Arthur Conan Doyle, जिनकी वजह से हुआ विश्व प्रसिद्ध जासूस Sherlock Holmes का जन्म | Arthur Conan Doyle Biography in Hindi

Arthur Conan Doyle Biography in Hindi

Arthur Conan Doyle Biography in Hindiमित्रो हमने Sherlock Holmes से जुड़े कई उपन्यास और फिल्मे देखी होगी , जो ना केवल ब्रिटेन बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्ध हुए थे | आपको जानकर ये ताज्जुब होगा कि Sherlock Holmes कोई असली पात्र नही था बल्कि Arthur Conan Doyle द्वारा रचित एक काल्पनिक पात्र था जिसने जासुसी के क्षेत्र में नई उचाइयो को छुआ था | अब सोचिये जिस वव्यक्ति ने  Sherlock Holmes जैसे पात्र को जीवंत किया , वो कितना  बड़ा जासूस होगा | Arthur Conan Doyle एक ब्रिटिश लेखक और भौतिक विज्ञानी थे जिनकी Sherlock Holmes सहित कई रचनाओं ने देश विदेश में धूम मचाया था | उन्होंने कई काल्पनिक रहस्यमयी किरदारों को अपने उपन्यासों के द्वारा जीवित किया था | आइये आज हम आपको उसी Arthur Conan Doyle की जीवनी से रूबरू करवाते है |

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Arthur Conan Doyle का जन्म 22 मई 1859 को स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग जिले में हुआ था | उनके पिता का नाम चार्ल्स डायल और माँ का नाम मैरी था | 1855 में आर्थर के माता पिता की शादी हुयी थी , लेकिन चार्ल्स के शराब की आदत के कारण 1864 में उनका परिवार अलग हो गया था जो बाद में 1867 में वापस एक हुआ था | आर्थर के पिता की मृत्यु 1893 में हो गयी थी जो काफी समय से एक असाध्य रोग से गुजर रहे थे | आर्थर के पिता की मौत के बाद उनके धनी चाचाओं ने उनकी सहायता की और 9 साल की उम्र  में उन्हें स्कॉटलैंड के जाने माने स्कूल में दाखिला दिलवाया | इसके बाद वो 1875 तक Stonyhurst College में पढ़े और फिर ऑस्ट्रिया के Jesuit school Stella Matutina में पढ़े |

1876 से 1881 तक आर्थर  University of Edinburgh Medical School में मेडिकल की पढाई की | मेडिकल अभ्यास से होने वाली आय पर्याप्त नही थी अत: वो लेखन भी करने लगे | लेखन इतना सफल रहा कि उन्होंने इसे ही पूर्णकालिक रूप से अपना लिया | उन्होंने अपनी मेडिकल की पढाई के दौरान छोटीछोटी कहानिया लिखना शुरू कर दिया था | उनका सबसे प्रथम उपन्यास The Haunted Grange of Goresthorpe था जिसको Blackwood’s Magazine में छापने के लिए भेजा गया था लेकिन उसको approve नही किया गया  गया था  | आर्थर का पहला प्रकाशित उपन्यास  “The Mystery of Sasassa Valley था जो  Chambers’s Edinburgh Journal में 6 September 1879 को प्रकाशित हुआ था | उनका पहला अकादमी आर्टिकल Gelsemium as a Poison था जो British Medical Journal में छपा था |

1880 में आर्थर पीटरहेड के Greenland whaler Hope में डॉक्टर की नौकरी करने लग गये और 1881 में अपनी स्नातक की पढाई के बाद उन्हें West African coast की यात्रा के दौरान ship’s surgeon की नौकरी मिली | उन्हें अपने मेडिकल के पेशे की वजह से देश विदेश में भ्रमण के कई अवसर मिले | उन्होंने वहा की विभिन्न परम्पराओं एवं संस्कृतियो का अध्ययन किया और उन्हें अपने उपन्यासों में गुंथा | 1885 में आर्थर ने अपनी M.D. degree पुरी की | 1882 में आर्थर अपने पुराने मित्र के साथ मिलकर मेडिकल अभ्यास करने लगे लेकिन बाद में विवादों के कारण उन्होंने स्वतंत्र अभ्यास करना शुरू कर दिया था | अपने मेडिकल के पेशे से वो असफल रहे और इसी कारण वो अपने लेखन पर ज्यादा ध्यान देने लग गये थे |

1887 में Beeton’s Christmas Annual के क्रिसमस अंक में उनके  A Study in Scarlet से Sherlock Holmes नामक लेख प्रकाशित हुए | उन्हें इस कहानी के लिए 25 पौंड दिए गये थे | लेखक ने इसकी सफलता से उत्साहित होकर पूरा उपन्यास लिखने की योजना बनाई और दो वर्ष बाद “मीका क्लार्क ” सामने आया | 1891 में उन्होंने “द स्ट्रैंड पत्रिका ” के लिए कहानियों की पुरी श्रुंखला प्रस्तुत की | इतने प्रसिधी पाने के बाद भी वो अंगरेजी साहित्य की ओर आगे जाना चाहते थे | 1893 में उन्होंने अपने प्रिय पात्र होम्स को मृत दिखाकर अपने लेखन से निकलने का प्रयास किया ,किन्तु पाठको के आग्रह पर कहानी में नया मोड़ लाना पड़ा और होम्स लौट आया |

आर्थर ने जासूसी के अलावा अन्य विषयों पर भी उपन्यास लिखे जिनमे The Tragedy of the Korosko , Rodney Stone और Last World प्रमुख है | उन्होंने इसके अतिरिक्त ओर भी कई किताबे एवं ग्रन्थ लिखे | 1930 में हृदयाघात की वजह से उनकी मृत्यु हो गयी|  वो अपने मौत के बाद भी अपने प्रसिद्ध उपन्यास Sherlock Holmes के जरीये आज लोगो के दिलो में जीवित है | कुछ लोगो का तो आज भी मानना है कि “मृत्यु के पश्चात जीवन ” विषय के विशेषज्ञ और शोध कर्ता भी थे |

 

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