Mahabharata -Army of Pandavas and Kauravas महाभारत कथा – पांड्वो-कौरवो की सेना और युद्ध के नियम

kurukshetra War Preparationsश्रीकृष्ण ने हस्तिनापुर से लौंटने के पश्चात पांड्वो को युद्ध की तैयारी करने को कहा | पांड्वो की विशाल सेना को सात भागो में विभाजित कर दिया गया जिसमे प्रत्येक सेना में द्रुपद , विराट , दृष्टध्युम , शिखन्डी , सात्यकि , चेकितान और भीमसेन जैसे महारथी सातो सेनाओ दल नायक थे | अब सेनापति का चुनाव करना था तो वीर कुमार दृष्टधुम्यं को पांड्वो की सेना का सेनापति बनाया गया | दुसरी तरफ कौरवो की सेना के नायक भीष्म ने दुर्योधन कहा “मै युद्ध का संचालन अवश्य करूंगा लेकिन पांडू पुत्रो का वध नही करूंगा इसलिए यदि तुम अपने प्रिय मित्र कर्ण को सेनापति बना दो तो मुझे कोई आपति नही है  ” |

loading...

उधर कर्ण ने भी प्रतिज्ञा कर ली थी कि जब तक भीष्म रणभूमि में है वो युद्ध नही करेगा और उनकी मृत्यु के बाद ही युद्ध में प्रवेश लेगा और केवल अर्जुन को मारेगा | दुर्योधन ने सोच विचारकर भीष्म पितामह को कौरवो का सेनापति नियुक्त किया | अब कौरवो की सेना में आचार्य द्रोण , उनके पुत्र अश्वत्थामा , कौरवो के बहनोई जयद्रथ , ब्रह्मन कृपा , कृतवर्मा , शल्य , सुदक्षिना , भुरिश्र्वास , बहलिका , शकुनि और हस्तिनापुर के कई महारथी शामिल थे |

युद्ध की तैयारियों के मध्य बलराम जी पांड्वो के पड़ाव में पहुचे और पांड्वो से कहा ” पांडू पुत्रो , जैसा कि तुम जानते हो मेरे लिए कौरव और पांडव दोनों समान है , मैंने भीम और बलराम दोनों को गदा सिखाई है इसलिए दोनों ही मेरे शिष्य है , मैंने तो कृष्ण से भी युद्ध में सम्मिलित होने के लिए मना किया किन्तु वो नही माना लेकिन मै कुरुवंशियो का नाश होते हुए नही देख सकता हु इसलिए मै यहा नही रह सकता हु , मेरा अब संसार से विराग हो गया है इसलिए मै जा रहा हु “| उस समय पुरे भारतवर्ष में केवल दो राजा ही युद्ध में सम्मिलित नही हुए थे पहले बलराम और दुसरे श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मणी की चोटी बहन के पति भोजकट के राजा रुक्मी |

राजा रुक्मी पहले पांड्वो के पास गये और उनकी तरफ से युद्ध में सम्मिलित होने के लिए प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने मना कर दिया | अब वो दुर्योधन के पास उसकी सहायता के लिए गये लेकिन उसने कहा कि जिसकी सहायता को पांड्वो ने अस्वीकृत कर दिया उसको वो कैसे स्वीकृत कर सकता है | दोनों पक्षों में अपमानित होने के कारण उसने युद्ध में सम्मिलित नही होने का प्रण लिया | अब दोनों सेनाओ के योद्धाओ और सैनिको को मिलाकर कुल सेना लगभग 40 लाख थी | कुरुक्षेत्र युद्ध में प्रयुक्त होने वाले शस्त्र इस प्रकार थे

धनुष – अर्जुन ,भीष्म ,द्रोण ,कर्ण ,सात्यकी और अभिमन्यु द्वारा चुना गया शस्त्र
गदा – भीम और दुर्योधन द्वारा चुना गया शस्त्र
भाला – युधिष्ठिर द्वारा चुना गया शस्त्र
तलवार – नकुल , दुशाशन , दृष्टद्य्मं और दुसरे कौरवो द्वारा चुना गया शस्त्र
कुल्हाडी – सहदेव द्वारा चुना गया शस्त्र

कुरुक्षेत्र में सैन्य टुकडियो को निम्न रूप से तैयार किया गया जिसमे कुछ आक्रमण कारी और कुछ बचावकारी टुकडिया थे इनके नाम क्रौंचव्यूह, मकरव्यूह, कुर्मव्यूह, त्रिशूलव्यूह, चक्रव्यूह, कमलव्यूह, गरुड़व्यूह, ऊर्मीव्यूह, मंडलव्यूह, वज्रव्यूह, शकटव्यूह, असुरव्यूह, देवव्यूह , सूचीव्यूह, श्रीगटकव्यूह, चन्द्रकलाव्यूह , मालाव्यूह थे | कुरुक्षेत्र युद्ध के नियम इस प्रकार थे जो धर्मयुद्ध कहलाया |

सूर्यास्त से पूर्व और सूर्यास्त के पश्चात युद्ध नही होगा
एक योद्धा पर एक से अधिक योद्धा वार नही कर सकते है
समान शस्त्र या समान सवारी वाले होने पर दो योद्धा द्वंदयुद्ध कर सकते है
समर्पण करने वाले योद्धा को ना ही मारा जायेगा और ना ही चोटिल किया जाएगा
समर्पण कर्ण्व वाले योद्धा को युद्ध का बंदी बना लिया जाएगा और युद्ध में उसकी सुरक्षा की जायेगी
बिना शस्त्र वाले योद्धा को ना ही कोई नही मारेगा और ना चोटिल करेगा
अचेत योधा को भी ना कोई मारेगा और ना चोटिल करेगा
युद्ध में शामिल ना होने वाले व्यक्ति या पशुओ को कोई नही मारेगा |
युद्ध में कोई पीठ पीछे वार नही करेगा
युद्ध में कोई औरतो पर आक्रमण नही करेगा
किसी भी पशु को बिना वजह हानि नही पहुछाएगा
हर शस्त्र के लिए बने नियमो का योद्धा पालन करेगा
युद्ध में कोई योद्धा छल कपट का प्रयोग नही करेगा|

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *