अलीबाबा और चालीस चोर – प्रथम भाग Ali Baba and the Forty Thieves

Ali Baba and the Forty Thievesफारस के एक शहर में अलीबाबा और कासिम नाम के दो भाई रहते थे | उनके पिता ने मरने से पहले दोनों भाइयो को बराबर सम्पति दे दी लेकिन कासिम ने अलीबाबा से सारी सम्पति हडप ली | कासिम ने एक बढ़िया दूकान और माकन खरीदकर एक विधवा औरत से शादी कर ली | कासिम अपनी सम्पति को ओर बढाता हुआ अमीर हो गया | दुसरी तरफ अलीबाबा पहले ही कासिम द्वारा सम्पति हडपने से गरीब हो गया था | उसने एक गरीब लड़की से शादी कर ली और बुरे दौर से गुजरने लगा | वो लकडिया काटकर उन्हें बेचता था जिससे उसका परिवार चलता था |

एक दिन वो लकडिया काटने जंगल में गया तभी उसको उसकी तरफ जोरो से धुल उडती हुयी दिखाई दी | तभी उसको दूर से कुछ घोड़े उसकी ओर आते दिखाई दिए | हालांकि  वहा पर लुटेरो का खतरा नही था फिर भी अलीबाबा ने खुद को बचाने के लिए एक पेड़ पर छुपकर बैठ गया | वो पेड़ पर ऐसी जगह बैठा जहा उसको कोई नही देख सकता था लेकिन वो सबको देख सकता था | वो पेड़ एक चट्टान के पास थी | तभी उस चट्टान के पास आकर सारे घोड़े रुक गये | उसने देखा कि सभी घोड़ो पर आदमी हथियार लेकर बैठे थे और वहा पर आकर घोड़ो से उतर गये थे | अलीबाबा ने उन आदमियों को गिना तो वो कुल चालीस थे | वो सभी लुटेरे थे और उन सबके घोड़ो पर चोरी का सामान लदा हुआ था |

तभी उन लुटेरो में से उनका सरदार आगे बढ़ा और चट्टान के पास आकर बोला “खुल जा सिम सिम ” | तभी उस चट्टान में से एक दरवाजा खुला और एक एक करके सभी लुटेरे अंदर चले गये | उनके अंदर जाने के बाद दरवाजा बंद हो गया | अलीबाबा वहा पेड़ पर बैठा सब देख रहा था और थोड़ी देर बाद वो सभी 40 लुटेरे उस गुफा से बाहर आ गये | सभी के बाहर आ जाने के बाद सरदार ने वापस “बंद हो जा सिम सिम ” कहकर गुफा का दरवाजा बंद कर दिया | अब सभी लुटेरे जिस रस्ते से आये उसी से वापस चले गये | अलीबाबा फिर भी कुछ देर बैठा रहा ताकि शायद कोई गलती से दुबारा लौटकर ना आ जाए | सब कुछ शांत होने के बाद जब उसे यकीन हो गया कि अब कोई वापस नही आ सकता है , वो पेड़ से नीचे उस चट्टान के नजदीक गया |

वो चट्टान के पास जाकर सोचने लगा कि मै भी कोशिश करके देखता हु जो वो लुटेरे बोल रहे थे | अलीबाबा बोला “खुल जा सिम सिम ” और उस गुफा का दरवाजा खुल गया | अब वो गुफा के अंदर चला गया और वो गुफा बहुत बड़ी जगह थी | उसके गुफा के अंदर गुस्ते ही गुफा का द्वार बंद हो गये | उस गुफा के अंदर उपर की ओर दरार से रोशनी के कारण सब कुछ दिखाई दे रहा था | अब वो उस गुफा के अंदर घूमकर देखने लगा और उसे उस गुफा में बहुत सारे हीरे ,जवाहरात , सोना , चांदी और कीमती चोरी के सामान बिखरे हुए थे | ऐसा लग रहा था कि लुटेरो ने काफी समय तक लुटा हुआ सामान यहा रखा हुआ था | उसने वहा से उतना सोना चांदी और जवाहरात उठा लिया जितना वो ले जा सकता था |

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अब वो गुफा से बाहर निकल गया और वापस गुफा को उसी मन्त्र से बंद कर दिया | अब वो घर पंहुचा और अपने घर के दरवाजे बंद कर ध्यान से सभी बोरिया रख दी | जब उसकी पत्नी ने इतना सारा सोना और अशर्फिया देखा तो वो सोचने लगी कि उसके पति ने कही पर चोरी की होगी लेकिन अलीबाबा ने अपनी पत्नी को सारी कहानी बताई | अब अलीबाबा ने अपनी पत्नी को कहा “मै अभी एक गड्डा खोद देता हु जिसमे हम सभी सोने जवाहरात और अशर्फियों को गाड़ देता हु और जब तक तुम मेरे भाई से तराजू लेकर आ जाओ ” | अब अलीबाबा की पत्नी तुरंत कासिम के घर गयी और कासिम की पत्नी से तराजू माँगा | कासिम की पत्नी बहुत चालाक थी और वो ये देखना चाहती थी कि इतने सालो में इन्होने कभी कुछ नही तोला और आज ऐसा क्या तोल रहे है इसलिए उसने उसने तराजू के नीचे गोंद चिपका दिया ताकि जो भी यो तोलेंगे वो इस तराजू के साथ चिपककर आ जाएगा |

अब अलीबाबा की पत्नी अपने घर आ गये और उस तराजू को अशर्फियों की बोरी पर रख अशरफिया तौलती गयी | उध अलीबाबा ने गड्डा खोद दिया था और उन सारी अशर्फियों को उस गड्डे में दफन कर दिया ताकि किसी को पता ना चल सके | अब वो तराजू वापस कासिम की पत्नी को लौटाने गयी लेकिन उसको सोने की अशर्फी के तराजू के नीचे चिपके होने की खबर नही थी | अन उसने तराजू कासिम की पत्नी को दिया और वापस घर लौट आयी | अब कासिम की पत्नी ने तराजू की नीचे देखा तो उसे एक सोने की अशर्फी मिली | अब वो सोचने लगी कि अलीबाबा के साथ जरुर खजाना लगा होगा जो वो उन अशर्फियों को तोल रहा था | जब कासिम घर आया तो उसकी पत्नी ने उसको सारी बात बताई |

कासिम को इस बात की खबर लगते ही अगले दिन अलीबाबा के घर पहुच गया और कहा “तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो , तुम इतने गरीब हो फिर भी अशरफिया टोल रहे थे ” | अलीबाबा घबरा गया कि उसके भाई को कैसे पता चल गया | कासिम ने उसके भाई को वो अशर्फी दिखाते हुए कहा “तुम्हारे पास ऐसी कितनी अशरफिया है , मेरी पत्नी को जो तुमने तराजू लौटाया था ये उसके नीचे चिपककर आयी थी इसलिए अब जल्दी से मुझे वो खजाना बता दो वरना मै कोतवाल को बुला दूंगा ” | अलीबाबा घबरा गया और अशर्फियों के बारे में अनजान बनने लगा | अब कासिम ने उसको और उसकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी और अलीबाबा को सारा राज बताना पड़ा |

अब अगले दिन कासिम अकेला अलीबाबा की बताई हुयी जगह पर 10 खच्चर लेकर गया और उसी गुफा के बाहर आकर बोला “खुल जा सिम सिम ” और गुफा का दरवाजा खुल गया |  अब गुफा के अंदर हीरे जवाहरातो और अशर्फियों को देखकर उसकी आँखों पर विश्वास नही हुआ | उसने जितना माल उठा सकता था वो खच्चरों पर लाद दिया | जब वो वापस बाहर जाने के लिए दरवाजे के द्वार पर आया वो “खुल जा सिम सिम ” की जगह पर दूसरा मन्त्र बोलने लग गया और द्वार नही खुला | वो बार बार याद करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे याद नही आया | अब वो उस गुफा के अंदर फंस गया था |

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