क्रांतिदूत अन्ना हजारे की जीवनी | Anna Hazare Biography in Hindi

Loading...

Anna Hazare Biography in Hindi

anna-hazare-biography-in-hindiअन्ना हजारे , जिसको शायद आज भारत का इन्सान जानता है जिन्होंने अपने आंदोलनों से सरकार की नीदं उड़ा दी | अन्ना हजारे एक समाज सेवक है जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देशहित और समाजहित में लगा दिया | गांधीजी के पदचिन्हों पर चलते हुए उन्होंने अनेक मुकाम हासिल किये जो एक साधारण व्यक्ति के लिए बहुत कठिन होते है | उनके इन्ही आंदोलनों द्वारा समाज सेवा के प्रयास के कारण उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था | अभी कुछ ही दिनों में अन्ना के जीवन पर बनी एक फिल्म रिलीज़ हो रही है उससे पहले हम आपको Anna Hazare अन्ना के जीवन के बारे में  और उनके संघर्ष की कहानी आप लोगो को बताना चाहते है |

अन्ना हजारे का प्रारम्भिक जीवन | Early Life of Anna Hazare

महाराष्ट्र के एक अत्यंत साधारण परिवार में 15 जून 1938 को भिंगर कस्बे में  अन्ना हजारे का जन्म हुआ | पिता एक मजदूर थे  | ऐसे घर में जन्मे Anna Hazare अन्ना हजारे का वास्तविक नाम यह नही था | माता पिता ने जन्म के बाद उसे नाम दिया – ‘किसन बाबू ‘ | पूरा नाम रखा “किसन बाबुराव हजारे “| वैसे पुरे परिवार के लिए वह किसन ही था | इसी नाम से गाँव के बच्चे उनसे परिचित थे | माँ उन्हें कभी नानू , कभी मुन्ना तो कभी किसनू कहकर अपना प्यार उडेला करती थी | अपने सौम्य स्वभाव के कारण बालक किसन अपने हमउम्र दोस्तों में काफी लोकप्रिय हुआ करता |

महाराष्ट्र का एक विस्कित जिला है अहमदनगर | यही पर किसन के दादा तैनात थे | वह सेना में थे और अपने परिवार के साथ उन का निवास अहमदनगर के भिंगर में था | भिंगर एक अच्छा कस्बा था जहा पर दादा रहते थे | उनकी ड्यूटी भी इसी स्थान पर थी | पिता मजदूरी करके अपना कुछ आर्थिक योगदान परिवार को देते | यहा पर रहते हुए बालक किसन का जन्म हुआ , जो कि मजदूर पिता की पहली सन्तान थी | घर में पहली सन्तान ,वह भी लड़का जैसे खुशियों का पिटारा खुल गया हो | हर भारतीय परिवार की तरह माता दादा माता पिता औए अन्य सगे संबधियो ने खूब खुशिया मनाई |

जब दादा की मृत्यु हुयी तो भी पिता भिंगर नामक कस्बे में रहते रहे और मजदूरी करके परिवार का पालन करते रहे | गुजारा बड़ी मुश्किल से होता | घर में एक के बाद एक बच्चे होते रहे , जिनमे सबसे बड़ा किसन ही था | दादा की मृत्यु के बाद परिवार सात वर्ष तो जैसे तैसे वही रहता रहा फिर परिवार का ठीक निर्वाह न हो सकने के कारण तथा बच्चो की संख्या बढ़ जाने पर पिता अपने पुश्तैनी घर में चले गये जो रालेगांव सिद्धि में था | इस परिवार में साथ पुत्र हुए जिनमे अन्ना (किसन) सबसे बड़े थे | छ भाइयो में सबसे बड़ा होने के कारण वह सबसे अधिक समझदार और परिवार के प्रति अपने दायित्व को समझते थे |

अन्ना की के बुआ मुम्बई में रहती थी जब तब भाई भाभी के पास आती भी रही | एक बार जब घर में गरीबी देखी तो वह किसन को अपने साथ ले आई | तब वह छोटा था और वह भाई भाभी को आश्वासन दे गयी कि वह उनके किसन को अपने पुत्र की तरह पालेगी और स्कूल में दाखिला करवाकर उसे पढने का मौका देगी | बालक किसन मुम्बई में अपनी बुआ के पास रहने लगा | वही स्कूल में दाखिला हो गया और हर बच्चे की तरह स्कूल जाने लगा | सुबह शाम जब भी समय मिलता वह पढ़ लेता और शेष समय बच्चो की तरह बुआ को उनके काम में सहयोग करता | मुम्बई में रहते हुए किसन ने सातवी तक की पढाई पुरी ली |

फुल बेचने की दूकान पर नौकरी और खोल की अपनी ही दूकान | Anna Hazare Flowers Shop

रालेगांव सिद्धि में मजदूर पिता को अब अन्य छ बच्चो का भी पालन करना पड़ा | हर समय आर्थिक तंगी रहती | ठीक से निर्वाह भी नही हो पाता | पिता को अपने सबसे बड़े पुत्र किसन से अब आर्थिक मदद की आस बंधने लगी थी | घर के हालत अच्छे न थे | शायद इसी को देखकर किसन ने स्कूल छोड़ा | पिता की मदद के लिए बालक किसन ने काम ढूँढना शूरू कर दिया | कई दिनों की कोशिस के बाद किसन को दादर स्टेशन के बाहर नौकरी मिल गयी | यहा फूलो की एक दूकान के मालिक को नौकर की जरूरत थी जो कि दूकान पर फूल बेचने का काम न कर सके |किसन को उसने 40 रूपये महीना पगार पर रख लिया | वह दिल लगाकर काम करने लगा |

धीरे धीरे फूल खरीदने और बेचने के सारे गुण पा लिए | हर महीने चालीस रूपये मिल जाते | इनमे से जितना भी सम्भव हो पाता वह घर भेज देते| घर पर भी छोटे भाई समझदार हो गये और उन्हें भी काम की तलाश थी |फूल खरीदने बेचने की अच्छी जानकारी पा लेने के बाद तथा दो भाइयो को भी काम दिलवाने के विचार से किसन ने अपनी दूकान बना ली | उस पर वह फूलो का काम करने लगा | शीघ्र ही शेष दो भाइयो को अपने पास बुला लिया | तीनो भाई मिलकर फूल बेचने की दूकान चलाने लगे | इससे उनकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार आने लगा | गाँव में जब तब पिता को कुछ पैसा पहुच जाता , जिससे घर का गुजारा भी ठीक चलने लगा था |

सेना में डाइवर की नौकरी | Anna Hazare in Army

anna-hazare-in-armyकिसन ने जब देखा कि उसके छोटे भाई दूकान का काम ठीक से चला सकते है तो वह नौकरी की तलाश करने लगे | Anna Hazare अन्ना में थोड़ी भागदौड़ की और सेना में नौकरी मिल गयी | बतौर ड्राईवर काम करने लगे | 60 के दशक की बात है जब वह सैनिक थे | उन्हें पंजाब में ड्यूटी मिली | वे सेना का ट्रक चलाते | इससे माँ बाप की और छोटे भाइयो की सहायता करना सरल हो गया | सेना में रहकर अच्छा अनुशासन भी सीखा और देश भक्ति भी समझने लगे |

पंजाब में बतौर सेना में ड्राईवर का काम करते हुए अन्ना ने अनुशाषित होकर अपनी ड्यूटी निभाई | जब भी छुट्टिया मिलती ,वे अपने गाँव चले जाते | पहली पोस्टिंग पंजाब में थी और उन्ही दिनों हमारे पडौसी पाकिस्तान ने हमला कर दिया | उस समय अन्ना जी को बहुत बोर्डर तक जाना पड़ता | कहा जाता है कि इस समय फ़ौजी ड्राईवर अन्ना ने कई बार मौत को करीब आते देखा | अपनी जागरूकता ,अपनी हिम्मत तथा वीरता के बल पर अन्ना ने कई बार मौत को धत्ता देकर अपनी जान बचाई |

पुस्तको में रूचि और शिक्षा | Anna Hazare Inspire with Swami Vivekanand

नौकरी के दौरान एक बार Anna Hazare अन्ना ने दिल्ली रेलवे स्टेशन से स्वामी विवेकानंद की पुस्तक खरीदी | उस पुस्तक से अन्ना जी बहुत प्रभावित हुए तथा समाज के लिए कुछ विशेष करने के बारे में सोचा करते थे | इन्ही दिनों अन्ना ने जिन दो महापुरुषों पर पुस्तके पढ़ी , उनके नाम थे मोहनदास करमचन्द गांधी और संत विनोभा भावे | उन पर जीवनी तथा कार्यो ने भी Anna Hazare अन्ना पर गहरा प्रभाव छोड़ना शूरू कर दिया | कुल मिलाकर फ़ौजी ड्राईवर अन्ना के तो जैसे विचार ही बदल गये | उनकी सोच पहले से बहुत भिन्न हो गयी | उन्होंने ठान लिया कि वह अपना शेष जीवन समाज को समर्पित कर देंगे |

अविवाहित रहने का निर्णय | Unmarried to Serve India

समाज में व्याप्त कुरीतियों ,गरीबी और भुखमरी  ,समाज में प्रति युवाओं के दायित्व ,तीन महापुरुषों के जीवन से प्रात शिक्षाओं को अपने जीवनकाल में धारण करते हुए अन्ना ने कभी भी विवाह नही करने का निश्चय किया | जीवन भर अविवाहित रहने का पक्का निर्णय हो गया | वैसे इससे पहले अन्ना ने विवाह न करने का मन बना रखा था किन्तु 1970 में जीवन भर कुंवारा रहने का निश्चय अपने मित्रो ,परिजनों ,परिवार वालों को बता दिया | इस समय अन्ना की आयु 32 वर्ष के आस पास थी | सेना में काम करते हुए जब उनकी पोस्टिंग मुम्बई में हुयी तो उन्होंने गाँव जाने का काफी बार अवसर मिलता रहा | वह रालेगन सिद्धि कई बार जाते रहे तथा समस्याओं ,रहन सहन की कठिनाइयो को करीब से देखते और समझते रहे | इस प्रकार वह गाँव वालों से मिलने जुलने लगे | जिनसे पहचान नही थी या जिन्हें वह भूल चुके थे ,उनमे भी थोडा मेल मिलाप हो जाता | अपनापन छाता गया |

सेना से सेवानिवृत्त | Anna Hazare VRS From Army

जब Anna Hazare अन्ना की तैनाती जम्मू में हुयी और नौकरी के 15 वर्ष भी पुरे हो गये तो उन्होंने VRS लेकर सेवानिवृत हो जाने का मन बना लिया | वास्तव में जम्मू से मुम्बई तथा पैतृक गाँव रालेगन सिद्धि बहुत दूर पड़ता था | आने जाने में बहुत कथिना होती थी समय बहुत लगता था | गाँव में रहने वालो से अच्छा परिचय ही नही घनिष्टता भी हो गयी थी | गाँव की समस्याए भी रह रहकर धयान में आज जाती |स्वामी विवेकानंद , महात्मा गांधी तथा विनोभा भावे को पढने और स्वयं को समाज को समर्पित करने का तो पक्का इरादा कर लिया था |सेना में नौकरी में रहकर वह समाज विशेषकर अपने गाँव के लिए कोई सेवा काम नही कर पाते थे इसलिए 1975 ने पेंशन पर चले जाने का अन्ना ने VRS ले लिया और पेंशन पर चले गये |

बदली अपने गाँव की तस्वीर

सेना से VRS लेने के बाद अन्ना सीधे अपने गाँव जा पहुचे | अपनी इच्छा अपने गाँव में परिवर्तन लाने की , गाँव का उत्थान करने की , गाँव वासियों के जीवन को बेहतर बनाने की थी | थोड़े ही समय में अन्ना ने गाँव की तस्वीर ही बदल कर रखे दी |ग्रामीण विकास होता गया और गाँव आदर्श बनता गया | अन्ना हजारे ने अपनी जमीन जो उनके हिस्से में थी स्कूल के होस्टल को दान कर दी |वहा पहले होस्टल नही था और वहा होस्टल का निर्माण भी करवा दिया | होस्टल में होने वाला खर्च भी उनके सहयोग से होता | बच्चो के लिय बनने वाला खाना उन्ही के पैसे से तैयार हो पाता | पेंशन के साथ साथ अन्ना लोगो का सहयोग भी लिया करते थे |

मन्दिर में निवास

Anna Hazare अन्ना हजारे मन्दिर में रहते थे और वही से गाँव के विकास का कम चलाते थे | उन का भोजन होस्टल से आता था | जो भोजन बच्चे करते है वही अन्ना भी करते है | उसी भोजन को पाकर तृप्त रहते है | अन्ना हजारे को अपने घर गये 35 वर्ष हो गये क्योंकि वो मन्दिर में ही रहते है और वही उनका घर है | गाँव में शराब तथा अन्य नशे का बिलकुल भी प्रयोग नही किया जाता | गाँव में इतना विकास हो चूका है कि गाँव किसी भी सुविधा से वंचित नही | इसका श्रेय केवल अन्ना जी को जाता है |

जन लोकपाल बिल अभियान | Anna Hazare Jan Lokpal

Anna Hazare अन्ना हजारे ने अपने दल बल के साथ देश में रामराज लाने की इच्छा से जन्तर मन्तर से अपना अभियान शुरू किया | उनका कहना है कि जब जन लोकपाल बिल पारित हो जाएगा तो भ्रष्टाचार को खत्म करना सम्भव हो सकेगा | अन्ना हजारे ने जो आन्दोलन शुरू किया धरने किये जिसमे अरविन्द केजरीवाल सहित कई लोग शामिल हुए थे | अनशन पर बैठने से पहले अन्ना जे ने अपील घर घर पहुचाई थी और जनता को उनका सहयोग देनें को कहा गया था | उनका ये आन्दोलन धीरे धीरे देशव्यापी स्वरूप लेने लगा और पुरे देश में एक ही गूंज थी “अन्ना तुम संघर्ष करो ,हम तुम्हारे साथ है “| अन्ना के नाम की टोपिया बनने लगी जिस पर लिखा होता था “मै अन्ना हु “| अन्ना जी ने देश के लिए जन लोकपाल के अलावा भी कई आंदोलनों में कई दिनों तक अनशन किया था जिसके कारण वो देश की महान हस्ती बन गये |

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *