राजस्थान की भील जनजाति से जुड़े 16 रोचक तथ्य | Bhil Tribe Facts in Hindi

जनजाति से तात्पर्य उन जातियों से है जो प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप जीवनयापन करते हुए अपने जीवन पद्दति ,भाषा , संस्कार एवं व्यवसाय को सभ्यता के प्रभाव से अक्षुण्य बनाये रखती है | आज हम आपको राजस्थान की भील जनजाति से जुड़े रोचक तथ्य आपके सामने पेश करने जा रहे है |

  • भील जनजाति राजस्थान राज्य की दुसरी सबसे बड़ी जनजाति है प्रथम में मीणा आते है |
  • भील शब्द “द्रविड़” भाषा में “बिल” का अपभ्रंश है बिल का शाब्दिक अर्थ है तीर कमान |
  • राजस्थान में भील जनजाति उदयपुर ,बाँसवाड़ा ,प्रतापगढ़ , डूंगरपुर ,भीलवाड़ा और सिरोही इत्यादि जिले में निवास करती है | |
  • कर्नल टॉड ने भीलो को वनपुत्र कहा है
  • भील वीर ,साहसी निडर ,स्वामी भक्त एवं शपथ के पक्के होते है |  ये लोग केसरियानाथ (ऋषभदेव) को चढी केसर का पानी पीकर कभी झूठ नही बोलते है |
  • भीलो में जातिगत एकता बहुत है | ढोल बजते या किलकारी सुनते ही ये लोग शस्त्र लेकर एक जगह एकत्रित हो जाते है “फाईरे फाईरे ” भीलो का रणघोष है |
  • भीलो का घर “कु” कहलाता है | भीलो का मोहल्ला “फलां” तथा बहुत से झोपड़े मिलकर “पाल” कहलाते है | पाल का मुखिया पालवी कहलाता है |
  • भीलो के गाँव का मुखिया “तदवी” और “वंशाओ” कहलाता है जबकि भीलो की पंचायत का मुखिया गमेती कहलाता है |
  • मार्ग दर्शक भीलो को “बोलावा ” एवं सैनिक के घोड़े मारने वाला भील पाखरिया कहलाता है |
  • पांडा शब्द सुनकर भील खुश होते है जबकि कांडी (बाण चलाने वाला ) शब्द को गाली मानते है |
  • भीलो की गोत्र अटक कहलाती है
  • भीलो के कुलदेवता टोटम कहलाता है वैसे ये लोग हिंदूवादी होते है |
  • भीलो के भोजन में मक्का की रोटी तथा कांदो (प्याज) का भात मुख्य होता है | ये महुआ के बनी शराब और ताड़ का रस पीने के शौक़ीन होते है |
  • वेशभूषा – वस्त्रो के आधार पर भीलो को दो वर्ग लंगोटिया भील एवं पोतीद्दा भील में बांटा जाता है | लंगोटिया भील परुष खोयतु (कमर में लंगोटी) एवं भील स्त्रियाँ कछावु (घुटनों तक घाघरा) पहनती है | पोतीद्दा भील धोती बंडी (बनियान ) ,फालु (कमर का अंगोछा ) पहनते है | भील पुरुष प्रायः कुर्ता या अंगरखी तथा तंग धोती पहनते है | सिर पर पोत्या (साफा) बांधते है |
  • आजीविका – भीलो की मुख्य आजीविका कृषि एवं वनोपज है | भील पहाडी भागो में वनों को जलाकर प्राप्त भूमि में कृषि करते है उसे चिमाता तथा मैदानी भागो में वनों को काटकर प्राप्त भूमि में कार्य करते है तो उसे द्जिया कहते है |
  • भीलो में तलाक प्राय: मुखिया की उपस्थिति में होता है जिसे छेड़ा फाड़ना कहते है |
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