अलीबाबा और चालीस चोर – दूसरा भाग AliBaba and the Forty Thieves- Part 2

Ali-Baba-And-The-Forty-Thieves Part 2अलीबाबा का भाई कासिम अंदर तो आ गया था लेकिन बाहर जाने के लिए जादुई मन्त्र भूल गया था | उसी दौरान वो सभी डाकू भी आ गये और उन्होंने कासिम को अंदर देख लिया | उन्होंने कासिम से सारा माल लेकर वापस अपनी जगह पर रख दिया | अब वो अनुमान लगाने लगे कि वो अंदर कैसे आया क्योंकि अंदर आने का मन्त्र तो सिर्फ उन्ही 40 डाकुओ को पता थी | अब उन्हें अपनी गुफा की सुरक्षा की चिंता होने लगी थी | अब उन्होंने कासिम को मारकर उसके चार टुकड़े कर दिए और उन सभी टुकडो को गुफा के दरवाजे पर लटका दिए ताकि उसे देखकर डर के मारे कोई अंदर ना आ सके | ऐसा करके वापस वो लुट के लिए निकल गये |

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अब कासिम के देर रात नही लौटने पर उसकी पत्नी घबरा गयी और अलीबाबा के घर गयी | उसने कासिम के अभी तक नही लौटने की बात बताई | अलीबाबा ने सोचा भी नही था कि उसका भाई अकेला इतना जल्दी गुफा तक चला जाएगा | अब आधी रात तक पर भी नही लौटने पर कासिम की पत्नी को कुछ दुर्घटना की आशंका हुयी | सुबह वो वापस अलीबाबा के पास गयी और मदद के लिए कहा | अलीबाबा तुंरत अपनी कुल्हाड़ी साथ लेकर गुफा तक गया | उस समय सभी डाकू डकैती के लिए निकल चुके थे | अब वो अंदर गया तो उसको कासिम के टुकड़े दरवाजे के पास मिले और वो चकित रह गया | उसने तुरंत उसके शरीर के टुकडो को एक थैले में भरकर जल्दी से वहा से निकलकर कासिम के घर आ गया |

कासिम के घर का दरवाजा कासिम की बुद्धिमान और चतुर दासी मरजीना ने खोला | उसने मरजीना को कहा “तुम अपने मालिक की मौत और लाश का राज किसी को मत बताना , अब हमें कासिम की लाश को इस तरह दफन करना होगा जैसे उसकी प्राकृतिक मौत हो गयी हो , जल्दी जाकर अपनी मालिकन को बुलाकर लाओ ” | मरजीना अपनी मालकिन को बुलाकर लाई और कासिम की लाश को देखकर उसकी पत्नी जोर जोर से रोने लगी तभी अलीबाबा ने उसे शांत किया और कासिम को दफन करने के लिए योजना बनाने के लिए सोचने लगा | अब मरजीना तुंरत वैद्य के पास गयी और उसको अपने मालिक के लिए औषधि देने को कहा | वो ऐसा इसलिए कर रहे थे ताकि वहा के लोगो को यकीन हो जाए कि कासिम की बीमारी से मौत हुयी |

अगली सुबह मरजीना मुस्तफा दर्जी के पास गयी और उसे सोने की अशर्फिया देते हुए कहा “तुम मेरे साथ मेरे घर चलो , मै तुम्हे आँखों पर पट्टी बांधकर ले जाना चाहती हु ” | मुस्तफा हिचकिचाते हुए बोला “ऐसी रात को क्या काम आ गया जो तुम मुझे चलने को बोल रही हो ” | अब मरजीना ने उसको कुछ ओर सोने की अशर्फिया देते हुए कहा “डरो मत  , तुम्हे मेरे घर चलना है , मेरे मालिक के शरीर के टुकडो को सीना है और काम पूरा होते ही तुम्हे ओर सोने की अशर्फिया दे दूंगी ” | पहले तो मुस्तफा ने घबराते हुए मना कर दिया लेकिन पैसो के लालच में उसने हामी भर दी |

अब मरजीना उसकी आँखों पर पट्टी बांधकर उसको कासिम के घर ले गयी | उसने कासिम के शरीर को सिया और उसके लिए कफन तैयार कर वापस चला गया | अगले दिन कासिम की बीमारी से मौत की खबर फैला दी और उसको बिना कीसी को पता चलते हुए दफन कर दिया | इस तरह किसी को बहे कासिम की हत्या का पता नही चला |अब कुछ दिनों बाद कासिम की विधवा पत्नी ने दुसरी शादी कर ली और अलीबाबा ने कासिम की दुकान अपने बड़े बेटे को दे दी |

उधर जब डाकू वापस गुफा में आये तो उन्हें कासिम की लाश नही मिली | अब उनका सरदार सोच में पड़ गया क्योंकि कोई ओर भी उनके राज को जान गया था इसलिए उसने अपने साथीयों को उस आदमी का पता लगाने के लिए बोला | एक डाकू इस काम को करने के लिए तैयार हो गया और शहर में घूमते फिरते एक सुबह जल्दी मुस्तफा दर्जी की दूकान पर एक दिन योही बैठ गया | उसने मुस्तफा दर्जी से पूछा “तुम इतनी जल्दी काम शुरू कर देते हो , अभी तो कोई दुकान नही खुली , मुझे तो विश्वास नही होता है कि तुम्हारे जैसा बुजुर्ग आदमी इतना बढ़िया सिलाई कर सकता है  ” | अब मुस्तफा दर्जी बोला “लगता है , तुम शहर में नये आये हो , मेरी आँखे बहुत तेज है , तुम विश्वास नही करोगे मैंने एक लाश के टुकडो को कम रोशनी में सी दिया था ” | अपनी बड़ाई सुनकर उस दर्जी ने गलती से ऐसा बोल दिया |

डाकू ये बात सुनकर खुश हो गया और वो चौकते हुए बोला “एक मरा आदमी , तुमने एक मरे आदमी को सिया है ” | मुस्तफा ने बात पलटते हुए कहा “नही नही , मै तुम्हे क्यों बताऊ , मैंने तो कुछ नही बोला ” | उस डाकू ने दर्जी को सोने की अशर्फिया दिखाई तो लालची दर्जी ने सबी बक दिया | अब उस डाकू ने उस आदमी का घर पूछा जिसके यहा वो शरीर के टुकडो को सीने गया | अब लालची दर्जी ने ओर अशर्फिया पाने के लिए कहा “मेरी तो आँखे बंधी थी ,मैं उसका घर कैसे जान सकता हु ” | उस डाकू ने उसको ओर अशर्फिया दी और घर बताने को बोला | अब उस दर्जी ने कहा “मेरी आंखे बंधी थी लेकिन मैंने कदमो से उसके घर को नाप लिया था ” | अब दर्जी उस डाकू को मुस्तफा के  घर तक लेकर गया और उस डाकू ने उस घर के बाहर एक निशान कर दिया | इस तरह वो डाकू वापस अपने खेमे में चला गया |

 

कुछ देर बाद जब मरजीना बाहर निकली तो उसने वो निशान अपने घर के बाहर देखा जो सिर्फ उसी के घर पर था दुसरे घरो पर नही था | उसको कुछ शक हुआ कि कोई उसके मालिक को नुकसान पहचाना चाहता है इसलिए उसने वैसा ही निशान सारे घरो पर कर दिया | उधर उस डाकू ने सारी खबर सरदार को बताई और वो डाकू रात को अपने सरदार को उस जगह पर लेकर गया | अब उस डाकू ने सभी घरो पर निशान देखा तो चौंक गया कि उसने तो एक ही घर पर निशान किया था अब उस घर को कैसे पहचाने | बाद में उस डाकू को सरदार ने मार दिया क्योंकि सरदार को लगा कि उसने गलत सुचना दी है |

अब सरदार मुस्तफा दर्जी के पास गया और उसको जान से मारने की धमकी देकर मुस्तफा का घर बताने को कहा | इस बार सरदार ने उसका घर ध्यान से देख लिया था | अब सरदार ने एक ओर योजना बनाई और उसने 19 खच्चर और 39 बड़े मर्तबान खरीदे जिस्म से के मर्तबान को तेल से भर दिया उअर बाकी सब को खाली रख दिया | उसने मर्तबान का मुह इतना बड़ा रखा ताकि आदमी उसके अंदर घुस सके | अब वो उन सबके साथ शहर में आया और अलीबाबा के घर पहुच गया | उसने अलीबाबा से कहा “तुम्हारे भाई ने मौत से पहले मुझसे तेल के मर्तबान खरीदे थे जिसकी रकम तो उसने अदा कर दी थी इसलिए मैं उसे लेकर आया हु ” | अलीबाबा ने सारे मर्तबान अस्तबल में रखने को कहा

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