अलीबाबा और चालीस चोर – तीसरा भाग Ali Baba and the Forty Thieves-Part 3

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Ali Baba and the Forty Thieves-Part 3अब बाकी बचे सारे डाकू शहर में आ गयी और अलीबाबा के घर की तरफ बढ़ने लगे | अब डाकुओ का सरदार अलीबाबा के घर गया और से कहा “मैंने सारे मर्तबान आपके अस्तबल में रख दिए है , आज मै वापस अपने शहर पहुचने में देर हो जाऊँगा और मै यहा कोई सराय भी नही जानता इसलिए अगर आपको तकलीफ ना हो तो आज की रात आपके यहा गुजार सकता हु ” | अलीबाबा राजी हो गया और उसको मेहमान की तरह खाना खिलाया | शाम को वो टहलने का बहाना कर अस्तबल चला गया और अपने सभी साथियो को सचेत कर दिया कि वो जब रात को आदेश देगा तब हमला कर देंगे | इस तरह ये कहकर वापस अलीबाबा के घर चला गया |

अब मरजीना रात को दिया जलाने गयी तो उसने देखा कि तेल तो खत्म हो गया | अलीबाबा ने उसे अस्तबल में रखे जारो से थोडा तेल ले आने को कहा  |अब मरजीना अस्तबल चली गयी और वो जैसे ही मर्तबान के पास गयी , उसे आवाज आयी “क्या हमला करने का वक़्त आ गया है ?” | मरजीना एकदम घबरा गयी और बिना कुछ बोले उसने खतरे का अनुमान लगा लिया | अब वो सभी जारो के पास जाकर कहने लगी “अभी हमला करने का वक़्त नही आया है ” , इस तरह उसे मालुम हो गया कि केवल एक जार को छोडकर सभी मर्तबानो में डाकू है | उसने तेल वाले मर्तबान से तेल लिया और वापस घर लौट आयी |

अब घर आते ही उसने बत्ती जला दी और एक बड़े बर्तन में पानी गर्म किया और उसमे तेल मिला दिया | अब उसने वो गर्म तेल का पानी ले जाकर अस्तबल के हर मर्तबान में डाल दिया और मर्तबान को जोर से बंद कर दिया | इस तरह सभी डाकू मर गये | अब वो घर आयी और बत्तिया बुझा कर सोने को चली गयी | सरदार ने देखा कि अभी सब सो गये और अपने साथियो को हमले के लिए बोलने का सही वक़्त है | अब वो अस्तबल जाकर बोलने लगा “हमला करने का वक़्त आ गया है लेकिन उन मर्तबानो में से कोई नही बोला ” | अब उसने मर्तबान खोलकर देखे तो उसके सभी साथी मारे गये थे | उसे पता चल गया कि अलीबाबा ने उसे भी मारने का पूरा इंतजाम कर रखा होगा इसलिए वो घर जाने के बजाय वहा से भाग गया |

रात की घटना से अनजान अलीबाबा अगले दिन जागा | मरजीना ने रात की घटना अलीबाबा को बताई और अलीबाबा को अपनी दासी की बहादुरी पर गर्व हुआ | अलीबाबा ने उसको अपनी जान बचाने के लिए दासता से मुक्त कर दिया | अब अलीबाबा ने तरीके से उन सभी मर्तबानो के तेल को बेचने का बहाना कर शहर से बाहर ले जाकर सभी लाशो को दफन कर दिया |

उधर डाकुओ के सरदार ने वापस गुफा में जाकर अलीबाबा से बदला लेने की योजना बनाई | वो काफी समय तक अपने साथियो की मौत पर रोया और उस दिन सो गया | अगले दिन एक नई योजना लेकर वापस शहर गया | उसने अलीबाबा के बेटे की दुकान के सामने एक नई दूकान खोली और उसके जीवन भर की कमाई की महंगी चीजो को बेचने का कारोबार करने लग गया | इस बार वो भेष बदलकर आया और उसने अपना नाम कोजिया हुसैन रखा | धीरे धीर कुछ दिनों में वहा के व्यापारियों और अलीबाबा के बेटे से दोस्ती कर ली | हुसैन ने अलीबाबा को भी तोहफे देकर दोस्त बना लिया |

एक दिन अलीबाबा के बेटे ने हुसैन को घर पर खाने के लिए बुलाया | हुसैन अलीबाबा के घर आया और उसने बिना नमक का भोजन बनाने को कहा | मरजीना को ये सुनकर थोडा शक हुआ कि ऐसा कौनसा महमान आया जो बिना नमक का खाना खाता है लेकिन बिना कुछ विचार किये उसने खाना बना दिया | जब मरजीना उसको खाना खिलाने के आयी तो वो डाकुओ के सरदार को पहचान गयी क्योंकि उसने दो तीन बार ढंग से देखा हुआ था |  अब उसने अपने मालिक की जान बचाने के लिए एक ओर योजना बनाई | वो तुरंत अंदर जाकर एक नाचने वाली बनकर आ गयी | उसने अलीबाबा के बेटे को सब बता दिया और दोनों ही साथ में नाचने के लिए आ गये |

अब हुसैन उनका नाच देखने के लिए रुक गया और अलीबाबा को मारने का मौका ढूंडने लगा | मरजीना ने एक कटार अपने कपड़ो में छुपा कर रखी थी | नाचते नाचते वो हुसैन के पास आयी और उसके सीन में कतार घोंप दी | उसी समय डाकुओ के सरदार की मौत हो गयी |अलीबाबा ये देखकर चौंक गया कि उसने अपने मेहमान को मार दिया | लेकिन मरजीना ने हुसैन की सारी सच्चाई बताई कि वो उनको मारने आया था | मैंने इसको उसी वक़्त पहचान लिया जब इसने नमक के लिए मना किया था क्योंकि पिछली बार जब वो व्यापारी बनकर आया था तब भी उसने नमक के लिए मना किया था इसी शक के आधार पर मैंने उसे पहचान लिया |

मरजीना ने दुसरी बार अलीबाबा की जान बचाई इसलिए उसने मरजीना को बहुत शुक्रिया कहा | अलीबाबा ने उसको बिलकुल आजाद कर दिया उअर अपने बेटे की शादी उससे कर दी | अलीबाबा का बेटा भी पहले ही उससे प्यार करता था इसलिए राजी हो गया | उन्होंने चुपके से हुसैन के शव को दफन कर दिया ताकि किसी को पता ना चल सके | अब वो कई दिनों तक उस गुफा तक नही गया क्योंकि उसने सोचा की दो डाकू अभी भी बाकी होंगे जबकी उनको तो सरदार ने नाकामी के चलते पहले ही मार दिया था | फिर भी एक दिन हिम्मत करके वो वहा गया और उसे उस गुफा में कोई नही मिला | उसने वहा से बहुत सारा धन ले लिया और अपने बेटे को भी उस गुफा के बारे में बता दिया ताकि जरूरत पड़ने पर वहा से अशर्फिया ले सके | इस तरह अलीबाबा और उसका परिवार खुशी खुशी जीवन बिताने लगा |

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