अलिफ़ लैला – मछुवारे की कहानी Arabian Nights-Story of the Fisherman

अलिफ़ लैला – मछुवारे की कहानी Arabian Nights-Story of the Fisherman

एक बार एक बहुत गरीब मछुआरा था जो बड़ी मुश्किल से अपने परिवार को पाल रहा था | उसके परिवार में उसके एक पत्नी और तीन बच्चे थे | वो रोज समुद्र में मछलिया पकड़ने जाता था लेकिन उसका एक नियम था कि वो उसका जाल एक दिन में चार बार से ज्यादा नही डालेगा | उसके इस नियम के कारण उसकी पत्नी बहुत परेशान थी क्योंकि अगर वो ज्यादा प्रयास करे तो उसे ज्यादा मछलिया मिल सकती थी | लेकिन वो आदमी अपने नियमो पर पक्का था और उसे अल्लाह पर पूरा विश्वास था कि वो उसे जरुर एक दिन उसे धनवान बना देगा |

रोज की तरह एक दिन भी वो जाल लेकर समुद्र किनारे पहुचा और अपना जाल फेका | जाल को जब वो खीचने लगा तो वो बहुत भारी लग रहा था तो वो सोचने लगा कि शायद आज कोई बड़ी मछली पकड़ में आयी है और उसका काम हो जाएगा | लेकिन जैसे ही वो जाल को तट पर लेकर आया उसमे हड्डियों के कंकाल मिले और वो दुखी हो गया | अब उसने दुसरी बार फिर जाल फेंका और इस बार एक बक्सा आया जिसमे कचरा भरा हुआ था अब वो अपनी किस्मत को दोष देने लगा | अब तीसरी बार उसने जाल फेंका और जाल में कंकड़ पत्थर आये और निराश होते हुए मन जी मन रोने लगा | अब उसके जाल डालने की आखिरी बारी थी और उसने अल्लाह का नाम लेते हुए जाल समुद्र में फ़ेंक दिया |

इस बार उसके जाल में एक पीतल की सुराही आयी और थोडा खुश हुआ | उसने उसे बेचकर पैसे कमाने के बारे में सोचने लगा और फिर उस सुराही का ढक्कन खोला | जैसे ही उसने उस सुराही का ढक्कन खोला उसमे से एक धुआ निकला और फैलते फैलते उसने एक जिन्न का आकार ले लिया | अब वो जिन्न सुराही से निकलते वक़्त बोल रहा था “मुझे माफ़ कर दो मै आपकी नाफरमानी नही करूंगा ” | अब वो मछुआरा उस जिन्न को देखकर डर गया लेकिन हिम्मत जुटाकर जिन्न से बोला “ए जिन्न , तू कौन है और तुझे इस सुराही में क्यों कैद किया गया था ” |  जिन्न बोला “तुम अदब से बात करो नही तो मै तुझे मार दूंगा ”

मछुवारा बोला “ए एहसान फरामोश जिन्न , मैंने तुझे आजाद किया और तुम मुझे ही मारोगे , क्या मेरी नेकी का यही बदला है  ” अब जिन्न बोला “मै एक बहुत जालिम और मगरूर जिन्न हु जो इंसानों को तकलीफ पहुचाकर बहुत खुश हुआ करता था , मुझे हजरत मोहम्मद ने इंसानों पर जुल्म करने के लिए मना किया लेकिन मैंने ताकत के गुरुर में इंकार कर दिया , तब उन्होंने मुझे इस सुराही में कैद कर दिया और दरिया में डुबो दिया , लेकिन अबी मुझमे कई जिन्नातो की ताकत आ गयी है ”

अब वो मछुवारा बोला “ए ताकतवर जिन्न , मगर मुझ गरीब कंगाल और बदहाल इन्सान को क्यों मारना चाहता है ” अब जिन्न बोला “मैंने कसम खाई थी कि अगर कोई मेरे कैद के 100 सालो में मुझे निकाल देगा तो मै उसे मालामाल कर दूंगा ,बड़ी सल्तनत का बादशाह बना दूंगा ,हर वक़्त रूह बनकर उसके पास हाजिर रहूँगा और रोज उसकी तीन ख्वाहिश पुरी करूंगा लेकिन 100 बरसों में मुझे किसी ने नही निकाला और मुझे आदमजात इंसानों पर बहुत गुस्सा आया और मैंने फिर कसम खाई कि 100 बाद जो भी मुझे निकालेगा, मै उसे जान से मार दूंगा  , तूने मुझे निकाला है इसलिए मै तुझे कत्ल कर दूंगा , अब तू मुझे बता कि तू कैसे मरना चाहेगा ”

अब मछुवारे ने जिन्न से कहा “मरने से पहले मै तुझसे एक सवाल का जवाब पूछना चाहता हु ” जिन्न में झल्लाते हुए कहा “पूछ , क्या सवाल पूछना चाहता है ”| अब मछुवारे ने पूछा “ए जिन्न मुझे यकीन नही आता है कि तू इस छोटी से सुराही के अंदर था ” | अब जिन्न ओर भी गुस्से में आते हुए बोला “हां , मै अंदर ही था ” | अब मछुवारे ने कहा “मुझे तो बिलकुल यकीन नही आता , तेरे पैर का एक अंगूठा भी इस सुराही में नही समा सकता तो फिर तेरा पूरा जिस्म इसमें कैसे आ सकता है और मै जब तक आँखों से ना देख लू मुझे यकीन नही आएगा  ” | अब जिन्न मछुवारे की चुनौती स्वीकार करते हुए धुवा बनते हुए सुराही में चला गया |

अब जिन्न सुराही में गया वो मछुवारे से बोला “ए आदमजात देख मै अब इस सुराही में आ गया हु और इसी में से बोल रहा हु ” |  जैसे ही मछुवारे ने जिन्न की बात सूनी वो दौड़ता हुआ सुराही के पास गया और उसका ढक्कन बंद कर दिया |  अब मछुवारे ने जिन्न से कहा “अब तू बता कि तू कैसे मरना पसंद करेगा , मेरा सोचन है कि तुझे फिर से इस दरिया में दफन कर दू  ” | जिन्न ने रिहाई की भींख माँगी और कहा “मुझे माफ़ कर दो , मुझे फिर से दरिया में मत फेंको , तुम जैसा बोलोगे वैसा मै करूंगा ” | मछुवारा बोला “नही , अब मै तुम पर विश्वास नही कर सकता हु , मुझे डर है कि तुम मेरे साथ भी वही करोगे जैसा एहसान फरामोश बादशाह ग्रीक और साजिशी मक्कार वजीर ने हकीम दोबान के एहसान का बदला दिया था, चल आज मै तुझे उस एहसान फरामोश बादशाह की कहानी सुनाता हु  ”

loading...
Loading...

One Comment

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *