसों से चली आ रही होती है | उन परम्पराओ में से कुछ तो आने वाली पीढ़िया बंद कर देती है लेकिन फिर भी कुछ ऐसी प्रथाए शेष रह जाती है जो बरसों से लेकर आज तक चली आ रही है | आज हम उन्ही भारत के कुछ चौंका देने वाले रीती रिवाज Bizarre Traditions के एक सफर पर आपको लेकर चलते है जिनके बारे में आपने बहुत कम सुना होगा |

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01 Baby Tossing बच्चे को छत से गिराना

Baby Tossingभारत के महाराष्ट्र जिले में सोलापुर नाम का एक शहर है जहा पर बाबा उमर की दरगाह है | इस दरगाह में हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही दर्शन करने आते है जो कि लगभग 700 वर्ष पुरानी दरगाह है | यहा पर हर साल कई माता-पिता अपने बच्चो की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करने आते है | यहाँ पर प्रार्थना के नाम पर एक ऐसा रीती रिवाज होता है जिसने पुरे विश्व में इस जगह को कुख्यात कर दिया है | यहा पर मस्जिद के मौलवी और अनुभवी लोग छोटे छोटे एक साल तक के बच्चो को मस्जिद की छत से 50 फूट की उचाई से नीचे गिराते है | मस्जिद के नीचे दुसरे गाँव वाले और अन्य अनुभवी लोग चादर को फैलाकर उसमे बच्चो को झेलते है |

इस Bizarre Traditions रिवाज को ना केवल मुस्लिम लोगो बल्कि हिन्दू लोगो द्वारा भी अपनी सन्तान की लम्बी उम्र और स्वास्थ्य की कामना के लिए अपनाते है |  यहा पर ज्यादातर ये रिवाज वो लोग अपनाते है जिनको दरगाह में आने के बाद सन्तान सुख प्राप्त हुआ है | इस रीती रिवाज को खत्म करने के लिए कई बार स्थानीय और राष्ट्रीय सरकार ने प्रयास किये लेकिन गाँव वालो के विद्रोह के आगे नही रुक पाए | फिर भी इस रिवाज के दौरान इस जगह पर पुलिस बल तैनात रहता है | वैसे इस रिवाज में आज तक कोई अप्रिय घटना घटित नही हुयी है लेकिन फिर भी ये एक ऐसा खरतनाक रिवाज है जिसमे बच्चे को गिराने वालो या झेलने वालो दोनों में थोड़ी सी चुक हो जाए तो बच्चे की वही जान जा सकती है | फिर भी सरकार प्रयास कर रही है और आने वाली पीढिया जल्द ही इस प्रथा को समाप्त कर देगी |

02 बच्चो को गर्दन तक गाढ़ना Buried Child up to Neck

Buried Child up to Neckबच्चो के उपर आजमाने वाले दूसरा कुख्यात और चौका देने वाले रिवाज Bizarre Traditions उत्तरी कर्नाटक में किया जाता हाउ | इस रिवाज में शारीरिक विकलांगता से पीड़ित बच्चो को गर्दन तक रेत में गाड़ दिया जाता है | इस प्रथा को सामान्यत: सूर्यग्रहण के दिन किया जाता है जिसमे सूर्योदय से पहले एक इतना गहरा गड्डा खोदा जाता है कि बच्चे की गर्दन बाहर रह जावे | इसके बाद सूर्योदय होने पर बच्चे को उस गड्डे में उतारा जाता है और शरीर के सभी भागो को अंदर रख केवल गर्दन को बाहर रखा जाता है | यह रिवाज एक घंटे से लेकर छ: घंटे तक किया जाता है |

माता-पिता का ऐसा मानना होता है कि सूर्यग्रहण के नकारात्मक प्रभाव के कारण बच्चो में शारीरिक विकलांगता आती है इसलिए सूर्यग्रहण के सकारात्मक प्रभाव को बच्चे पर पड़ने के लिए उस दिन ये प्रथा अपनाई जाती है | मिटटी में उनको इसलिए गाढा जता है क्योंकि ऐसा माना जता है कि मिटटी में गाड़ने से सारी बीमारी मिटटी खीच लेती है और बच्चा स्वास्थ्य हो जाता है | कुछ माता-पिता इस प्रथा से अपने बच्चो के ठीक होने का दावा भी करते है लेकिन शायद बिना दुसरे इलाज के केवल इसी प्रथा से ठीक होना एक अजूबे से कम नही होगा | इस बात की असलियत को केवल इस प्रथा को आजमाने वाले लोग ही बता सकते है |

03 गायो के नीचे लेटना Trampled by Cows

Trampled by Cowsमध्य प्रदेश में दिवाली के दुसरे दिन गोवर्धन पूजा पर यहा के स्थानीय लोगो द्वारा एक विशेष प्रथा का प्रदर्शन किया जता है जिसे देखकर आपकी रूह काँप जाये | इस प्रथा में स्थानीय लोग अपने मन की मुराद पुरी करने के लिए दौड़ते हुए गायो और बैलो के नीचे लेटते है | स्थानीय लोगो का मानना है कि इस प्रथा से उनको गौमाता का आशीर्वाद मिलता है और उनके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते है | इस रिवाज में गायो के तले दबकर कई लोग भारी रूप से जख्मी हो जाते है फिर भी इसे आशीर्वाद समझकर इस प्रथा को पूरा करते है | इस प्रथा को यहा कई सालो से निभाया जा रहा है और हजारो श्रुधालू यहा पर मेले में इस प्रथा को देखने के लिए जमा होते है |

04 मेंढको की शादी Frog Marriage for Rain

Frog Marriage for Rainभारत के नागपुर और जमशेदपुर इलाके में एक अजीब प्रथा अपनाई जाती है जहा पर स्थानीय लोग मेंढको की शादी करवाते है | भारत के इन इलाको में अक्सर काफी गर्मी रहती है और वर्षा भी कई बार बहुत डदेरी से आती है | इसलिए स्थानीय लोग इंद्रदेव को प्रस्सन करने के लिए इस प्रथा को पूरा करने के लिए डॉम मेंढको को पकडकर ले आते है | इन मेंढको को दो अलग अलग तालाबो से लाया जाता है | अब इन मेंढको को एक मन्दिर में लाया जाता है और वहा पर पुरे रीती रिवाज के साथ इन मेंढको की शादी करवाई जाती है | इस प्रथा के पूरा होने पर वापस इन्हें एक ही तालाब में छोड़ दिया जाता है | स्थानीय लोगो का ऐसा मानना है कि मेंढक इंद्रदेव के बहुत बड़े भक्त होते है जिनको प्रसन्न करने से इंद्रदेव प्रसन्न होते है इसलिए ये प्रथा आजमाते है | वैसे इस प्रथा में कोई बुराई तो नही है लेकिन फिर भी देश और दुनिया के लिए ये एक अजीब प्रथा मानी जाती है |

05 प्रेत विकार से छुटकारे के लिए कुत्ते से शादी Daughter Marry Dogs

Daughter Marry Dogsमेंढको की शादी तो समझ में आयी कि दो जानवरों की शादी हो रही है लेकिन जब एक जानवर और इन्सान की शादी हो तो ये थोड़ी ज्यादा ही अजीबोगरीब प्रथा लगेगी | भारत के झारखंड राज्य के कई इलाको में इस प्रथा को अपनाया जता है | इस प्रथा में जिन बच्चिया को प्रेत बाधा ने जकड़ लिया होता है उसके निवारण के लिए उसके माता पिता अपनी बेटी की एक कुत्ते से शादी करवाने की एक रस्म निभाते है | स्थानीय लोगो का ऐसा मानना होता है कि कुत्ते से शादी करवाने से प्रेतबाधा उस बच्ची से चली जाती है | इस प्रथा को महिला की तरह पुरुष भी प्रेतविकार के लिए कुतिया से शादी करते है | इस प्रथा में हिन्दू मान्यता के अनुसार शादी की सारी रस्मे निभायी जाती है और खाने का आयोजन भी किया जाता है जिसमे सभी रिश्तेदार शामिल होते है |

06 सिर से नारियल फोड़ना Smashing coconuts on the head

Smashing coconuts on the headहर साल हजारो श्रुधालू दक्षिण भारत के तमिलनाडू राज्य के आदी पर्व के लिए इक्कठे होते है ताकि उनको सुखी और स्वास्थ्य जीवन मिले | यहा पर कई मन्दिरों , जिसमे से करुर जिले का महालक्ष्मी मन्दिर पसिद्ध है , पर अपने अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए एक ऐसी प्रथा का पालन करते है जिसको देखना बड़ा मुश्किल हो जाता है करने की बात तो दूर है | इस प्रथा में युवाओ से लेकर बुजुर्ग सभी इस मन्दिर में इकठे होकर अपने सिर पर नारियल फ़ूडवाते है | अब सोचिये कि नारियल इतना सख्त होता है जिसे हम पत्थर से बड़ी मुश्किल से फोड़ पाते है यहा पर सिर से नारियल फोड़े जाते है |

इस मन्दिर के बारे में एक कहानी मशहूर है जो ब्रिटिश राज की कहानी है | इस कहानी के अनुसार अंग्रेज इस मन्दिर से होकर एक रेलवे ट्रैक बनाना चाहते थे और उस रेलवे ट्रैक को बनाने के लिए मन्दिर को तोडना पड़ता | इसलिए गाँव वालो ने अंग्रेजो का रेलवे ट्रैक बनाने में विरोध किया ताकि उस प्राचीन मंदिर को सुरक्षित कर सके | अंग्रेज मानने वाले नही थे फिर भी उन्होंने एक ऐसी शर्त रखी जिससे वो गाँव वालो की भक्ति की परीक्षा लेना चाहते थे | उन्होंने शर्त ये रखी थी इस मन्दिर से निकले हुए नारियल के आकार के 187 पत्थरों को उनको अपने सिर से फोड़ना है और अगर वो सफल हो गये तो अंग्रेज रेलवे ट्रैक नही बनायेंगे | गाँव वालो ने जान की पपरवाह किये देवी का नाम लेकर अपने सिर से पत्थर तोड़ दिए और किसी को चोट नही आयी | अंग्रेज भी इस अजूबे को देखकर चकित रह गये और उन्होंने रेलवे ट्रैक बनाना रोक दिया |

तब से अब तक पत्थर की जगह पर नारियल अपने सिर से फोड़कर इस प्रथा को पूरा किया जाता है | अब यहा पर खुद के हाथो से सिर पर नारियल फोड़ना तो बहुत कठिन कार्य है इसलिए मन्दिर के पुजारी इसके लिए श्रुधलुओ की सहायता करते है और उनके सिर से नारियल फोड़ते है | लोग बारी बारी से पुजारी के आने का इन्तजार करते है और अपनी बारी आने के बाद पुजारी अपने तरीके से उनके सिर से नारियल फोड़ते है जिससे उनको नुकसान भी नही होता है और नारियल भी फुट जाता है | यह सारा काम चंद मिनटों में पूरा हो जाता है | कुछ श्रुदालुओ को पीड़ा भी होती है लेकीन फिर भी वो अपने सर पर मसाज करवा कर सहन कर लेते है और बाद में नारियल के टुकडो को भगवान को चढ़ा देते है |

यहा पर किसी अप्रिय घटना के घटने पर उपचार करने वाला कोई डॉक्टर भी नही होता है | डॉक्टर भी हर साल इस घटना को दोहराने को प्राण घातक बताते है जिससे उनके दिमाग को नुकसान पहुचने की आशंका रही है | अगर नारियल फुट जता है तो ये नुकसानदायक नही होता है क्योंकि इससे ऊर्जा बंट जाती है लेकिन अगर नारियल नही फूटता है तो सिर को नुकसान होने की सम्भावना रहती है | लेकिन फिर भी श्रुधालू बिना किसी चिंता के ये प्रथा को पूरा करते है | इस प्रथा को निभाने वाले से ज्यादा यहाँ पर देखने वालो की भीड़ होती है जो इस नजारे को अपनी आँखों से देखते है |

तो मित्रो इन खतरनाक प्रथाओ Bizarre Traditions के अलावा भी भारत की कई ऐसी अजीबोगरीब प्रथाए Bizarre Traditions है जिसे हम शीघ्र ही अपने अगले अंश में आप तक पहुचाएंगे तब तब आप इस पोस्ट पर अपने विचार और सुझाव प्रकट करना ना भूले|

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